अंबिकापुर के संजय पार्क में बनेगा आधुनिक वन्यजीव उपचार केंद्र, घायल जानवरों को मिलेगा नया जीवन.State-of-the-Art Wildlife Treatment Centre to Be Established at Sanjay Park in Ambikapur. अम्बिकापुरस्य सञ्जय-उद्याने आधुनिकं वन्यजीव-चिकित्साकेन्द्रं निर्मास्यते, आहतवन्यजीवेभ्यः नवजीवनस्य आशा.

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अंबिकापुर के संजय पार्क में आधुनिक वन्यजीव उपचार केंद्र को मंजूरी, घायल वन्यप्राणियों को मिलेगा त्वरित इलाज

अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ में वन्यजीवों की सुरक्षा और वनांचल के ग्रामीणों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में राज्य सरकार ने कई अहम निर्णय लिए हैं। वन मंत्री केदार कश्यप की अध्यक्षता में राज्य वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति की पहली बैठक आयोजित की गई। बैठक में वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा करते हुए महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।इसी क्रम में अंबिकापुर के संजय पार्क में आधुनिक वन्यजीव ट्रांजिट ट्रीटमेंट सेंटर स्थापित करने का निर्णय लिया गया। इस केंद्र के माध्यम से घायल और संकटग्रस्त वन्यप्राणियों को समय पर उपचार एवं आवश्यक देखभाल उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। यह पहल प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था को सुदृढ़ करने के साथ ही वन्यप्राणियों के बचाव और पुनर्वास को भी बढ़ावा देगी।

अंबिकापुर। मानव-वन्यजीव संघर्ष और सड़क दुर्घटनाओं में घायल होने वाले वन्यप्राणियों को समय पर सहायता उपलब्ध कराने के लिए अंबिकापुर के संजय पार्क में आधुनिक ट्रांजिट ट्रीटमेंट सेंटर स्थापित किया जाएगा। इस केंद्र में वन्यजीवों के त्वरित बचाव, प्राथमिक उपचार और अल्पकालिक देखरेख की व्यवस्था होगी। क्षेत्र में इस तरह की सुविधा की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी।

संजय पार्क में वन्यजीवों के उपचार के लिए संचालित केंद्र को लेकर पहले यह तथ्य सामने आया था कि इसके संचालन के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवश्यक अनुमति नहीं ली गई थी। इस कारण केंद्र का संचालन नियमों के अनुरूप नहीं हो रहा था।

बुनियादी ढांचे के विकास पर नहीं करना होगा अतिरिक्त खर्च.

संजय पार्क में आधुनिक ट्रांजिट ट्रीटमेंट सेंटर स्थापित करने के लिए अधोसंरचना विकास पर अधिक राशि खर्च करने की आवश्यकता नहीं होगी। यहां वन्यजीवों की देखभाल के लिए कई जरूरी सुविधाएं पहले से उपलब्ध हैं, जिनका उपयोग प्रस्तावित केंद्र के संचालन में किया जा सकेगा।

संजय पार्क में प्रस्तावित आधुनिक ट्रांजिट ट्रीटमेंट सेंटर के संचालन के लिए बुनियादी सुविधाएं पहले से उपलब्ध हैं। वन्यजीवों को सुरक्षित रखने के लिए यहां केज, शेड और अलग-अलग बाड़ों की व्यवस्था है। ऐसे में वन्यजीव विशेषज्ञों की पदस्थापना करने और आवश्यकता के अनुसार कुछ जरूरी उपकरण व सामग्री खरीदने के बाद केंद्र का संचालन शुरू किया जा सकेगा।

ट्रांजिट ट्रीटमेंट सेंटर वन्यजीवों के लिए क्यों है महत्वपूर्ण?

