छत्तीसगढ़ के रेल यात्रियों को राहत, अब जनरल कोचों की सफाई पर भी AI से रखी जाएगी नजर. Good News for Chhattisgarh Rail Passengers: AI to Monitor Cleanliness in General Coaches. छत्तीसगढस्य रेलयात्रिभ्यः शुभसमाचारः, सामान्ययानकक्षेषु अपि स्वच्छतायाः निरीक्षणं कृत्रिमबुद्धिमत्तया भविष्यति

ट्रेन के जनरल कोचों में भी चमकेगी सफाई, AI तकनीक से होगी निगरानी.
रेल यात्रियों की सुविधा को बेहतर बनाने के लिए दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने ‘बेटर ऑन-बोर्ड सर्विसेज’ नीति लागू करने की पहल शुरू की है। इसके तहत अब ट्रेनों के सामान्य कोचों में भी साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। योजना के पहले चरण में छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस सहित तीन ट्रेनों को शामिल किया गया है। खास बात यह है कि सफाई व्यवस्था की निगरानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक के माध्यम से की जाएगी, जिससे यात्रियों को स्वच्छ और बेहतर यात्रा का अनुभव मिल सकेगा।
रेल मंत्रालय के ‘52 सप्ताह में 52 सुधार’ परिवर्तन अभियान के तहत इस नई पहल को शुरू किया गया है। इसके अंतर्गत दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के बिलासपुर और रायपुर मंडल से संचालित लंबी दूरी की ट्रेनों को प्राथमिकता दी जा रही है। पहले चरण में छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस, हमसफर एक्सप्रेस और सुपरफास्ट एक्सप्रेस को इस व्यवस्था में शामिल किया गया है।
इनमें ट्रेन संख्या 18237/18238 छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस (बिलासपुर–अमृतसर–बिलासपुर), 20847/20848 हमसफर एक्सप्रेस (दुर्ग–हजरत निजामुद्दीन–दुर्ग) और 12549/12550 सुपरफास्ट एक्सप्रेस (दुर्ग–एमसीटीएम उधमपुर–दुर्ग) शामिल हैं। इस पहल का उद्देश्य लंबी दूरी के यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस का प्राथमिक कोचिंग डिपो बिलासपुर में है, जबकि हमसफर एक्सप्रेस और सुपरफास्ट एक्सप्रेस का कोचिंग डिपो दुर्ग में स्थित है। नई व्यवस्था के तहत इन ट्रेनों के एसी और स्लीपर कोचों के साथ अनारक्षित यानी जनरल डिब्बों की भी नियमित साफ-सफाई की जाएगी।
यात्रा के दौरान शौचालयों, प्रवेश द्वारों और कूड़ेदानों की सफाई पर विशेष जोर दिया जाएगा। निर्धारित समय-सारणी के अनुसार, सुबह 6 बजे से 9 बजे तक और रात 8 बजे से 10 बजे तक शौचालयों की हर घंटे सफाई करना अनिवार्य होगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य यात्रियों को स्वच्छ वातावरण और बेहतर यात्रा सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
निर्धारित समय के अलावा अन्य अवधि में ट्रेनों के शौचालयों और संबंधित स्थानों की सफाई हर दो घंटे के अंतराल पर की जाएगी। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सफाई से पहले और बाद की तस्वीरें जियो-टैगिंग और समय की जानकारी के साथ मोबाइल ऐप पर अपलोड करना अनिवार्य होगा।
इन तस्वीरों और सफाई संबंधी रिकॉर्ड का सत्यापन एआई आधारित वार रूम के माध्यम से किया जाएगा। निर्धारित स्वच्छता मानकों का पालन सुनिश्चित होने के बाद ही संबंधित ठेकेदार को भुगतान की मंजूरी मिलेगी। इसके अलावा, सफाई व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए एक ही एजेंसी को सफाई के साथ लिनेन (चादर, कंबल आदि) के वितरण और संग्रह की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
सफाई के साथ दूर होंगी कोचों की छोटी-मोटी खामियां.
