| क्या इस वर्ष भी महान एवं विशाल भारतवर्ष में पूज्यनीय ” गौ माता ” एवं मवेशी झेलेंगे ” बारिश – भूख एवं एक्सीडेंट से मौत ” की मार !? क्या ” शासन – प्रशासन -पशुपालकों ” से मिलेगा ” गौ माता ” एवं मवेशियों को न्याय एवं सम्मान ?? | | Will the venerable ” Gau Mata ” and cattle in the great and vast Bharatvarsh have to endure the blow of ” Rain – Hunger and Death by Accident ” this year too !?Will ” Gau Mata ” and cattle get justice and respect from the ” Government – Administration – Cattle Owners ” ?? | | किम् अस्मिन् अपि वर्षे महति च विशाले भारतवर्षे पूजनीया ” गौः माता ” च पशवः च ” वृष्टि – क्षुधा च दुर्घटनया मरणस्य ” आघातं सोढिष्यन्ते !? किम् ” शासनात् – प्रशासनात् – पशुपालकेभ्यः ” च ” गौः माता ” च पशुभ्यः न्यायः च सम्मानः च लप्स्यते ??

वर्ष 2026 में पवित्र श्रावण मास का आगमन कल 30 जुलाई को होना है , शिव जी पशुपतिनाथ की आराधना यू तो बहुत ही सरल एवं प्रत्येक क्षण को अमूल्य और पवित्र कर देती है किंतु श्रावण माह शिव जी की विशेष आराधना का माह माना जाता है , आषाढ़ के बाद आने वाले इस श्रावण माह में सभी जानते है कि बारिश अपनी चरम गति प्राप्त करती है , किसानों के सपनों को पंख लगाती है , धरती को उपजाऊ बनाती है, फसल को मजबूती प्रदान करती है ,चारो ओर हरियाली फैलाती है ,
किंतु हाय ये रे कैसा दाग़ इस पवित्र श्रावण माह के दामन में लगने जा रहा है फिर इस वर्ष जहां फिर से पशुपतिनाथ के इस विशेष पवित्र माह में उन्हीं के सबसे प्रिय एवं करीबी माने जाने वाले पशु प्रजाति की स्थिति बद से बदतर और दयनीय हो जाती है और सबसे ज्यादा परेशानी होती है हमारी ” गौ माता ” को , और ना जाने कितने वर्षों से होते ही आ रहा है , सवाल सिर्फ एक – कब होगा समाधान ” गौ माता ” की समस्याओं का,
1.समस्या ” बारिश से बचने एक अच्छे राहतयुक्त आवास की “
- समस्या ” दरिंदे जल्लादों के द्वारा काटे जाने से आजादी की “
- समस्या ” भूख से बिलखते पेट की रूदन को शांत करने की “
- समस्या ” धिक्कार मिलते इस समाज में सम्मान पाने की “
आखिर ये समस्याएं आई कहा से कौन है इसका जिम्मेदार और क्या होगा इसका निवारण यह तो कथित तौर पर पर सिर्फ एक सवाल बनकर सीमित रह गई है जिसके शायद कारण हो सकते है
- पशुपालक जिन्होंने सिर्फ एक मजदूर की दृष्टि से ” गौ माता ” को देखा या साफ तौर पर कहे तो जब तक ” गौ माता ” ज़रूरतें पूरी कर पा रही थी तब तक इस्तेमाल किया गया और जब ” गौ माता ” से कोई लाभ ना मिले तो उन्हें निकाल दिया गया, जब समय उनकी सेवा करने की आई तो उन्हें मिला सिर्फ तिरस्कार और ऐसे ही पशुपालकों के द्वारा निकाले गए मवेशियों को विशेषकर हमारी ” गौ माता ” को काटने वाले जल्लादों के द्वारा बेहिचक बिना डर के सड़क ये सुनसान जगहों से उठा लिया जाता है ,
” क्या यह उचित है मनुष्यता के अनुसार !?
निर्धारण जनता स्वयं करे .
