छत्तीसगढ़ GST विभाग: यह ‘कार्रवाई की गाड़ी’ है या बिना बिल वाले स्क्रैप की ‘वसूली वाली गाड़ी’?Chhattisgarh GST Department: Is this an ‘Action Vehicle’ or a ‘Recovery Vehicle’ for bill-less scrapछत्तीसगढ-राज्यकर-विभागः किम् एषा ‘कार्यवाही-वाहनम्’ अस्ति उत अभिलेखहीन-लौहावशेषस्य ‘वसूली-वाहनम्’?
बिना बिल वाले स्क्रैप की ‘वसूली वाली गाड़ी’?Chhattisgarh GST Department: Is this an ‘Action Vehicle’ or a ‘Recovery Vehicle’ for bill-less scrap

छत्तीसगढ़ GST विभाग: यह ‘कार्रवाई की गाड़ी’ है या बिना बिल वाले स्क्रैप की ‘वसूली वाली गाड़ी’?
रायपुर। छत्तीसगढ़ का राज्य कर (SGST) विभाग इन दिनों अपनी कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवालों के घेरे में है। अमूमन टैक्स चोरी रोकने की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारियों का एक ऐसा कारनामा सामने आया है, जिसने विभाग की शुचिता और दावों की पोल खोलकर रख दी है। सिलतरा औद्योगिक क्षेत्र में बिना जीएसटी बिल के परिवहन कर रहे मेटल स्क्रैप के वाहनों को पकड़ने के बजाय, विभाग के ऑन-ड्यूटी अधिकारी खुद मौके से भागते नजर आए।
दोपहर के सन्नाटे में 30 मिनट का संदिग्ध ‘मंथन’—क्या पहले से तय थी ‘वसूली’ की सेटिंग?
घटना बीते 10 सितंबर की है। सिलतरा औद्योगिक क्षेत्र के फेज़-2 में राकेश धर्मकांटा के सामने स्थित एक पार्किंग स्थल में दोपहर 2 से 4 बजे के बीच, बिना वैध दस्तावेजों और जीएसटी बिल के मेटल स्क्रैप से लदा एक वाहन प्रवेश करता है। मीडिया की खोजी टीम इस संदिग्ध वाहन का लगातार पीछा कर रही थी। परंतु, पार्किंग के भीतर का दृश्य चौंकाने वाला था। वहां पहले से ही ‘छत्तीसगढ़ शासन’ की पट्टिका लगी जीएसटी विभाग की अनुबंधित अर्टिगा कार (क्रमांक: CG04QZ4110) खड़ी थी। विभाग के अधिकारी लगभग 30 मिनट से वाहन के भीतर ही मौजूद थे। सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि उस पार्किंग में स्क्रैप से लदे 20-25 अन्य वाहन भी खड़े थे। ऐसे में यह गंभीर संदेह उठता है कि जीएसटी की यह टीम वहां किसी सरकारी जांच या औचक निरीक्षण के लिए नहीं, बल्कि इन सभी वाहनों से ‘अवैध वसूली’ की सेटिंग करने के लिए पहले से ही उनका इंतजार कर रही थी। क्या दोपहर के इस समय को ‘थोक वसूली’ का सुरक्षित ठिकाना बनाया गया था?
कैमरा देखते ही अधिकारियों ने खड़े किए हाथ, कहा- ‘कमिश्नर को बोलो’
जब मौके पर उपस्थित पत्रकारों ने अधिकारियों से इस अवैध परिवहन के संबंध में पूछताछ की और कार्रवाई न करने का कारण जानना चाहा, तो अधिकारी संतोषजनक उत्तर देने में पूरी तरह असमर्थ रहे। पार्किंग में मौजूद 20-25 स्क्रैप गाड़ियों पर कर्तव्य का निर्वहन करने और अवैध माल को ज़ब्त करने के स्थान पर, वाहन में सवार एक अधिकारी ने गैर-जिम्मेदाराना ढंग से कहा, “जाकर कमिश्नर को बोलो!” इसके तत्काल बाद अधिकारी अपनी गाड़ी चालू कर अत्यधिक तीव्र गति से मौके से फरार हो गए। अधिकारियों का इस तरह अचानक भागना इस बात को और पुख्ता करता है कि वे रंगे हाथ पकड़े जाने के डर से भागे थे, क्योंकि यदि वे किसी वैध जांच पर होते तो भागने के बजाय अपनी शासकीय कार्रवाई पूरी करते।
वरिष्ठ अधिकारियों का मौन और संरक्षण की आशंका
इस अत्यंत गंभीर और संदिग्ध घटना की संपूर्ण जानकारी साक्ष्यों सहित अगले ही दिन 11 सितंबर को जीएसटी विभाग के उच्चाधिकारियों को सौंप दी गई थी। इसके बावजूद, आज 20 सितंबर तक न तो उस अवैध स्क्रैप वाहन पर कोई दंडात्मक कार्रवाई की गई है और न ही कर्तव्य से विमुख होकर भागने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कोई विभागीय जांच आरंभ हुई है। अधिकारियों की यह अकर्मण्यता और दीर्घकालिक मौन इस बात का स्पष्ट संकेत है कि औद्योगिक क्षेत्रों में जारी इस कथित ‘टैक्स चोरी और थोक वसूली’ के खेल को प्रशासनिक स्तर पर मूक संरक्षण प्राप्त है।
ENGLISH NEWS
Chhattisgarh GST Department: Is this an ‘Action Vehicle’ or a ‘Recovery Vehicle’ for bill-less scrap?
