बलरामपुर में करंट की चपेट में आया भालू, वन विभाग ने ट्रेंक्यूलाइज कर बचाई जान.Bear Trapped in Live Electric Wires in Balrampur, Forest Department Rescues It After Tranquilizing. बलरामपुरे विद्युत्तारेषु बद्धः भल्लूकः, वनविभागेन निश्चेतकौषधं प्रयुज्य रक्षितः
बलरामपुर जिले के चांदो वन परिक्षेत्र में बुधवार को एक जंगली भालू की जान आफत में फंस गई। प्लांटेशन क्षेत्र की सुरक्षा के लिए लगाए गए लोहे के तारों की बाड़ में भालू बुरी तरह फंस गया था। काफी देर तक वह बाहर निकलने के लिए छटपटाता रहा। उसकी कराह सुनकर मौके पर पहुंचे ग्रामीणों और वन विभाग की टीम ने संयुक्त रूप से बचाव अभियान चलाया। काफी मशक्कत के बाद भालू को सुरक्षित निकालकर उसे नया जीवन देने में सफलता मिली।

बलरामपुर जिले के चांदो वन परिक्षेत्र में भालुओं की आवाजाही आम बात है। सामान्यतः भालू फेंसिंग के नीचे की मिट्टी खोदकर आसानी से बाहर निकल जाते हैं, लेकिन इस बार स्थिति अलग थी। आबादी के नजदीक स्थित प्लांटेशन क्षेत्र में पहुंचे एक भालू का शरीर लोहे के नुकीले तारों में बुरी तरह उलझ गया। खुद को छुड़ाने के लिए वह जितना अधिक संघर्ष करता, तार उतने ही कसते जाते। इसी दौरान जंगल में लकड़ी लेने गए ग्रामीणों ने भालू की दर्दभरी आवाज सुनी और उसकी मदद के लिए आगे आए।
बलरामपुर जिले के चांदो वन परिक्षेत्र में भालुओं की आवाजाही बनी रहती है। आमतौर पर ये वन्यजीव फेंसिंग के नीचे की मिट्टी खोदकर बाहर निकल जाते हैं, लेकिन इस बार आबादी के नजदीक स्थित प्लांटेशन क्षेत्र में पहुंचा एक भालू मुसीबत में फंस गया। वहां सुरक्षा के लिए लगाए गए लोहे के नुकीले तारों में उसका शरीर बुरी तरह उलझ गया। खुद को छुड़ाने के लिए भालू जितनी अधिक कोशिश करता, तार उतने ही कसते जाते। इसी दौरान जंगल में लकड़ी लेने पहुंचे ग्रामीणों ने उसकी दर्दभरी आवाज सुनी, जिसके बाद भालू को बचाने की कोशिशें शुरू हुईं।
ग्रामीणों ने जब घटनास्थल पर पहुंचकर देखा, तो भालू लोहे के तारों में बुरी तरह फंसा हुआ दर्द से तड़प रहा था। ग्रामीणों ने बिना देर किए चांदो वन परिक्षेत्र के अधिकारियों को इसकी सूचना दी। जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन उचित संसाधनों के अभाव में भालू के नजदीक जाना जोखिम भरा था। घायल और भयभीत भालू के आक्रामक होने की आशंका के चलते बचाव अभियान चुनौतीपूर्ण बन गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए वन्यजीव अधिकारियों को तत्काल इसकी जानकारी दी गई। मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) डॉ. प्रणव मिश्रा ने स्थिति पर संज्ञान लेते हुए अंबिकापुर से वन्यजीव चिकित्सक डॉ. अजीत पांडेय के नेतृत्व में एक विशेष रेस्क्यू टीम को घटनास्थल के लिए रवाना किया, ताकि भालू को सुरक्षित बचाया जा सके।
भालू को नहीं आई कोई गंभीर चोट.
