MP Tourism: पातालपानी-कालाकुंड हेरिटेज ट्रेन में प्रकृति के बीच रोमांचक सफर, रास्ते से किराए तक जानें पूरी डिटेल। MP Tourism: A Scenic Ride on the Patalpani-Kalakund Heritage Train, Know the Route, Fare and Complete Travel Guide। मध्यप्रदेश पर्यटनम्: पातालपानी-कालाकुण्ड विरासत-रेलयानेन रमणीययात्रा, मार्गात् शुल्कपर्यन्तं सम्पूर्णविवरणम्।
प्रकृति के साथ स्वाद का भी आनंद: हेरिटेज ट्रेन से सफर के दौरान पर्यटक पातालपानी के मनमोहक झरने और हरी-भरी वादियों का नजारा देख सकेंगे। यात्रा के बीच भेल, मैगी, भुट्टा और चाट जैसे स्थानीय स्वादों का भी लुत्फ उठाया जा सकता है। पातालपानी झरने के समीप टंट्या भील का मंदिर भी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है।

महू। मालवा की हरियाली, पहाड़ी इलाकों और मनमोहक प्राकृतिक दृश्यों के बीच हेरिटेज ट्रेन का रोमांच एक बार फिर शुरू होने जा रहा है। करीब नौ महीने के अंतराल के बाद पातालपानी-कालाकुंड हेरिटेज ट्रेन शनिवार से पर्यटकों के लिए फिर पटरी पर दौड़ेगी। रतलाम मंडल ने संचालन को लेकर तैयारियां पूरी कर ली हैं और गुरुवार को ट्रेन का परीक्षण भी किया गया। फिलहाल महू से पातालपानी रेलवे स्टेशन तक सीधी रेल सेवा उपलब्ध नहीं होने के चलते यात्रियों को सड़क मार्ग से पातालपानी पहुंचना पड़ेगा।

पातालपानी-कालाकुंड हेरिटेज ट्रेन एक बार फिर पर्यटकों के लिए खास आकर्षण बनने जा रही है। शनिवार से शुरू होने वाली इस ट्रेन की ऑनलाइन बुकिंग भी शुरू हो चुकी है। ट्रेन का संचालन सप्ताह में तीन दिन—शुक्रवार, शनिवार और रविवार—किया जाएगा। सफर के दौरान पर्यटक पातालपानी के मनमोहक झरने और हरी-भरी वादियों का आनंद लेने के साथ भेल, मैगी, भुट्टा और चाट जैसे स्थानीय व्यंजनों का स्वाद भी ले सकेंगे। पातालपानी झरने के पास स्थित टंट्या भील मंदिर भी यात्रा का प्रमुख आकर्षण रहेगा। आगे बढ़ते हुए ट्रेन अंग्रेजों के दौर में बनाए गए पुराने बोगदों और पुलों से होकर गुजरेगी। पहाड़ियों के बीच अलग-अलग स्थानों से बहते झरने इस यात्रा को और भी यादगार बनाएंगे।

शनिवार को सुबह 11:05 बजे पातालपानी से हेरिटेज ट्रेन का प्रस्थान
हेरिटेज ट्रेन के इंजन और कोच बीकानेर में आवश्यक मेंटेनेंस के बाद महू स्टेशन पहुंच गए हैं। ट्रेन शनिवार सुबह 11:05 बजे पातालपानी से कालाकुंड के लिए रवाना होगी और दोपहर 1:05 बजे कालाकुंड पहुंचेगी। वापसी यात्रा में ट्रेन शाम 3:34 बजे कालाकुंड से पातालपानी के लिए चलेगी और 4:30 बजे पातालपानी रेलवे स्टेशन पहुंचेगी
नौ महीने के लंबे विराम के बाद फिर पटरी पर दौड़ेगी हेरिटेज ट्रेन
करीब नौ महीने बाद फिर शुरू होगी हेरिटेज ट्रेन सेवापातालपानी-कालाकुंड के बीच संचालित हेरिटेज ट्रेन को आमतौर पर गर्मी के मौसम में मार्च से अस्थायी रूप से बंद किया जाता था। हालांकि, पिछले वर्ष पातालपानी-कालाकुंड मीटरगेज रेलमार्ग को हेरिटेज ट्रैक का दर्जा मिलने के बाद इसके रखरखाव और प्रस्तावित विकास कार्यों के चलते 21 नवंबर 2025 से ट्रेन सेवा रोक दी गई थी। अब लगभग नौ महीने के लंबे अंतराल के बाद ट्रेन का संचालन दोबारा शुरू किया जा रहा है।
कोच से पीवीसी शीट गायब, हेरिटेज ट्रेन की खूबसूरती पर पड़ा असर
इस बार पातालपानी-कालाकुंड हेरिटेज ट्रेन का आकर्षण पहले की तुलना में कुछ कम नजर आ रहा है। पश्चिम रेलवे ने पहले ट्रेन के कोचों को हेरिटेज रूट के प्रमुख प्राकृतिक स्थलों की तस्वीरों वाली पीवीसी शीट से सजाया था। इसकी वजह से यात्री ट्रेन के साथ तस्वीरें खिंचवाने के लिए भी उत्साहित रहते थे। हालांकि, हालिया मेंटेनेंस के दौरान ये शीट हटा दी गईं, जिससे फिलहाल कोच सामान्य रेलवे डिब्बों की तरह दिखाई दे रहे हैं। इससे पर्यटकों को थोड़ी निराशा हो सकती है। पश्चिम रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार के अनुसार, कोच पर पीवीसी शीट लगाने के लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है और प्रक्रिया पूरी होने के बाद ट्रेन को फिर से पहले जैसा आकर्षक रूप दिया जाएगा।