2 . यह एक राजनीतिक विषय नहीं हैं,
यह विषय है हमारे इस विशाल महान भारतवर्ष के पवित्र एवं निश्छल सेवा की सभ्यता एवं संस्कारों के दोभन की है , जिस महान भारतवर्ष में युगों – युगान्तर से
“गौ को माता मानने की परंपरा एवं उनकी सेवा को विशिष्ट धर्म का दर्जा दिया जाता था और पालन किया जाता है नि:स्वार्थ भाव से आज उसी महान भारतवर्ष में गौ रक्षा की असफलताओं पर केवल खेद व्यक्त करके ” गौ माता ” की सेवा एवं सुरक्षा को केवल ‘ प्रसिद्धि एवं धन की प्राप्ति ” सिर्फ इन्हीं की सार्थकता के लिए इस्तेमाल किया जाता है , कुछ की ऐसे संस्थान और सतपुरुष बचे है जो नि:स्वार्थ रूप से इस महान एवं विशाल भारतवर्ष की इस पवित्र धरोहर को बचाने का प्रयास कर रहे है .
सवाल यह उठता है सत्ता सक्षम है , सत्ता पर आसीन जनप्रतिनिधियों में से ज्यादातर जनप्रतिनिधि चाहे उन विचारवाद वाली पार्टियों से ताल्लुक रखते है जिनका एक मुख्य एवं मूल सिद्धांत प्रारंभ से हिंदुत्व रक्षा एवं गौ रक्षा रहा है , किंतु महान भारतवर्ष में सबसे ज्यादा जनप्रतिनिधियों का ” गौ रक्षा ” सिद्धांत वाली पार्टियों एवं संगठनों से होने के बावजूद आज तक ” गौ माता ” सड़को पर है , ऐसा लगता है शायद सिद्धांत चुनावी मुद्दों के लिए होता है , क्योंकि धरातल की पृष्ठभूमि इसी ओर इशारा करती है !
गौ माता एवं मवेशियों को घर से निकलने वाले पशुपालकों से भी सवाल रहेगा कि – ” क्या बुढ़ापे में उनके बच्चों ने अगर उन्हें भी किसी काम का नहीं रहा समझकर घर से तिरस्कार करके निकाल दिया या तिरस्कारयुक्त जीवन दिया तो कैसा प्रतीत होगा !
और क्या इन कर्मों के साथ साथ हम हमारे ” पशुपतिनाथ ” के समक्ष प्रस्तुत होने के लायक है !?
देखना यह होगा कि क्या ” शासन – प्रशासन – पशुपालकों ” के द्वारा क्या ” शिव जी “के प्रिय इन मासूम बेजुबानों को इंसाफ एवं सम्मान दिया जाएगा !?
आप सभी से भी ” THE PASHUPATINATH NEWS – DIGITAL NEWS PORTAL & NEWS AGENCY & E – PAPER PUBLICAGION “
अनुरोध करना चाहेगी कि जितना हो सके आपकी सामर्थ्यानुसार आप सभी के आस – पास रहने वाली ” गौ माता ” एवं मवेशियों की सेवा करने का प्रयास कीजिए , अगर पहले से करते है तो आप ” पशुपतिनाथ महाराज ” के प्रियजनों में से एक है ।
|| जीव सेवा ही सर्वोच्च शिव सेवा है ||
English:
In the year 2026, the holy month of Shravan is set to begin tomorrow, on 30th July. The worship of Lord Shiva Pashupatinath is very simple and makes every moment invaluable and sacred, but the month of Shravan is considered the month of special worship of Lord Shiva. After Ashadha, in this month of Shravan, everyone knows that the rains reach their peak, give wings to the dreams of farmers, make the earth fertile, strengthen the crops, and spread greenery all around.
But alas, what a stain is about to fall on the hem of this holy month of Shravan this year again, where in this special sacred month of Pashupatinath, the condition of the animal species considered to be His dearest and closest once again becomes worse and pitiable, and ” Gau Mata ” suffers the most. And this has been happening for who knows how many years. There is only one question – when will there be a solution to the problems of ” Gau Mata “?
- Problem of ” A good and relief-providing shelter to protect from rain “
- Problem of ” Freedom from being slaughtered by cruel butchers “
- Problem of ” Pacifying the cry of the stomach wailing with hunger “
- Problem of ” Getting respect in this society full of contempt “
Finally, where did these problems come from, who is responsible for them, and what will be their solution? This has been limited to just a question, and the possible reasons may be:
- Cattle owners who looked at ” Gau Mata ” only as a laborer, or to put it bluntly, they were used as long as ” Gau Mata ” could fulfill needs, and when no benefit was received from ” Gau Mata “, they were abandoned. When it was time to serve them, they received only contempt. And the cattle abandoned by such cattle owners, especially our ” Gau Mata “, are fearlessly picked up from roads and deserted places by the butchers who slaughter them,
” Is this appropriate according to humanity !?
