मन की बात में पीएम मोदी का दीपावली संदेश, स्वदेशी उत्पाद अपनाने और ‘वोकल फॉर लोकल’ को बढ़ावा देने की अपील.Mann Ki Baat: PM Modi Urges People to Promote ‘Vocal for Local’ During Diwali. ‘मन की बात’ कार्यक्रमे दीपावल्याः सन्देशः, प्रधानमन्त्री मोदी स्वदेशी-उत्पादानां प्रोत्साहनाय ‘स्थानीयस्य कृते मुखराः भवामः’ इति आह्वानम् अकरोत्।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम के जरिए देशवासियों से दीपावली के अवसर पर स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देने और ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को नई मजबूती देने की अपील की। इस दौरान उन्होंने देश के विभिन्न हिस्सों में हो रहे नवाचारों और रचनात्मक पहलों की सराहना करते हुए लोगों के प्रयासों को प्रेरणादायक बताया।

दीपावली के त्योहार को लेकर देशभर में चल रही तैयारियों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को देशवासियों से स्थानीय कारीगरों और स्वदेशी उत्पादों को प्रोत्साहित करने की अपील की। अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में उन्होंने ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को और मजबूत बनाने पर जोर दिया। साथ ही, उन्होंने वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों की बढ़ती पहचान और लोकप्रियता का भी उल्लेख किया।प्रधानमंत्री ने बिहार के मखाने और कर्नाटक की अरहर दाल का उदाहरण देते हुए बताया कि देश के पारंपरिक उत्पाद अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी अलग पहचान बना रहे हैं। उन्होंने स्थानीय उत्पादों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया, जिससे देश के कारीगरों, छोटे कारोबारियों और स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन मिल सके।
महाराष्ट्र के जनजातीय उत्पाद भी अपनी पारंपरिक कला और संस्कृति से सजी आकर्षक पैकेजिंग के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान बना रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खादी की बढ़ती लोकप्रियता का उल्लेख करते हुए कहा कि स्थानीय कारीगरों की मेहनत और हुनर देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने दीपावली के अवसर पर लोगों से स्वदेशी वस्तुओं को खरीदने और स्थानीय कारीगरों के प्रयासों को प्रोत्साहित करने की अपील की।‘मन की बात’ कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने कृषि क्षेत्र में किए जा रहे अभिनव प्रयोगों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी प्रेरणादायक पहलों का भी जिक्र किया। उन्होंने इन प्रयासों को देश के विकास, आत्मनिर्भरता और प्रकृति के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में पंजाब और उत्तराखंड में पर्यावरण संरक्षण तथा टिकाऊ विकास के लिए किए जा रहे अभिनव प्रयासों की सराहना की। उन्होंने पंजाब के मालवा क्षेत्र में ‘खेती विरासत मिशन’ की ओर से शुरू की गई ‘नव-त्रिंजन’ पहल का उल्लेख किया। इस पहल के तहत बिना रासायनिक पदार्थों के प्राकृतिक रंगों वाले जैविक कपास की खेती की जा रही है। इससे कपास के रेशों से तैयार सूत को अलग से रंगने की आवश्यकता नहीं पड़ती, जिससे प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को बढ़ावा मिलता है।
प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल में हेवल नदी को पुनर्जीवित करने के प्रयासों की भी प्रशंसा की। उन्होंने बताया कि स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों ने वर्षा जल संचयन तथा बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण के जरिए नदी के जलस्रोतों को बचाने की दिशा में उल्लेखनीय काम किया है।
पीएम मोदी ने ‘मन की बात’ को अपने लिए तीर्थयात्रा के समान बताते हुए देशवासियों के इन भागीरथ प्रयासों और समाजहित में किए जा रहे योगदान को नमन किया। उन्होंने इन पहलों को प्रकृति संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता की प्रेरणादायक मिसाल के रूप में प्रस्तुत किया।
English
Through his ‘Mann Ki Baat’ programme, Prime Minister Narendra Modi urged citizens to prioritise indigenous products during Diwali and further strengthen the ‘Vocal for Local’ campaign. He also appreciated innovative initiatives and creative efforts taking place across the country, describing them as a source of inspiration.
