छत्तीसगढ़ पुलिस में 3 नए स्पेशल डीजी पदों को मंजूरी, प्रमोशन की दौड़ में कई अफसरों के नाम.Chhattisgarh Police Gets Approval for 3 New Special DG Posts, Several Officers in Promotion Race. छत्तीसगढ-पुलिस-विभागे त्रयः नवीनाः विशेष-महानिदेशक-पदाः स्वीकृताः, पदोन्नत्यर्थं अनेकानाम् अधिकारिणां नामानि चर्चायाम्

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छत्तीसगढ़ पुलिस में विशेष पुलिस महानिदेशक (स्पेशल डीजी) के तीन नए पदों को कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की पदोन्नति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। अब कई वरिष्ठ अधिकारियों की नजर इन पदों पर होने वाली नियुक्तियों पर टिकी है।

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार की कैबिनेट से पुलिस विभाग में विशेष पुलिस महानिदेशक (स्पेशल डीजी) के तीन नए पदों को मंजूरी मिलने के बाद वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की पदोन्नति की संभावनाओं को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। इन पदों के सृजन और नियुक्तियों की प्रक्रिया का प्रभाव भविष्य में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) पद के लिए तैयार होने वाले पैनल के समीकरणों पर भी पड़ सकता है।

प्रमोशन की रेस में शामिल हैं ये वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी.

स्पेशल डीजी पद पर पदोन्नति के संभावित दावेदारों में 1994 बैच के एसआरपी कल्लूरी, 1995 बैच के प्रदीप गुप्ता और 1996 बैच के विवेकानंद सिन्हा के नाम चर्चा में हैं। ये तीनों वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी फिलहाल पुलिस मुख्यालय में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजी) के रूप में अहम दायित्व निभा रहे हैं। नए पदों के सृजन से वरिष्ठ अधिकारियों को पदोन्नति मिलने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। साथ ही, पुलिस मुख्यालय में वरिष्ठ स्तर पर जिम्मेदारियों के नए सिरे से बंटवारे की संभावना भी जताई जा रही है।

डीजीपी चयन पैनल के समीकरणों में हो सकता है बदलाव.

राज्य में डीजी स्तर के अतिरिक्त पदों के गठन का विषय पहले भी विवाद का कारण बन चुका है। वर्ष 2018 में सृजित किए गए अतिरिक्त डीजी स्तर के तीन पदों और उन पर की गई पदोन्नतियों को बाद में रद्द कर दिया गया था। इस पुराने मामले को देखते हुए अब नए पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया में निर्धारित नियमों के पालन और केंद्र सरकार की सहमति को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

तीनों वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को पदोन्नति मिलने की स्थिति में विभागीय वरिष्ठता के साथ-साथ भविष्य में डीजीपी पद के लिए पात्र अधिकारियों के चयन संबंधी समीकरणों में भी बदलाव आ सकता है। हालांकि, डीजीपी चयन पैनल पर इसका वास्तविक प्रभाव नियुक्ति की आधिकारिक प्रक्रिया और लागू सेवा नियमों के अनुसार ही तय होगा।

23 साल बाद भी IPS अवार्ड का इंतजार बरकरार.

राज्य पुलिस सेवा (SPS) के अधिकारियों को भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में पदोन्नति पाने के लिए वर्षों तक इंतजार करना पड़ रहा है। वर्ष 2004-05 बैच के लगभग दस डीएसपी अब भी आईपीएस अवार्ड मिलने की राह देख रहे हैं। वहीं, वर्ष 2002 बैच के अधिकारियों को करीब 23 वर्षों की सेवा के बाद हाल ही में आईपीएस में पदोन्नति प्रदान की गई है।

राज्य में वर्तमान में भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के कुल 153 पद स्वीकृत हैं। नए जिलों के गठन के बावजूद आईपीएस कैडर की समीक्षा नहीं होने से अधिकारियों के लिए पदोन्नति के अवसर सीमित बने हुए हैं। इस स्थिति से असंतुष्ट अधिकारियों ने सरकार को पत्र लिखकर कैडर रिव्यू कराने की मांग की है। साथ ही, उन्होंने राज्य में कम से कम 60 नए आईपीएस पद बढ़ाने का प्रस्ताव भी रखा है।

English

The Chhattisgarh Cabinet’s approval for three new Special Director General of Police (Special DG) posts has intensified discussions over the promotion of senior IPS officers. Several senior officers are now eyeing these positions.

