छत्तीसगढ़ में महज 13 महीनों के भीतर बिजली की दरों में दूसरी बार इजाफा हुआ है। 201 से 400 यूनिट तक बिजली खपत करने वाले उपभोक्ताओं के लिए प्रति यूनिट 50 पैसे की बढ़ोतरी की गई है।Electricity tariffs in Chhattisgarh have been increased for the second time within 13 months. Consumers using 201 to 400 units of electricity will now have to pay an additional 50 paise per unit.छत्तीसगढे त्रयोदशमासानाम् अन्तरे विद्युद्दरेषु द्वितीयवारं वृद्धिः कृता अस्ति। २०१ तः ४०० एककपर्यन्तं विद्युतोपयोगं कुर्वद्भ्यः उपभोक्तृभ्यः प्रति-एककं ५० पैसाधिकं शुल्कं दातव्यम् भविष्यति।
छत्तीसगढ़ में महज 13 महीने के दौरान बिजली की दरों में दूसरी बार इजाफा हुआ है। नई दरों से घरेलू उपभोक्ताओं के खर्च पर अतिरिक्त दबाव बढ़ा है। 0 से 100 यूनिट और 200 से 400 यूनिट वाले बिजली स्लैब में प्रति यूनिट 50 पैसे तक की बढ़ोतरी की गई है। वहीं, हाफ-बिल योजना के नियमों में हुए बदलाव के बाद कई उपभोक्ताओं को पहले की तुलना में अधिक बिजली बिल का भुगतान करना पड़ रहा है।

बिजली बिल की बढ़ी दरों का प्रतीकात्मक विजुअल।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में बीते 13 महीनों के दौरान बिजली दरों में दो बार बढ़ोतरी का सीधा असर उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ा है। 100 यूनिट तक बिजली इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों के लिए प्रति यूनिट शुल्क 3.90 रुपये से बढ़कर 4.40 रुपये हो गया है। इसी तरह 201 से 400 यूनिट तक खपत वाले उपभोक्ताओं की दर 5.50 रुपये से बढ़कर 6 रुपये प्रति यूनिट पहुंच गई है। यानी इस श्रेणी के उपभोक्ताओं को अब हर यूनिट पर 50 पैसे अतिरिक्त भुगतान करना होगा।
300 यूनिट बिजली खपत करने वाले उपभोक्ता के उदाहरण से इसे समझें तो जून 2025 में करीब 751 रुपये का अनुमानित बिल जुलाई 2026 में बढ़कर लगभग 1,172 रुपये हो गया। यानी उपभोक्ता को करीब 421 रुपये अतिरिक्त भुगतान करना पड़ रहा है। हालांकि, इस बढ़ोतरी के लिए केवल बिजली दरों में हुआ इजाफा जिम्मेदार नहीं है। इस अवधि में हाफ-बिल योजना की पात्रता सीमा में भी बदलाव किया गया, जिसका असर कुल बिल पर पड़ा। 300 यूनिट की ऊर्जा लागत भी 1,350 रुपये से बढ़कर 1,490 रुपये हो गई, यानी इसमें करीब 140 रुपये या 10.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई।
जुलाई 2025 में पहली बार बिजली दरों में बढ़ोतरी हुई।
जुलाई 2025 में बिजली की दरों में पहली बार इजाफा किया गया। संशोधित टैरिफ के तहत 0 से 100 यूनिट तक की खपत पर दर 4.10 रुपये, 101 से 200 यूनिट पर 4.20 रुपये और 201 से 400 यूनिट पर 5.60 रुपये प्रति यूनिट निर्धारित हुई। जून 2025 के मुकाबले इन तीनों श्रेणियों में क्रमशः 20 पैसे, 10 पैसे और 10 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
जुलाई 2026 में बिजली दरों में दूसरी बार इजाफा
जुलाई 2026 से बिजली की दरों में एक बार फिर बढ़ोतरी लागू कर दी गई। अब 0 से 100 यूनिट की खपत पर 4.40 रुपये, 101 से 200 यूनिट पर 4.50 रुपये और 201 से 400 यूनिट तक 6 रुपये प्रति यूनिट का भुगतान करना होगा। विद्युत नियामक आयोग के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2026-27 में सभी उपभोक्ता वर्गों को मिलाकर औसत टैरिफ में 6.23 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
हाफ-बिल योजना खत्म होने और स्मार्ट मीटर लगने से बिजली के बिल में बढ़ोतरी
बिजली की बढ़ी हुई दरों और स्मार्ट मीटर को लेकर लोगों में नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है। भाजपा सरकार द्वारा पहले 400 यूनिट तक लागू हाफ-बिल योजना को समाप्त किया गया और अब टैरिफ बढ़ने से आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव बढ़ गया है। विरोध के तहत बिजली की नई दरें वापस लेने, स्मार्ट मीटर की व्यवस्था हटाने और 400 यूनिट तक हाफ-बिल योजना को फिर से लागू करने की मांग उठाई जाएगी।
English
Electricity tariffs in Chhattisgarh have been increased for the second time within just 13 months, adding to the financial burden on households. The rates for the 0–100 unit and 200–400 unit slabs have gone up by up to 50 paise per unit. In addition, changes in the rules of the half-bill scheme have resulted in many consumers having to pay significantly higher electricity bills than before.
