कोरबा की मानिकपुर पोखरी का बदलेगा स्वरूप, 45 करोड़ रुपये से विकसित होगा भव्य पर्यटन केंद्र.Korba’s Manikpur Pokhari Set for a Major Makeover, Grand Tourism Hub Planned at ₹45 Crore. कोरबा-नगरस्य मानिकपुर-पोखरीस्थलस्य नूतनं रूपं भविष्यति, ४५ कोटिरूप्यकैः भव्यपर्यटनकेन्द्रस्य निर्माणयोजना.

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कोरबा। शहर के मध्य स्थित ऐतिहासिक मानिकपुर पोखरी जल्द ही पर्यटन और मनोरंजन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित होने जा रही है। जिला प्रशासन और साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) के संयुक्त प्रयासों से इस महत्वाकांक्षी परियोजना की रूपरेखा तैयार कर ली गई है। पहले इसके लिए 11 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया था, लेकिन परियोजना का विस्तार करते हुए अब इसकी लागत बढ़ाकर 45 करोड़ रुपये कर दी गई है। इस परियोजना के तहत मानिकपुर पोखरी को आकर्षक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना है। निर्माण कार्य आगामी नए साल में जनवरी से शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।

मानिकपुर पोखरी की चमकेगी किस्मत, पर्यटन के नक्शे पर बनेगी नई पहचान.

मानिकपुर पोखरी को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने और यहां नई चौपाटी बनाने की योजना पर नगर पालिक निगम ने कई साल पहले ही काम शुरू कर दिया था। जिला प्रशासन के अनुसार, यह महत्वाकांक्षी परियोजना लंबे समय से प्रस्तावित थी और शहरवासियों को इसके साकार होने का इंतजार था।

मानिकपुर पोखरी का विकास कोरबा के पर्यटन क्षेत्र को नई पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। परियोजना पूरी होने के बाद स्थानीय लोगों को शहर के नजदीक ही घूमने-फिरने और मनोरंजन का नया ठिकाना मिल सकेगा। कोरबा में पहले से ही कई लोकप्रिय पर्यटन स्थल मौजूद हैं, जहां बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। अब मानिकपुर पोखरी के विकसित होने से शहर के पर्यटन आकर्षण में एक और नया नाम जुड़ जाएगा। शहर के करीब होने के कारण यहां पहुंचना भी लोगों के लिए सुविधाजनक रहेगा।

बंद खदान में भरे पानी से दिखेगा झील-सा नजारा, मानिकपुर पोखरी बनेगी आकर्षण का केंद्र.

मानिकपुर पोखरी का कोरबा जिले के इतिहास में विशेष स्थान है। आज पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित होने की तैयारी कर रही यह जगह कभी जिले की पहली ओपनकास्ट कोयला खदान हुआ करती थी। लगभग 23 एकड़ क्षेत्र में फैली इस खदान में वर्ष 1966 में सोवियत रूस के तकनीकी सहयोग से कोयला उत्खनन की शुरुआत हुई थी।

करीब 24 वर्षों तक लगातार खनन कार्य चलने के बाद खदान की गहराई लगभग 100 मीटर तक पहुंच गई। इसी दौरान अचानक भूजल का एक विशाल स्रोत फूट पड़ा। पानी इतनी तेजी से खदान में भरने लगा कि उस समय उपलब्ध आधुनिक पंपिंग व्यवस्था भी उसे बाहर निकालने में नाकाम रही। देखते ही देखते पूरी खदान जलमग्न हो गई और समय के साथ यह स्थान पानी से भरे विशाल क्षेत्र के रूप में पहचान बनाने लगा।

भूजल के तेज बहाव ने रोका खनन, आखिरकार बंद करनी पड़ी खदान.

