नारायणपुर में पुलिया बहने से तीन गांवों का संपर्क टूटा, ग्रामीणों ने खुद खड़ी की वैकल्पिक राह। Washed-Away Culvert Cuts Off Three Narayanpur Villages, Villagers Build Road Using Ropes and Wooden Supports. नारायणपुरे सेतुपथः प्रवाहेन विनष्टः, त्रयः ग्रामाः विच्छिन्नाः; ग्रामवासिभिः काष्ठ-रज्जुसाहाय्येन मार्गः निर्मितः।

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नारायणपुर। बस्तर और अबूझमाड़ के दूरस्थ इलाकों तक विकास पहुंचाने के प्रशासनिक दावों के बीच ग्राम पंचायत झारावाही की स्थिति ने व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां ग्रामीण लंबे समय से रास्ते की समस्या से जूझ रहे हैं। बताया जा रहा है कि समस्या को लेकर कई बार जिम्मेदारों से गुहार लगाई गई, लेकिन समाधान नहीं हुआ।आखिरकार ग्रामीणों ने प्रशासन का इंतजार छोड़कर खुद ही रास्ता सुधारने का फैसला किया। लोगों ने श्रमदान करते हुए सड़क को आवागमन के लायक बनाने की कोशिश की। ग्रामीणों की यह पहल दूरस्थ क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की जमीनी स्थिति और प्रशासनिक दावों के बीच अंतर को सामने लाती है।

जिला मुख्यालय से तीन गांवों का संपर्क टूटा।

जानकारी के मुताबिक, ग्राम पंचायत झारावाही से हतलानार होते हुए नारायणपुर तक जाने वाला प्रमुख मार्ग तेज बारिश के दौरान पुलिया बह जाने से पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। मार्ग टूटने के बाद झारावाही, हतलानार और दुम्मा गांव के ग्रामीणों का जिला मुख्यालय से संपर्क बाधित हो गया। हालात ऐसे बन गए कि स्कूली बच्चों, बीमार बुजुर्गों और आपात स्थिति में मरीजों के लिए गांव से बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया।

बार-बार लगाई गुहार, लेकिन जिम्मेदारों ने नहीं सुनी ग्रामीणों की आवाज।

ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क टूटने और पुलिया बह जाने की जानकारी जनपद पंचायत से लेकर जिला स्तर के अधिकारियों तक पहुंचाई गई थी। समस्या के समाधान की उम्मीद में ग्रामीण लगातार अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगाते रहे और मौके पर निरीक्षण की मांग करते रहे, लेकिन उनकी शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।ग्रामीणों का कहना है कि किसी जिम्मेदार अधिकारी ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेने तक की जहमत नहीं उठाई। प्रशासन की कथित उदासीनता से निराश ग्रामीणों ने आखिरकार खुद ही समस्या से निपटने का निर्णय लिया और श्रमदान कर रास्ते को दुरुस्त करने की पहल शुरू कर दी।

जज्बे के दम पर ग्रामीणों ने लकड़ी-रस्सियों से उठाया भारी ह्यूम पाइप।

प्रशासन की कथित अनदेखी से परेशान झारावाही, हतलानार और दुम्मा गांव के ग्रामीण एकजुट हुए और सड़क व पुलिया की व्यवस्था खुद करने में जुट गए। बिना सरकारी मशीनरी, क्रेन या आधुनिक उपकरणों के ग्रामीणों ने लकड़ी और रस्सियों की मदद से कई क्विंटल वजनी सीमेंट के ह्यूम पाइप को उठाया और बह चुके नाले पर स्थापित कर अस्थायी आवागमन का रास्ता तैयार किया।ग्रामीणों की इस पहल ने बुनियादी सुविधाओं की जमीनी हकीकत को उजागर कर दिया है। उनका कहना है कि जिन निर्माण कार्यों के लिए सरकारी स्तर पर बजट और टेंडर की प्रक्रिया होती है, वही काम उन्हें अपनी मेहनत और संसाधनों के बल पर करने को मजबूर होना पड़ रहा है।

आखिर कब बनेगी गांव की सड़क?

