जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रों का कमाल, बनाया AI ऐप; ‘अंतर्गीता’ से पूछ सकेंगे हर सवाल। Jabalpur Engineering College Students Develop AI-Powered App ‘Antargita’ to Answer User Queries। जबलपुर-अभियांत्रिकी-महाविद्यालयस्य छात्रैः कृत्रिमबुद्धिम्-आधारितं ‘अन्तर्गीता’ नामकं अनुप्रयोगं निर्मितम्, यस्मिन् जनाः प्रश्नान् पृच्छितुं शक्नुवन्ति।

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करीब एक वर्ष से इस ऐप को विकसित करने का कार्य लगातार जारी था। अब इसमें AI डायरी, व्यवहार विश्लेषण, डिजिटल वेलबीइंग, कर्मा स्कोर, ग्रेटिट्यूड लॉग, ‘हील योरसेल्फ’ और ‘गीता कंपेनियन’ जैसे कई उपयोगी फीचर्स जोड़े गए हैं।

जबलपुर। तेज रफ्तार जीवनशैली में बढ़ते तनाव, मानसिक दबाव और रोजमर्रा की व्यक्तिगत परेशानियों के बीच जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रों ने एक ऐसा AI ऐप विकसित किया है, जो महज डिजिटल डायरी तक सीमित नहीं है। यह ऐप यूजर्स के लिए एक पर्सनल कंपेनियन की तरह काम करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भगवद्गीता के ज्ञान और जीवन-दर्शन के साथ अनूठा समन्वय किया गया है।

‘अंतर्गीता’ ऐप में AI तकनीक को भगवद्गीता के ज्ञान और जीवन-दर्शन के साथ जोड़ा गया है। यह ऐप यूजर की डायरी, व्यवहार और डिजिटल गतिविधियों का विश्लेषण करके उसकी भावनात्मक एवं व्यक्तिगत स्थिति को समझने का प्रयास करेगा। इसके बाद संबंधित परिस्थिति के अनुसार भगवद्गीता की शिक्षाओं के माध्यम से मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा। ऐप को जल्द ही Google Play Store पर लॉन्च किए जाने की तैयारी चल रही है।

अपने भीतर झांककर खुद को समझने की सोच से इस अनोखे सफर की शुरुआत हुई।

जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर और प्रोजेक्ट लीड डॉ. सौरभ सिंह बताते हैं कि इस ऐप की परिकल्पना आत्म-समझ की तलाश से सामने आई। उनका विचार था कि ऐसी डिजिटल डायरी विकसित की जाए, जो महज विचारों और बातों को रिकॉर्ड न करे, बल्कि व्यक्ति की मानसिक स्थिति को समझने का प्रयास भी करे। साथ ही, जरूरत के समय उपयोगकर्ता को सकारात्मक और उचित दिशा में सोचने के लिए प्रेरित करे। इसी सोच ने इसे एक डिजिटल साथी का स्वरूप दिया।इसी अवधारणा को AI तकनीक से जोड़ते हुए ‘अंतर्गीता’ ऐप के विकास की शुरुआत की गई। कॉलेज के प्राचार्य राजीव चांडक ने बताया कि ऐप का निर्माण अब पूरा हो चुका है और इसे जल्द ही औपचारिक रूप से लॉन्च किया जाएगा।

एक वर्ष के दौरान ऐप में कई नए और उपयोगी फीचर्स शामिल किए गए।

डॉ. माधुरी गोखले के मुताबिक, शुरुआत में ऐप का एक शुरुआती बेसिक वर्जन तैयार किया गया था। इसके बाद आईआईटी मद्रास के स्टार्टअप प्रोग्राम के दौरान संभावित यूजर्स से मिले सुझावों और फीडबैक के आधार पर ऐप को और बेहतर बनाया गया तथा इसमें कई नए फीचर्स शामिल किए गए।

