ईरान युद्ध के बीच ब्रिक्स में मतभेद उजागर, एकजुटता पर उठे सवाल। Iran War Exposes Differences Within BRICS, Raising Questions Over Unity. ईरान-युद्धेन ब्रिक्स-संघस्य मतभेदाः प्रकाशं गताः, ऐक्यस्य विषये प्रश्नाः।

पीएम मोदी का संदेश- ब्रिक्स देशों को नियमों का पालन करने वालों के बजाय नियम तय करने वाली ताकत।
पीएम मोदी की बात सुनने वालों में ब्रिक्स के प्रमुख नेता शामिल रहे, जिनमें चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान, अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा मौजूद थे।
इन देशों को सहज सहयोगी कहना आसान नहीं है, क्योंकि इनके बीच सीमा विवादों से लेकर सैन्य संघर्ष तक का लंबा इतिहास रहा है।
2020 में भारत और चीन की सेनाओं के बीच विवादित सीमा पर हिंसक और जानलेवा टकराव हुआ था। वहीं, मध्य पूर्व के संघर्ष में ईरान और यूएई भी सीधे आमने-सामने रहे। इस दौरान ईरान ने ब्रिक्स के सदस्य यूएई पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए। इस संघर्ष का असर केवल क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी इसके झटके महसूस किए गए।
भारत का इन शीर्ष नेताओं को एक मंच पर आमने-सामने संवाद के लिए जुटाना बड़ी कूटनीतिक सफलता माना जा रहा है। इससे वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती कूटनीतिक पहुंच भी सामने आती है। सम्मेलन ने ईरान युद्ध के बाद संबंधित देशों को अपने आपसी संबंधों की नए सिरे से समीक्षा करने का अवसर भी दिया।
हालांकि, नई वैश्विक व्यवस्था के स्वरूप को लेकर साझा सहमति बनाना आसान नहीं रहा और सम्मेलन से कोई स्पष्ट निष्कर्ष निकालना भी चुनौतीपूर्ण रहा। पूरे सम्मेलन के दौरान सदस्य देशों के बीच मतभेद और तनाव साफ तौर पर नजर आया।
पश्चिमी प्रभाव को चुनौती देने वाला वैकल्पिक शक्ति केंद्र।
चीन, रूस और ईरान जैसे देशों के लिए ब्रिक्स, अमेरिका और पश्चिमी यूरोप के वैश्विक प्रभाव को संतुलित करने का अहम मंच माना जाता है।
(English)
PM Modi’s Message: BRICS Nations Should Move From Rule-Followers to Rule-Makers.
The audience included key BRICS leaders, including Chinese President Xi Jinping, Russian President Vladimir Putin, Iranian President Masoud Pezeshkian, Abu Dhabi Crown Prince Sheikh Khaled bin Mohamed bin Zayed Al Nahyan, and South African President Cyril Ramaphosa.
These countries can hardly be described as natural allies, given their long history of border disputes and even military confrontations.
In 2020, Indian and Chinese troops were involved in a deadly clash along the disputed border. Meanwhile, Iran and the UAE found themselves on opposing sides in the Middle East conflict, with Iran launching missiles and drones at its fellow BRICS member. The repercussions of the war were felt beyond the region, sending shocks through the global economy.
Bringing these key leaders together for a face-to-face meeting on one platform is being seen as a significant diplomatic achievement for India. It also highlights India’s growing diplomatic reach on the global stage. The summit gave the participating countries an opportunity to reassess their relations in the aftermath of the Iran war.
However, reaching a common understanding on the shape of a new global order proved far more difficult, with the summit yielding no clear outcome. Differences and tensions among the member countries remained visible throughout the meeting.
An Alternative Power Bloc to Counter Western Influence.
For countries such as China, Russia, and Iran, BRICS is seen as an important platform to counterbalance the global influence of the United States and Western Europe.
(संस्कृत)
प्रधानमन्त्री-मोदी-महोदयस्य सन्देशः—ब्रिक्स-राष्ट्राणि नियमपालकाः न भूत्वा नियमनिर्मातारः भवेयुः।
प्रधानमन्त्री-मोदी-महोदयस्य वक्तव्यं शृण्वत्सु ब्रिक्स-संघस्य प्रमुखाः नेतारः अपि आसन्। तेषु चीनस्य राष्ट्रपतिः शी जिनपिङ्गः, रूसस्य राष्ट्रपतिः व्लादिमीर-पुतिनः, ईरानस्य राष्ट्रपतिः मसूद-पेज़ेश्कियानः, अबू-धाबीनगरस्य युवराजः शेख़ खालिद-बिन-मोहम्मद-बिन-ज़ायद-अल-नहयानः, दक्षिण-अफ्रीकादेशस्य राष्ट्रपतिः सिरिल-रामाफोसा च आसन्।
एते देशाः सहजतया सहयोगिनः इति वक्तुं न शक्यते, यतः तेषां मध्ये सीमाविवादानां तथा सैन्यसंघर्षाणां दीर्घः इतिहासः अस्ति।
२०२० तमे वर्षे भारत-चीनयोः सैनिकानां मध्ये विवादितसीमायां घातकः संघर्षः अभवत्। मध्यपूर्वस्य संघर्षे अपि ईरान-यूएई-देशौ परस्परं सम्मुखौ अभवताम्। तस्मिन् काले ईरानेन ब्रिक्स-सदस्यदेशस्य यूएई-देशस्य विरुद्धं क्षेपणास्त्रैः तथा ड्रोन-यन्त्रैः आक्रमणं कृतम्। अस्य युद्धस्य प्रभावः केवलं तस्मिन् क्षेत्रे एव न सीमितः अभवत्, अपितु वैश्विक-अर्थव्यवस्थायामपि तस्य प्रभावः अनुभूतः।
एतेषां प्रमुखनेतॄणां एकस्मिन् मञ्चे प्रत्यक्षं संवादाय समागमनं भारतस्य महत्त्वपूर्णा कूटनीतिक-सफलता मन्यते। अनेन वैश्विकस्तरे भारतस्य वर्धमाना कूटनीतिक-पहुँच अपि प्रकाशिता भवति। ईरान-युद्धस्य अनन्तरं अस्य सम्मेलनस्य माध्यमेन सहभागीदेशानां परस्परसम्बन्धानां पुनर्मूल्याङ्कनस्य अवसरः अपि प्राप्तः।
किन्तु नवीनस्य वैश्विकव्यवस्थायाः स्वरूपविषये सामान्यसम्मतिं प्राप्तुं अत्यन्तं कठिनम् अभवत्। सम्मेलनात् स्पष्टः निष्कर्षः अपि न प्राप्तः। सम्पूर्णस्य सम्मेलनस्य अवधौ सदस्यदेशानां मध्ये मतभेदाः तनावश्च स्पष्टतया दृश्यन्ते स्म।
पाश्चात्यप्रभावस्य प्रतिरोधाय वैकल्पिकं शक्तिकेन्द्रम्।
चीन-रूस-ईरान-सदृशदेशानां कृते ब्रिक्स-संघः अमेरिका-पाश्चात्य-यूरोपयोः वैश्विकप्रभावं सन्तुलयितुं महत्त्वपूर्णं मञ्चं मन्यते।