लगातार भूजल का रिसाव बढ़ने के कारण आखिरकार वर्ष 1990-91 में मानिकपुर खदान के इस हिस्से में खनन कार्य बंद करना पड़ा। इसके बाद समय के साथ यह स्थान एक विशाल जलाशय में तब्दील हो गया। वर्तमान में लगभग एक किलोमीटर लंबी और 300 मीटर चौड़ी यह खदान प्राकृतिक झील जैसा मनमोहक दृश्य प्रस्तुत करती है।

मानिकपुर पोखरी की सबसे खास बात इसके पानी का रंग है। दूर से देखने पर इसका पानी हरे रंग की आभा लिए नजर आता है, जो आसपास के प्राकृतिक वातावरण के साथ मिलकर बेहद आकर्षक दृश्य बनाता है। कभी कोयला उत्खनन के लिए पहचानी जाने वाली यह जगह अब अपनी प्राकृतिक सुंदरता के कारण लोगों का ध्यान खींच रही है। पर्यटन स्थल के रूप में इसके विकास की योजना से इस ऐतिहासिक स्थान को नई पहचान मिलने की उम्मीद है।

मानिकपुर पोखरी को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना की शुरुआत तत्कालीन कलेक्टर रानू साहू के कार्यकाल में हुई थी। हालांकि, कुछ कारणों के चलते परियोजना की फाइल अटक गई और लंबे समय तक इस पर आगे काम नहीं हो सका।

अब कलेक्टर कुणाल दुदावत के पदभार संभालने के बाद इस परियोजना को फिर से गति मिली है। पोखरी का निरीक्षण करने के बाद उन्होंने योजना को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाने की दिशा में पहल की है। इससे लंबे समय से प्रस्तावित इस परियोजना के धरातल पर उतरने की उम्मीद बढ़ गई है।

इसी बीच मानिकपुर कोयला खदान के विस्तार की योजना भी प्रस्तावित है। खनन क्षेत्र का दायरा बढ़ाने के लिए कई गांवों के विस्थापन की प्रक्रिया से जुड़े विषय सामने हैं। हाल ही में खदान विस्तार को लेकर पर्यावरणीय जनसुनवाई भी आयोजित की जा चुकी है। ऐसे में SECL के लिए खदान विस्तार की पर्यावरणीय मंजूरी हासिल करने के साथ-साथ स्थानीय क्षेत्र में जनसुविधाओं का विकास करना भी महत्वपूर्ण प्राथमिकता है। मानिकपुर पोखरी का विकास इसी व्यापक क्षेत्रीय विकास की दृष्टि से अहम माना जा रहा है।

मानिकपुर पोखरी के कायाकल्प की तैयारी तेज, जल्द शुरू होगा विकास कार्य.

मानिकपुर पोखरी के विकास की दिशा में जल्द ही महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सकता है। कलेक्टर कुणाल दुदावत ने ईटीवी भारत से चर्चा में बताया कि मानिकपुर तालाब को बंद खदानों के विकास की योजना के तहत आधुनिक वाटर बॉडी, एम्यूजमेंट सेंटर और पार्क के रूप में विकसित किया जाएगा। इस परियोजना को साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) की माइन क्लोजर योजना के अंतर्गत तैयार किया जा रहा है।

कलेक्टर के अनुसार, इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए SECL ने 40 करोड़ रुपये से अधिक लागत का प्रस्ताव प्रस्तुत किया है। फिलहाल परियोजना की निविदा प्रक्रिया चल रही है। उम्मीद है कि आने वाले तीन महीनों के भीतर कार्यादेश जारी कर निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा।

परियोजना पूरी होने के बाद मानिकपुर पोखरी को आधुनिक सुविधाओं से युक्त पर्यटन और मनोरंजन केंद्र के रूप में विकसित करने का रास्ता खुलेगा। इससे कोरबा शहर के लोगों को घूमने-फिरने के लिए एक नया आकर्षक स्थल मिलने की उम्मीद है।

English

The historic Manikpur Pokhari, located in the heart of the city, is set to be transformed into a prominent tourism and recreational destination. The ambitious project has been finalized through a joint initiative of the district administration and South Eastern Coalfields Limited (SECL). Initially, the project was allocated a budget of ₹11 crore. However, following an expansion of its scope, the estimated cost has been increased to ₹45 crore. The initiative aims to develop the historic pond into an attractive tourist destination. Construction work is expected to begin in January next year.