  • किसी घायल, बीमार या आबादी वाले क्षेत्र में भटककर पहुंचे वन्यजीव का रेस्क्यू करने के बाद उसे तुरंत जंगल में छोड़ना उचित नहीं होता। ऐसे वन्यप्राणियों को पहले ट्रांजिट ट्रीटमेंट सेंटर लाया जाएगा, जहां उनकी स्थिति के अनुसार प्राथमिक उपचार और जरूरी चिकित्सा उपलब्ध कराई जाएगी। चोटों का इलाज करने के साथ ही उन्हें पानी और भोजन भी दिया जाएगा। आवश्यक देखभाल के बाद वन्यजीव की स्थिति अनुकूल होने पर उसे सुरक्षित रूप से प्राकृतिक आवास में छोड़ा जा सकेगा।
  • वन्यजीवों को रेस्क्यू करने के बाद उनकी स्वास्थ्य स्थिति की जांच करना भी जरूरी होता है। इसी उद्देश्य से ट्रांजिट ट्रीटमेंट सेंटर में घायल, बीमार या संदिग्ध संक्रमण वाले वन्यप्राणियों को कुछ दिनों तक अन्य जानवरों से अलग रखा जाता है। इस प्रक्रिया को क्वारंटाइन कहा जाता है। इस दौरान विशेषज्ञ उनकी निगरानी करते हैं और यह पता लगाया जाता है कि कहीं उनमें कोई संक्रामक बीमारी तो नहीं है। इससे संक्रमण फैलने की आशंका कम होती है और जंगल में रहने वाले अन्य वन्यजीवों को सुरक्षित रखने में मदद मिलती है।
  • ट्रांजिट ट्रीटमेंट सेंटर वन्यजीवों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजने से पहले सुरक्षित रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उदाहरण के तौर पर, अंबिकापुर में रेस्क्यू किए गए किसी वन्यजीव को अचानकमार टाइगर रिजर्व या रायपुर के जंगल सफारी केंद्र भेजना हो, तो लंबी यात्रा शुरू करने से पहले उसे संजय पार्क स्थित केंद्र में रखा जा सकेगा। यहां उसकी स्वास्थ्य स्थिति का आकलन करने के साथ जरूरी देखभाल की जाएगी, ताकि यात्रा के दौरान उसे अनावश्यक परेशानी न हो। दूसरे स्थान पर भेजने से पहले वन्यजीवों को अस्थायी रूप से ठहराने की सुविधा के कारण ही इसे ‘ट्रांजिट’ यानी रास्ते का पड़ाव केंद्र कहा जाता है।
  • घायल वन्यजीवों के लिए अस्थायी अस्पताल, प्राकृतिक आवास में लौटाने से पहले सुरक्षित आश्रय।

English

Modern Wildlife Transit Treatment Centre Approved at Sanjay Park in Ambikapur.

Ambikapur: The Chhattisgarh government has taken several important decisions to strengthen wildlife conservation and improve facilities for residents of forested regions. The first meeting of the Standing Committee of the State Board for Wildlife was held under the chairmanship of Forest Minister Kedar Kashyap.

Ambikapur: A modern Transit Treatment Centre is proposed to be established at Sanjay Park in Ambikapur to provide prompt assistance to wild animals injured in human-wildlife conflicts and accidents. The facility will offer rapid rescue, first aid and short-term care for injured wildlife. The need for such a centre has been felt in the region for a long time.

It had earlier come to light that the wildlife treatment facility operating at Sanjay Park was functioning without obtaining the required formal authorisation. As a result, its operation was not in accordance with the prescribed rules.

No Additional Expenditure Required for Infrastructure Development.

Establishing a modern Transit Treatment Centre at Sanjay Park is not expected to require significant additional expenditure on infrastructure development, as several essential facilities are already available at the park.

Basic infrastructure is already available at Sanjay Park for the proposed modern Transit Treatment Centre. The park has cages, shelters and separate enclosures to keep wild animals safe. The facility can be made operational by deploying wildlife experts and procuring additional equipment and materials as required.

Why Is a Transit Treatment Centre Important for Wildlife?

  • Wild animals that are injured, sick or found wandering into human settlements should not be released into the forest immediately after rescue. They can first be brought to a Transit Treatment Centre for preliminary medical care and assessment.
  • After being rescued, wild animals need to undergo health checks to determine whether they are carrying any infectious diseases. For this purpose, injured, sick or potentially infected animals are kept separately at a Transit Treatment Centre for a few days. This process is known as quarantine.
  • A Transit Treatment Centre plays an important role in keeping rescued wild animals safe before they are transferred from one location to another. For instance, if a wild animal rescued in Ambikapur needs to be moved to Achanakmar Tiger Reserve or the Jungle Safari facility in Raipur, it can be housed temporarily at the centre in Sanjay Park before beginning the long journey.
  • A Temporary Hospital for Injured Wildlife and a Safe Shelter Before Their Return to the Wild.

संस्कृति

अम्बिकापुरस्य सञ्जय-उद्याने आधुनिकस्य वन्यजीव-चिकित्साकेन्द्रस्य अनुमोदनम्

छत्तीसगढराज्ये वन्यजीवानां संरक्षणाय तथा वनक्षेत्रेषु निवसतां ग्रामीणानां सुविधानां विस्ताराय शासनपक्षतः अनेकाः महत्त्वपूर्णाः निर्णयाः स्वीकृताः।वनमन्त्री केदारकश्यपस्य अध्यक्षतायां राज्यवन्यजीवमण्डलस्य स्थायीसमितेः प्रथमं सभायोजनम् अभवत्। अस्यां सभायां वन्यजीवसंरक्षणसम्बद्धाः विविधाः विषयाः चर्चिताः तथा महत्त्वपूर्णाः प्रस्तावाः अनुमोदिताः।

