भारतमाला प्रोजेक्ट में अनियमितता का आरोप: प्रस्तावित मार्ग बदला, अवैध शेड को भी मिला मुआवजा। Alleged Irregularities in Bharatmala Project: Route Shifted, Compensation Reportedly Given for Illegal Shed. भारतमाला-परियोजनायां अनियमिततायाः आरोपः — मार्गः परिवर्तितः, अवैध-शेडाय अपि क्षतिपूर्तिः।

रायगढ़।भारतमाला परियोजना में मुआवजा वितरण को लेकर कथित अनियमितताओं के आरोप लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। आरोप है कि अधिकारियों ने सरकारी हितों की निगरानी करने के बजाय कथित तौर पर जमीन दलालों के हितों को प्राथमिकता दी, जिसके चलते ऐसी जमीन के लिए भी मुआवजा दिए जाने की स्थिति बनी, जहां भारतमाला परियोजना का निर्माण प्रस्तावित नहीं था।
बताया जा रहा है कि बाद में कोयला खदानों को प्रभावित होने से बचाने के लिए परियोजना का दूसरा एलाइनमेंट तय किया गया। इस पूरे मामले ने जमीन अधिग्रहण, मुआवजा वितरण और अधिकारियों की भूमिका को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामले से जुड़े आरोप इतने व्यापक बताए जा रहे हैं कि इसकी पूरी प्रक्रिया की जांच अपने आप में एक विस्तृत दस्तावेज बन सकती है। इसी क्रम में यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि क्या ऐसे मकान या पोल्ट्री फार्म को मुआवजा दिया गया, जिनके पास बिजली का कनेक्शन तक नहीं था।
धरमजयगढ़ क्षेत्र में भारतमाला परियोजना के तहत मुआवजा वितरण को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दावा है कि खेतों के बीच बिना बिजली कनेक्शन के मकान, गोदाम और पोल्ट्री फार्म संचालित होने के बावजूद इनके निर्माण को मुआवजे के दायरे में शामिल किया गया।
मामले में वर्ष 2023 के बायसी कॉलोनी स्थित खसरा नंबर 151 का उदाहरण दिया जा रहा है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, स्वरूपदास, प्रेमानंद दास और हराधन दास, पिता मंगलचंद दास के नाम पर अलग-अलग प्रकरण तैयार कर मुआवजा दिए जाने की बात सामने आई है।
दस्तावेजों में स्वरूपदास के नाम दर्ज निर्माण को पक्की ईंट और एजबेस्टस शीट से बना गोदाम बताया गया है। इसमें फर्श कच्चा था, प्लास्टर नहीं था और एक दरवाजा दर्ज किया गया। इस निर्माण के लिए 15,19,078 रुपये मुआवजा दिए जाने का उल्लेख है।
इसी खसरा नंबर की जमीन पर प्रेमानंद दास, पिता मंगलचंद दास के नाम से भी इसी प्रकार के निर्माण के लिए 15,25,406 रुपये मुआवजा दिए जाने की जानकारी सामने आई है।
इन दोनों मामलों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि निर्माण की वास्तविक स्थिति क्या थी, बिजली कनेक्शन की स्थिति क्या थी और अलग-अलग प्रकरणों में मुआवजे का निर्धारण किन आधारों पर किया गया। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मुआवजा प्रक्रिया में किसी तरह की अनियमितता हुई थी या नहीं।
धरमजयगढ़ में भारतमाला परियोजना के मुआवजा प्रकरण में एक और मामला सामने आया है, जिसने पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उपलब्ध विवरण के अनुसार, मंगलचंद के पुत्र हराधन को भी इसी प्रकार के निर्माण के लिए 12,98,168 रुपये का मुआवजा दिया गया।
राजस्व विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक, खसरा नंबर 151 को तीन हिस्सों में विभाजित किया गया। इनमें 151/1, रकबा 2.0930 हेक्टेयर, मंगलचंद के नाम दर्ज हुआ, जबकि 151/2, रकबा 0.7400 हेक्टेयर, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के नाम दर्ज किया गया। तीसरा हिस्सा 151/3 किसी व्यक्ति के नाम दर्ज नहीं बताया गया है।
