लोकल ट्रेनें बंद होने से जनता परेशान, जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी और छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना ने की विशेष स्पेशल ट्रेनें चलाने की मांग।Johar Chhattisgarh Party & Chhattisgarhia Kranti Sena Demand Special Local Trains for Teeja Festival, Term Shutdown Unfair. तीजा-महोत्सवे स्थानीय-रेलयानानां स्थगनेन जन आक्रोशः, जोहार छत्तीसगढ़ दलस्य छत्तीसगढ़िया क्रांति सेनायाः च विशेषयान-सञ्चालनस्य याचना।

रायपुर: छत्तीसगढ़ में तीजा-पोरा त्योहार के दौरान रेलवे प्रशासन द्वारा नियमित लोकल यात्री ट्रेनों को बंद किए जाने के फैसले पर भारी आक्रोश है। जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी और छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना ने इस फैसले की कड़े शब्दों में निंदा की है। संगठनों का कहना है कि कोरबा-रायपुर-दुर्ग मार्ग पर छोटे स्टेशनों के बीच आवागमन के लिए लोकल ट्रेनें ही सबसे सुरक्षित और किफायती साधन हैं। इनके बंद होने से सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव बढ़ेगा और दुर्घटनाओं की आशंका गहरा जाएगी।
संगठनों ने रेलवे प्रशासन पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि जिस तरह बिहार के छठ पर्व और बंगाल की दुर्गा पूजा के लिए अतिरिक्त ट्रेनें और बोगियां लगाई जाती हैं, उसी तरह छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े त्योहार तीजा के मौके पर ट्रेनों को बंद करना मनमाना फैसला है। उन्होंने मांग की है
- इस फैसले पर तत्काल पुनर्विचार कर लोकल ट्रेनों का परिचालन पूर्ववत किया जाए।
- 15, 16 और 17 सितंबर 2026 को तीजा स्पेशल अतिरिक्त लोकल ट्रेनें चलाई जाएं।
- दिन के समय आरक्षित बोगियों में भी राजनांदगांव से कोरबा-रायगढ़ स्टेशन तक साधारण यात्री टिकट पर यात्रा की अनुमति दी जाए।

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के फैसले से छत्तीसगढ़िया समाज में भारी आक्रोश, त्योहार के समय लोकल ट्रेनें बंद करने को बताया ‘तुगलकी’।
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) प्रशासन द्वारा 13 और 14 सितंबर 2026 को कोरबा-रायपुर-दुर्ग मार्ग पर चलने वाली लोकल यात्री ट्रेनों को बंद रखने के फैसले पर छत्तीसगढ़ में भारी जन-आक्रोश भड़क गया है। स्थानीय संगठनों और आम जनता ने इस निर्णय को अत्यंत दुखद, अविवेकपूर्ण और छत्तीसगढ़िया समाज को अपमानित करने वाला ‘तुगलकी फैसला’ करार दिया है।
गौरतलब है कि इन दिनों छत्तीसगढ़ प्रदेश का सबसे बड़ा और पारंपरिक त्योहार (तीजा-पोरा) मनाया जा रहा है। इस पावन अवसर पर प्रदेश की लाखों माताएं और बहनें अपने बच्चों के साथ ससुराल से मायके जाती हैं। उनके आवागमन के लिए लोकल ट्रेनें ही एकमात्र सुलभ और मुख्य साधन होती हैं। ऐसे समय में ट्रेनों को बंद कर दिए जाने से लाखों रेल यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे पूरे समाज में रेलवे प्रशासन के खिलाफ गहरा गुस्सा है।
(English)
RAIPUR: Public resentment is brewing in Chhattisgarh following the railway administration’s arbitrary decision to suspend regular local passenger trains during the peak festive season of Teeja. Strongly condemning the move, the Johar Chhattisgarh Party and the Chhattisgarhia Kranti Sena highlighted that local trains are the safest and most economical mode of transport for commuters between smaller stations on the Korba-Raipur-Durg route. The cancellation will lead to heavy traffic congestion on roads, significantly increasing the risk of accidents.
The organizations accused the railway administration of bias, pointing out that while additional trains and coaches are arranged for festivals like Chhath in Bihar and Durga Puja in Bengal, local trains are instead being canceled during Chhattisgarh’s biggest festival. They have demanded:
- An immediate review of the decision and restoration of normal local train services.
- Operation of special “Teeja Special” local trains on September 15, 16, and 17, 2026.
- Permission for passengers holding general tickets to travel in reserved coaches during the day between Rajnandgaon, Korba, and Raigarh stations.
Outrage Ignites Over SECR’s Decision to Suspend Local Trains During Chhattisgarh’s Biggest Festival.