डायरी के जरिए मिलेगी अगले दिन की दिनचर्या पर उपयोगी प्रतिक्रिया

ऐप में यूजर को रोजाना लंबी डायरी लिखने की आवश्यकता नहीं होगी। वह दिनभर की छोटी घटनाओं, अनुभवों और विचारों को संक्षिप्त एंट्री के रूप में दर्ज कर सकेगा। AI इन जानकारियों का विश्लेषण करके अगले दिन उपयोगकर्ता को फीडबैक देगा। इसका मकसद बार-बार सामने आने वाली परेशानियों और व्यवहार में दोहराए जाने वाले पैटर्न को पहचानने में मदद करना है।

English

The app has been under continuous development for nearly a year. It now offers several features, including an AI diary, behavior analysis, digital well-being tools, a Karma Score, gratitude log, “Heal Yourself,” and a “Gita Companion.”

Jabalpur. Amid the growing stress, mental pressure, and personal challenges of today’s fast-paced lifestyle, students of Jabalpur Engineering College have developed an AI-powered app designed to function as more than just a digital diary. It aims to serve as a personal companion, helping users navigate their everyday thoughts and experiences.

Artificial Intelligence has been uniquely integrated with the wisdom and teachings of the Bhagavad Gita.

The ‘Antargita’ app combines Artificial Intelligence with the wisdom and teachings of the Bhagavad Gita. It will analyze a user’s diary entries, behavior, and digital activities to understand their concerns and provide guidance based on relevant teachings from the Gita. The app is expected to be launched on the Google Play Store soon.

The journey began with the idea of looking within and understanding oneself better.

According to Dr. Saurabh Singh, Assistant Professor and Project Lead at Jabalpur Engineering College, the idea behind the app emerged from an attempt to better understand oneself. He envisioned a digital diary that would go beyond simply recording thoughts and instead try to understand a user’s state of mind while offering timely guidance to help them think in a constructive direction. This concept eventually shaped the app as a digital companion.

Building on this concept, the development of the ‘Antargita’ app began by integrating it with Artificial Intelligence. College Principal Rajiv Chandak said that the app is now ready and will be officially launched soon.

Several new and useful features were added to the app over the course of a year.

Dr. Madhuri Gokhale said that the app was initially developed in a basic version. It was later refined based on feedback from potential users during a startup programme at IIT Madras, leading to the addition of several new features.

The diary will provide feedback and insights on the user’s routine for the following day.

Users will not need to write lengthy diary entries every day. They can simply record brief moments, experiences, or thoughts from their day. The AI will analyze these entries and provide feedback the following day. The feature is designed to help users identify recurring problems and recognize patterns in their behavior.

संस्कृत

अस्य अनुप्रयोगस्य विकासकार्यं प्रायः एकवर्षकालात् निरन्तरं प्रचलति। अधुना अस्मिन् कृत्रिमबुद्धि-दैनन्दिनी, आचरण-विश्लेषणम्, डिजिटल-कल्याणम्, कर्माङ्कः, कृतज्ञता-अभिलेखः, ‘स्वस्य उपचारः’ तथा ‘गीता-सहचरः’ इत्यादयः विविधाः सुविधाः समाविष्टाः सन्ति।

जबलपुरम्। अद्यतनस्य द्रुतजीवनस्य कारणेन वर्धमानस्य तनावस्य, मानसिकदबावस्य तथा व्यक्तिगतसमस्याभिः मध्ये जबलपुर-अभियांत्रिकी-महाविद्यालयस्य छात्रैः कृत्रिमबुद्धि-आधारितः एकः अनुप्रयोगः विकसितः अस्ति। अयं केवलं डिजिटल-दैनन्दिनी न, अपितु व्यक्तिगत-सहचरः इव उपयोक्तृणां दैनन्दिनजीवने सहायकः भवितुम् अभिप्रेतः अस्ति।

कृत्रिमबुद्धेः भगवद्गीतायाः ज्ञानस्य जीवनदर्शनस्य च सह अद्वितीयः समन्वयः कृतः अस्ति।

