12 लाख रुपये देकर आरक्षक बनने का सपना टूटा, तीन साल बाद भी न नौकरी मिली न पैसे लौटे; दुर्ग पुलिस ने दो आरोपियों को दबोचा। Promise of Police Constable Job for ₹12 Lakh Turns into Fraud: No Job Even After 3 Years, Money Not Returned; Durg Police Arrest Two Accused। द्वादशलक्षरूप्यकाणां विनिमयेन आरक्षकपदं निश्चितम् इति प्रलोभनम्—त्रिषु वर्षेषु अपि न नियुक्तिः, न च धनप्रत्यर्पणम्; दुर्गपुलिसेन द्वौ अभियुक्तौ गृहीतौ।

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दुर्ग जिले के उतई थाना क्षेत्र में पुलिस आरक्षक की नौकरी दिलाने के नाम पर 12 लाख रुपए की कथित ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि वर्ष 2023 में दो लोगों ने एक युवक और उसके स्वजन को नौकरी लगवाने का भरोसा दिलाकर उनसे 12 लाख रुपए ले लिए। लंबे समय तक नौकरी नहीं लगने पर परिवार ने अपनी रकम वापस मांगी, लेकिन आरोपियों ने पैसे लौटाने से भी इनकार कर दिया। इसके बाद पीड़ित पक्ष ने पुलिस से शिकायत की। मामले की जांच के बाद उतई पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

पुलिस के अनुसार, ग्राम सेलूद निवासी गैंदलाल बंछोर ने 20 अगस्त 2026 को थाने पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया कि बेमेतरा जिले के ग्राम अतरिया निवासी उमेश दास मानिकपुरी ने उनके पुत्र विकास बंछोर को पुलिस आरक्षक के पद पर भर्ती कराने का आश्वासन दिया था।कथित तौर पर सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर परिवार से कुल 12 लाख रुपए लिए गए। परिवार को उम्मीद थी कि रकम देने के बाद विकास की पुलिस आरक्षक के पद पर नियुक्ति हो जाएगी, लेकिन समय गुजरने के बावजूद भर्ती नहीं हो सकी। बाद में जब परिवार ने अपनी रकम वापस मांगी तो कथित रूप से पैसे भी नहीं लौटाए गए। इसके बाद गैंदलाल बंछोर

पुलिस जांच में सामने आया कि पीड़ित परिवार से रकम वर्ष 2023 में ली गई थी, लेकिन नौकरी नहीं लगने और पैसे वापस न मिलने पर करीब तीन साल बाद 20 अगस्त 2026 को उतई थाने में शिकायत दर्ज कराई गई। इस दौरान परिवार बेटे की नौकरी लगने या अपनी रकम वापस मिलने का इंतजार करता रहा।शिकायत मिलते ही उतई पुलिस ने मामले से जुड़े लेन-देन और आरोपों की जांच शुरू की। जांच के दौरान मिले साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने अपराध दर्ज कर दोनों आरोपियों की तलाश तेज कर दी। पुलिस टीम ने संभावित ठिकानों पर दबिश देकर ग्राम अतरिया निवासी उमेश दास मानिकपुरी और बिलासपुर निवासी राजेश वर्मा को गिरफ्तार कर लिया। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।

आरक्षक की नौकरी दिलाने के नाम पर कथित ठगी के मामले में पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ के साथ जांच का दायरा बढ़ा दिया है। जांच के दौरान आरोपियों से जुड़े बैंक खातों और एक मोबाइल फोन को जब्त किया गया है, ताकि पैसों के लेन-देन और अन्य साक्ष्यों की पड़ताल की जा सके।पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद न्यायालय में पेश किया। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने सरकारी विभाग में आरक्षक पद पर नौकरी दिलाने का भरोसा देकर युवक के परिवार से रकम ली थी। हालांकि नौकरी नहीं लगी और मांगे जाने पर कथित तौर पर पैसे भी वापस नहीं किए गए।इसी आधार पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का प्रकरण दर्ज किया है। फिलहाल उतई पुलिस बैंक लेन-देन, जब्त मोबाइल और इस पूरे मामले में आरोपियों की भूमिका से जुड़े अन्य तथ्यों की गहन जांच कर रही है।

English

A case of alleged fraud involving ₹12 lakh has surfaced in the Utai police station area of Durg district. The accused allegedly promised a young man a job as a police constable in 2023 and collected ₹12 lakh from his family. When the promised job did not materialize, the family demanded their money back, but the amount was allegedly not returned. Following a complaint, Utai Police investigated the matter and arrested both accused. Further legal action is underway.