रेलवे की नई पहल के तहत सफाई कर्मचारियों की जिम्मेदारी केवल साफ-सफाई तक सीमित नहीं रहेगी। उन्हें बिजली और प्लंबिंग से जुड़े छोटे-मोटे कार्यों के लिए भी प्रशिक्षित किया जाएगा। इससे ट्रेन में लाइट, पंखे, कुंडी और पानी की उपलब्धता जैसी समस्याओं का त्वरित समाधान किया जा सकेगा, जिससे यात्रियों को सफर के दौरान बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
इसके अलावा, ट्रेन में एकत्रित कचरे को मजबूत और सीलबंद बैगों में भरकर निर्धारित सीएमएम-पंजीकृत स्टेशनों पर उतारा जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य रेलवे ट्रैक पर कचरा फैलने से रोकना और पर्यावरण को प्रदूषण से बचाना है।
English
The South East Central Railway has begun implementing the ‘Better On-Board Services’ policy to improve passenger convenience. Under this initiative, special attention will be given to cleanliness in general coaches as well. In the first phase, three trains, including the Chhattisgarh Express, have been selected. Artificial Intelligence (AI) technology will be used to monitor cleaning arrangements, with the aim of providing passengers with a cleaner and more comfortable travel experience.
The initiative has been launched under the Railway Ministry’s ‘52 Reforms in 52 Weeks’ transformation agenda. Long-distance trains operated by the Bilaspur and Raipur divisions of the South East Central Railway have been given priority. In the first phase, the Chhattisgarh Express, Humsafar Express and Superfast Express have been included.
The selected services are train numbers 18237/18238 Chhattisgarh Express (Bilaspur–Amritsar–Bilaspur), 20847/20848 Humsafar Express (Durg–Hazrat Nizamuddin–Durg) and 12549/12550 Superfast Express (Durg–MCTM Udhampur–Durg). The initiative aims to improve onboard services and provide a better travel experience for long-distance passengers.
The primary coaching depot of the Chhattisgarh Express is located in Bilaspur, while the Humsafar Express and Superfast Express are maintained at the Durg coaching depot. Under the new system, regular cleaning will be carried out in unreserved general coaches as well as AC and sleeper coaches.
Special attention will be given to the cleanliness of toilets, entry gates and dustbins throughout the journey. Toilets must be cleaned every hour between 6 am and 9 am, and again between 8 pm and 10 pm. The initiative aims to maintain better hygiene and provide passengers with a cleaner and more comfortable travel experience.
During the remaining hours, cleaning will be carried out at intervals of every two hours. To ensure transparency and accountability, photographs taken before and after cleaning must be uploaded to a mobile application along with geotagging and timestamps.
An AI-based war room will verify the photographs and related records. Contractors will be eligible for payment only after compliance with the prescribed cleanliness standards has been confirmed. Under the new arrangement, a single agency will be responsible for cleaning services as well as the distribution and collection of linen, including bedsheets and blankets.
Minor Coach Defects to Be Fixed Alongside Cleaning.
Under the new railway initiative, the responsibilities of cleaning staff will extend beyond routine cleanliness. They will also receive training to handle minor electrical and plumbing tasks. This will enable them to address small issues involving lights, fans, latches and water availability, helping improve passenger convenience during journeys.