रेस्क्यू टीम के घटनास्थल पर पहुंचने के बाद सबसे पहले भालू को बेहोश किए बिना तारों से मुक्त कराने का प्रयास किया गया। हालांकि, नुकीला तार उसके शरीर में गहराई तक धंसा होने के कारण इस कोशिश में सफलता नहीं मिल सकी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वन्यजीव विशेषज्ञों ने भालू की सुरक्षा और प्राणरक्षा के लिए उसे ट्रेंक्यूलाइज (बेहोश) करने का फैसला लिया।
वन्यजीवों के बचाव से जुड़े सभी निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन करते हुए डॉ. अजीत पांडेय ने ट्रेंक्यूलाइजर गन से भालू को निशाना बनाया। डार्ट लगने के कुछ ही मिनटों में भालू बेहोश हो गया। इसके बाद वन विभाग के कर्मचारियों ने पूरी सतर्कता बरतते हुए लोहे के तारों को काटा और भालू को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। चिकित्सकीय जांच के दौरान उसके शरीर पर कुछ मामूली खरोंचें पाई गईं, लेकिन कोई गंभीर चोट नहीं मिली। राहत की बात यह रही कि भालू पूरी तरह स्वस्थ पाया गया।
भालू को जंगल में सुरक्षित पहुंचाने के बाद दिया गया एंटीडोट.
भालू को बेहोशी की अवस्था में ही सुरक्षित तरीके से घने जंगल के एक उपयुक्त स्थान पर पहुंचाया गया। इसके बाद उसे होश में लाने के लिए एंटीडोट का इंजेक्शन दिया गया। कुछ देर बाद जब भालू को होश आया, तो उसने आसपास नजर दौड़ाई और फिर तेजी से दौड़ते हुए घने जंगल में चला गया।
मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) डॉ. प्रणव मिश्रा ने बताया कि भालू की जान बचाना वन विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता थी। पूरी सावधानी और निर्धारित वन्यजीव प्रोटोकॉल के तहत रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा किया गया।
English
A wild bear faced a life-threatening situation on Wednesday in the Chando forest range of Balrampur district. The animal became severely entangled in the iron fencing installed to protect a plantation area. It struggled for hours to free itself from the wires. After hearing its cries, local villagers and forest department personnel rushed to the spot and launched a joint rescue operation. Following considerable efforts, the bear was successfully rescued, giving it a new lease on life.
Bear movement is common in the Chando forest range of Balrampur district. Usually, bears dig beneath the fencing to make their way out. However, this time, a bear that entered a plantation area near a residential locality became severely trapped in sharp iron wires. The more it struggled to free itself, the tighter the wires became around its body. Meanwhile, villagers who had gone into the forest to collect firewood heard the animal’s painful cries and came forward to help.
Bear movement is common in the Chando forest range of Balrampur district. Usually, these wild animals dig beneath the fencing to make their way out. However, a bear that entered a plantation area near a residential locality found itself in serious trouble. Its body became badly entangled in the sharp iron wires installed for protection. The more it struggled to escape, the tighter the wires became. Meanwhile, villagers who had gone into the forest to collect firewood heard the bear’s painful cries, prompting efforts to rescue the animal.
When the villagers reached the spot, they found the bear struggling in pain after becoming severely entangled in the iron wires. They immediately informed the officials of the Chando forest range. A forest department team soon arrived at the scene, but approaching the animal without proper equipment was extremely risky. Since the injured and frightened bear could become aggressive, carrying out the rescue operation posed a significant challenge.
Considering the seriousness of the situation, the matter was brought to the attention of Dr. Pranav Mishra, Chief Conservator of Forests (Wildlife). He immediately dispatched a specialised rescue team from Ambikapur under the leadership of wildlife veterinarian Dr. Ajit Pandey to carry out the operation and ensure the bear’s safe rescue.
Relief for Wildlife Officials: Bear Escapes Serious Injuries.
After reaching the spot, the rescue team initially attempted to free the bear from the wires without tranquilizing it. However, the effort proved unsuccessful as the sharp wire had penetrated deep into the animal’s body. Considering the seriousness of the situation, wildlife experts decided to tranquilize the bear to ensure its safety and save its life.