According to the police, Gaindlal Banchhor, a resident of Selud village, submitted a written complaint at the police station on August 20, 2026. In his complaint, he alleged that Umesh Das Manikpuri, a resident of Atariya village in Bemetara district, had promised to get his son Vikas Banchhor recruited as a police constable.The family allegedly paid a total of ₹12 lakh on the assurance of securing the government job. They hoped that Vikas would be appointed as a police constable after the money was paid, but no recruitment materialised even after considerable time had passed. When the family later demanded the return of the money, the amount was allegedly not refunded. Gaindlal then approached the police and lodged a complaint.

The money was allegedly taken from the victim’s family in 2023, while the police complaint was filed at Utai police station on August 20, 2026—nearly three years later. During this period, the family reportedly waited either for the promised police job or for the return of their money.After receiving the complaint, Utai Police began examining the alleged financial transactions and other facts related to the case. Based on the evidence gathered during the investigation, a criminal case was registered and a search was launched for the accused. Police teams raided suspected locations and arrested Umesh Das Manikpuri of Atariya village and Rajesh Verma, a resident of Bilaspur. Further legal action is underway.

Police have expanded their investigation into the alleged fraud case involving a promise of a police constable job. Along with questioning the accused, investigators have seized bank accounts linked to the case and a mobile phone to examine financial transactions and gather further evidence.Both accused were produced before a court after their arrest. According to the police, they allegedly took money from a young man’s family after promising to secure him a job as a constable in a government department. However, the promised job did not materialise, and the money was allegedly not returned.Based on these allegations, a case of cheating has been registered. Utai Police are continuing to investigate the flow of money, the evidence contained in the seized mobile phone and the exact role of the accused in the case.

संस्कृत

दुर्गजनपदस्य उतई-थानाक्षेत्रे पुलिस-आरक्षकपदे नियुक्तिं कारयितुम् इति प्रलोभनं दत्त्वा द्वादशलक्षरूप्यकाणां कथितवञ्चनायाः प्रकरणं प्रकाशम् आगतम्। आरोपानुसारं वर्षे 2023 मध्ये द्वाभ्याम् अभियुक्ताभ्याम् एकस्मै युवकाय आरक्षकपदं प्रदास्यामः इति आश्वासनं दत्त्वा तस्य परिवारात् द्वादशलक्षरूप्यकाणि स्वीकृतानि। नियुक्तिः न प्राप्ता इति कारणेन परिवारजनैः धनं प्रत्यर्पयितुम् उक्तम्, किन्तु आरोपिभ्यां धनं न प्रत्यर्पितम्। ततः पीडितपक्षेण पुलिसप्रशासने शिकायत प्रेषिता। अन्वेषणानन्तरं उतईपुलिसेन द्वौ अभियुक्तौ गृहीतौ, अग्रिमविधिककार्यम् प्रचलति।