विस्टाडोम कोच में रोमांचक सफर के लिए 265 रुपये होगा किराया
- हेरिटेज ट्रेन के कोचों की संख्या और किराए में इस बार कोई बदलाव नहीं किया गया है। ट्रेन में कुल पांच कोच होंगे, जिनमें दो विस्टाडोम कोच शामिल हैं। इन कोचों में पारदर्शी कांच की खिड़कियों से यात्री सफर के दौरान प्राकृतिक नजारों का आनंद ले सकेंगे। इसके अलावा ट्रेन में तीन सेकंड क्लास कोच भी रहेंगे।
- हेरिटेज ट्रेन के प्रत्येक विस्टाडोम कोच में 60 यात्रियों के बैठने की क्षमता है। इस हिसाब से दोनों विस्टाडोम कोच में कुल 120 सीटें उपलब्ध रहेंगी।
- हेरिटेज ट्रेन में नॉन-एसी चेयर कार के तीन कोच होंगे
- हेरिटेज ट्रेन के तीन नॉन-एसी चेयर कार कोच में यात्रियों के लिए कुल 152 सीटों की व्यवस्था है। इनमें दो कोच में 64-64 सीटें, जबकि तीसरे कोच में 24 सीटें उपलब्ध हैं। नॉन-एसी चेयर कार में सफर करने वाले यात्रियों से प्रति व्यक्ति 20 रुपये किराया लिया जाएगा।
पातालपानी-कालाकुंड हेरिटेज ट्रेन में विस्टाडोम कोच पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण बने हुए हैं। यात्रियों को अधिक आरामदायक और बेहतर अनुभव देने के उद्देश्य से रेलवे ने करीब चार वर्ष पहले ट्रेन में एसी विस्टाडोम कोच शामिल किए थे। इन कोचों में बड़े शीशे वाली खिड़कियां, ट्रेलिंग विंडो, स्नैक्स टेबल और साइड पेंट्री जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए स्वच्छ टॉयलेट की व्यवस्था भी की गई है। बड़े कांच के शीशों से पहाड़ियों, हरियाली और घाटियों के प्राकृतिक दृश्यों को निहारना इस रेल सफर को खास और यादगार बनाता है।
25 दिसंबर 2018 को शुरू हुआ था हेरिटेज ट्रेन का पहला सफर
मध्य प्रदेश के एकमात्र हेरिटेज ट्रैक पर चलने वाली हेरिटेज ट्रेन की शुरुआत 25 दिसंबर 2018 को हुई थी। संचालन शुरू होने के कुछ ही समय में यह ट्रेन मध्य प्रदेश के साथ देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले पर्यटकों के बीच लोकप्रिय हो गई। कोरोना संक्रमण के दौर में अप्रैल 2020 में इसकी सेवा रोक दी गई थी। इसके बाद ट्रेन में कई बदलाव और सुविधाएं जोड़कर 4 अगस्त 2021 को इसका संचालन फिर से शुरू किया गया।
महू से पातालपानी तक सीधी रेल कनेक्टिविटी अब भी बनी चुनौती
हेरिटेज ट्रेन की सवारी की योजना बना रहे पर्यटकों के सामने फिलहाल महू से पातालपानी रेलवे स्टेशन तक पहुंचना बड़ी परेशानी है। महू और पातालपानी के बीच सीधी रेल सेवा उपलब्ध नहीं है। इंदौर से यात्री बस या ट्रेन के जरिए महू पहुंच सकते हैं, लेकिन इसके बाद पातालपानी स्टेशन जाने के लिए ऑटो रिक्शा या निजी वाहन का सहारा लेना पड़ता है। महू से पातालपानी तक फिलहाल कोई सीधा सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध नहीं होने से यात्रियों को अतिरिक्त परेशानी उठानी पड़ती है।
English
Scenic Views and Local Flavors: During the heritage train journey, tourists can enjoy the picturesque Patalpani waterfall and beautiful surrounding valleys. The trip also offers an opportunity to taste popular local snacks such as bhel, Maggi, roasted corn and chaat. A temple dedicated to tribal freedom fighter Tantya Bhil near Patalpani waterfall is another attraction for visitors.