इस मामले का अहम पहलू यह है कि मूल खसरा नंबर मंगलचंद के नाम पर होने के बावजूद मुआवजा उसके तीन पुत्रों—स्वरूपदास, प्रेमानंद दास और हराधन दास—के नाम पर अलग-अलग प्रकरण बनाकर दिए जाने की जानकारी सामने आई है।
मामले में बिजली कनेक्शन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। CSPDCL के सत्यापन के दौरान तीनों व्यक्तियों के नाम पर कोई स्थायी या अस्थायी विद्युत कनेक्शन नहीं मिलने की बात सामने आई है।
अब मुख्य सवाल यह है कि जिन निर्माणों के आधार पर मुआवजा तय किया गया, उनकी वास्तविक स्थिति क्या थी और मुआवजा अलग-अलग व्यक्तियों के नाम पर किस आधार पर निर्धारित किया गया। इन सवालों का जवाब राजस्व रिकॉर्ड, स्थल सत्यापन और मुआवजा प्रकरणों की विस्तृत जांच से ही स्पष्ट हो सकेगा।
हर मुआवजा केस के पीछे अलग कहानी, भारतमाला परियोजना में उठे कई सवाल।
हम भारतमाला परियोजना से जुड़े कथित मुआवजा घोटाले की दूसरी कड़ी सामने ला रहे हैं। धरमजयगढ़ का मामला धमतरी और रायपुर में सामने आए मामलों से अलग तस्वीर पेश करता है। यहां कर्नाटका पावर के दुर्गापुर टू सरिया और दुर्गापुर टू तराईमार कोल ब्लॉक के बीच से भारतमाला मार्ग गुजरने की स्थिति बनी थी। इसी दौरान एलाइनमेंट बदलने की मांग उठी।
आरोप है कि शासन की ओर से एलाइनमेंट परिवर्तन का कोई औपचारिक आदेश जारी होने से पहले ही तत्कालीन एसडीएम और तहसीलदार ने अवार्ड पारित कर मुआवजा वितरण शुरू कर दिया।
मामले में सबसे अधिक सवाल इस बात को लेकर उठ रहे हैं कि शुरुआती भुगतान कथित तौर पर उन लोगों को किया गया, जिन्होंने कृषि भूमि पर शेड और गोदाम जैसे निर्माण किए थे। इससे मुआवजा प्रक्रिया की गति, पात्रता और प्रशासनिक निर्णयों के समय को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
अब जांच का अहम बिंदु यही है कि एलाइनमेंट परिवर्तन का निर्णय कब और किस स्तर पर लिया गया, अवार्ड किस आधार पर पारित हुए और निर्माणों के सत्यापन के बाद मुआवजा तय करने की प्रक्रिया क्या रही।
निवासियों के नाम पर शेड और गोदाम का मुआवजा, उठे सवाल।
फटीक सरकार — 30,71,389 रुपए
ममता रानी व अन्य — 26,11,145 रुपए
अनिल सरकार — 18,62,282 रुपए
धनंजय हालदार — 24,12,583 रुपए
रतन बिस्वास — 31,83,882 रुपए
दयालचंद बिस्वास — 15,13,998 रुपए
स्वरूपदास पिता मंगलचंद — 15,19,078 रुपए
प्रेमानंद पिता मंगलचंद — 15,25,406 रुपए
हराधन पिता मंगलचंद — 12,98,168 रुपए
विमल किर्तुनिया — 6,48,354 रुपए
दुलाल बिस्वास — 11,93,771 रुपए
संतोष बिस्वास — 44,98,226 रुपए
भैरव मधु पिता अनिल — 34,01,522 रुपए
सुभाष मंडल — 8,66,238 रुपए
प्रभाष मंडल — 11,20,848 रुपए
श्रीवास मंडल — 10,77,278 रुपए
लक्ष्मी मजूमदार — 3,77,196 रुपए
अरुणा बाला — 12,20,637 रुपए
सुभाष राय पिता ज्योतिष — 18,60,733 रुपए
प्रियतोष हालदार — 8,62,544 रुपए
छह अन्य प्रभावित — 9,24,322 रुपए
(English)
Allegations of widespread irregularities in the compensation process linked to the Bharatmala project are raising serious questions. It is alleged that some officials, instead of protecting government interests, allegedly favoured the interests of land intermediaries, resulting in compensation being considered or paid for land where the Bharatmala project was reportedly not going to be constructed.