Raipur. Electricity consumers in Chhattisgarh have faced two tariff hikes in the past 13 months, increasing the financial burden on households. For consumers using up to 100 units, the tariff has risen from ₹3.90 to ₹4.40 per unit. Meanwhile, the rate for those consuming 201 to 400 units has increased from ₹5.50 to ₹6 per unit. This means consumers in this slab will now have to pay an additional 50 paise for every unit consumed.
The impact can be understood through the example of a consumer using 300 units of electricity. An estimated bill of around ₹751 in June 2025 has increased to approximately ₹1,172 in July 2026, an additional burden of about ₹421. However, the entire increase cannot be attributed solely to the hike in electricity tariffs. During this period, the eligibility limit under the half-bill scheme was also revised, which further affected the total bill. The energy cost for 300 units rose from ₹1,350 to ₹1,490, marking an increase of ₹140, or around 10.4%
The first electricity tariff hike took place in July 2025.
The first electricity tariff hike in Chhattisgarh took place in July 2025. Under the revised rates, the tariff for consumption of 0–100 units increased to ₹4.10 per unit, while the rates for 101–200 units and 201–400 units rose to ₹4.20 and ₹5.60 per unit, respectively. Compared with June 2025, the increase was 20 paise, 10 paise and 10 paise per unit across these three slabs.
Second Electricity Tariff Hike in July 2026
Electricity tariffs were increased again from July 2026. Consumers now have to pay ₹4.40 per unit for 0–100 units, ₹4.50 for 101–200 units and ₹6 per unit for consumption between 201 and 400 units. According to the Electricity Regulatory Commission, the average tariff increase across all consumer categories for 2026–27 stands at 6.23%.
Higher Electricity Bills After the Half-Bill Scheme Ends and Smart Meters Are Installed
Public dissatisfaction over rising electricity tariffs and smart meters is growing steadily. The BJP government had earlier discontinued the half-bill scheme for consumption up to 400 units, and the subsequent tariff hike has further increased the financial burden on ordinary consumers. Demands will be raised for a rollback of the increased electricity rates, removal of smart meters and reinstatement of the half-bill scheme for consumption up to 400 units.