Mhow: The much-awaited Patalpani-Kalakund Heritage Train is all set to resume its scenic journey through the lush green landscapes, hills and natural beauty of the Malwa region. After a gap of nearly nine months, the heritage train will once again take tourists on a memorable ride from Saturday. Ratlam Division has completed all preparations for its operation, while a trial run was conducted on Thursday. At present, as there is no direct rail connectivity between Mhow and Patalpani railway station, tourists will have to reach Patalpani by road.
Bookings for the train, scheduled to resume from Saturday, have already begun. The heritage train will operate three days a week—Friday, Saturday and Sunday. During the journey, visitors can enjoy the picturesque Patalpani waterfall, lush green valleys and local delicacies such as bhel, Maggi, roasted corn and chaat. The Tantya Bhil Temple near the waterfall will be another key attraction. Further along the route, the train will pass through old tunnels and bridges built during the British era. Scenic waterfalls flowing through different parts of the valleys will add to the charm of the journey.
Heritage Train to Depart from Patalpani at 11:05 AM on Saturday
The engine and coaches of the heritage train have returned to Mhow station after undergoing maintenance in Bikaner. On Saturday, the train will depart from Patalpani for Kalakund at 11:05 AM and reach Kalakund Railway Station at 1:05 PM. On the return journey, it will leave Kalakund at 3:34 PM and arrive at Patalpani Railway Station at 4:30 PM.
Heritage Train to Resume Services After a Nine-Month Break
The heritage train operating between Patalpani and Kalakund was traditionally suspended from March during the summer season. However, after the Patalpani-Kalakund meter-gauge railway line was declared a heritage track last year, train operations were halted from November 21, 2025, to facilitate maintenance and proposed development works. After a gap of nearly nine months, the heritage train service is now set to resume.
Missing PVC Sheets on Coaches Diminish the Heritage Train’s Appeal
The Patalpani-Kalakund Heritage Train appears less attractive this time compared to its earlier appearance. Western Railway had previously decorated the coaches with PVC sheets featuring photographs of prominent scenic spots along the heritage route. The distinctive decoration became a popular backdrop for tourists taking photographs with the train. However, the sheets were removed during the latest maintenance work, leaving the coaches with an ordinary railway-coach appearance. This may disappoint some visitors. Western Railway Public Relations Officer Mukesh Kumar said that the tender process for installing new PVC sheets is underway, and the coaches will be restored to their earlier attractive look once the process is completed.
Vistadome Coach Journey to Cost ₹265
- There has been no change in the heritage train’s coach composition or fare. The train will continue to operate with five coaches, including two Vistadome coaches equipped with transparent glass windows. Passengers can enjoy scenic views throughout the journey, while the remaining three coaches will be second-class compartments.
- Each Vistadome coach of the heritage train has a seating capacity of 60 passengers. Therefore, the two Vistadome coaches together will provide a total of 120 seats.