ग्रामीणों की सामूहिक पहल ने अबूझमाड़ के लोगों के हौसले और संघर्षशीलता की मिसाल पेश की है। हालांकि, यह तस्वीर व्यवस्था की उस खामी को भी सामने लाती है, जहां बुनियादी सुविधाओं के लिए लोगों को खुद मेहनत करनी पड़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासनिक उदासीनता के चलते उन्हें अपने जरूरी अधिकारों और सुविधाओं के लिए भी स्वयं मोर्चा संभालना पड़ रहा है।

(English)

Narayanpur. Administrative claims of taking development to the remotest areas of Bastar and Abujhmad have come under scrutiny after the condition of Gram Panchayat Jharawahi came to light. Villagers have reportedly been struggling with poor road connectivity and repeatedly approached the authorities for a solution, but their appeals did not bring any relief.With no timely intervention forthcoming, the villagers decided to take matters into their own hands. They contributed voluntary labour to repair the damaged route and make it usable for transportation. Their initiative highlights the gap between official development claims and the ground realities in remote areas.

Connectivity of Three Villages with District Headquarters Severed.

According to the information, the main road connecting Gram Panchayat Jharawahi to Narayanpur via Hatlanar was severely damaged after a culvert was washed away during recent heavy rains. As a result, residents of Jharawahi, Hatlanar and Dumma villages lost direct connectivity with the district headquarters. The situation created serious difficulties for schoolchildren, elderly patients and people requiring emergency medical assistance to travel outside the villages.

Repeated Appeals Went Unheeded, Villagers’ Pleas Fell on Deaf Ears.

Villagers allege that authorities, from the Janpad Panchayat to senior district officials, had been informed about the damaged road and the washed-away culvert. Despite repeatedly visiting government offices and appealing for an on-site inspection, no responsible official, they claim, came forward to assess the situation.Frustrated by the alleged administrative apathy, the villagers eventually decided to take matters into their own hands. They began repairing the route through voluntary labour, making it clear that they could no longer wait for official intervention.

With Determination and Wooden Supports, Villagers Lifted a Heavy Hume Pipe.

Fed up with the alleged lack of administrative response, residents of Jharawahi, Hatlanar and Dumma villages joined hands and began restoring the road and culvert themselves. Without government machinery, cranes or modern equipment, the villagers used wooden supports and ropes to lift a cement Hume pipe weighing several quintals. They placed it across the washed-out drain to create a temporary route for movement.The villagers’ effort highlights the difficult ground realities of basic infrastructure in the region. They say that work for which government budgets and tender processes are normally undertaken has, in this case, been left to villagers to complete through their own labour and limited resources.

Who Will Finally Take Responsibility for Building the Road?

The collective effort of the villagers reflects the courage and determination of the people of Abujhmad. At the same time, the situation highlights the difficult reality that residents are being forced to undertake physical labour themselves to secure even basic amenities. Villagers say administrative inaction has left them with little choice but to take responsibility for essential infrastructure on their own.

(संस्कृत)

नारायणपुरम्। बस्तर-अबूझमाड़स्य दूरस्थेषु क्षेत्रेषु विकासं अन्तिमजनपर्यन्तं प्रापयितुं प्रशासनस्य दावाः सन्ति, किन्तु ग्रामपञ्चायत् झारावाहीतः प्राप्तं दृश्यं व्यवस्थायाः वास्तविकस्थितिं प्रकाशयति। ग्रामवासिनः दीर्घकालात् मार्गस्य समस्यया पीडिताः आसन्। समस्यायाः समाधानार्थं ते उत्तरदायिभ्यः अनेकवारं निवेदनं कृतवन्तः, तथापि तेषां समस्या न समाधाता।अन्ते ग्रामवासिनः प्रशासनस्य प्रतीक्षां त्यक्त्वा स्वयमेव मार्गस्य सुधारकार्यं कर्तुं निश्चयं कृतवन्तः। ते श्रमदानं कृत्वा मार्गं यातायातयोग्यं कर्तुं प्रयत्नं कृतवन्तः। ग्रामवासिनां एषा पहलः दूरस्थक्षेत्रेषु मूलभूतसुविधानां वास्तविकस्थितिं प्रशासनिकदावैः सह स्पष्टतया प्रदर्शयति।

