तेजस Mk1A की वायुसेना में जल्द तैनाती की राह आसान, GE ने भेजे 4 नए F404-IN20 इंजन.Tejas Mk1A Induction Gains Momentum as GE Delivers Four More F404-IN20 Engines. तेजस् Mk1A इति युद्धविमानस्य वायुसैन्ये शीघ्रं प्रवेशस्य सम्भावना वर्धिता, GE संस्थया चत्वारः F404-IN20 यन्त्राः प्रेषिताः

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भारतीय वायुसेना के स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस Mk1A की डिलीवरी प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद बढ़ गई है। GE Aerospace ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को चार अतिरिक्त F404-IN20 इंजन भेजे हैं। अब हर महीने लगभग चार इंजन की आपूर्ति होने की उम्मीद है, जिससे तेजस Mk1A के निर्माण और वायुसेना को डिलीवरी की रफ्तार बढ़ सकती है।

भारतीय वायुसेना के स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस Mk1A की डिलीवरी जल्द तेज होने की उम्मीद बढ़ गई है। GE Aerospace ने सितंबर 2026 में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को चार अतिरिक्त F404-IN20 इंजन भेजे हैं। इसके साथ ही तेजस Mk1A कार्यक्रम के लिए अब तक भेजे गए इंजनों की कुल संख्या 14 हो गई है। यदि आगे भी हर महीने करीब चार इंजनों की आपूर्ति जारी रहती है, तो इससे HAL के उत्पादन कार्यक्रम को गति मिलने और विमानों की डिलीवरी में तेजी आने की संभावना है।

तेजस Mk1A के लिए हर महीने चार इंजन की होगी सप्लाई.

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब हर महीने करीब चार F404-IN20 इंजन की आपूर्ति होने की उम्मीद है। यदि इंजन की सप्लाई लगातार इसी गति से होती रही, तो हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के तेजस Mk1A उत्पादन कार्यक्रम में तेजी आ सकती है।

दरअसल, तेजस Mk1A परियोजना के लिए F404-IN20 इंजनों की उपलब्धता लंबे समय से चुनौती बनी हुई है। इंजनों की आपूर्ति में देरी के चलते विमान के निर्माण और डिलीवरी की समयसीमा भी प्रभावित हुई है। ऐसे में नियमित और पर्याप्त इंजन सप्लाई तेजस Mk1A के उत्पादन को गति देने के लिहाज से HAL के लिए बेहद अहम मानी जा रही है।.

इंजनों की देरी ने तेजस Mk1A के उत्पादन की रफ्तार पर डाला असर.

इंजन की आपूर्ति में हुई देरी का सीधा असर HAL के तेजस Mk1A उत्पादन शेड्यूल पर पड़ा है। अब GE Aerospace ने अपनी सप्लाई क्षमता बढ़ाने की दिशा में कदम आगे बढ़ाए हैं और सितंबर में चार अतिरिक्त इंजन भेजे हैं। HAL के लिए यह आपूर्ति इसलिए अहम है, क्योंकि विमान निर्माण की प्रक्रिया में इंजन की उपलब्धता एक जरूरी कड़ी है। यदि इंजनों की नियमित सप्लाई बनी रहती है, तो तैयार एयरफ्रेम को आगे की प्रक्रिया में तेजी से ले जाने और तेजस Mk1A की उत्पादन गति बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

भारतीय वायुसेना के बेड़े में फिलहाल तेजस की दो ऑपरेशनल स्क्वाड्रन शामिल हैं। इनमें नंबर 45 स्क्वाड्रन ‘फ्लाइंग डैगर्स’ और नंबर 18 स्क्वाड्रन ‘फ्लाइंग बुलेट्स’ शामिल हैं। तेजस का शुरुआती बड़ा उत्पादन कार्यक्रम 40 विमानों का था, जिसे 20 IOC और 20 FOC कॉन्फिगरेशन में तैयार किया गया था। यह कार्यक्रम अब पूरा हो चुका है।

तेजस Mk1A के लिए मिला 83 विमानों का पहला बड़ा ऑर्डर.