- Heritage Train to Feature Three Non-AC Chair Car Coaches
- The three non-AC chair car coaches of the heritage train will have a total of 152 seats. Two coaches will have 64 seats each, while the third will accommodate 24 passengers. The fare for the non-AC chair car will be ₹20 per passenger.
Panoramic Vistadome Windows to Offer Stunning Views of Hills and Valleys
The Vistadome coaches of the Patalpani-Kalakund Heritage Train remain a major attraction for tourists. Around four years ago, the Railways introduced AC Vistadome coaches to make the journey more comfortable and enjoyable for passengers. These coaches feature large glass windows, trailing windows, snack tables and side pantry facilities. Clean toilets are also available for passenger convenience. The panoramic glass windows allow travelers to enjoy spectacular views of hills, greenery and valleys, making the journey a memorable tourism experience.
Direct Rail Connectivity from Mhow to Patalpani Remains a Challenge
Tourists planning to enjoy the heritage train journey currently face a connectivity issue while traveling from Mhow to Patalpani Railway Station. There is no direct rail service between Mhow and Patalpani. Visitors can reach Mhow from Indore by bus or train, but they need to use an auto-rickshaw or private vehicle to travel onward to Patalpani station. At present, the lack of direct public transport between Mhow and Patalpani makes the journey less convenient for tourists.
संस्कृत
प्रकृतिसौन्दर्येन सह स्वादस्यापि आनन्दः: विरासत-रेलयात्रायां पर्यटकाः पातालपानेः मनोहरं निर्झरं तथा हरिताभाः रमणीयाः उपत्यकाः द्रष्टुं शक्नुवन्ति। यात्रायां भेल्, मैगी, भुट्टम्, चाट् इत्यादीनां स्थानीय-व्यञ्जनानाम् आस्वादः अपि कर्तुं शक्यते। पातालपानि-निर्झरस्य समीपे टंट्या-भीलस्य मन्दिरम् अपि पर्यटकानां प्रमुखं आकर्षणम् अस्ति।
महू। मालवप्रदेशस्य हरिताभेषु रमणीयेषु प्रदेशेषु, पर्वतेषु तथा प्राकृतिकदृश्येषु पुनः विरासत-रेलयानस्य रोमाञ्चकारी यात्रा प्रारभ्यते। प्रायः नवमासानां विरामानन्तरं पातालपानी-कालाकुण्ड-विरासत-रेलयानं शनिवासरात् पुनः पर्यटकानां कृते सञ्चालयिष्यते। रतलाम-मण्डलेन रेलयानस्य संचालनाय सर्वाः व्यवस्थाः पूर्णाः कृताः, गुरुवासरे च परीक्षणयात्रा अपि सम्पन्ना। सम्प्रति महू-स्थानकात् पातालपानी-रेलस्थानकं प्रति प्रत्यक्ष-रेलसम्पर्कः नास्ति, अतः पर्यटकैः मार्गेण पातालपानीं गन्तव्यम् भविष्यति।