Discussions over the promotion prospects of senior IPS officers have intensified after the Chhattisgarh Cabinet approved the creation of three new Special Director General of Police (Special DG) posts. The creation of these posts and the subsequent appointment process could also influence the composition and dynamics of the panel for the future Director General of Police (DGP) position.

These Senior IPS Officers Are in the Promotion Race.

The names of SRP Kalluri, a 1994-batch IPS officer, Pradeep Gupta from the 1995 batch, and Vivekanand Sinha from the 1996 batch are being discussed among the potential contenders for promotion to Special Director General of Police (Special DG). All three officers are currently serving as Additional Directors General of Police (ADGs) and handling key responsibilities at the Police Headquarters. The creation of the new posts could open up promotion opportunities for senior officers and may also lead to a redistribution of responsibilities at the top level of the Police Headquarters.

New Posts Could Influence the DGP Selection Panel.

The creation of additional posts at the Director General (DG) level has been a contentious issue in the state in the past. In 2018, three additional DG-level posts were created, but the posts and the promotions made against them were subsequently annulled. In light of this earlier episode, compliance with prescribed rules and the Centre’s approval have become key considerations in the process of appointing officers to the newly approved posts.

The promotion of all three senior IPS officers could affect departmental seniority and alter the pool of eligible officers for future appointments to the DGP post. However, the actual impact on the DGP selection panel will depend on the formal appointment process and the applicable service rules.

Still Awaiting IPS Induction After 23 Years.

State Police Service (SPS) officers are facing a prolonged wait for promotion to the Indian Police Service (IPS). Around ten Deputy Superintendents of Police (DSPs) from the 2004-05 batches are still awaiting IPS induction. Meanwhile, officers from the 2002 batch were recently inducted into the IPS after nearly 23 years of service.

The state currently has 153 sanctioned Indian Police Service (IPS) posts. Despite the formation of new districts, the lack of a cadre review has restricted promotion opportunities for officers. Expressing concern over the situation, officers have written to the state government, seeking a cadre review and demanding an increase of at least 60 IPS posts.

संस्कृति

छत्तीसगढ-राज्यस्य मन्त्रिपरिषदः विशेष-पुलिस-महानिदेशकानां (स्पेशल डीजी) त्रयाणां नवीनपदानां स्वीकृत्यनन्तरं वरिष्ठ-भारतीय-पुलिस-सेवा-अधिकारिणां पदोन्नतिविषये चर्चाः तीव्राः अभवन्। अनेकाः वरिष्ठाः अधिकारिणः एतेषु पदेषु नियुक्तेः प्रतीक्षां कुर्वन्ति।

छत्तीसगढ-राज्यस्य मन्त्रिपरिषदः पुलिस-विभागे विशेष-पुलिस-महानिदेशकानां (स्पेशल डीजी) त्रयाणां नवीनपदानां सृष्टये अनुमोदनं प्रदत्तवती। ततः वरिष्ठ-भारतीय-पुलिस-सेवा-अधिकारिणांसम्भावनानां विषये चर्चाः तीव्राः अभवन्। एतेषां पदानां सृष्टिः नियुक्ति-प्रक्रिया च भविष्ये पुलिस-महानिदेशक-पदस्य चयनार्थं निर्मीयमाणस्य अधिकारि-सूचिपट्टस्य समीकरणेषु अपि प्रभावं जनयितुं शक्नोति।