मानव-वन्यजीव-सङ्घर्षे तथा दुर्घटनासु आहतानां वन्यप्राणिनां शीघ्रं साहाय्यं प्रदातुम् अम्बिकापुरस्य सञ्जय-उद्याने आधुनिकस्य वन्यजीव-संक्रमण-चिकित्साकेन्द्रस्य स्थापना प्रस्ताविता अस्ति। अस्मिन् केन्द्रे वन्यप्राणिनां शीघ्रं उद्धारः, प्राथमिकचिकित्सा तथा अल्पकालीनपरिचर्यायाः व्यवस्था भविष्यति। अस्याः सुविधायाः आवश्यकता दीर्घकालात् अनुभूयमाना आसीत्।

पूर्वं स्पष्टम् अभवत् यत् सञ्जय-उद्याने सञ्चालितस्य वन्यजीव-चिकित्साकेन्द्रस्य सञ्चालनाय निर्धारितप्रक्रियानुसारम् आवश्यकम् अनुमतिपत्रं न प्राप्तम् आसीत्। अतः केन्द्रस्य सञ्चालनं नियमानुसारं न भवति स्म।

आधारभूत-संरचनायाः विकासाय अतिरिक्तः व्ययः न करणीयः भविष्यति।

सञ्जय-उद्याने आधुनिकस्य वन्यजीव-संक्रमण-चिकित्साकेन्द्रस्य स्थापनायै आधारभूत-संरचनायाः विकासे अधिकः व्ययः न करणीयः भविष्यति। उद्याने वन्यजीवानां संरक्षणाय आवश्यकाः अनेकाः सुविधाः पूर्वमेव उपलब्धाः सन्ति।

सञ्जय-उद्याने प्रस्तावितस्य आधुनिकस्य वन्यजीव-संक्रमण-चिकित्साकेन्द्रस्य सञ्चालनाय आवश्यकाः आधारभूतसुविधाः पूर्वमेव उपलब्धाः सन्ति। अत्र वन्यजीवानां सुरक्षायै पञ्जराणि, छादनानि, पृथक् आवरणयुक्तानि क्षेत्राणि च सन्ति। वन्यजीवविशेषज्ञानां नियुक्तिं कृत्वा आवश्यकतानुसारम् अतिरिक्तसामग्रीणाम् उपकरणानां च क्रयणानन्तरं केन्द्रस्य सञ्चालनं प्रारब्धुं शक्यते।

वन्यजीवानां कृते संक्रमण-चिकित्साकेन्द्रं किमर्थम् उपयुक्तम् अस्ति?

  • आहतान्, रोगग्रस्तान् अथवा जनवसतिक्षेत्रे प्रविष्टान् वन्यप्राणिनः उद्धृत्य तत्कालमेव वने न मोचयेत्। प्रथमं तान् संक्रमण-चिकित्साकेन्द्रम् आनीय प्राथमिकचिकित्सा प्रदातव्या तथा तेषां स्वास्थ्यस्थितेः परीक्षणं करणीयम्।
  • उद्धारानन्तरं वन्यजीवानां स्वास्थ्यपरीक्षणम् आवश्यकं भवति, येन तेषु कश्चित् सङ्क्रामकरोगः अस्ति न वा इति ज्ञातुं शक्यते। अस्य प्रयोजनस्य कृते आहतान्, रोगग्रस्तान् अथवा सङ्क्रमणस्य आशङ्कायुक्तान् वन्यप्राणिनः संक्रमण-चिकित्साकेन्द्रे कतिपयानि दिनानि अन्येभ्यः प्राणिभ्यः पृथक् स्थापयन्ति। एषा प्रक्रिया पृथक्-परिरक्षणम् अथवा क्वारंटाइन इति कथ्यते।
  • वन्यजीवान् एकस्मात् स्थानात् अन्यस्मिन् स्थाने प्रेषयितुं पूर्वं सुरक्षितरूपेण स्थापयितुं संक्रमण-चिकित्साकेन्द्रस्य महत्त्वपूर्णा भूमिका भवति। उदाहरणार्थम्, अम्बिकापुरे उद्धृतः कश्चित् वन्यजीवः यदि अचानकमार-अभयारण्यम् अथवा रायपुर-नगरस्य जङ्गल-सफारी-केन्द्रं प्रेषणीयः भवति, तर्हि दीर्घयात्रायाः पूर्वं सञ्जय-उद्याने स्थिते केन्द्रे तस्य अस्थायी-निवासस्य व्यवस्था कर्तुं शक्यते।
  • आहतवन्यजीवानां कृते अस्थायी चिकित्सालयः, प्राकृतिकावासे पुनः प्रेषणात् पूर्वं सुरक्षितम् आश्रयस्थलम्।

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