शनिवासरात् आरभ्यमाणस्य अस्य रेलयानस्य आरक्षणम् अपि प्रारब्धम् अस्ति। एतत् रेलयानं सप्ताहे त्रिषु दिवसेषु—शुक्रवासरे, शनिवासरे, रविवासरे च—सञ्चालयिष्यते। यात्राकाले पर्यटकाः पातालपानेः मनोहरं निर्झरं, हरिताभाः उपत्यकाः च अवलोकयिष्यन्ति तथा भेल्, मैगी, भुट्टम्, चाट् इत्यादीनां स्थानीय-व्यञ्जनानाम् आस्वादं करिष्यन्ति। निर्झरस्य समीपे स्थितं टंट्या-भीलस्य मन्दिरम् अपि प्रमुखं आकर्षणं भविष्यति। अग्रे गच्छन् रेलयानं आङ्ग्लशासनकालीनैः निर्मितैः प्राचीनैः सुरङ्गैः सेतुभिश्च गमिष्यति। पर्वतीयप्रदेशेषु विभिन्नस्थानेभ्यः प्रवहन्तः निर्झराः यात्रायाः सौन्दर्यं अधिकं वर्धयिष्यन्ति।
शनिवासरे प्रातः ११:०५ वादने पातालपानेः विरासत-रेलयानस्य प्रस्थानम्
शनिवासरात् विरासत-रेलयानस्य पुनः संचालनम्विरासत-रेलयानस्य इञ्जिनं तथा डब्बाः बीकानेर-नगरे आवश्यक-रक्षणकार्यं सम्पन्नं कृत्वा महू-रेलस्थानकं प्रत्यागतवन्तः। शनिवासरे प्रातः ११:०५ वादने रेलयानं पातालपानेः कालाकुण्डं प्रति प्रस्थास्यति तथा अपराह्णे १:०५ वादने कालाकुण्ड-रेलस्थानकं प्राप्स्यति। प्रत्यागमनयात्रायां रेलयानं अपराह्णे ३:३४ वादने कालाकुण्डात् पातालपानीं प्रति प्रस्थास्यति तथा सायं ४:३० वादने पातालपानी-रेलस्थानकं प्राप्स्यति।
नवमासीय-विरामानन्तरं पुनः पथे धाविष्यति विरासत-रेलयानम्
नवमासानन्तरं विरासत-रेलसेवा पुनः प्रारभ्यतेपातालपानी-कालाकुण्डयोः मध्ये सञ्चालिता विरासत-रेलसेवा सामान्यतः ग्रीष्मकाले मार्चमासात् स्थगिता भवति स्म। किन्तु गतवर्षे पातालपानी-कालाकुण्डयोः मीटरगेज-रेलमार्गस्य विरासत-मार्गरूपेण घोषणा कृता। ततः मार्गस्य संरक्षणकार्याणां प्रस्तावित-विकासकार्याणां च कारणेन २१ नवम्बर २०२५ दिनाङ्कात् रेलयानस्य संचालनं स्थगितम् आसीत्। अधुना प्रायः नवमासानां विरामानन्तरं रेलसेवा पुनः प्रारभ्यते।
कोचेषु पीवीसी-पत्राणाम् अभावेन विरासत-रेलयानस्य आकर्षणं न्यूनम्
अस्मिन् समये पातालपानी-कालाकुण्ड-विरासत-रेलयानस्य आकर्षणं पूर्वापेक्षया किञ्चित् न्यूनं दृश्यते। पश्चिम-रेलविभागेन पूर्वं रेलयानस्य कोचेषु विरासत-मार्गस्य प्रमुख-रमणीयस्थलानां चित्रयुक्ताः पीवीसी-पत्राः स्थापिताः आसन्। तेन पर्यटकाः रेलयानेन सह छायाचित्राणि ग्रहीतुं विशेषतया उत्साहिताः भवन्ति स्म। परन्तु अधुनातन-रक्षणकार्यकाले ते पीवीसी-पत्राः निष्कासिताः, अतः सम्प्रति कोचाः सामान्य-रेलयानवत् दृश्यन्ते। अनेन पर्यटकानां निराशा सम्भवति। पश्चिम-रेलविभागस्य जनसम्पर्क-अधिकारी मुकेश-कुमारस्य अनुसारं पीवीसी-पत्राणां स्थापनायै निविदा-प्रक्रिया प्रचलति। प्रक्रिया पूर्णा भवितुम् अनन्तरं रेलयानं पुनः पूर्ववत् आकर्षकरूपेण सज्जीकर्तुं व्यवस्था भविष्यति।
विस्टाडोम-कोचे रोमाञ्चक-यात्रायै २६५ रूप्यकाणि शुल्कम्
- विरासत-रेलयानस्य प्रत्येकस्मिन् विस्टाडोम-कोचे ६० यात्रिकाणां कृते आसनव्यवस्था अस्ति। अतः द्वयोः विस्टाडोम-कोचयोः मिलित्वा १२० आसनानि उपलब्धानि भविष्यन्ति।