भारतीय वायुसेना ने वर्ष 2021 में करीब 48,000 करोड़ रुपये के समझौते के तहत 83 तेजस Mk1A विमानों की खरीद का ऑर्डर दिया था। इस पैकेज में 73 सिंगल-सीट लड़ाकू विमान और 10 ट्विन-सीट ट्रेनर विमान शामिल हैं। इन विमानों की डिलीवरी मार्च 2024 से शुरू करने की योजना थी, लेकिन इंजन की आपूर्ति में देरी के साथ-साथ सर्टिफिकेशन से जुड़ी अड़चनों के कारण कार्यक्रम प्रभावित हुआ।

इस 83 विमानों के कार्यक्रम के लिए कुल 99 F404-IN20 इंजन का अनुबंध किया गया था। इंजन की समय पर उपलब्धता नहीं होने से HAL के उत्पादन कार्यक्रम पर दबाव बना रहा और विमानों की डिलीवरी की गति भी प्रभावित हुई।

English

The delivery schedule of India’s indigenous Tejas Mk1A fighter aircraft for the Indian Air Force is expected to gain momentum. GE Aerospace has shipped four additional F404-IN20 engines to Hindustan Aeronautics Limited (HAL). The company is now expected to supply around four engines every month, potentially boosting the production and delivery pace of the Tejas Mk1A.

The prospects of faster deliveries of India’s indigenous Tejas Mk1A fighter jets to the Indian Air Force have improved. GE Aerospace shipped four additional F404-IN20 engines to Hindustan Aeronautics Limited (HAL) in September 2026. With this shipment, the total number of engines supplied for the Tejas Mk1A programme has reached 14. If the company continues to deliver around four engines every month, the steady supply could help HAL accelerate its production schedule and speed up aircraft deliveries.

Four Engines to Be Supplied Every Month for Tejas Mk1A.

The key development is that around four F404-IN20 engines are now expected to be supplied every month. If the supply continues at this pace, it could significantly accelerate Hindustan Aeronautics Limited’s (HAL) Tejas Mk1A production programme.

The availability of F404-IN20 engines has been a major challenge for the Tejas Mk1A programme for a considerable period. Delays in engine deliveries have also affected the aircraft’s production and delivery schedules. Therefore, a steady and timely supply of engines is considered crucial for HAL to maintain and accelerate Tejas Mk1A production.

Engine Supply Delays Hit Tejas Mk1A Production Pace.

Delays in engine deliveries have affected HAL’s Tejas Mk1A production schedule. GE Aerospace has now taken steps to strengthen its supply capability and shipped four additional engines in September. The development is important for HAL, as engine availability is a critical requirement in the aircraft production process. A steady supply of engines could help move completed airframes through the remaining stages more quickly and improve the overall production pace of the Tejas Mk1A.

The Indian Air Force currently operates two Tejas squadrons — No. 45 Squadron, ‘Flying Daggers’, and No. 18 Squadron, ‘Flying Bullets’. The first major Tejas production programme involved 40 aircraft, comprising 20 in the IOC and 20 in the FOC configuration. The programme has now been completed.

First Major Order for 83 Tejas Mk1A Fighter Jets.

In 2021, the Indian Air Force placed an order for 83 Tejas Mk1A aircraft under a deal worth around ₹48,000 crore. The order comprises 73 single-seat fighter aircraft and 10 twin-seat trainer aircraft. Deliveries were originally planned to begin in March 2024, but delays in engine supplies and certification-related processes affected the programme.

A total of 99 F404-IN20 engines were contracted for the 83-aircraft programme. Delays in engine availability put pressure on HAL’s production schedule and affected the pace of aircraft deliveries.

संस्कृत

भारतीयवायुसैन्याय निर्मीयमाणस्य स्वदेशीयस्य तेजस् Mk1A युद्धविमानस्य आपूर्तिप्रक्रियायां शीघ्रता आगन्तुं शक्नोति। GE एयरोस्पेस् संस्थया हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स् लिमिटेड् (HAL) संस्थायै चत्वारः अतिरिक्ताः F404-IN20 यन्त्राः प्रेषिताः। अधुना प्रतिमासं प्रायः चत्वारः यन्त्राः प्राप्तुं शक्यन्ते, येन तेजस् Mk1A विमानानां निर्माणस्य तथा वायुसैन्याय आपूर्तेः गतिः वर्धितुं शक्नोति।

भारतीयवायुसैन्यस्य स्वदेशीयस्य तेजस् Mk1A युद्धविमानस्य शीघ्रापूर्तेः सम्भावना अधुना वर्धिता अस्ति। GE एयरोस्पेस् संस्थया सितम्बर-मासे 2026 तमे वर्षे हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स् लिमिटेड् (HAL) संस्थायै चत्वारः अतिरिक्ताः F404-IN20 यन्त्राः प्रेषिताः। एतेन तेजस् Mk1A कार्यक्रमाय अद्यावधि प्रेषितानां यन्त्राणां संख्या 14 जाता अस्ति। यदि अग्रे अपि प्रतिमासं प्रायः चत्वारः यन्त्राः प्रेष्यन्ते, तर्हि HAL संस्थायाः उत्पादनकार्यक्रमे वेगवृद्धिः भवितुं शक्नोति तथा च विमानानां आपूर्तिः शीघ्रतरा भवितुम् अर्हति।

तेजस् Mk1A विमानाय प्रतिमासं चत्वारः यन्त्राः प्रेष्यन्ते.