Amid preparations for the Diwali festival, Prime Minister Narendra Modi on Sunday urged citizens to purchase products made by local artisans and further strengthen the ‘Vocal for Local’ campaign. During his monthly radio programme, Mann Ki Baat, he highlighted the growing recognition of Indian products in international markets.
The Prime Minister cited Bihar’s makhana (fox nuts) and Karnataka’s pigeon peas (arhar dal) as examples of Indian products gaining recognition in global markets. He emphasised the importance of supporting locally made goods to encourage artisans, small businesses and the domestic economy.
Maharashtra’s tribal products are gaining global recognition through attractive packaging that showcases the region’s traditional art and cultural heritage. Highlighting the growing popularity of khadi, Prime Minister Narendra Modi said that the skills and dedication of local artisans play a vital role in preserving India’s rich traditions. He urged citizens to choose indigenous products during Diwali and support the efforts of local craftspeople.
During his Mann Ki Baat programme, the Prime Minister also shared inspiring examples of innovative practices in agriculture and initiatives aimed at environmental conservation. He highlighted the importance of such efforts in promoting national development, self-reliance and the protection of nature.
In his monthly radio programme Mann Ki Baat, Prime Minister Narendra Modi appreciated innovative initiatives promoting environmental conservation and sustainable development in Punjab and Uttarakhand.
He highlighted the ‘Nav-Trinjan’ initiative launched by the Kheti Virasat Mission in Punjab’s Malwa region. Under this initiative, organic cotton with naturally occurring colours is cultivated without the use of chemicals. This reduces the need to dye the yarn separately, helping promote environmentally friendly textile production and the conservation of natural resources.
The Prime Minister also praised efforts to revive the drying Heval River in Tehri Garhwal, Uttarakhand. Local authorities and villagers have been working together to restore the river through rainwater harvesting and tree plantation.
Describing Mann Ki Baat as a pilgrimage in his own life, PM Modi paid tribute to the people involved in these extraordinary efforts and acknowledged their contributions to society. He presented the initiatives as inspiring examples of environmental protection and community participation.
संस्कृति