जिला-मुख्यालयेन सह त्रयाणां ग्रामाणां सम्पर्कः विच्छिन्नः।

प्राप्तविवरणानुसारं ग्रामपञ्चायत् झारावाहीतः हतलानारमार्गेण नारायणपुरं प्रति गच्छन् मुख्यमार्गः अलीयसीनां वर्षाणां कारणेन सेतुपथस्य प्रवाहे पूर्णतया क्षतिग्रस्तः अभवत्। तेन झारावाही, हतलानार तथा दुम्मा ग्रामाणां जनानां जिला-मुख्यालयेन सह सम्पर्कः पूर्णतया विच्छिन्नः अभवत्। एतादृशे परिस्थितौ विद्यालयगामिनः बालकाः, रोगपीडिताः वृद्धाः तथा आपत्कालीनचिकित्सायाः आवश्यकतां अनुभवन्तः रोगिणः ग्रामेभ्यः बहिः गन्तुं कठिनताम् अनुभवन्ति।

पुनः पुनः प्रार्थितेऽपि उत्तरदायिभिः ग्रामवासिनां याचना न श्रुता।

ग्रामवासिनां स्पष्टः आरोपः अस्ति यत् मार्गस्य भग्नतायाः तथा सेतुपथस्य प्रवाहेण विनाशस्य सूचना जनपदपञ्चायतः आरभ्य जिला-प्रशासनस्य उच्चाधिकारिभ्यः अपि प्रेषिता आसीत्। समस्यायाः समाधानस्य आशया ग्रामवासिनः पुनःपुनः कार्यालयानां भ्रमणं कृत्वा स्थलनिरीक्षणस्य निवेदनं कृतवन्तः, तथापि कश्चित् उत्तरदायी अधिकारी स्थलं गत्वा परिस्थितेः निरीक्षणं कर्तुं न आगतः।प्रशासनस्य कथितया उदासीनतया निराशाः ग्रामवासिनः अन्ततः स्वयमेव समस्यायाः समाधानाय अग्रे आगताः। ते श्रमदानं कृत्वा क्षतिग्रस्तमार्गस्य सुधारकार्यं प्रारब्धवन्तः।

साहसेन काष्ठ-सहाय्येन च ग्रामवासिभिः भारी ह्यूम-नलिका उत्थापिता।

प्रशासनस्य कथिताम् उपेक्षां दृष्ट्वा झारावाही, हतलानार तथा दुम्मा ग्रामाणां ग्रामवासिनः एकत्रिताः भूत्वा स्वयमेव मार्गस्य सेतुपथस्य च निर्माणकार्ये प्रवृत्ताः। शासकीययन्त्राणां, क्रेन-यन्त्रस्य अथवा आधुनिकसाधनानां विना ते काष्ठस्य रज्जूनां च साहाय्येन बहुक्विन्टलभारयुक्तां सिमेण्ट-ह्यूम-नलिकां स्कन्धेषु उत्थाप्य प्रवाहेन नष्टे नाले स्थापितवन्तः। एवं ते आवागमनाय वैकल्पिकमार्गं निर्मितवन्तः।ग्रामवासिनां एषः प्रयासः मूलभूत-सुविधानां वास्तविकस्थितिं प्रकाशयति। तेषां कथनम् अस्ति यत् येषां निर्माणकार्याणां कृते शासनस्तरे बजटं निर्धारितं भवति तथा निविदाप्रक्रिया क्रियते, तादृशं कार्यम् अपि ते स्वश्रमेन सीमितसाधनैः च कर्तुं विवशाः सन्ति।

अन्ततः ग्राममार्गस्य निर्माणं कः करिष्यति?

ग्रामवासिनां सामूहिकः प्रयासः अबूझमाड़-क्षेत्रस्य जनानां साहसं संघर्षशीलतां च प्रकाशयति। परन्तु एषा स्थितिः व्यवस्थायाः उदासीनतायाः कटुसत्यं अपि प्रकटयति, यत्र मूलभूत-सुविधानां प्राप्तये जनाः स्वयमेव श्रमं कर्तुं विवशाः भवन्ति। ग्रामवासिनां कथनम् अस्ति यत् प्रशासनिक-निष्क्रियतायाः कारणेन आवश्यकसुविधानां कृते अपि ते स्वयमेव उत्तरदायित्वं वहितुं बाध्याः सन्ति।

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