छत्तीसगढ़ के राज्यपशु वन भैंसे का कुनबा बढ़ाने की पहल, बारनवापारा से उदंती आएंगी तीन मादा वन भैंसें; ‘छोटू’ संभालेगा प्रजनन की जिम्मेदारी।Chhattisgarh takes a step to boost its state animal population: Three female wild buffaloes will be brought from Barnawapara to Udanti, with ‘Chhotu’ playing a key role in breeding.छत्तीसगढस्य राज्यपशोः वनमहिषस्य वंशवृद्ध्यै प्रयासः, बारनवापारात् उदन्ती-अभयारण्यम् त्रयः मादाः वनमहिष्यः आनयिष्यन्ते। ‘छोटू’ प्रजननकार्यस्य उत्तरदायित्वं वहिष्यति।
छत्तीसगढ़ के राजकीय पशु वन भैंसे के संरक्षण और संख्या विस्तार की दिशा में वन विभाग ने अहम पहल की है। बारनवापारा अभयारण्य से तीन मादा वन भैंसों को उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में स्थानांतरित किया जाएगा। यहां उन्हें एकमात्र नर वन भैंसा ‘छोटू’ के साथ रखा जाएगा, ताकि प्राकृतिक प्रजनन के माध्यम से वन भैंसों के कुनबे को बढ़ाया जा सके।

रायपुर। छत्तीसगढ़ के राजकीय पशु वन भैंसे के संरक्षण और उनकी संख्या बढ़ाने की योजना को नई दिशा मिली है। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में अब असम से वन भैंसे लाने की जगह बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य से तीन मादा वन भैंसों को स्थानांतरित करने की तैयारी की जा रही है। इन मादा वन भैंसों को उदंती-सीतानदी में मौजूद एकमात्र नर वन भैंसा ‘छोटू’ के साथ रखा जाएगा, ताकि प्राकृतिक प्रजनन के जरिए वन भैंसों की आबादी बढ़ाई जा सके।
उदंती-सीतानदी में रह रहा ‘छोटू’ छत्तीसगढ़ का मूल वन भैंसा माना जाता है। करीब 25 वर्ष की उम्र में भी अब वह इस दुर्लभ प्रजाति के संरक्षण और संख्या बढ़ाने की उम्मीद का केंद्र बना हुआ है। बढ़ती उम्र के बावजूद वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूटीआई) के वैज्ञानिकों ने स्वास्थ्य परीक्षण के बाद उसे प्रजनन के लिए उपयुक्त पाया है। इसी आधार पर बारनवापारा से मादा वन भैंसों को उदंती लाकर ‘छोटू’ के साथ प्राकृतिक प्रजनन कराने की योजना तैयार की गई है।
2023 में असम से छह वन भैंसों को उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व लाया गया था।
वन भैंसों के संरक्षण और उनकी आबादी बढ़ाने की योजना के तहत वर्ष 2023 में असम के मानस और काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यानों से छह वन भैंसों को छत्तीसगढ़ लाकर बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य में रखा गया था। संरक्षण और प्रजनन की कोशिशें सफल रहीं और अब बारनवापारा में इनकी संख्या बढ़कर 13 हो चुकी है। इसी बढ़ी हुई आबादी में से तीन मादा वन भैंसों को अब उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व भेजने की तैयारी की जा रही है, ताकि वहां भी प्रजाति के प्राकृतिक प्रजनन और संरक्षण को गति मिल सके।
उदंती-सीतानदी में वन भैंसों को स्थानांतरित करने की योजना पहले से ही तैयार थी।
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक वरुण जैन के अनुसार, कुछ परिस्थितियों के चलते असम से लाए गए वन भैंसों को शुरुआती दौर में बारनवापारा में रखा गया था। हालांकि, उसी समय यह तय किया गया था कि हालात अनुकूल होने पर इन्हें बारनवापारा से उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में स्थानांतरित किया जाएगा। अब इसी पूर्व निर्धारित योजना को आगे बढ़ाते हुए तीन मादा वन भैंसों को उदंती लाने की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
वन भैंसों के प्राकृतिक आवास को बेहतर बनाने पर विशेष फोकस
वन भैंसों की आबादी बढ़ाने के साथ-साथ उनके प्राकृतिक पर्यावास को मजबूत करने पर भी वन विभाग का विशेष ध्यान है। वन्यजीव विशेषज्ञों के सहयोग से आवास विकास, शिकार पर रोक लगाने के लिए एंटी-पोचिंग अभियान और नियमित निगरानी जैसे कदम लगातार उठाए जा रहे हैं। वर्ष 2023 में असम से वन भैंसों को लाकर बारनवापारा में संरक्षण व प्रजनन की पहल भी इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा थी। अब बारनवापारा में बढ़ी संख्या में से तीन मादा वन भैंसों को उदंती भेजने की तैयारी से छत्तीसगढ़ में राजकीय पशु के संरक्षण और संवर्धन अभियान को नई गति मिलने की उम्मीद है।
English
The Chhattisgarh Forest Department has taken a significant step toward conserving and increasing the population of the state animal, the wild buffalo. Three female wild buffaloes will be shifted from Barnawapara Wildlife Sanctuary to the Udanti-Sitanadi Tiger Reserve. They will be kept with the reserve’s lone male wild buffalo, ‘Chhotu’, to encourage natural breeding and help expand the population.