Raipur. The State Tax (SGST) Department of Chhattisgarh is currently under serious questions regarding its working style. An act of the officers, who are usually responsible for preventing tax evasion, has come to light, which has exposed the integrity and claims of the department. Instead of catching metal scrap vehicles being transported without GST bills in the Siltara industrial area, the on-duty officers of the department themselves were seen fleeing from the spot.
Suspicious 30-minute ‘deliberation’ in the afternoon silence — Was the ‘recovery’ setting pre-planned?
The incident is of last 10th September. Between 2 to 4 pm, a vehicle loaded with metal scrap without valid documents and GST bill entered a parking lot located in front of Rakesh Dharamkanta in Phase-2 of Siltara industrial area. The investigative team of the media was continuously chasing this suspicious vehicle. However, the scene inside the parking was shocking. The contracted Ertiga car (No. CG04QZ4110) of the GST department with a ‘Chhattisgarh Government’ plaque was already parked there. The officers of the department were present inside the vehicle for about 30 minutes. The most surprising thing was that 20-25 other vehicles loaded with scrap were also parked in that parking. In such a situation, a serious doubt arises that this GST team was not there for any government investigation or surprise inspection, but was already waiting for all these vehicles to set up an ‘illegal recovery’ from them. Was this afternoon time made a safe haven for ‘wholesale recovery’?
On seeing the camera, officers raised their hands and said – ‘Tell the Commissioner’
When the journalists present on the spot questioned the officers about this illegal transportation and wanted to know the reason for not taking action, the officers were completely unable to give a satisfactory answer. Instead of performing their duty on the 20-25 scrap vehicles present in the parking and confiscating the illegal goods, an officer sitting in the vehicle said in an irresponsible manner, “Go and tell the Commissioner!” Immediately after this, the officers started their vehicle and fled from the spot at a very high speed. This sudden escape of the officers further confirms that they fled for fear of being caught red-handed, because if they were on a valid investigation, they would have completed their official action instead of fleeing.
Silence of senior officers and apprehension of protection
The complete information of this very serious and suspicious incident along with evidence was handed over to the higher officials of the GST department the very next day on 11th September. Despite this, till today, 20th September, neither any punitive action has been taken against that illegal scrap vehicle nor any departmental inquiry has been initiated against the officers who fled abdicating their duty. This inaction and prolonged silence of the officers is a clear indication that this alleged game of ‘tax evasion and wholesale recovery’ going on in industrial areas has tacit protection at the administrative level.
SANSKRIT NEWS
छत्तीसगढ-राज्यकर-विभागः किम् एषा ‘कार्यवाही-वाहनम्’ अस्ति उत अभिलेखहीन-लौहावशेषस्य ‘वसूली-वाहनम्’?
रायपुरम्। छत्तीसगढस्य राज्यकर (SGST) विभागः सम्प्रति स्वकार्यप्रणालीं प्रति गम्भीरप्रश्नानां परिधौ अस्ति। सामान्यतः करचोरी-निवारणस्य दायित्वं वहन्तः अधिकारिणां एतादृशं कृत्यं प्रकाशे आगतम् अस्ति, येन विभागस्य शुचितायाः दावानां च पर्दाफाशः जातः। सिलतरा-औद्योगिकक्षेत्रे विना जीएसटी-अभिलेखं परिवहनं कुर्वतां लौहावशेष-वाहनानां ग्रहणस्य स्थाने, विभागस्य कर्तव्यस्थ-अधिकारिणः एव स्थलात् पलायमानाः दृष्टाः।
मध्याह्नस्य नीरवतायां ३० निमेषस्य सन्दिग्धं ‘मन्थनम्’ — किम् ‘वसूली’-व्यवस्था पूर्वमेव निश्चिताऽऽसीत्?