पुलिसविवरणानुसारं सेलूदग्रामनिवासी गैंदलाल बंछोरः 20 अगस्त 2026 दिनाङ्के थानं गत्वा लिखितां शिकायतं दत्तवान्। तस्य शिकायतानुसारं बेमेतरा-जनपदस्य अतरिया-ग्रामनिवासी उमेश दास मानिकपुरी इत्यनेन तस्य पुत्रस्य विकास बंछोरस्य पुलिस-आरक्षकपदे नियुक्तिं कारयितुं आश्वासनं दत्तम्।सरकारीनियुक्तिं कारयितुं इति वचनं दत्त्वा परिवारात् कुलं द्वादशलक्षरूप्यकाणि गृहीतानि इति आरोपः अस्ति। परिवारजनाः धनप्रदानानन्तरं विकासस्य आरक्षकपदे नियुक्तिः भविष्यतीति प्रतीक्षां कुर्वन्तः आसन्, किन्तु कालव्यतीतेऽपि नियुक्तिः न अभवत्। अनन्तरं परिवारजनैः स्वधनस्य प्रत्यर्पणं याचितम्, परन्तु कथितरूपेण धनं न प्रत्यर्पितम्। ततः गैंदलाल बंछोरः पुलिसप्रशासने शिकायतं प्रस्तुतवान्।

पीडितपरिवारात् वर्षे 2023 मध्ये धनराशिः गृहीता इति पुलिस-अन्वेषणे प्रकाशम् आगतम्। नियुक्तिः न प्राप्ता तथा धनं न प्रत्यर्पितम् इति कारणेन प्रायः त्रिवर्षानन्तरं 20 अगस्त 2026 दिनाङ्के उतई-थाने लिखिता शिकायतं दत्ता।एतस्मिन् समये परिवारजनाः नियुक्तेः अथवा स्वधनस्य प्रत्यर्पणस्य प्रतीक्षां कुर्वन्तः आसन्। शिकायतं प्राप्त्य उतई-पुलिसेन धनव्यवहारस्य आरोपसम्बद्धतथ्यानां च अन्वेषणम् आरब्धम्। अन्वेषणे प्राप्तसाक्ष्याणाम् आधारेण अपराधः पंजीकृतः तथा अभियुक्तयोः अन्वेषणं प्रारब्धम्। पुलिसदलैः संभावितस्थानेषु अन्वेषणं कृत्वा अतरिया-ग्रामनिवासी उमेश दास मानिकपुरी तथा बिलासपुरनिवासी राजेश वर्मा इत्येतौ अभियुक्तौ गृहीतौ। अग्रिमविधिककार्यवाही प्रचलति।

आरक्षकपदे नियुक्तिं कारयितुं इति आश्वासनं दत्त्वा कथितवञ्चनायाः प्रकरणे पुलिसेन अन्वेषणस्य विस्तारः कृतः। अभियुक्तयोः पृच्छापृच्छया सह प्रकरणसम्बद्धानि बैंक-खातानि तथा एकः चलदूरभाषः अपि जब्तः कृतः। एतेषां माध्यमेन धनव्यवहारस्य अन्येषां साक्ष्याणां च परीक्षणं क्रियते।गिरफ्तार्य उभौ अभियुक्तौ न्यायालयस्य सम्मुखं प्रस्तुतौ। पुलिसविवरणानुसारं सरकारीविभागे आरक्षकपदे नियुक्तिं कारयितुम् इति आश्वासनं दत्त्वा युवकस्य परिवारात् धनराशिः गृहीता आसीत्। किन्तु नियुक्तिः न अभवत् तथा धनं प्रत्यर्पितम् अपि न इति आरोपः अस्ति।एतेषां तथ्यानाम् आधारेण धोखाधड़ीसम्बद्धः अपराधः पंजीकृतः। सम्प्रति उतई-पुलिसः धनव्यवहारं, जब्तचलदूरभाषे उपलब्धान् साक्ष्यान् तथा अस्मिन् प्रकरणे अभियुक्तयोः भूमिकासम्बद्धान् अन्यान् तथ्यान् अन्वेषयति।

According to the police, Gaindlal Banchhor, a resident of Selud village, submitted a written complaint at the police station on August 20, 2026. In his complaint, he alleged that Umesh Das Manikpuri, a resident of Atariya village in Bemetara district, had promised to get his son Vikas Banchhor recruited as a police constable.The family allegedly paid a total of ₹12 lakh on the assurance of securing the government job. They hoped that Vikas would be appointed as a police constable after the money was paid, but no recruitment materialised even after considerable time had passed. When the family later demanded the return of the money, the amount was allegedly not refunded. Gaindlal then approached the p

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