Manikpur Pokhari Set for a Bright Future, Poised to Shine on the Tourism Map.

The Korba Municipal Corporation began working several years ago on a plan to promote Manikpur Pokhari as a tourist attraction and develop a new food and recreation zone, known as a Choupati. According to the district administration, the ambitious project had been in the pipeline for a long time, and residents had been eagerly awaiting its implementation.

The development of Manikpur Pokhari is expected to give a fresh boost to tourism in Korba. Once completed, the project will provide residents with a new destination for leisure and recreation close to the city. Korba already has several popular tourist attractions that draw visitors. The addition of Manikpur Pokhari is set to further enhance the city’s tourism appeal. Its location near the urban centre will also make it convenient for residents and visitors to access.

An Abandoned Mine to Offer a Lake-Like Experience, Manikpur Pokhari Set to Become a Major Attraction.

Manikpur Pokhari holds a special place in the history of Korba district. Today, as plans take shape to develop it into a tourist destination, the site has a remarkable industrial past as the district’s first opencast coal mine. Spread across approximately 23 acres, mining operations began here in 1966 with technical assistance from the Soviet Union.

After nearly 24 years of uninterrupted mining, the mine reached a depth of around 100 metres. At that point, a massive underground water source suddenly emerged. The inflow was so intense that even the advanced pumping systems available at the time failed to control it. The mine was eventually submerged, transforming the site into a large water-filled area that is now known as Manikpur Pokhari.

Intense Groundwater Inflow Forced Mining Operations to Shut Down.

Mining operations in this section of the Manikpur mine were finally discontinued in 1990–91 due to persistent groundwater inflow. Over time, the abandoned mine gradually transformed into a vast water body. Today, measuring approximately one kilometre in length and 300 metres in width, the site offers a picturesque view resembling a natural lake.

One of Manikpur Pokhari’s most striking features is the colour of its water. Viewed from a distance, the water appears green, creating a beautiful landscape that blends with the surrounding natural environment. Once known for coal mining, the site is now drawing attention for its scenic appeal. The proposed tourism development project is expected to give this historic location a new identity.

The initiative to develop Manikpur Pokhari into a tourism destination was launched during the tenure of former Collector Ranu Sahu. However, the project file became stalled for various reasons, preventing further progress for an extended period.

Following his assumption of office, Collector Kunal Dudawat inspected the pond and took steps to move the long-pending project forward on a priority basis. This has raised hopes that the proposed development will finally move towards implementation.

Meanwhile, plans are also underway to expand the Manikpur coal mine. The proposed expansion involves widening the mining area, with the displacement of several villages among the issues associated with the plan. An environmental public hearing regarding the mine expansion was recently conducted.

In this context, obtaining the necessary environmental clearance for the expansion and improving public amenities in the surrounding areas are important priorities for South Eastern Coalfields Limited (SECL). The development of Manikpur Pokhari is also being viewed as a significant step towards improving local tourism and regional infrastructure.

Manikpur Pokhari Revamp Gains Momentum, Development Work to Begin Soon.

The development of Manikpur Pokhari is expected to move forward soon. Collector Kunal Dudawat told ETV Bharat that the historic pond will be developed into a modern water body, an amusement centre and a park under South Eastern Coalfields Limited’s (SECL) mine closure plan.

According to the Collector, SECL has submitted a project proposal worth more than ₹40 crore. The tendering process is currently underway, and the administration expects the work order to be issued within the next three months, allowing construction to begin.

Once completed, the project is expected to transform Manikpur Pokhari into a modern tourism and recreational destination, offering residents of Korba a new place to visit and enjoy leisure activities.