It is further alleged that a second alignment was later finalized to avoid affecting coal mines. The developments have raised questions about the land acquisition process, compensation payments and the role of officials involved
The scale of the allegations has led to demands for a detailed examination of the entire process. Questions have also been raised over claims involving houses and poultry farms that allegedly did not even have electricity connections.
A case related to compensation under the Bharatmala project has raised serious questions in the Dharamjaigarh area. It is alleged that houses, warehouses and poultry farms operating amid agricultural fields, reportedly without electricity connections, were nevertheless included for construction compensation.
One cited example relates to Khasra No. 151 in Baisi Colony in 2023. According to the available details, separate compensation cases were prepared in the names of Swaroop Das, Premanand Das and Haradhan Das, sons of Mangal chand Das.
The records reportedly describe the structure attributed to Swaroop Das as a warehouse made of brick masonry and asbestos sheets, with an unfinished floor, no plaster and one door. Compensation of ₹15,19,078 is mentioned for this structure.
On the same piece of land, compensation of ₹15,25,406 was reportedly granted to Premanand Das, son of Mangal chand Das, for a similar type of construction.
The cases raise questions about the actual condition of the structures, their electricity status and the basis on which separate compensation amounts were assessed. A fair and detailed investigation would be required to establish whether any irregularity occurred in the compensation process.
Another case has emerged in connection with compensation under the Bharatmala project in Dharamjaigarh, raising questions over the process. According to the available details, ₹12,98,168 was reportedly paid to Haradhan, son of Mangal chand, for a similar type of construction.
Revenue records reportedly show that Khasra No. 151 was divided into three portions. Khasra 151/1, measuring 2.0930 hectares, was recorded in the name of Mangal chand, while Khasra 151/2, measuring 0.7400 hectares, was recorded in the name of the Ministry of Road Transport and Highways. The third portion, Khasra 151/3, is reportedly not recorded in anyone’s name.
The significant point in the case is that although the original Khasra No. 151 was recorded in Mangal chand name, separate compensation cases were reportedly prepared in the names of his three sons—Swaroop Das, Premanand Das and Haradhan Das.
The electricity connection records have raised another question. During verification by CSPDCL, no permanent or temporary electricity connection was reportedly found in the names of any of the three individuals.
The key questions now are: What was the actual status of the structures for which compensation was assessed, and on what basis was compensation sanctioned separately in the names of the three sons? A detailed examination of revenue records, site verification and compensation files would be necessary to establish the facts.
A Different Story Behind Every Compensation Case, Multiple Questions Raised in Bharatmala Project.
We present the second part of the alleged compensation irregularities linked to the Bharatmala project. The Dharamjaigarh case appears different from the cases reported in Dhamtari and Raipur. The Bharatmala route was reportedly planned between Karnataka Power’s Durgapur-to-Sariya and Durgapur-to-Taraimar coal blocks, following which demands emerged for a change in the alignment.
It is alleged that before the government issued any formal order regarding the proposed alignment change, the then SDM and Tehsildar passed the awards and began distributing compensation.
Questions have particularly been raised over the alleged priority given to people who had constructed sheds and warehouses on agricultural land. This has brought the timing of administrative decisions, verification of structures and eligibility for compensation under scrutiny.
The key issues now are when and at what level the alignment-change decision was taken, on what basis the awards were passed, and how the structures were verified before compensation was determined.
Compensation for Sheds and Warehouses Issued in Residents’ Names, Questions Raised.
