महानदी जल विवाद सुलझने की उम्मीद, छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच 25 साल के समझौते से खत्म हो सकता है तीन दशक पुराना विवाद.Mahanadi Water Dispute May Be Resolved: 25-Year Agreement Between Chhattisgarh and Odisha Could End Three-Decade-Long Conflict. महानदीजलविवादस्य समाधानस्य आशा, छत्तीसगढ-ओडिशाराज्ययोः पञ्चविंशतिवर्षीयेन सम्झौतेन त्रिदशकपुरातनः विवादः समाप्तिं गन्तुं शक्नोति।

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छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच महानदी के जल बंटवारे को लेकर पिछले 43 वर्षों से जारी विवाद अब समाप्त होने की दिशा में आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है। दोनों राज्यों के बीच इस लंबे समय से चले आ रहे मतभेद को सुलझाने के लिए 25 साल के ऐतिहासिक जल समझौते का खाका तैयार कर लिया गया है। माना जा रहा है कि इस पहल से दोनों राज्यों के बीच जल बंटवारे को लेकर सहमति बनने और विवाद का स्थायी समाधान निकलने की उम्मीद मजबूत हुई है।

महानदी जल विवाद के समाधान की दिशा में एक अहम कदम उठाया जा रहा है। केंद्रीय जल आयोग (CWC) 26 अक्टूबर तक अपनी अंतिम रिपोर्ट महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण को सौंपने की तैयारी पूरी कर चुका है। वहीं, केंद्र सरकार की सक्रिय मध्यस्थता से छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच लंबे समय से जारी जल बंटवारे के विवाद के सुलझने की संभावनाएं भी बढ़ गई हैं। माना जा रहा है कि इस प्रक्रिया से दोनों राज्यों के बीच दशकों से कायम गतिरोध को दूर करने का रास्ता खुल सकता है।

महानदी जल बंटवारे के लिए 46 एमएएफ का नया फॉर्मूला तैयार.

प्रस्तावित जल समझौते में महानदी के कुल 46 मिलियन एकड़ फीट (MAF) जल के बंटवारे के लिए एक नया खाका तैयार किया गया है। इसके तहत दोनों राज्यों के बीच पानी का वितरण वैज्ञानिक आधार और न्यायसंगत सिद्धांतों के अनुरूप करने का प्रस्ताव है। फॉर्मूले के मुताबिक, ओडिशा को 24 एमएएफ और छत्तीसगढ़ को 22 एमएएफ पानी आवंटित करने का प्रावधान रखा गया है।

महानदी जल विवाद: 28 सितंबर को दोनों राज्यों ने न्यायाधिकरण के सामने रखा अपना पक्ष.

उल्लेखनीय है कि 28 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस बेला एम. त्रिवेदी की अध्यक्षता में गठित महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण के समक्ष छत्तीसगढ़ और ओडिशा ने अपना-अपना पक्ष प्रस्तुत किया था। इसके बाद केंद्रीय जल आयोग की ओर से तैयार की जा रही विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट को दोनों राज्यों के हितों के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस रिपोर्ट से महानदी के जल बंटवारे को लेकर जारी विवाद के समाधान का रास्ता निकलने की उम्मीद है।

पोलावरम बैकवाटर और मुआवजे के मुद्दे पर आगे बढ़ेगी बातचीत.

महानदी जल विवाद के साथ-साथ गोदावरी नदी पर आंध्र प्रदेश में निर्माणाधीन पोलावरम बांध परियोजना से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए भी आने वाले दिनों में चर्चा तेज होने की संभावना है। इस मामले में छत्तीसगढ़ सरकार ने बांध के बैकवाटर यानी जलभराव के संभावित प्रभावों का तकनीकी अध्ययन भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) खड़गपुर को सौंपा था। अब यह अध्ययन पूरा हो चुका है।अध्ययन में बांध के कारण डुबान क्षेत्र में आने वाले सीमावर्ती गांवों पर पड़ने वाले आर्थिक प्रभावों का आकलन किया गया है। रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर छत्तीसगढ़ सरकार आंध्र प्रदेश के समक्ष प्रभावित गांवों के विस्थापन, पुनर्वास और उचित वित्तीय मुआवजे का मुद्दा औपचारिक रूप से उठाने की तैयारी कर रही है। इससे दोनों राज्यों के बीच इस विवाद के समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की उम्मीद है।

अमित शाह की मध्यस्थता से विवाद सुलझने की बढ़ी उम्मीद.

महानदी जल बंटवारे को लेकर दशकों से चले आ रहे विवाद के स्थायी समाधान के लिए केंद्र सरकार की पहल तेज हो गई है। इसी कड़ी में 1 अक्टूबर को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने अपने-अपने राज्यों का पक्ष मजबूती से प्रस्तुत किया।अब अगले महीने दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों की मौजूदगी में इस मुद्दे पर एक और अहम बैठक प्रस्तावित है। इस बैठक में जल बंटवारे से जुड़े प्रमुख बिंदुओं पर सहमति बनने और प्रस्तावित समझौते को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना जताई जा रही है। यदि दोनों राज्यों के बीच सहमति बनती है, तो लंबे समय से जारी विवाद के स्थायी समाधान का रास्ता खुल सकता है।

English

A lasting resolution to the 43-year-old Mahanadi water-sharing dispute between Chhattisgarh and Odisha now appears to be within reach. A framework for a historic 25-year water-sharing agreement between the two neighboring states has been prepared. The proposed agreement is expected to pave the way for mutual understanding on water distribution and help resolve the long-standing dispute.