संस्कृति

नगरस्य मध्यभागे स्थिता ऐतिहासिकी मानिकपुर-पोखरी शीघ्रमेव पर्यटनस्य मनोरञ्जनस्य च प्रमुखं केन्द्रं भविष्यति। अस्याः महत्त्वाकाङ्क्षिण्याः परियोजनायाः योजना जिलाप्रशासनेन साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) इत्यनेन च संयुक्तरूपेण अन्तिमरूपं प्राप्तवती। पूर्वम् अस्याः परियोजनायाः कृते एकादशकोटिरूप्यकाणां बजटं निर्धारितम् आसीत्। परन्तु योजनायाः विस्तारितस्वरूपं दृष्ट्वा अधुना व्ययः पञ्चचत्वारिंशत् कोटिरूप्यकाणि यावत् वर्धितः अस्ति। अस्याः योजनायाः माध्यमेन मानिकपुर-पोखरी आकर्षकपर्यटनस्थलरूपेण विकसितुं लक्ष्यते। निर्माणकार्यं आगामीवर्षस्य जनवरीमासे प्रारब्धुं सम्भावना अस्ति।

मानिकपुर-पोखर्याः भाग्योदयः भविष्यति, पर्यटनक्षेत्रे नूतना पहचानं प्राप्स्यति।

मानिकपुर-पोखरीं पर्यटनस्थलरूपेण विकसितुं तथा तत्र नूतनां चौपाटीं निर्मातुं नगरपालिकानिगमेन बहुवर्षेभ्यः पूर्वमेव कार्यम् आरब्धम् आसीत्। जिलाप्रशासनस्य अनुसारम्, इयं महत्त्वाकाङ्क्षिणी योजना दीर्घकालात् विचाराधीना आसीत्। नगरवासिनः अस्याः योजनायाः कार्यान्वयनस्य प्रतीक्षां कुर्वन्ति स्म।

मानिकपुर-पोखर्याः विकासः कोरबानगरस्य पर्यटनक्षेत्रस्य विकासाय महत्त्वपूर्णं सोपानं भविष्यति। परियोजनायाः पूर्णतायां नगरवासिभ्यः नगरस्य समीपे एव भ्रमणस्य मनोरञ्जनस्य च नूतनं स्थानं प्राप्स्यते। कोरबानगरे पूर्वमेव अनेकानि लोकप्रियाणि पर्यटनस्थलानि सन्ति, यत्र पर्यटकाः बहुसंख्यया आगच्छन्ति। अधुना मानिकपुर-पोखर्याः विकासेन नगरस्य पर्यटनाकर्षणे नूतनं स्थलम् अपि योजितं भविष्यति। नगरस्य समीपे स्थितत्वात् अत्र गमनम् अपि सुकरं भविष्यति।

परित्यक्तायां खनौ सञ्चितं जलं सरोवरस्य इव दृश्यं जनयिष्यति, मानिकपुर-पोखरी आकर्षणस्य प्रमुखं केन्द्रं भविष्यति।

मानिकपुर-पोखरी कोरबाजनपदस्य इतिहासे विशिष्टं स्थानं धारयति। अद्य एतत् स्थलम् पर्यटनकेन्द्ररूपेण विकसितुं सज्जं भवति, परन्तु पूर्वम् एतत् जनपदस्य प्रथमं मुक्ताङ्गण-कोयलाखनिस्थलम् आसीत्। प्रायः त्रयोविंशतिः एकर्-परिमिते क्षेत्रे विस्तृते अस्मिन् खनिस्थले १९६६ तमे वर्षे सोवियत-रूसस्य तान्त्रिकसहयोगेन कोयलोत्खननकार्यस्य आरम्भः अभवत्।