Following all prescribed wildlife rescue protocols, Dr. Ajit Pandey accurately targeted the bear with a tranquilizer gun. Within a few minutes of the dart being administered, the animal became unconscious. Forest department personnel then carefully cut through the iron wires and safely freed the bear. A medical examination revealed only minor scratches, with no serious injuries. Fortunately, the bear was found to be in good health.
Bear Given an Antidote After Being Safely Relocated to the Forest.
The bear was transported while unconscious to a safe location deep inside the forest. An antidote injection was then administered to reverse the effects of the tranquilizer and help the animal regain consciousness. After waking up, the bear looked around for a few moments before running swiftly into the dense forest and disappearing from sight.
Chief Conservator of Forests (Wildlife) Dr. Pranav Mishra said that saving the bear’s life had been the forest department’s top priority. The rescue operation was completed with due care and in accordance with established wildlife protocols.
संस्कृति
बलरामपुरजनपदस्य चान्दो वनक्षेत्रे बुधवासरे एकः वन्यभल्लूकः प्राणसङ्कटे पतितः। वृक्षारोपणक्षेत्रस्य सुरक्षार्थं स्थापितायां लौहकण्टकयुक्तायां तारवेष्टिकायां सः भल्लूकः दारुणतया बद्धः अभवत्। सः बहुकालं यावत् बन्धनात् मुक्तः भवितुं प्रयत्नम् अकरोत्। तस्य आर्तनादं श्रुत्वा ग्रामवासिनः वनविभागस्य कर्मचारिणश्च घटनास्थले समागताः। संयुक्तप्रयत्नैः भल्लूकस्य रक्षणकार्यं कृतम् तथा च अन्ततः तस्य प्राणरक्षा सफला अभवत्।
बलरामपुरजनपदस्य चान्दो वनक्षेत्रे भल्लूकानां विचरणं सामान्यं भवति। सामान्यतः भल्लूकाः तारवेष्टिकायाः अधः मृत्तिकां खनित्वा बहिः निर्गच्छन्ति। किन्तु अस्मिन् समये वसतिक्षेत्रस्य समीपे स्थिते वृक्षारोपणक्षेत्रे प्रविष्टः एकः भल्लूकः तीक्ष्णलौहतारेषु दृढतया बद्धः अभवत्। सः यथा यथा मुक्तः भवितुं प्रयत्नम् अकरोत्, तथा तथा ताराः तस्य शरीरे अधिकं दृढतया बद्धाः अभवन्। तस्मिन् समये काष्ठानि आनेतुं वनं गतवन्तः ग्रामवासिनः भल्लूकस्य दुःखपूर्णम् आर्तनादं श्रुत्वा तस्य सहायतार्थम् अग्रे आगतवन्तः।