प्रमुखविषयः अस्ति यत् अधुना प्रतिमासं प्रायः चत्वारः F404-IN20 यन्त्राः प्राप्तुं शक्यन्ते। यदि यन्त्राणां आपूर्तिः एतस्यामेव गतौ निरन्तरं भवति, तर्हि हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स् लिमिटेड् (HAL) संस्थायाः तेजस् Mk1A उत्पादनकार्यक्रमे महत्त्वपूर्णा गतिवृद्धिः भवितुं शक्नोति।

वस्तुतः तेजस् Mk1A कार्यक्रमे F404-IN20 यन्त्राणां उपलब्धता दीर्घकालात् प्रमुखा चुनौती अभवत्। यन्त्राणां आपूर्तौ विलम्बस्य प्रभावः विमानानां निर्माणकार्ये तथा आपूर्तिसमय-सारण्याम् अपि अभवत्। अतः नियमितरूपेण पर्याप्तमात्रायां यन्त्राणां प्राप्तिः HAL संस्थायै तेजस् Mk1A विमानानां उत्पादनस्य गतिवर्धनाय अत्यन्तं महत्त्वपूर्णा मन्यते।

यन्त्रापूर्तौ विलम्बेन तेजस् Mk1A उत्पादनस्य गतिः प्रभाविता.

यन्त्राणां आपूर्तौ विलम्बस्य प्रभावः HAL संस्थायाः तेजस् Mk1A उत्पादनसमय-सारण्याम् अपि अभवत्। अधुना GE एयरोस्पेस् संस्थया स्वस्य आपूर्तिक्षमतां वर्धयितुं पदानि गृहीतानि सन्ति तथा च सितम्बर-मासे चत्वारः अतिरिक्ताः यन्त्राः प्रेषिताः। HAL संस्थायै एषा आपूर्तिः महत्त्वपूर्णा अस्ति, यतः विमाननिर्माणप्रक्रियायां यन्त्राणां उपलब्धता अत्यावश्यकी कडी अस्ति। यदि यन्त्राणां नियमितापूर्तिः निरन्तरं भवति, तर्हि निर्मितविमानकायान् अग्रिमप्रक्रियासु शीघ्रं प्रवर्तयितुं तथा तेजस् Mk1A विमानानां उत्पादनगतिं वर्धयितुं सहायता भवितुं शक्नोति।

भारतीयवायुसैन्यस्य समीपे सम्प्रति तेजस् विमानस्य द्वे कार्यरत् स्क्वाड्रन्-दले स्तः। तयोः क्रमशः क्रमाङ्कः 45 ‘फ्लाइङ्ग डैगर्स’ तथा क्रमाङ्कः 18 ‘फ्लाइङ्ग बुलेट्स’ इति नाम्ना प्रसिद्धे स्तः। तेजस् विमानस्य प्रथमः प्रमुखः उत्पादनकार्यक्रमः 40 विमानानां निर्माणस्य आसीत्, यस्मिन् 20 विमानानि IOC तथा 20 विमानानि FOC विन्यासे निर्मितानि आसन्। अयं कार्यक्रमः अधुना पूर्णः अभवत्।

तेजस् Mk1A विमानानां 83 इति संख्यायाः प्रथमः प्रमुखः आदेशः

प्रमुखविषयः अस्ति यत् अधुना प्रतिमासं प्रायः चत्वारः F404-IN20 यन्त्राः प्राप्तुं शक्यन्ते। यदि यन्त्राणां आपूर्तिः एतस्यामेव गतौ निरन्तरं भवति, तर्हि हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स् लिमिटेड् (HAL) संस्थायाः तेजस् Mk1A उत्पादनकार्यक्रमे महत्त्वपूर्णा गतिवृद्धिः भवितुं शक्नोति।

वस्तुतः तेजस् Mk1A कार्यक्रमे F404-IN20 यन्त्राणां उपलब्धता दीर्घकालात् प्रमुखा चुनौती अभवत्। यन्त्राणां आपूर्तौ विलम्बस्य प्रभावः विमानानां निर्माणकार्ये तथा आपूर्तिसमय-सारण्याम् अपि अभवत्। अतः नियमितरूपेण पर्याप्तमात्रायां यन्त्राणां प्राप्तिः HAL संस्थायै तेजस् Mk1A विमानानां उत्पादनस्य गतिवर्धनाय अत्यन्तं महत्त्वपूर्णा मन्यते।

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