A significant step is being taken towards resolving the Mahanadi water-sharing dispute. The Central Water Commission (CWC) is fully prepared to submit its final report to the Mahanadi Water Disputes Tribunal by October 26. Following the Central Government’s active mediation, hopes of resolving the decades-old inter-state deadlock between Chhattisgarh and Odisha have strengthened. The development could pave the way for a lasting settlement between the two states.

New 46 MAF Formula Proposed for Mahanadi Water Sharing.

A framework has been proposed for the allocation of the Mahanadi’s total 46 million acre-feet (MAF) of water under the proposed agreement. The formula aims to ensure a scientific and equitable distribution between the two states. Under the proposal, Odisha would receive 24 MAF of water, while Chhattisgarh would be allocated 22 MAF.

Mahanadi Water Dispute: Both States Presented Their Positions Before the Tribunal on September 28

It is worth noting that on September 28, Chhattisgarh and Odisha presented their respective positions before the Mahanadi Water Disputes Tribunal, chaired by former Supreme Court judge Justice Bela M. Trivedi. Following the hearing, the detailed technical report being prepared by the Central Water Commission is being viewed as an important step towards balancing the interests of both states. The report is expected to help pave the way for resolving the long-standing Mahanadi water-sharing dispute.

Talks to Move Forward on Polavaram Backwaters and Compensation Issues.

Alongside the Mahanadi water-sharing dispute, discussions on issues related to the Polavaram dam project under construction by Andhra Pradesh on the Godavari River are also expected to move forward in the coming days.

The Chhattisgarh government had commissioned the Indian Institute of Technology (IIT) Kharagpur to conduct a technical study of the dam’s backwater effects, referring to the water that accumulates upstream. The study has now been completed, assessing the economic impact on border villages that may fall within the submergence zone.Based on the findings, the state government is preparing to formally seek appropriate financial compensation from Andhra Pradesh for the displacement and rehabilitation of affected villages. The move is expected to advance discussions between the two states towards resolving the issue.

Dispute Expected to Be Resolved Through Home Minister Amit Shah’s Mediation.

Efforts to find a lasting solution to the decades-old Mahanadi water-sharing dispute have gained momentum through the Centre’s intervention. On October 1, a high-level meeting was held in New Delhi under the chairmanship of Union Home Minister Amit Shah. During the meeting, Chhattisgarh Chief Minister Vishnu Deo Sai and Odisha Chief Minister Mohan Charan Majhi strongly presented their respective states’ positions.

Another crucial meeting is expected to take place next month in the presence of both chief ministers. The discussions may focus on reaching a consensus on key aspects of water sharing and finalizing the proposed agreement. If both states reach an understanding, it could pave the way for a lasting resolution to the long-standing dispute.

संस्कृति

छत्तीसगढ-ओडिशाराज्ययोः मध्ये महानदीजलस्य विभाजनं प्रति विगतचतुश्चत्वारिंशत् वर्षेभ्यः प्रचलितः विवादः अधुना समाधानस्य दिशि अग्रसरः दृश्यते। उभयोः समीपस्थराज्ययोः मध्ये पञ्चविंशतिवर्षीयस्य ऐतिहासिकजलसम्झौतेः प्रारूपं सज्जीकृतम् अस्ति। अनेन प्रस्तावितसम्झौतेन जलविभाजनविषये परस्परसहमतिः भवितुं तथा च दीर्घकालीनविवादस्य स्थायिसमाधानं प्राप्तुं आशा वर्धिता अस्ति।

महानदीजलविवादस्य समाधानदिशि महत्त्वपूर्णं पदं क्रियते। केन्द्रीयजलायोगः (CWC) अक्टोबरमासस्य २६ दिनाङ्कपर्यन्तं स्वस्य अन्तिमप्रतिवेदनं महानदीजलविवादन्यायाधिकरणाय समर्पयितुं पूर्णतया सज्जः अस्ति। केन्द्रसर्वकारस्य सक्रियमध्यस्थतया छत्तीसगढ-ओडिशाराज्ययोः मध्ये दीर्घकालात् प्रचलितस्य अन्तर्राज्यीयजलविवादस्य समाधानस्य आशा वर्धिता अस्ति। एषा प्रक्रिया उभयोः राज्ययोः मध्ये स्थायिसमाधानस्य मार्गं प्रशस्तं कर्तुं शक्नोति।