‘अन्तर्गीता’ नामके अस्मिन् अनुप्रयोगे कृत्रिमबुद्धेः भगवद्गीतायाः ज्ञानस्य च समन्वयः कृतः अस्ति। अयं अनुप्रयोगः उपयोक्तुः दैनन्दिनीं, आचरणं तथा डिजिटल-क्रियाकलापान् विश्लेष्य तस्य समस्यां परिस्थितिं च अवगन्तुं प्रयतिष्यते। ततः परिस्थित्यानुसारं भगवद्गीतायाः शिक्षाभिः मार्गदर्शनं प्रदास्यते। अयं अनुप्रयोगः शीघ्रमेव गूगल-प्ले-स्टोरे इत्यत्र प्रारब्धुं सज्जीकृतः अस्ति।

स्वस्य अन्तर्मनसि अवलोक्य आत्मानं सम्यक् अवगन्तुम् इति विचारात् अस्य यात्रायाः आरम्भः अभवत्।

जबलपुर-अभियांत्रिकी-महाविद्यालयस्य सहायक-प्राध्यापकः परियोजना-प्रमुखः च डॉ. सौरभसिंहः कथयति यत् अस्य अनुप्रयोगस्य परिकल्पना आत्मानं सम्यक् अवगन्तुम् इति भावनातः जाता। तस्य विचारः आसीत् यत् एतादृशी डिजिटल-दैनन्दिनी निर्मीयेत, या केवलं विचारान् न लिखेत्, अपितु उपयोक्तुः मनःस्थितिं ज्ञातुं प्रयत्नं कुर्यात् तथा आवश्यकताकाले सम्यक् सकारात्मकदिशि चिन्तयितुं मार्गदर्शनं दद्यात्। एवं सा डिजिटल-सहचरस्य रूपं प्राप्तवती।

अस्यैव विचारस्य कृत्रिमबुद्ध्या सह समन्वयं कृत्वा ‘अन्तर्गीता’ अनुप्रयोगस्य विकासकार्यस्य आरम्भः कृतः। महाविद्यालयस्य प्राचार्यः राजीव चाण्डकः अवदत् यत् अनुप्रयोगस्य निर्माणकार्यं सम्पूर्णम् अस्ति तथा शीघ्रमेव तस्य औपचारिकं विमोचनं भविष्यति।

एकवर्षस्य अवधौ अनुप्रयोगे अनेकाः नवीनाः उपयोगिन्यः सुविधाः समाविष्टाः।

डॉ. माधुरी गोखले इत्यवदत् यत् प्रारम्भे अनुप्रयोगस्य मूलरूपं निर्मितम् आसीत्। अनन्तरं आईआईटी-मद्रासस्य स्टार्टअप-कार्यक्रमे सम्भावित-उपयोक्तृभ्यः प्राप्ताभिः प्रतिक्रियाभिः सुझावैः च अनुप्रयोगः अधिकं विकसितः, तस्मिन् च अनेकाः नवीनाः सुविधाः समाविष्टाः।

दैनन्दिन्या माध्यमेन परदिने दिनचर्यायाः उपयोगी प्रतिक्रिया प्राप्स्यते।

अस्मिन् अनुप्रयोगे उपयोक्तृभिः प्रतिदिनं विस्तृतां दैनन्दिनीं लेखितुं आवश्यकता न भविष्यति। ते दिवसभरस्य लघुघटनाः, अनुभवान्, विचारांश्च संक्षिप्त-प्रविष्टिरूपेण अभिलिखितुं शक्नुवन्ति। कृत्रिमबुद्धिः ताः प्रविष्टयः विश्लेष्य परदिने उपयोक्त्रे प्रतिक्रियां प्रदास्यति। अस्य उद्देश्यं पुनःपुनः जायमानानां समस्याणां तथा आचरणस्य पुनरावर्तमानानां प्रतिरूपाणां परिचये सहायतां प्रदातुम् अस्ति।

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