संस्कृत:
छत्तीसगढे केवलं त्रयोदशमासानां कालावधौ विद्युद्दरेषु द्वितीयवारं वृद्धिः कृता अस्ति। नूतनदरेण गृहस्थ-उपभोक्तृणां व्ययभारः वर्धितः अस्ति। शून्यात् शतैककपर्यन्तं तथा द्विशततः चतुःशतैककपर्यन्तं विद्युतोपयोगस्य श्रेण्यां प्रति-एककं पञ्चाशत् पैसापर्यन्तं वृद्धिः अभवत्। अपि च, अर्धमूल्यविद्युत्-योजनायाः नियमेषु परिवर्तनात् अनेकैः उपभोक्तृभिः पूर्वापेक्षया अधिकं विद्युद्बिलं दातव्यं भवति।
रायपुरम्। छत्तीसगढे गतत्रयोदशमासेषु विद्युद्दरेषु द्विवारं वृद्धिः अभवत्, येन विद्युत्-उपभोक्तृणां व्ययभारः वर्धितः। शतैककपर्यन्तं विद्युतोपयोगं कुर्वतां उपभोक्तृणां कृते प्रतिएककं ३.९० रुप्यकाणां स्थानात् ४.४० रुप्यकाणि शुल्कं निर्धारितम् अस्ति। तथा २०१ तः ४०० एककपर्यन्तं विद्युतोपयोगिनां कृते प्रतिएककं ५.५० रुप्यकाणां स्थानात् ६ रुप्यकाणि शुल्कं कृतम्। अतः अस्यां श्रेण्यां उपभोक्तृभिः प्रत्येकस्मिन् एकके ५० पैसाः अधिकं दातव्यं भविष्यति।
त्रिशत-एककं विद्युतं उपयुञ्जानस्य उपभोक्तुः उदाहरणेन एतत् स्पष्टं भवति। २०२५ तमस्य वर्षस्य जूनमासे यस्य अनुमानितं विद्युद्बिलं प्रायः ७५१ रुप्यकाणि आसीत्, तत् २०२६ तमस्य वर्षस्य जुलाईमासे वर्धित्वा प्रायः १,१७२ रुप्यकाणि अभवत्। अर्थात् उपभोक्तुः भारः प्रायः ४२१ रुप्यकैः वर्धितः। तथापि एषा सम्पूर्णा वृद्धिः केवलं विद्युद्दरवृद्धेः कारणेन न अभवत्। अस्मिन् काले अर्धमूल्य-विद्युत्-योजनायाः सीमायामपि परिवर्तनं कृतम्, येन कुलविद्युद्बिले अतिरिक्तः प्रभावः अभवत्। त्रिशत-एककस्य ऊर्जाव्ययः अपि १,३५० रुप्यकात् वर्धित्वा १,४९० रुप्यकाणि अभवत्, अर्थात् प्रायः १४० रुप्यकैः अथवा १०.४ प्रतिशतं वृद्धिः अभवत्।
जुलाई २०२५-मासे प्रथमवारं विद्युद्दरेषु वृद्धिः अभवत्।
जुलाई २०२५-मासे छत्तीसगढे प्रथमवारं विद्युद्दरेषु वृद्धिः कृता। संशोधितदरेषु शून्यात् १०० एककपर्यन्तं विद्युतोपयोगस्य दरः प्रतिएककं ४.१० रुप्यकाणि, १०१ तः २०० एककपर्यन्तं ४.२० रुप्यकाणि, तथा २०१ तः ४०० एककपर्यन्तं ५.६० रुप्यकाणि निर्धारितानि। जून २०२५-मासस्य तुलनायां एतेषु त्रिषु वर्गेषु क्रमशः २० पैसे, १० पैसे तथा १० पैसे प्रति-एककं वृद्धिः अभवत्।
जुलाई २०२६-मासे विद्युद्दरेषु द्वितीयवारं वृद्धिः
जुलाई २०२६-मासात् विद्युद्दरेषु पुनः वृद्धिः प्रवर्तिता। अधुना शून्यात् १०० एककपर्यन्तं विद्युतोपयोगाय प्रतिएककं ४.४० रुप्यकाणि, १०१ तः २०० एककपर्यन्तं ४.५० रुप्यकाणि, तथा २०१ तः ४०० एककपर्यन्तं ६ रुप्यकाणि दातव्यानि भविष्यन्ति। विद्युत्-विनियामक-आयोगस्य अनुसारं २०२६-२७ वित्तवर्षे सर्वेषां उपभोक्तृवर्गाणां समग्ररूपेण औसतविद्युद्दरे ६.२३ प्रतिशतं वृद्धिः अभवत्।
अर्धमूल्य-विद्युत्-योजनायाः समाप्त्या स्मार्ट-मीटर-स्थापनेन च विद्युद्बिलस्य वृद्धिः।
वर्धमानविद्युद्दराणां स्मार्ट-मीटर-व्यवस्थायाः च विषये जनसामान्येषु असन्तोषः निरन्तरं वर्धते। भाजपा-शासनेन पूर्वं ४०० एककपर्यन्तं प्रवर्तिता अर्धमूल्य-विद्युत्-योजना समाप्ता कृता, ततः विद्युद्दरवृद्ध्या सामान्योपभोक्तृणां आर्थिकभारः अधिकः अभवत्। वर्धितविद्युद्दराणां प्रत्याहरणं, स्मार्ट-मीटर-व्यवस्थायाः निरसनं तथा ४०० एककपर्यन्तं अर्धमूल्य-विद्युत्-योजनायाः पुनः प्रवर्तनं इति मागः उत्थापयिष्यते।