महानदीजलविभाजनाय ४६ एमएएफ-परिमितस्य नवीनसूत्रस्य प्रस्तावः

प्रस्तावितजलसम्झौतानुसारं महानद्याः कुलं ४६ मिलियन एकरफीट् (MAF) जलस्य वैज्ञानिकरीत्या न्यायोचितं च विभाजनं कर्तुं प्रारूपं सज्जीकृतम् अस्ति। अस्य नवीनसूत्रस्य अन्तर्गतं उभयोः राज्ययोः मध्ये जलस्य समुचितं वितरणं प्रस्तावितम् अस्ति। तदनुसारम् ओडिशाराज्याय २४ एमएएफ जलं तथा छत्तीसगढराज्याय २२ एमएएफ जलं आवण्टयितुं प्रावधानम् अस्ति।

महानदीजलविवादः: सितम्बरमासस्य २८ दिनाङ्के उभयराज्यैः न्यायाधिकरणस्य समक्षं स्वपक्षः प्रस्तुतः

उल्लेखनीयं यत् सितम्बरमासस्य २८ दिनाङ्के सर्वोच्चन्यायालयस्य पूर्वन्यायाधीशायाः न्यायमूर्तेः बेला एम. त्रिवेदी-महोदयायाः अध्यक्षतायां गठितस्य महानदीजलविवादन्यायाधिकरणस्य समक्षं छत्तीसगढ-ओडिशाराज्ययोः प्रतिनिधिभिः स्वपक्षौ प्रस्तुतौ आस्ताम्। ततः परं केन्द्रीयजलायोगेन सज्जीक्रियमाणा विस्तृता प्राविधिकी प्रतिवेदना उभयोः राज्ययोः हितानां सन्तुलनस्थापनाय महत्त्वपूर्णा मन्यते। अस्याः प्रतिवेदनायाः माध्यमेन महानदीजलविभाजनसम्बद्धस्य दीर्घकालीनविवादस्य समाधानमार्गः प्रशस्तो भवितुम् अर्हति।

पोलावरम-जलपश्चप्रवाहस्य क्षतिपूर्तेः च विषये अग्रे चर्चा भविष्यति।

महानदीजलविवादेन सह गोदावरीनद्यां आन्ध्रप्रदेशेन निर्मीयमाणस्य पोलावरम-बन्धपरियोजनायाः सम्बन्धे अपि आगामीषु दिनेषु निर्णायकचर्चा अग्रे प्रवर्तिष्यते इति सम्भावना अस्ति।

छत्तीसगढसर्वकारेण बन्धस्य पश्चाज्जलसञ्चयस्य, अर्थात् बैकवाटरस्य, प्रभावस्य प्राविधिकाध्ययनं कर्तुं भारतीयप्रौद्योगिकीसंस्थानस्य खड्गपुरस्य (IIT Kharagpur) दायित्वं समर्पितम् आसीत्। इदानीम् एतदध्ययनं पूर्णम् अस्ति।

अध्ययनेन जलमग्नक्षेत्रे आगच्छतां सीमावर्तिग्रामाणां आर्थिकप्रभावस्य मूल्याङ्कनं कृतम् अस्ति। अस्य प्रतिवेदनस्य आधारेण छत्तीसगढसर्वकारः प्रभावितग्रामाणां विस्थापनस्य, पुनर्वासस्य तथा उचितवित्तीयक्षतिपूर्तेः विषयं आन्ध्रप्रदेशसर्वकारस्य समक्षं औपचारिकरूपेण स्थापयितुं सज्जः अस्ति। अनेन उभयोः राज्ययोः मध्ये विवादसमाधानस्य दिशि प्रगतिः भवितुं शक्नोति।

गृहमन्त्रिणः अमितशाहस्य मध्यस्थतया विवादस्य समाधानस्य आशा वर्धिता.

महानदीजलविभाजनसम्बद्धस्य दशकानां पुरातनविवादस्य स्थायिसमाधानाय केन्द्रसर्वकारस्य प्रयासाः तीव्राः अभवन्। अस्याः प्रक्रियायाः अन्तर्गतं गतस्य अक्टोबरमासस्य प्रथमदिनाङ्के नवदिल्ली-नगरे केन्द्रीयगृहमन्त्रिणः अमितशाहस्य अध्यक्षतायां महत्त्वपूर्णा उच्चस्तरीयसभा आयोजिता आसीत्। तस्यां सभायां छत्तीसगढस्य मुख्यमन्त्री विष्णुदेवसायः तथा ओडिशायाः मुख्यमन्त्री मोहनचरणमाझी च स्वस्वराज्ययोः पक्षौ दृढतया प्रस्तुतवन्तौ।

आगामिमासे उभयोः राज्ययोः मुख्यमन्त्रिणोः उपस्थितौ अस्मिन् विषये पुनः महत्त्वपूर्णा सभा भविष्यति इति सम्भावना अस्ति। तस्यां सभायां जलविभाजनस्य प्रमुखविषयेषु सहमतिः भवितुं तथा प्रस्तावितसम्झौतेः अन्तिमरूपं निर्धारयितुं शक्यते। यदि उभयोः राज्ययोः सहमतिः भवति, तर्हि दीर्घकालीनविवादस्य स्थायिसमाधानस्य मार्गः प्रशस्तः भवितुम् अर्हति।

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