घटना गतस्य १० सितम्बर-दिनस्य अस्ति। सिलतरा-औद्योगिकक्षेत्रस्य द्वितीय-चरणे राकेश-धर्मकांटा-समक्षे स्थिते पार्किंग-स्थले मध्याह्ने २ तः ४ वादनपर्यन्तं विना वैध-दस्तावेजैः जीएसटी-अभिलेखैः च लौहावशेषेन भारितं एकं वाहनं प्रविष्टम्। मीडिया-अन्वेषण-दलः अस्य सन्दिग्ध-वाहनस्य निरन्तरं पीछा करोत् स्म। परन्तु, पार्किंग-अन्तः दृश्यं विस्मयकारकम् आसीत्। तत्र पूर्वमेव ‘छत्तीसगढ़ शासन’ इति पट्टिका-युक्ता जीएसटी-विभागस्य अनुबन्धिता अर्टिगा-कार् (क्रमांकः CG04QZ4110) स्थिता आसीत्। विभागस्य अधिकारिणः प्रायः ३० निमेषात् वाहनस्य अन्तः एव उपस्थिताः आसन्। सर्वाधिकं विस्मयकारी विषयः अयम् आसीत् यत् तस्मिन् पार्किंग-स्थले अवशेष-भारितानि २०-२५ अन्यानि वाहनानि अपि स्थितानि आसन्। एतस्मिन् परिदृश्ये अयं गम्भीरः सन्देहः उदेति यत् जीएसटी-दलः तत्र कस्यापि शासकीय-जाँचस्य वा आकस्मिक-निरीक्षणस्य कृते न, अपितु एभ्यः सर्वेभ्यः वाहनेभ्यः ‘अवैध-वसूली’-व्यवस्थापनाय एव पूर्वमेव तेषां प्रतीक्षां कुर्वत् आसीत्। किम् मध्याह्नस्य एषः समयः ‘थोक-वसूली’-निमित्तं सुरक्षितं स्थलं कृतम् आसीत्?

कैमरां दृष्ट्वैव अधिकारिणः हस्तौ उत्थापितवन्तः, अवदन् — ‘कमिश्नरं वदत!’
यदा स्थले उपस्थितैः पत्रकारैः अधिकारिभ्यः अस्य अवैध-परिवहन-विषये पृच्छा कृता, कार्यवाही-अकरणस्य कारणं च ज्ञातुम् इच्छितम्, तदा अधिकारिणः सन्तोषजनकम् उत्तरं दातुम् पूर्णतया असमर्थाः अभवन्। पार्किंग-स्थले विद्यमानेषु २०-२५ अवशेष-वाहनेषु कर्तव्य-निर्वहणस्य अवैध-सामग्री-जप्तीकरणस्य स्थाने, वाहने उपविष्टेन एकेन अधिकारिणा दायित्वहीन-रीत्या उक्तम्, “गत्वा कमिश्नरं वदत!” तत्क्षणानन्तरमेव अधिकारिणः स्ववाहनं चालयित्वा अत्यधिक-तीव्र-गत्या स्थलात् पलायितवन्तः। अधिकारिणां एतादृशं सहसा पलायनं एतत् दृढयति यत् ते रंगेहाथं गृहीताः भवितुं भयेन पलायितवन्तः, यतोहि यदि ते वैध-जाँचे स्युः तर्हि पलायनस्य स्थाने स्वां शासकीय-कार्यवाहीं पूर्णां कुर्युः।
वरिष्ठाधिकारिणां मौनं संरक्षणस्य च आशंका
अत्यन्त-गम्भीरायाः सन्दिग्धायाः च अस्याः घटनायाः सम्पूर्णा सूचना प्रमाणैः सह अनन्तरदिने एव ११ सितम्बर-दिने जीएसटी-विभागस्य उच्चाधिकारिभ्यः समर्पिता आसीत्। तथापि, अद्य २० सितम्बर-पर्यन्तं न तु तस्मिन् अवैध-अवशेष-वाहने काऽपि दण्डात्मक-कार्यवाही कृता अस्ति, न च कर्तव्यात् विमुखीभूय पलायमानानाम् अधिकारिणां विरुद्धे काऽपि विभागीय-जाँचः आरब्धा अस्ति। अधिकारिणां इयम् अकर्मण्यता दीर्घकालिकं मौनं च अस्य स्पष्टः संकेतः अस्ति यत् औद्योगिकक्षेत्रेषु प्रचलितस्य कथितस्य ‘करचोरी-थोकवसूली’-क्रीडायाः प्रशासनिक-स्तरे मूक-संरक्षणं प्राप्तम् अस्ति।