‘मन की बात’ इति कार्यक्रमस्य माध्यमेन प्रधानमन्त्री नरेन्द्रमोदी दीपावल्याः अवसरे देशवासिनः स्वदेशीय-उत्पादानां प्राधान्यं दातुं ‘स्थानीयस्य कृते मुखराः भवामः’ इति अभियानं च सुदृढं कर्तुम् आह्वानम् अकरोत्। अस्मिन् अवसरे सः देशस्य विभिन्नेषु भागेषु प्रचलितानां नवाचाराणां सृजनात्मक-प्रयासानां च प्रशंसाम् अकरोत् तथा जनानां प्रयत्नान् प्रेरणादायकान् अवदत्।
दीपावली-महोत्सवस्य सज्जतायाः मध्ये प्रधानमन्त्री नरेन्द्रमोदी रविवासरे देशवासिनः स्थानीय-शिल्पिभिः निर्मितानाम् उत्पादानां क्रयणाय तथा ‘वोकल फॉर लोकल’ इति अभियानस्य अधिकं सुदृढीकरणाय च प्रेरितवान्। स्वस्य मासिके आकाशवाणी-कार्यक्रमे ‘मन की बात’ इत्यत्र सः अन्तरराष्ट्रीय-विपण्येषु भारतीय-उत्पादानां वर्धमानां प्रतिष्ठां विशेषतया उल्लिखितवान्।
प्रधानमन्त्री बिहार-प्रदेशस्य मखानस्य तथा कर्नाटक-प्रदेशस्य आढकी-दालस्य उदाहरणं दत्त्वा अवदत् यत् भारतीय-परम्परागत-उत्पादाः वैश्विक-विपण्येषु स्वकीयां विशिष्टां परिचितिं प्राप्नुवन्ति। स्थानीय-उत्पादानां क्रयणेन शिल्पिनः, लघु-व्यवसायिनः तथा देशस्य अर्थव्यवस्था च प्रोत्साहनं प्राप्स्यन्ति इति सः महत्त्वम् अददात्
महाराष्ट्रस्य जनजातीय-उत्पादाः पारम्परिक-कला-संस्कृतिभिः अलङ्कृतया आकर्षक-पुटीकरण-व्यवस्थया वैश्विक-विपण्येषु प्रसिद्धिं प्राप्नुवन्ति। खादी-वस्त्रस्य वर्धमानां लोकप्रियतां वर्णयन् प्रधानमन्त्री नरेन्द्रमोदी अवदत् यत् स्थानीय-शिल्पिनां कौशलं परिश्रमः च भारतस्य समृद्धां सांस्कृतिक-परम्परां संरक्षितुं महत्त्वपूर्णां भूमिकां निर्वहति। दीपावली-पर्वणि स्वदेशीय-वस्तूनि क्रेतुं स्थानीय-शिल्पिनां प्रयासान् प्रोत्साहयितुं च सः देशवासिनः आहूतवान्।
‘मन की बात’ इति कार्यक्रमे प्रधानमन्त्री कृषिक्षेत्रे क्रियमाणानां नवीन-प्रयोगाणां पर्यावरण-संरक्षण-सम्बद्धानां च प्रेरणादायक-प्रयासानां उदाहरणानि अपि प्रस्तुतवान्। एते प्रयासाः राष्ट्रस्य विकासाय, आत्मनिर्भरत्वस्य प्रवर्धनाय, प्रकृतेः संरक्षणाय च महत्त्वपूर्णाः सन्ति इति सः प्रतिपादितवान्।
प्रधानमन्त्री नरेन्द्रमोदी स्वस्य मासिके ‘मन की बात’ इति आकाशवाणी-कार्यक्रमे पञ्जाब-उत्तराखण्ड-प्रदेशयोः पर्यावरण-संरक्षणाय स्थायि-विकासाय च क्रियमाणानां नवीन-प्रयासानां प्रशंसाम् अकरोत्।
सः पञ्जाबस्य मालवा-क्षेत्रे ‘खेती विरासत मिशन’ इति संस्थया प्रारब्धायाः ‘नव-त्रिंजन’ इति योजनायाः उल्लेखम् अकरोत्। अस्याः योजनायाः अन्तर्गतं रसायनानाम् उपयोगं विना प्राकृतिक-वर्णयुक्तस्य जैविक-कर्पासस्य कृषिः क्रियते। अनेन कर्पास-सूत्रस्य पृथक् वर्णनस्य आवश्यकता न्यूनीभवति तथा पर्यावरण-अनुकूल-वस्त्र-निर्माणं प्राकृतिक-संसाधनानां संरक्षणं च प्रोत्साह्यते।
प्रधानमन्त्री उत्तराखण्डस्य टिहरी-गढ़वाल-क्षेत्रे शुष्यन्त्याः हेवल-नद्याः पुनरुज्जीवनाय क्रियमाणानां प्रयासानाम् अपि प्रशंसाम् अकरोत्। स्थानीय-प्रशासनं ग्रामवासिनः च वर्षाजल-सञ्चयनस्य वृक्षारोपणस्य च माध्यमेन नदीं पुनर्जीवितुं प्रयत्नशीलाः सन्ति।
‘मन की बात’ कार्यक्रमं स्वस्य कृते तीर्थयात्रा-सदृशम् इति वर्णयन् प्रधानमन्त्री देशवासिनां महतां प्रयासानां समाजहिते योगदानस्य च प्रशंसां कृत्वा तेभ्यः नमनम् अकरोत्। एते प्रयासाः पर्यावरण-संरक्षणस्य सामुदायिक-सहभागितायाश्च प्रेरणादायकाः उदाहरणाः सन्ति इति सः अवदत्।