प्रायः चतुर्विंशतिवर्षाणि यावत् निरन्तरम् उत्खननकार्यं प्रवृत्तम्। अनन्तरं खनेः गभीरता प्रायः शतमीटरपर्यन्तम् अभवत्। तस्मिन् समये सहसा भूमिगतजलस्य विशालः स्रोतः प्रस्फुटितः। जलस्य प्रवाहः एतावान् तीव्रः आसीत् यत् तस्मिन् काले उपलब्धा आधुनिकापि जलनिष्कासनव्यवस्था तं नियन्त्रयितुं न अशक्नोत्। अन्ततः खनिः जलेन पूर्णतया पूरिता अभवत्। कालान्तरे एतत् स्थलम् विशालजलाशयसदृशं स्वरूपं प्राप्तवान्, यत् अधुना मानिकपुर-पोखरी इति नाम्ना प्रसिद्धम् अस्ति।

भूमिगतजलस्य तीव्रप्रवाहकारणात् खननकार्यं बाधितम्, अन्ततः खनिः पिहिता।

भूमिगतजलस्य निरन्तरप्रवाहकारणात् अन्ततः १९९०–९१ तमे वर्षे मानिकपुर-खन्याः अस्मिन् भागे खननकार्यं स्थगितम्। कालान्तरे एतत् परित्यक्तं खनिस्थलं विशालजलाशयरूपेण परिणतम्। वर्तमानकाले इदं स्थलम् प्रायः एककिलोमीटर् दीर्घं तथा त्रिशतमीटर् विस्तृतम् अस्ति। अस्य दृश्यं प्राकृतिकसरोवरस्य इव मनोहरम् अस्ति।

मानिकपुर-पोखर्याः प्रमुखं वैशिष्ट्यम् अस्य जलस्य हरितवर्णीयं स्वरूपम् अस्ति। दूरात् अवलोकने अस्य जलं हरितवर्णयुक्तं दृश्यते, येन आसपासस्य प्राकृतिकवातावरणस्य सौन्दर्यं वर्धते। पूर्वं कोयलोत्खननाय प्रसिद्धम् एतत् स्थलम् अधुना स्वस्य प्राकृतिकसौन्दर्येण जनानाम् आकर्षणस्य केन्द्रं भवति। पर्यटनस्थलरूपेण अस्य विकासयोजनया अस्य ऐतिहासिकस्थलस्य नूतना पहचान भविष्यति इति अपेक्षा अस्ति।

मानिकपुर-पोखरीं पर्यटनकेन्द्ररूपेण विकसितुं परियोजनायाः आरम्भः तत्कालीनजिलाधिकारी रानू साहू-महोदयायाः कार्यकाले अभवत्। किन्तु विविधकारणैः परियोजनायाः सञ्चिका अवरुद्धा अभवत्, येन दीर्घकालपर्यन्तं कार्यस्य अग्रगतिः न अभवत्।

जिलाधिकारी कुणाल-दुदावत-महोदयेन पदभारग्रहणानन्तरं पोखर्याः निरीक्षणं कृतम्। तेन दीर्घकालात् लम्बितायाः अस्याः योजनायाः कार्यं प्राथमिकतया अग्रे नेतुं प्रयासः कृतः। अनेन परियोजनायाः कार्यान्वयनस्य सम्भावना वर्धिता अस्ति।

एतस्मिन्नेव समये मानिकपुर-कोयलाखनेः विस्तारस्य योजना अपि प्रस्ताविता अस्ति। खननक्षेत्रस्य विस्ताराय अनेकग्रामाणां विस्थापनसम्बद्धाः विषयाः अपि विचाराधीनाः सन्ति। खनिविस्तारसम्बन्धिनी पर्यावरणीय-जनसुनवायी अपि अद्यतने काले आयोजिता।

अतः साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) संस्थायाः कृते खनिविस्तारस्य आवश्यकपर्यावरणीयानुमतिप्राप्तिः तथा स्थानीयक्षेत्रे जनसुविधानां विकासः महत्त्वपूर्णाः प्राथमिकताः सन्ति। मानिकपुर-पोखर्याः विकासः पर्यटनस्य प्रोत्साहनाय क्षेत्रीयविकासाय च महत्त्वपूर्णः उपक्रमः मन्यते।

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