The public shall decide.
- This is not a political issue.
This issue is about the erosion of the civilization and values of selfless service of our great and vast Bharatvarsh. In the great Bharatvarsh where for ages the tradition of considering the cow as mother and giving the status of a special religion to her service has been followed selflessly, today in that same great Bharatvarsh, by merely expressing regret over the failures of cow protection, the service and security of ” Gau Mata ” is used only for the sake of ‘ gaining fame and wealth ‘. There are still some institutions and noble men who are trying to save this holy heritage of this great and vast Bharatvarsh selflessly.
The question arises: the power is capable, and most of the public representatives in power belong to parties whose main and fundamental principle from the beginning has been the protection of Hindutva and Gau Raksha. Yet, despite having the most public representatives from ” Gau Raksha ” principle parties and organizations in great Bharatvarsh, even today ” Gau Mata ” is on the streets. It seems that perhaps principles are only for election issues, because the ground reality points in this direction!
There will also be a question to the cattle owners who abandon cattle from home: ” If in old age your children also consider you useless and throw you out of the house with contempt or give you a life of contempt, how will it feel! “
And with these deeds, are we even worthy of presenting ourselves before our ” Pashupatinath “!?
It remains to be seen whether ” Government – Administration – Cattle Owners ” will give justice and respect to these innocent voiceless ones, dear to ” Lord Shiva ” !?
” THE PASHUPATINATH NEWS – DIGITAL NEWS PORTAL & NEWS AGENCY & E – PAPER PUBLICAGION ” also requests all of you to try to serve the ” Gau Mata ” and cattle living around you to the best of your ability. If you are already doing it, then you are one of the dear ones of ” Pashupatinath Maharaj “.
|| Service to living beings is the highest service to Shiva ||
Sanskrit:
वर्षे 2026 तमे पवित्रस्य श्रावणमासस्य आगमनं श्वः 30 जुलै दिनाङ्के भविष्यति, शिवस्य पशुपतिनाथस्य आराधना तु अतीव सरला च प्रत्येकं क्षणं अमूल्यं पवित्रं च करोति, किन्तु श्रावणमासः शिवस्य विशेषाराधनायाः मासः मन्यते। आषाढस्य अनन्तरं आगच्छति अस्मिन् श्रावणमासे सर्वे जानन्ति यत् वृष्टिः स्वां परमां गतिं प्राप्नोति, कृषकाणां स्वप्नेभ्यः पक्षौ ददाति, पृथिवीं उर्वरां करोति, सस्यं दृढं करोति, चतुर्दिक्षु हरितिमां प्रसारयति।
किन्तु हाय! कीदृशः कलङ्कः अस्य पवित्रस्य श्रावणमासस्य अञ्चले लगिष्यति पुनः अस्मिन् वर्षे, यत्र पुनः पशुपतिनाथस्य अस्मिन् विशेषे पवित्रे मासे तस्यैव प्रियतमायाः च समीपस्थायाः मानीतायाः पशुजातेः स्थितिः बदतरात् बदतरा च दयनीया च भवति, च सर्वाधिकं कष्टं च अस्माकं ” गौः मातुः ” भवति, च न जाने कतिभिः वर्षेभ्यः एवं भवति एव, प्रश्नः केवलम् एकः – कदा भविष्यति ” गौः मातुः ” समस्याणां समाधानम्?
- समस्या ” वृष्टितः रक्षणाय एकस्य उत्तमस्य राहतयुक्तस्य आवासस्य “
- समस्या ” क्रूरघातकैः छेदनात् मुक्तेः “
- समस्या ” क्षुधया विलपतः उदरस्य रुदनस्य शान्तेः “
- समस्या ” धिक्कारं प्राप्नुवति अस्मिन् समाजे सम्मानस्य प्राप्तेः “
अन्ते एताः समस्याः कुतः आगताः, कः अस्य उत्तरदायी, च किम् भविष्यति अस्य निवारणम्? इदं तु कथितरूपेण केवलं एकः प्रश्नः भूत्वा सीमितम् अभवत्, यस्य सम्भाव्य कारणानि भवितुम् अर्हन्ति।
- पशुपालकाः यैः केवलं एकस्य श्रमिकस्य दृष्ट्या ” गौः माता ” दृष्टा, अथवा स्पष्टं वक्तुं चेत् यावत् ” गौः माता ” आवश्यकताः पूरयितुं अशक्नोत् तावत् उपयुक्ता, च यदा ” गौः मातुः ” सकाशात् किमपि लाभः न प्राप्तः तदा ताः निष्कासिताः। यदा तासां सेवायाः समयः आगतः तदा तेभ्यः प्राप्तः केवलं तिरस्कारः, च एवंविधैः पशुपालकैः परित्यक्तान् पशून् विशेषतः अस्माकं ” गौः मातरम् ” छेदकैः घातकैः निर्भयं बिना भयात् राजमार्गात् च निर्जनस्थानेभ्यः गृह्यन्ते।
” किम् एत् उचितम् मनुष्यतायाः अनुसारम् !?