Raipur: The conservation and population expansion programme for Chhattisgarh’s state animal, the wild buffalo, has entered a new phase. Instead of bringing wild buffaloes from Assam to Udanti-Sitanadi Tiger Reserve, the authorities are preparing to relocate three female wild buffaloes from Barnawapara Wildlife Sanctuary. The females will be kept with ‘Chhotu’, the reserve’s only male wild buffalo, with the aim of promoting natural breeding and increasing the population.
‘Chhotu’, the wild buffalo residing in Udanti-Sitanadi, is considered a native wild buffalo of Chhattisgarh. At around 25 years of age, he has now become a key hope for the conservation and population recovery of the species. Despite his advanced age, scientists from the Wildlife Trust of India (WTI) found him fit for breeding after a detailed health assessment. Based on this evaluation, a plan has been prepared to bring female wild buffaloes from Barnawapara to Udanti and facilitate natural breeding with ‘Chhotu’.
In 2023, six wild buffaloes were brought from Assam to the Udanti-Sitanadi Tiger Reserve.
As part of efforts to conserve and expand the wild buffalo population, six wild buffaloes were brought to Chhattisgarh in 2023 from Assam’s Manas and Kaziranga National Parks and housed at Barnawapara Wildlife Sanctuary. The conservation and breeding efforts have yielded encouraging results, with their population in Barnawapara now increasing to 13. Based on this growth, preparations are underway to shift three female wild buffaloes to the Udanti-Sitanadi Tiger Reserve, with the aim of strengthening natural breeding and conservation efforts there.
The plan to shift wild buffaloes to Udanti-Sitanadi had already been decided earlier.
According to Varun Jain, Deputy Director of the Udanti-Sitanadi Tiger Reserve, the wild buffaloes brought from Assam were initially kept at Barnawapara due to certain circumstances. Even then, there was a plan to shift them to Udanti-Sitanadi once conditions became suitable. The authorities are now proceeding with that plan and preparing to relocate three female wild buffaloes to Udanti.
Emphasis on improving the natural habitat of wild buffaloes
Along with increasing the wild buffalo population, the Forest Department is also focusing on improving and strengthening their natural habitat. Wildlife experts and forest officials are working on habitat development, anti-poaching measures and continuous monitoring. The initiative to bring wild buffaloes from Assam to Barnawapara in 2023 for conservation and breeding was also part of this broader strategy. Now, the proposed relocation of three female wild buffaloes from the growing Barnawapara population to Udanti is expected to give fresh momentum to the conservation and revival efforts for Chhattisgarh’s state animal.