Fatik Sarkar — ₹30,71,389
Mamata Rani and Others — ₹26,11,145
Anil Sarkar — ₹18,62,282
Dhananjay Haldar — ₹24,12,583
Ratan Biswas — ₹31,83,882
Dayalchand Biswas — ₹15,13,998
Swaroopdas, son of Mangalchand — ₹15,19,078
Premanand, son of Mangalchand — ₹15,25,406
Haradhan, son of Mangalchand — ₹12,98,168
Bimal Kirtunia — ₹6,48,354
Dulal Biswas — ₹11,93,771
Santosh Biswas — ₹44,98,226
Bhairav Madhu, son of Anil — ₹34,01,522
Subhash Mandal — ₹8,66,238
Prabhash Mandal — ₹11,20,848
Shribas Mandal — ₹10,77,278
Lakshmi Majumdar — ₹3,77,196
Aruna Bala — ₹12,20,637
Subhash Rai, son of Jyotish — ₹18,60,733
Priyatosh Haldar — ₹8,62,544
Six other affected persons — ₹9,24,322
(संस्कृत)
भारतमाला-परियोजनायाः सम्बन्धितायां क्षतिपूर्ति-वितरण-प्रक्रियायां व्यापकानाम् अनियमिततानाम् आरोपाः समुत्थिताः सन्ति। आरोपः अस्ति यत् केचन अधिकारी राजकीयहितस्य संरक्षणस्य स्थाने भूमिमध्यस्थेषां हितं प्राथमिकतया दृष्टवन्तः, येन तत्रापि भूमेः कृते क्षतिपूर्तेः व्यवस्था जाता, यत्र भारतमाला-परियोजनायाः निर्माणं प्रस्तावितं नासीत्।
अनन्तरं कोयला-खनयः प्रभाविताः न भवेयुः इति हेतोः परियोजनायाः कृते द्वितीया मार्गरेखा निर्धारितेति कथ्यते। अस्मिन् प्रकरणे भूमिग्रहण-प्रक्रियायाः, क्षतिपूर्ति-वितरणस्य तथा सम्बन्धिताधिकारिणां भूमिकायाः विषये अनेकाः प्रश्नाः उत्पन्नाः सन्ति।
अस्य प्रकरणस्य आरोपाः व्यापकाः कथ्यन्ते। अतः सम्पूर्णस्य प्रकरणस्य विस्तृत-परीक्षणस्य आवश्यकता इति प्रश्नः उत्थापितः अस्ति। विद्युत्-संयोजनं विना स्थितानां गृहाणां तथा कुक्कुटपालन-केन्द्राणां कृते अपि क्षतिपूर्तिः दत्ता वा इति विषये अपि प्रश्नाः पृष्टाः सन्ति।
धरमजयगढ़-क्षेत्रे भारतमाला-परियोजनायाः अन्तर्गतं क्षतिपूर्ति-वितरणं प्रति एकं प्रकरणं समुपस्थितम् अस्ति, येन सम्पूर्णायाः प्रक्रियायाः विषये गम्भीराः प्रश्नाः उत्पन्नाः सन्ति। आरोपः अस्ति यत् कृषिक्षेत्राणां मध्ये विद्युत्-संयोजनं विना स्थितानि गृहाणि, भाण्डागाराणि तथा कुक्कुटपालन-केन्द्राणि अपि निर्माण-क्षतिपूर्तेः अन्तर्भुक्तानि कृतानि।
२०२३ तमे वर्षे बायसी-कॉलोनी-स्थितस्य खसरा-संख्या १५१ इत्यस्य उदाहरणं प्रस्तुतं क्रियते। उपलब्ध-विवरणानुसारं स्वरूपदासः, प्रेमानन्ददासः तथा हराधनदासः मंगलचन्ददासस्य पुत्राः इति नामभिः पृथक्-पृथक् प्रकरणानि निर्माय क्षतिपूर्तिः प्रदत्तेति कथ्यते।