A wave of intense public anger has swept across Chhattisgarh following the South East Central Railway (SECR) administration’s controversial decision to suspend local passenger trains on the Korba-Raipur-Durg route on September 13 and 14, 2026. Citizens and local bodies have strongly condemned the move, labeling it an “unreasonable and arbitrary” decision that deeply insults the people of Chhattisgarh.
The suspension coincides with the state’s largest and most revered traditional festival (Teeja-Pora). During this time, lakhs of women travel back to their maternal homes from their in-laws’ places along with their children. Since local trains serve as the primary and most accessible lifeline for these families, this abrupt shutdown has left thousands stranded, triggering widespread resentment against the railway administration.
(संस्कृत)
रायपुरम्: छत्तीसगढ़राज्ये तीजा-पर्वणः अवसरे रेलप्रशासनेन नियमित-स्थानीय-यात्री-रेलयानानां स्थगनस्य यः निर्णयः कृतः, तेन जनतायां तीव्रः असन्तोषः वर्तते। जोहार छत्तीसगढ़ दलम् तथा छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना च एतस्य निर्णयस्य दृढं निन्दां कुरुतः। संगठनयोः कथनमस्ति यत् कोरबा-रायपुर-दुर्ग मार्गे लघुस्थानानां मध्ये गमनागमनाय स्थानीयरेलयानानि एव सुरक्षितानि अल्पव्यययुक्तानी च साधनानि सन्ति। एतेषां स्थगनेन मार्गेषु यातायातस्य भारः वर्धिष्यते, दुर्घटनानां सम्भावना अपि दृढा भविष्यति।
प्रशासने पक्षपातस्य आरोपं कुर्वन्तः तैः उक्तं यत् यथा बिहारस्य छठ-पर्वणि बङ्गालस्य दुर्गापूजायां च अतिरिक्तानि रेलयानानि सञ्चाल्यन्ते, तथैव छत्तीसगढ़स्य महामहोत्सवे तीजा-अवसरे यान-स्थगनं अन्यायपूर्णम् अस्ति। तौ निम्नलिखितयाचनां कुरुतः
- एतस्य निर्णयस्य तत्कालं पुनर्विचारं कृत्वा स्थानीयरेलयानानां सञ्चालनम् पूर्ववत् क्रियेत।
- २०२६ तमस्य वर्षस्य सितम्बर-मासस्य १५, १६, १७ दिनाङ्केषु विशेष तीजा-रेलयानानां व्यवस्था क्रियेत।
- दिवाभागे आरक्षित-कक्षासु अपि राजनांदगांवतः कोरबा-रायगढ़ स्थानकं यावत् साधारण-यात्री-पत्रेण (Ticket) यात्रायाः अनुमतिः दीयेत।
दक्षिण-पूर्व-मध्य-रेलप्रशासस्य निर्णयेन छत्तीसगढ़-समाजे तीव्रः आक्रोशः, पर्वकाले स्थानीययानानां स्थगनं ‘तुगलकी’ इति घोषितम्।
दक्षिण-पूर्व-मध्य-रेलप्रशासनस्य (SECR) द्वारा २०२६ तमस्य वर्षस्य सितम्बर-मासस्य १३, १४ दिनाङ्कयोः कोरबा-रायपुर-दुर्ग मार्गे प्रचलितानां स्थानीययात्री-रेलयानानां स्थगनस्य निर्णयात् छत्तीसगढ़राज्ये तीव्रः जन-आक्रोशः समुत्पन्नः। स्थानीयसङ्घटनानि सामान्याः जनाः च इमं निर्णयं अतीव दुःखदं, अविवेकपूर्णं, छत्तीसगढ़-समाजस्य अपमानकारकं ‘तुगलकी-निर्णयम्’ इति अवदन्।
सर्वविदितं वर्तते यत् एतेषु दिनेषु छत्तीसगढ़प्रदेशस्य बृहत्तमं पारम्परिकं च पर्व (तीजा-पोरा) आचर्यते। अस्मिन् पावन-अवसरे राज्यस्य लक्षाधिक्यः मातरः भगिन्यः च स्वबालकैः सह श्वसुराश्रमत् पितृगृहं गच्छन्ति। तासां गमनागमनाय स्थानीयरेलयानानि एव एकमात्रं सुलभं मुख्यं च साधनं भवन्ति। अस्मिन् महत्त्वपूर्णे समये यानानां स्थगनेन लक्षशः यात्रिणः महतीं समस्यां प्रपन्नाः, येन कारणेन समग्रसमाजे रेलप्रशासनं प्रति तीव्रा निन्दा प्रवर्तते।