- विरासत-रेलयानस्य संरचना तथा शुल्कं यथावत्, द्वौ विस्टाडोम-कोचौ समाविष्टौविरासत-रेलयानस्य कोच-संरचनायां तथा यात्राशुल्के अस्मिन् समये किमपि परिवर्तनं न कृतम् अस्ति। रेलयाने पञ्च कोचाः भविष्यन्ति, येषु द्वौ विस्टाडोम-कोचौ पारदर्शक-काच-वातायनयुक्तौ स्तः। यात्रिकाः यात्राकाले प्राकृतिकदृश्यानां मनोहरं दर्शनं कर्तुं शक्नुवन्ति। अन्येषु त्रिषु कोचेषु द्वितीय-श्रेणी-व्यवस्था भविष्यति।
- विरासत-रेलयाने नॉन-एसी-चेयरकारस्य त्रयः कोचाः भविष्यन्ति
- विरासत-रेलयाने विद्यमानेषु त्रिषु नॉन-एसी-चेयरकार-कोचेषु यात्रिकानां कृते कुलं १५२ आसनानि सन्ति। द्वयोः कोचयोः प्रत्येकस्मिन् ६४ आसनानि, तृतीये कोचे च २४ आसनानि सन्ति। नॉन-एसी-चेयरकारे यात्रायै प्रत्येक-यात्रिकात् २० रूप्यकाणि शुल्करूपेण स्वीकरिष्यन्ते।
विस्तृत-काचवातायनैः पर्वतानां रमणीय-उपत्यकानां च दर्शनम्
पातालपानी-कालाकुण्ड-विरासत-रेलयाने विस्टाडोम-कोचाः पर्यटकानां प्रमुखम् आकर्षणं सन्ति। यात्रिकाणां सुखदां आरामदायकां च यात्रां सुनिश्चितुं प्रायः चतुर्षु वर्षेषु पूर्वं रेलविभागेन वातानुकूलित-विस्टाडोम-कोचाः रेलयाने संयोजिताः आसन्। एतेषु कोचेषु विशालानि काचवातायनानि, ट्रेलिङ्ग-विण्डो, अल्पाहार-मेजः तथा पार्श्व-पेन्ट्री इत्यादीनि सुविधाः सन्ति। यात्रिकाणां सुविधार्थं स्वच्छ-शौचालयस्य व्यवस्था अपि अस्ति। विशालैः काचवातायनैः पर्वतानां, हरितप्रदेशानां तथा उपत्यकानां मनोहराणि प्राकृतिकदृश्यानि द्रष्टुं शक्यन्ते। एतदेव अस्य रेलसफरस्य विशेषतां वर्धयति।
२०१८ तमस्य वर्षस्य दिसम्बर-मासस्य २५ दिनाङ्के प्रथमं विरासत-रेलयानं प्रारब्धम्
मध्यप्रदेशस्य एकमात्रे विरासत-रेलमार्गे सञ्चाल्यमानस्य विरासत-रेलयानस्य प्रारम्भः २०१८ तमस्य वर्षस्य दिसम्बर-मासस्य २५ दिनाङ्के अभवत्। संचालनस्य आरम्भात् कतिपयेषु मासेष्वेव एतत् रेलयानं मध्यप्रदेशस्य तथा देशस्य विभिन्नप्रदेशेभ्यः आगच्छतां पर्यटकानां मध्ये लोकप्रियम् अभवत्। कोरोनाकालस्य कारणेन २०२० तमस्य वर्षस्य एप्रिल-मासे अस्य संचालनं स्थगितम्। ततः रेलयाने अनेकानि परिवर्तनानि सुविधाश्च कृत्वा २०२१ तमस्य वर्षस्य अगस्त-मासस्य ४ दिनाङ्के पुनः संचालनम् आरब्धम्।
महूतः पातालपानीपर्यन्तं प्रत्यक्ष-रेलसम्पर्कः अद्यापि चुनौती
विरासत-रेलयानेन यात्रां कर्तुम् इच्छूनां पर्यटकानां कृते सम्प्रति महूतः पातालपानी-रेलस्थानकं प्रति गमनं चुनौतीपूर्णम् अस्ति। महू-पातालपानीयोः मध्ये प्रत्यक्षः रेलसम्पर्कः उपलब्धः नास्ति। इन्दौरतः पर्यटकाः बसयानेन अथवा रेलयानेन महूं प्राप्तुं शक्नुवन्ति। ततः पातालपानी-रेलस्थानकं गन्तुं ऑटोरिक्षायाः अथवा निजवाहनस्य आश्रयः स्वीकरणीयः। सम्प्रति महूतः पातालपानीपर्यन्तं प्रत्यक्षं सार्वजनिक-परिवहनसाधनं न उपलब्धम् अस्ति, अतः यात्रिकानां कृते अतिरिक्ता असुविधा भवति।