Additionally, waste collected on trains will be placed in strong, sealed bags and unloaded at designated CMM-registered stations. The measure aims to prevent littering along railway tracks and reduce environmental pollution.
संस्कृति
रेलयात्रिणां सुविधासु वृद्धिं कर्तुं दक्षिणपूर्वमध्यरेलविभागेन ‘बेटर ऑन-बोर्ड सर्विसेज’ इति नीत्याः कार्यान्वयनम् आरब्धम् अस्ति। अस्याः योजनायाः अन्तर्गतं रेलयानानां सामान्येषु कक्षेष्वपि स्वच्छतायाः विशेषं ध्यानं दीयते। प्रथमचरणे छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस इत्येतया सह तिस्रः रेलयानाः अस्यां योजनायां समाविष्टाः सन्ति। स्वच्छताव्यवस्थायाः निरीक्षणं कृत्रिमबुद्धिप्रौद्योगिक्याः (AI) माध्यमेन करिष्यते। अस्याः योजनायाः उद्देश्यं यात्रिभ्यः स्वच्छतरं सुखदं च रेलयात्रानुभवं प्रदातुम् अस्ति।
रेलमन्त्रालयस्य ‘५२ सप्ताहेषु ५२ सुधाराः’ इति परिवर्तनकार्यक्रमस्य अन्तर्गतं एषा नवीनपहलः प्रारब्धा अस्ति। अस्यां योजनायां दक्षिणपूर्वमध्यरेलविभागस्य बिलासपुर-रायपुर-मण्डलाभ्यां सञ्चालितानि दीर्घदूरयात्रिकरेलयानानि प्राथमिकतया स्वीकृतानि सन्ति। प्रथमचरणे छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस, हमसफर एक्सप्रेस तथा सुपरफास्ट एक्सप्रेस इति त्रीणि रेलयानानि योजनायां समाविष्टानि सन्ति।
एतेषु १८२३७/१८२३८ छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस (बिलासपुर–अमृतसर–बिलासपुर), २०८४७/२०८४८ हमसफर एक्सप्रेस (दुर्ग–हजरत निजामुद्दीन–दुर्ग) तथा १२५४९/१२५५० सुपरफास्ट एक्सप्रेस (दुर्ग–एमसीटीएम उधमपुर–दुर्ग) अन्तर्भवन्ति। अस्याः पहलस्य मुख्योद्देश्यं दीर्घदूरयात्रिकेभ्यः उत्तमाः सुविधाः प्रदातुं रेलयात्रां च अधिकं सुखदां कर्तुम् अस्ति।
छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस इत्यस्य प्राथमिकं रेलयानपरिचर्याकेन्द्रं बिलासपुरे स्थितम् अस्ति। हमसफर एक्सप्रेस तथा सुपरफास्ट एक्सप्रेस इत्यनयोः प्राथमिकं परिचर्याकेन्द्रं दुर्गनगरे स्थितम् अस्ति। नवीनव्यवस्थानुसारम् एतेषु रेलयानेषु वातानुकूलितेषु शयनयानेषु च सह अनारक्षितेषु सामान्यकक्षेष्वपि नियमितं स्वच्छताकार्यं करिष्यते।
यात्राकाले शौचालयानां, प्रवेशद्वाराणां तथा अपशिष्टपात्राणां स्वच्छतायां विशेषं ध्यानं दीयते। प्रातः षड्वादनात् नववादनपर्यन्तं तथा रात्रौ अष्टवादनात् दशवादनपर्यन्तं शौचालयानां प्रतिघण्टं स्वच्छता अनिवार्या भविष्यति। अस्याः व्यवस्थायाः मुख्योद्देश्यं यात्रिभ्यः स्वच्छं वातावरणं उत्तमाश्च यात्रासुविधाः प्रदातुम् अस्ति।
अन्येषु समयेषु रेलयानेषु प्रत्येकं द्विघण्टानन्तरं स्वच्छताकार्यं करिष्यते। पारदर्शितां सुनिश्चितुं स्वच्छताकार्यस्य पूर्वं पश्चात् च गृहीतानि छायाचित्राणि स्थाननिर्देशाङ्कैः (जियो-टैग) समयविवरणेन च सह चलदूरभाष-अनुप्रयोगे अपलोड् करणीयानि भविष्यन्ति।
एतेषां छायाचित्राणां सम्बन्धित-अभिलेखानां च सत्यापनं कृत्रिमबुद्धिमत्ताधारितेन वार-रूम् माध्यमेन करिष्यते। निर्धारितस्वच्छतामानकानां पालनस्य पुष्टि अभवत् चेत् एव ठेकेदाराय भुगतानस्य अनुमतिः प्रदास्यते। अपि च, नवीनव्यवस्थानुसारम् एका संस्था एव स्वच्छताकार्यस्य, शय्यावस्त्राणां वितरणस्य तथा संग्रहणस्य च उत्तरदायित्वं निर्वक्ष्यति।
स्वच्छतया सह रेलयानकक्षाणां लघुदोषाः अपि निराक्रियन्ते.
रेलवे-विभागस्य नवीनपहलस्य अन्तर्गतं स्वच्छताकर्मचारिणां दायित्वं केवलं स्वच्छताकार्ये सीमितं न भविष्यति। ते लघुविद्युत्कार्याणां जलनलिकासम्बद्धकार्याणां च कृते अपि प्रशिक्षिताः करिष्यन्ते। अनेन रेलयानेषु दीपानां, व्यजनानां, द्वारकुण्डिकानां तथा जलोपलब्धतायाः सम्बन्धिन्यः लघुसमस्याः शीघ्रं समाधातुं शक्यन्ते। फलतः यात्रिणां यात्रानुभवः अधिकः सुखदः भविष्यति।
अपि च, रेलयाने सञ्चितम् अपशिष्टं दृढेषु मुद्रितेषु च पुटकेषु स्थापयित्वा निर्धारितेषु सीएमएम-पञ्जीकृतेषु रेलस्थानकेषु अवतारयिष्यते। अस्य व्यवस्थायाः उद्देश्यं रेलपथेषु अपशिष्टस्य प्रसारं निवारयितुं पर्यावरणप्रदूषणं च न्यूनीकर्तुम् अस्ति।