पदोन्नति-प्रतिस्पर्धायां सम्मिलिताः एते वरिष्ठाः भारतीय-पुलिस-सेवा-अधिकारिणः

विशेष-पुलिस-महानिदेशक-पदे पदोन्नत्यर्थं १९९४-समूहस्य एस.आर.पी. कल्लूरी, १९९५-समूहस्य प्रदीप गुप्ता तथा १९९६-समूहस्य विवेकानन्द सिन्हा इत्येतेषां नामानि सम्भाव्य-प्रत्याशिषु चर्चायां सन्ति। एते त्रयः वरिष्ठाः भारतीय-पुलिस-सेवा-अधिकारिणः सम्प्रति पुलिस-मुख्यालये अतिरिक्त-पुलिस-महानिदेशक-रूपेण महत्त्वपूर्णानि दायित्वानि निर्वहन्ति। नवीनपदानां सृष्ट्या वरिष्ठाधिकारिणां पदोन्नतेः अवसराः सुलभाः भवितुम् अर्हन्ति। अपि च, पुलिस-मुख्यालयस्य उच्चस्तरे दायित्वानां पुनर्विभाजनस्य सम्भावना अपि वर्तते।

पुलिस-महानिदेशकस्य चयन-समितेः समीकरणेषु परिवर्तनं सम्भाव्यते।

राज्ये पुलिस-महानिदेशक-स्तरस्य अतिरिक्तपदानां सृष्टेः विषयः पूर्वमपि विवादस्य कारणम् अभवत्। वर्षे २०१८ निर्मितानि अतिरिक्त-पुलिस-महानिदेशक-स्तरस्य त्रीणि पदानि तथा तेषु कृता पदोन्नतयः पश्चात् निरस्ताः अभवन्। अस्य पूर्वघटनाक्रमस्य दृष्ट्या नवीनपदेषु नियुक्ति-प्रक्रियायां निर्धारितनियमानां पालनम् केन्द्रसर्वकारस्य अनुमतिश्च महत्त्वपूर्णौ विषयौ अभवताम्।

एतेषां त्रयाणां वरिष्ठ-भारतीय-पुलिस-सेवा-अधिकारिणां पदोन्नत्या विभागीय-ज्येष्ठतायां तथा भविष्ये पुलिस-महानिदेशक-पदस्य चयनार्थं योग्याधिकारिणां समीकरणेषु परिवर्तनं सम्भाव्यते। तथापि, चयन-समित्यां वास्तविकः प्रभावः औपचारिक-नियुक्ति-प्रक्रियायाः प्रचलित-सेवा-नियमानां च आधारेण एव निर्धारितः भविष्यति।

त्रयोविंशतिवर्षाणि व्यतीतान्यपि भारतीय-पुलिस-सेवायां (IPS) पदोन्नतेः प्रतीक्षा अविरता।

राज्य-पुलिस-सेवायाः (SPS) अधिकारिणः भारतीय-पुलिस-सेवायां (IPS) पदोन्नतेः कृते दीर्घकालं यावत् प्रतीक्षां कुर्वन्ति। २००४-०५ वर्षयोः समूहस्य प्रायः दश उप-पुलिस-अधीक्षकाः (DSP) अद्यापि भारतीय-पुलिस-सेवायां पदोन्नतेः प्रतीक्षां कुर्वन्ति। अपरतः, २००२-वर्षीय-समूहस्य अधिकारिणः प्रायः त्रयोविंशतिवर्षाणां सेवायाः अनन्तरं सम्प्रति भारतीय-पुलिस-सेवायां पदोन्नतिं प्राप्तवन्तः।प्राप्तवन्तः।

राज्ये सम्प्रति भारतीय-पुलिस-सेवायाः (IPS) १५३ पदानि स्वीकृतानि सन्ति। नवीनानां जनपदानां निर्माणे सत्यपि सेवा-संवर्गस्य पुनरीक्षणं न जातम्, येन अधिकारिणां पदोन्नतेः अवसराः सीमिताः सन्ति। अस्यां स्थितौ असन्तुष्टाः अधिकारिणः राज्यसर्वकाराय पत्रं लिखित्वा सेवा-संवर्गस्य पुनरीक्षणस्य आग्रहं कृतवन्तः। ते राज्ये न्यूनातिन्यूनं षष्टिः नवीनानि भारतीय-पुलिस-सेवा-पदानि वर्धयितुम् अपि आग्रहं कृतवन्तः।

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