कला और संस्कृति का महासंगम: दुर्ग में ‘कलाकार दिवस’ पर जुटेंगे प्रदेश के हुनरबाज़.A Night of Talent and Tributes: Chief Minister to Felicitate Cultural Icons in Durg. अद्य पञ्चाशदधिक-प्रतिभावन्तः कलाकाराः समादृताः भविष्यन्ति
छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक राजधानी कहे जाने वाले दुर्ग जिले में आज कला, संगीत और संस्कृति का एक भव्य समागम होने जा रहा है। ‘कलाकार दिवस’ के इस विशेष अवसर पर आयोजित सम्मान समारोह में राज्य के कोने-कोने से आए प्रतिभावान हुनरबाज़ एक मंच पर एकत्रित होंगे।
इस गरिमामयी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे, जो छत्तीसगढ़ की लोक कला, लोक नृत्य और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने वाले 50 से अधिक दिग्गज कलाकारों को सम्मानित करेंगे। दुर्ग जिला प्रशासन और संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित इस समारोह का मुख्य उद्देश्य स्थानीय प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना और भावी पीढ़ी को राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ना है।
English
A grand congregation of art, music, and culture is set to take place today in Durg district, often referred to as the cultural capital of Chhattisgarh. On this special occasion of ‘Kalakar Diwas’ (Artists’ Day), talented artists from every corner of the state will gather on a single platform for an grand felicitation ceremony.
Chief Minister Vishnu Deo Sai will attend this dignified event as the chief guest, where he will honor more than 50 veteran artists who have preserved the folk art, folk dance, and cultural heritage of Chhattisgarh. Organized jointly by the Durg District Administration and the Culture Department, the primary objective of this ceremony is to encourage local talent and connect the future generation with the state’s rich cultural traditions.
संस्कृति
छत्तीसगढ़राज्यस्य सांस्कृतिकराजधानीति प्रसिद्धे दुर्गमण्डले अद्य कला-सङ्गीत-संस्कृतीनां भव्यः समागमः आयोज्यते। ‘कलाकारदिवसः’ इति अस्मिन् विशेष-अवसरे आयोजित-सम्मानसामरोहे राज्यस्य कोणे-कोणेभ्यः समागताः प्रतिभावन्तः कलाकाराः एकस्मिन् मञ्चे एकत्रिताः भविष्यन्ति।
अस्मिन् गरिमामये कार्यक्रमे मुख्यमन्त्री विष्णुदेव साय महोदयः मुख्य-अतिथिरूपेण उपस्थितः भविष्यति, यः छत्तीसगढ़स्य लोककलां, लोकनृत्यं, सांस्कृतिकधरोहरं च संरक्षकान् पञ्चाशदधिक-वरिष्ठकलाकारान् सम्मानयिष्यति। दुर्ग-मण्डलप्रशासनेन तथा संस्कृतिविभागेन आयोजितस्य अस्य उत्सवस्य मुख्योद्देश्यं स्थानीयप्रतिभानां प्रोत्साहनं तथा आगामिपीढीं राज्यस्य समृद्धाभिः सांस्कृतिकपरम्पराभिः सह संयोजनं वर्तते।