अभिलेखेषु स्वरूपदासस्य नाम्ना उल्लिखितं निर्माणं पक्क-इष्टिकाभिः एजबेस्टस्-पत्रैश्च निर्मितं भाण्डागारम् इति वर्णितम् अस्ति। तस्य भूमितलं कच्चम् आसीत्, भित्तिषु लेपनं नासीत् तथा एकं द्वारम् उल्लिखितम् आसीत्। अस्य निर्माणस्य कृते १५,१९,०७८ रुप्यकाणां क्षतिपूर्तिः प्रदत्तेति विवरणे उल्लिखितम् अस्ति।
तस्मिन् एव भूमिखण्डे मंगलचन्ददासस्य पुत्रस्य प्रेमानन्ददासस्य नाम्ना समानप्रकारस्य निर्माणस्य कृते १५,२५,४०६ रुप्यकाणां क्षतिपूर्तिः प्रदत्तेति कथ्यते।
एतेषां प्रकरणानां कारणेन निर्माणस्य वास्तविकस्थितेः, विद्युत्-संयोजनस्य तथा पृथक्-पृथक् प्रकरणेषु क्षतिपूर्ति-निर्धारणस्य आधारस्य विषये प्रश्नाः उत्पन्नाः सन्ति। निष्पक्षया विस्तृतया च जाँचया एव एतत् स्पष्टं भविष्यति यत् क्षतिपूर्ति-प्रक्रियायां काचित् अनियमितता अभवत् वा न वा।
धरमजयगढ़े भारतमाला-परियोजनायाः क्षतिपूर्ति-प्रकरणे अन्यत् एकं प्रकरणं प्रकाशम् आगतम् अस्ति, येन सम्पूर्णायाः प्रक्रियायाः विषये प्रश्नाः उत्पन्नाः सन्ति। उपलब्ध-विवरणानुसारं मंगलचन्दस्य पुत्राय हराधनाय अपि समानप्रकारस्य निर्माणस्य कृते १२,९८,१६८ रुप्यकाणां क्षतिपूर्तिः प्रदत्तेति कथ्यते।
राजस्व-विभागस्य अभिलेखानुसारं खसरा-संख्या १५१ इति भूमिः त्रिषु भागेषु विभक्ता अभवत्। १५१/१ इति भागस्य क्षेत्रफलं २.०९३० हेक्टेयर अस्ति, सः मंगलचन्दस्य नाम्नि अभिलेखितः। १५१/२ इति भागस्य क्षेत्रफलं ०.७४०० हेक्टेयर अस्ति, सः सड़क-परिवहन-राजमार्ग-मन्त्रालयस्य नाम्नि अभिलेखितः। तृतीयः भागः १५१/३ इति अस्ति, यः कस्यापि व्यक्तेः नाम्नि अभिलेखितः नास्तीति कथ्यते।
अस्य प्रकरणस्य महत्त्वपूर्णः पक्षः अयं यत् मूल-खसरा-संख्या १५१ मंगलचन्दस्य नाम्नि स्थितेऽपि तस्य त्रिभ्यः पुत्रेभ्यः—स्वरूपदासाय, प्रेमानन्ददासाय तथा हराधनाय—पृथक्-पृथक् प्रकरणानि निर्माय क्षतिपूर्तिः प्रदत्तेति विवरणं प्राप्यते।
विद्युत्-संयोजनस्य विषये अपि प्रश्नाः उत्पन्नाः सन्ति। CSPDCL-संस्थया कृतस्य सत्यापनस्य समये त्रयाणामपि नामसु स्थायी अथवा अस्थायी विद्युत्-संयोजनं न प्राप्तमिति कथ्यते।
अधुना मुख्यः प्रश्नः अस्ति यत् येषां निर्माणानां आधारेण क्षतिपूर्तिः निर्धारिताभवत्, तेषां वास्तविकस्थितिः का आसीत् तथा त्रिभ्यः पुत्रेभ्यः पृथक्-पृथक् क्षतिपूर्तिः केन आधारेण निर्धारिताभवत्। राजस्व-अभिलेखानां, स्थल-सत्यापनस्य तथा क्षतिपूर्ति-प्रकरणानां विस्तृत-परीक्षणेन एव वास्तविकतथ्यं स्पष्टं भविष्यति।