निर्णयः जनतया स्वयमेव करणीयः।
- इदं राजनैतिकं विषयः नास्ति।
अयं विषयः अस्माकं अस्य विशालस्य महतः भारतवर्षस्य पवित्रस्य च निष्कपटसेवायाः सभ्यतायाः च संस्काराणां च भ्रंशस्य अस्ति, यस्मिन् महति भारतवर्षे युगेभ्यः युगान्तरेभ्यः च
“गां मातरं मन्यमानस्य परम्परा च तस्याः सेवायाः विशिष्टधर्मस्य पदं दत्तम् आसीत् च पालयते च निःस्वार्थभावेन अद्य तस्मिन् एव महति भारतवर्षे गोरक्षायाः असफलतासु केवलं खेदं प्रकट्य ” गौः मातुः ” सेवा च सुरक्षा च केवलं ‘ कीर्तेः च धनस्य च प्राप्त्यै ‘ एव उपयुज्यते, केचन संस्थाः च सज्जनाः च सन्ति ये निःस्वार्थरूपेण अस्य महतः च विशालस्य भारतवर्षस्य अस्य पवित्रस्य धरोहरस्य रक्षणाय प्रयतन्ते।
प्रश्नः अयम् उदेति – सत्ता समर्था अस्ति, सत्तायां आसीनानां जनप्रतिनिधीनां अधिकांशः जनप्रतिनिधयः येषां विचारवादिनां दलानां सह सम्बन्धः अस्ति येषां एकः मुख्यः च मूलः सिद्धान्तः आरम्भात् एव हिन्दुत्वरक्षा च गोरक्षा च आसीत्, किन्तु महति भारतवर्षे सर्वाधिकानां जनप्रतिनिधीनां ” गोरक्षा ” सिद्धान्तवद्भ्यः दलेभ्यः च सङ्घेभ्यः च भवताम् अपि अद्य यावत् ” गौः माता ” राजमार्गेषु अस्ति, प्रतिभाति यत् सम्भवतः सिद्धान्ताः चुनावीयविषयाणां कृते भवन्ति, यतः धरातलस्य पृष्ठभूमिः एताम् एव दिशां निर्दिशति !
गौः माता च पशवः च गृहात् निष्कासयद्भ्यः पशुपालकेभ्यः अपि प्रश्नः भविष्यति – ” किम् वार्धक्ये यदा तेषां सन्ततयः अपि तान् अकर्मण्यान् मत्वा गृहात् तिरस्कारेण निष्कासयेयुः अथवा तिरस्कारयुक्तं जीवनं दद्युः तर्हि कीदृशं प्रतिभास्यते !”
च किम् एतैः कर्मभिः सह वयं अपि अस्माकं ” पशुपतिनाथस्य ” समक्षम् उपस्थातुं योग्याः स्मः !?
द्रष्टव्यं यत् किम् ” शासनात् – प्रशासनात् – पशुपालकेभ्यः ” च ” शिवस्य ” प्रियेभ्यः एतेभ्यः अबोधेभ्यः मूकेभ्यः न्यायः च सम्मानः च दास्यते !?
युष्मान् सर्वान् अपि ” THE PASHUPATINATH NEWS – DIGITAL NEWS PORTAL & NEWS AGENCY & E – PAPER PUBLICAGION “
अनुरोधं कर्तुम् इच्छति यत् यथाशक्ति युष्माकं सामर्थ्यानुसारं युष्माकं समीपे वसतां ” गौः मातुः ” च पशूनां च सेवां कर्तुं प्रयतध्वम्, यदि पूर्वमेव कुर्वन्ति तर्हि यूयं ” पशुपतिनाथमहाराजस्य ” प्रियजनेषु एकः असि।
|| जीवसेवा एव परमा शिवसेवा ||