संस्कृत
छत्तीसगढस्य राजकीयपशोः वनमहिषस्य संरक्षणाय वंशवृद्धये च वनविभागेन महत्त्वपूर्णः प्रयासः कृतः। बारनवापारा अभयारण्यात् त्रयः मादा वनमहिष्यः उदन्ती-सीतानदी व्याघ्राभयारण्यम् आनयिष्यन्ते। ताः तत्र एकमात्रेण नरवनमहिषेण ‘छोटू’ इत्यनेन सह स्थापयिष्यन्ते, येन प्राकृतिकप्रजननस्य माध्यमेन वनमहिषाणां संख्या वर्धयितुं शक्येत।
रायपुर। छत्तीसगढस्य राजकीयपशोः वनमहिषस्य संरक्षणस्य वंशवृद्धेः च योजना नूतनं चरणं प्रविष्टवती अस्ति। उदन्ती-सीतानदी व्याघ्राभयारण्यम् असमप्रदेशात् वनमहिषान् आनयितुं स्थाने बारनवापारा वन्यजीवाभयारण्यात् त्रयः मादा वनमहिष्यः स्थानान्तरितुं सज्जतां प्रचलति। ताः उदन्ती-सीतानद्यां विद्यमानेन एकमात्रेण नरवनमहिषेण ‘छोटू’ इत्यनेन सह स्थापयिष्यन्ते। प्राकृतिकप्रजननस्य माध्यमेन वनमहिषाणां संख्या वर्धयितुम् अयं प्रयासः क्रियते।
उदन्ती-सीतानदी-अभयारण्ये विद्यमानः ‘छोटू’ छत्तीसगढस्य मूलवनमहिषः इति मन्यते। प्रायः पञ्चविंशतिवर्षीयः सः अद्य दुर्लभस्य अस्य वन्यजीवप्रजातिसंरक्षणस्य वंशवृद्धेः च प्रमुखः आशाकेन्द्रः अभवत्। वर्धमानायाम् आयुषि अपि वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इण्डिया-संस्थायाः वैज्ञानिकैः स्वास्थ्यपरीक्षणानन्तरं सः प्रजननाय योग्यः इति निर्धारितः। अतः बारनवापारात् मादा वनमहिष्यः उदन्तीं नीत्वा ‘छोटू’ इत्यनेन सह प्राकृतिकप्रजननं कारयितुं योजना निर्मिता अस्ति।
२०२३ तमे वर्षे असमप्रदेशात् षट् वनमहिषाः उदन्ती-सीतानदी व्याघ्राभयारण्यम् आनीताः आसन्।
वनमहिषाणां संरक्षणाय तेषां संख्यावृद्धये च वर्षे २०२३ तमे असमप्रदेशस्य मानस-काजीरङ्गा-राष्ट्रिय-उद्यानाभ्यां षट् वनमहिषाः छत्तीसगढं नीत्वा बारनवापारा वन्यजीवाभयारण्ये स्थापिताः आसन्। संरक्षणस्य प्रजननस्य च प्रयासैः शुभपरिणामः प्राप्तः, अधुना बारनवापारायां तेषां संख्या त्रयोदश अभवत्। अतः वर्धितायाः संख्यायाः मध्येभ्यः त्रयः मादा वनमहिष्यः उदन्ती-सीतानदी व्याघ्राभयारण्यम् स्थानान्तरितुं सज्जतां क्रियते, येन तत्रापि प्राकृतिकप्रजननं वनमहिषसंरक्षणं च सुदृढं भवेत्।
उदन्ती-सीतानदी अभयारण्ये वनमहिषाणां स्थानान्तरणस्य योजना पूर्वमेव निर्धारिता आसीत्।
उदन्ती-सीतानदी व्याघ्राभयारण्यस्य उपनिदेशकः वरुण जैनः अवदत् यत् कतिपयकारणैः असमप्रदेशात् आनीताः वनमहिषाः प्रारम्भे बारनवापारायां स्थापिताः आसन्। तस्मिन् समये अपि परिस्थितीनां अनुकूलत्वे बारनवापारात् वनमहिषान् उदन्ती-सीतानदी व्याघ्राभयारण्यम् स्थानान्तरयितुं योजना पूर्वमेव आसीत्। अधुना तस्याः योजनायाः अन्तर्गतं त्रयः मादा वनमहिष्यः उदन्तीं नेतुं सज्जता क्रियते।
वनमहिषाणां प्राकृतिकवासस्थानस्य सुधाराय विशेषः प्रयासः
वनमहिषाणां संख्यावृद्धेः सह तेषां प्राकृतिक-आवासस्य सुदृढीकरणे अपि वनविभागः विशेषं ध्यानं ददाति। वन्यजीवविशेषज्ञैः विभागीयाधिकारिभिः च आवासविकासः, अवैधशिकारनिवारणाय प्रतिरोधोपायाः, निरन्तरनिरीक्षणं च क्रियते। वर्षे २०२३ तमे असमप्रदेशात् वनमहिषान् आनीय बारनवापारायां संरक्षण-प्रजननयोः प्रयासः अपि अस्य व्यापककार्यक्रमस्य भागः आसीत्। अधुना बारनवापारायां वर्धितसंख्यायाः त्रयः मादा वनमहिष्यः उदन्तीं प्रेषयितुं सज्जता क्रियते। अनेन छत्तीसगढस्य राजकीयपशोः संरक्षणसंवर्धन-अभियानाय नूतना गतिः प्राप्तुं शक्यते।