प्रत्येक-क्षतिपूर्ति-प्रकरणस्य पृष्ठे पृथक् कथा, भारतमाला-परियोजनायां बहवः प्रश्नाः।
वयं भारतमाला-परियोजनायां कथितायाः क्षतिपूर्ति-अनियमिततायाः द्वितीयं प्रकरणं प्रस्तुतयामः। धरमजयगढ़स्य प्रकरणं धमतरी-रायपुर-क्षेत्रयोः प्रकरणेभ्यः भिन्नं दृश्यं प्रस्तुतयति। कर्नाटका-पावर-संस्थायाः दुर्गापुर-सारिया तथा दुर्गापुर-तराईमार कोयला-खनिक्षेत्रयोः मध्येण भारतमाला-मार्गः गन्तुं प्रस्तावितः आसीत्। ततः मार्गरेखायाः परिवर्तनस्य मागः समुत्थितः।
आरोपः अस्ति यत् शासनस्य पक्षतः मार्गरेखायाः परिवर्तनस्य औपचारिकः आदेशः निर्गतस्य पूर्वमेव तत्कालीन-एसडीएम-महोदयेन तथा तहसीलदारेण पुरस्कार-निर्णयः कृत्वा क्षतिपूर्ति-वितरणं प्रारब्धम्।
विशेषतः कृषिभूमौ शेड-भाण्डागारादीनां निर्माणं कृतवद्भ्यः व्यक्तिभ्यः प्रारम्भिकरूपेण क्षतिपूर्तिः प्रदत्ता इति आरोपः अस्ति। अनेन क्षतिपूर्ति-प्रक्रियायाः कालक्रमस्य, पात्रतायाः तथा प्रशासनिक-निर्णयानां विषये प्रश्नाः उत्पन्नाः सन्ति।
अधुना मुख्यतया एतत् परीक्षितव्यं यत् मार्गरेखायाः परिवर्तनस्य निर्णयः कदा केन च स्तरस्य अधिकारीभिः कृतः, केन आधारेण पुरस्कार-निर्णयाः पारिताः तथा निर्माणानां सत्यापनानन्तरं क्षतिपूर्तेः निर्धारणं कथं कृतम्।
निवासिनां नाम्ना शेड-भाण्डागाराणां क्षतिपूर्तिः, उत्पन्नाः प्रश्नाः।
फटीक-सरकारः — ३०,७१,३८९ रुप्यकाणि
ममता-रानी तथा अन्ये — २६,११,१४५ रुप्यकाणि
अनिल-सरकारः — १८,६२,२८२ रुप्यकाणि
धनञ्जय-हालदारः — २४,१२,५८३ रुप्यकाणि
रतन-बिस्वासः — ३१,८३,८८२ रुप्यकाणि
दयालचन्द-बिस्वासः — १५,१३,९९८ रुप्यकाणि
स्वरूपदासः, मंगलचन्दस्य पुत्रः — १५,१९,०७८ रुप्यकाणि
प्रेमानन्दः, मंगलचन्दस्य पुत्रः — १५,२५,४०६ रुप्यकाणि
हराधनः, मंगलचन्दस्य पुत्रः — १२,९८,१६८ रुप्यकाणि
विमल-किर्तुनियाः — ६,४८,३५४ रुप्यकाणि
दुलाल-बिस्वासः — ११,९३,७७१ रुप्यकाणि
सन्तोष-बिस्वासः — ४४,९८,२२६ रुप्यकाणि
भैरव-मधुः, अनिलस्य पुत्रः — ३४,०१,५२२ रुप्यकाणि
सुभाष-मण्डलः — ८,६६,२३८ रुप्यकाणि
प्रभाष-मण्डलः — ११,२०,८४८ रुप्यकाणि
श्रीवास-मण्डलः — १०,७७,२७८ रुप्यकाणि
लक्ष्मी-मजूमदारः — ३,७७,१९६ रुप्यकाणि
अरुणा-बाला — १२,२०,६३७ रुप्यकाणि
सुभाष-रायः, ज्योतिषः पुत्रः — १८,६०,७३३ रुप्यकाणि
प्रियतोष-हालदारः — ८,६२,५४४ रुप्यकाणि
अन्ये षट् प्रभाविताः — ९,२४,३२२ रुप्यकाणि