बलरामपुरजनपदस्य चान्दो वनक्षेत्रे भल्लूकानां विचरणं प्रायः भवति। सामान्यतः भल्लूकाः तारवेष्टिकायाः अधः मृत्तिकां खनित्वा बहिः निर्गच्छन्ति। किन्तु अस्मिन् समये जनवस्तेः समीपस्थं वृक्षारोपणक्षेत्रं प्रविष्टः एकः भल्लूकः सङ्कटे पतितः। तत्र रक्षणार्थं स्थापितेषु तीक्ष्णलौहतारेषु तस्य शरीरं दृढतया बद्धम् अभवत्। सः यथा यथा मुक्तः भवितुं प्रयत्नम् अकरोत्, तथा तथा ताराः तस्य शरीरे अधिकं कसिताः अभवन्। एतस्मिन् समये काष्ठानि आनेतुं वनं गतवन्तः ग्रामवासिनः भल्लूकस्य दुःखपूर्णम् आर्तनादं श्रुतवन्तः। ततः तस्य रक्षणाय प्रयासाः आरब्धाः।
ग्रामवासिनः घटनास्थलं प्राप्य अपश्यन् यत् भल्लूकः लौहतारेषु दृढतया बद्धः पीडया च आक्रन्दन् आसीत्। ते तत्कालं चान्दो वनक्षेत्रस्य अधिकारिणः सूचितवन्तः। सूचना प्राप्तमात्रेण वनविभागस्य दलं घटनास्थलं प्राप्तम्। किन्तु आवश्यकसाधनानाम् अभावे भल्लूकस्य समीपं गमनं जोखिमपूर्णम् आसीत्। आहतः भयभीतः च भल्लूकः आक्रामकः भवितुम् अर्हति स्म, अतः तस्य रक्षणकार्यं चुनौतीपूर्णम् अभवत्।
स्थितेः गाम्भीर्यं दृष्ट्वा वन्यजीवविषयकाधिकारिणः सूचिताः। मुख्यवनसंरक्षकः (वन्यजीवः) डॉ. प्रणवमिश्रः तत्कालम् अम्बिकापुरात् वन्यजीवचिकित्सकस्य डॉ. अजीतपाण्डेयस्य नेतृत्वे विशेषं रक्षणदलम् घटनास्थलं प्रति प्रेषितवान्, येन भल्लूकस्य सुरक्षितं रक्षणं कर्तुं शक्येत।
आश्वासप्रदं वृत्तम्—भल्लूकस्य गम्भीरः आघातः न जातः।
रक्षणदलस्य घटनास्थले आगमनानन्तरं प्रथमं भल्लूकं मूर्च्छितं अकृत्वा तारबन्धनात् मुक्तं कर्तुं प्रयासः कृतः। किन्तु तीक्ष्णतारः तस्य शरीरे गभीरतया प्रविष्टः आसीत्, अतः प्रयासः सफलः न अभवत्। परिस्थितेः गाम्भीर्यं दृष्ट्वा वन्यजीवविशेषज्ञैः भल्लूकस्य सुरक्षार्थं प्राणरक्षार्थं च तं निश्चेतनौषधं प्रयुज्य मूर्च्छितं कर्तुं निर्णयः कृतः।
वन्यजीवसंरक्षणस्य सर्वान् निर्धारितनियमान् अनुसृत्य डॉ. अजीतपाण्डेयः निश्चेतकास्त्रेण भल्लूकं लक्ष्यीकृतवान्। औषधयुक्तबाणस्य प्रहारानन्तरं कतिपयेषु निमेषेषु एव भल्लूकः अचेतनः अभवत्। ततः वनविभागस्य कर्मचारिणः अत्यन्तं सावधानतया लौहतारान् छित्त्वा भल्लूकं बन्धनात् मुक्तवन्तः। चिकित्सकीयपरीक्षणे तस्य शरीरे केवलं लघुक्षतचिह्नानि प्राप्तानि, गम्भीरः आघातः तु न दृष्टः। सौभाग्येन भल्लूकः पूर्णतया स्वस्थः आसीत्।
भल्लूकं सुरक्षितं वनं नीत्वा निश्चेतकौषधस्य प्रभावनिवारकौषधं दत्तम्।
भल्लूकः अचेतनावस्थायामेव सुरक्षिततया घनवनस्य उपयुक्तस्थाने नीतः। ततः तं चेतनावस्थायां प्रत्यानेतुं निश्चेतकौषधस्य प्रभावनिवारकौषधस्य च सूचिका दत्ता। किञ्चित्कालानन्तरं चेतनां प्राप्तवान् भल्लूकः इतस्ततः अपश्यत्, ततः शीघ्रं धावन् घनवनस्य अन्तः अदृश्यः अभवत्।
मुख्यवनसंरक्षकः (वन्यजीवः) डॉ. प्रणवमिश्रः अवदत् यत् भल्लूकस्य प्राणरक्षा वनविभागस्य प्रमुखं लक्ष्यं आसीत्। सर्वाणि आवश्यकसावधानतानि वन्यजीवसंरक्षणनियमान् च अनुसृत्य रक्षणकार्यं सम्पन्नम्।


