छत्तीसगढ़ के जूनियर डॉक्टरों को दिल्ली, बिहार और गुजरात से कम स्टाइपेंड, आंदोलन की तैयारी; सरकार को 15 दिन का अल्टीमेटम। Chhattisgarh Junior Doctors Get Lower Stipends Than Delhi, Bihar and Gujarat; Agitation Preparations Underway, Government Given 15-Day Ultimatum। छत्तीसगढस्य कनिष्ठचिकित्सकानां वृत्तिभृतिः दिल्ली-बिहार-गुजरातराज्येभ्यः न्यूना, आन्दोलनस्य सज्जता; शासनाय पञ्चदशदिनानाम् अन्तिमावधिः।

0

दो वर्षों से अधिक समय से स्टाइपेंड में कोई बढ़ोतरी नहीं होने से जूनियर डॉक्टरों में नाराजगी बढ़ गई है। मांगों के निराकरण के लिए डॉक्टरों ने आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर ली है। इसी क्रम में शुक्रवार को प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों में डीन को 17 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा जाएगा। डॉक्टरों को उम्मीद है कि इस पहल के बाद सरकार उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय लेगी।

रायपुर। छत्तीसगढ़ के मेडिकल कॉलेजों में अध्ययनरत पीजी (स्नातकोत्तर) डॉक्टरों को अन्य राज्यों की तुलना में कम स्टाइपेंड मिलने का मुद्दा अब तूल पकड़ता जा रहा है। दो वर्षों से अधिक समय से स्टाइपेंड में कोई बढ़ोतरी नहीं होने पर डॉक्टरों में नाराजगी बढ़ गई है और उन्होंने आंदोलन की रणनीति तैयार कर ली है।आंदोलन के पहले चरण में शुक्रवार को प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों के डीन को 17 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा जाएगा। इसके बाद डॉक्टर अपनी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, राज्य के मंत्रियों, संबंधित क्षेत्रों के विधायकों और जिला कलेक्टरों तक पहुंचाने की तैयारी में हैं।

अन्य राज्यों के मुकाबले डॉक्टरों का स्टाइपेंड कम, बढ़ा असंतोष

पीजी डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि यदि 15 दिनों के भीतर उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। वर्तमान में छत्तीसगढ़ में पीजी डॉक्टरों को 67,500 रुपये से 74,600 रुपये प्रतिमाह तक स्टाइपेंड दिया जा रहा है।इसके विपरीत अन्य राज्यों में पीजी डॉक्टरों को इससे कहीं अधिक स्टाइपेंड मिल रहा है। दिल्ली में 1,32,336 रुपये, बिहार में 1,29,962 रुपये, उत्तर प्रदेश में 1,06,380 रुपये, गुजरात में 1,00,800 रुपये, हरियाणा में 1,00,980 रुपये और महाराष्ट्र में 92,470 रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड निर्धारित है।डॉक्टरों का कहना है कि कार्य की प्रकृति, जिम्मेदारियां और काम का दबाव लगभग समान होने के बावजूद उन्हें दूसरे राज्यों की तुलना में काफी कम आर्थिक सहायता मिल रही है। इसी असमानता को दूर करने के लिए वे लंबे समय से स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।

अस्पतालों में लंबी ड्यूटी, लगातार बढ़ते कार्यदबाव और मरीजों की देखभाल जैसी अहम जिम्मेदारियों के बावजूद डॉक्टरों को आर्थिक रूप से पर्याप्त प्रोत्साहन नहीं मिल पाने की शिकायत है। स्टाइपेंड और अन्य मांगों को लेकर डॉक्टर पहले हस्ताक्षर अभियान भी चला चुके हैं। पिछले छह महीनों से वे चरणबद्ध तरीके से स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग उठा रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी मांगों पर अपेक्षित निर्णय नहीं लिया गया है।

जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (जेडीए) के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. रेशम रत्नाकर ने कहा कि रेजिडेंट डॉक्टर अस्पताल व्यवस्था की रीढ़ हैं। वे नियमित चिकित्सा सेवाओं के साथ-साथ आपातकालीन परिस्थितियों में भी अग्रिम पंक्ति में रहकर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाते हैं। इसके बावजूद उन्हें मिलने वाला पारिश्रमिक राष्ट्रीय औसत की तुलना में काफी कम है।उन्होंने बताया कि शुक्रवार से मेडिकल कॉलेजों में 17 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। यदि 15 दिनों के भीतर मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो डॉक्टर आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।

English

Raipur: Discontent among postgraduate (PG) doctors in Chhattisgarh’s medical colleges is growing over lower stipends compared with those offered in several other states. With no revision in the stipend for more than two years, the doctors have now drawn up a strategy for an agitation.As the first phase of their campaign, the doctors will submit a memorandum containing 17 key demands to the deans of all medical colleges across the state on Friday. They are also preparing to take their demands to Chief Minister Vishnu Deo Sai, state ministers, local MLAs and district collectors.

Doctors Receive Lower Stipends Compared to Other States

Postgraduate doctors have announced that they will launch an agitation if their demands are not addressed within the next 15 days. At present, PG doctors in Chhattisgarh receive a monthly stipend ranging from ₹67,500 to ₹74,600.In comparison, PG doctors in several other states receive significantly higher stipends. The monthly amount is ₹1,32,336 in Delhi, ₹1,29,962 in Bihar, ₹1,06,380 in Uttar Pradesh, ₹1,00,800 in Gujarat, ₹1,00,980 in Haryana and ₹92,470 in Maharashtra.The doctors say that despite having similar responsibilities and facing comparable workloads, their stipend remains considerably lower than that of their counterparts in other states. They have therefore demanded a substantial revision in the existing stipend structure.

Despite long working hours in hospitals, increasing workload and the crucial responsibility of patient care, doctors say they are not receiving adequate financial incentives. They had earlier conducted a signature campaign in support of their demands related to stipends and other issues. For the past six months, the doctors have been raising the demand for a stipend hike in a phased manner, but they are still awaiting a concrete decision.

Dr. Resham Ratnakar, state president of the Junior Doctors Association (JDA), said that resident doctors are the backbone of the hospital system. Besides providing regular medical services, they remain on the front line during emergencies and shoulder critical responsibilities. Despite this, their remuneration remains significantly below the national average.He said that the process of submitting memorandums containing 17 demands will begin at medical colleges from Friday. If the demands are not addressed within 15 days, the doctors will be compelled to launch an agitation.

संस्कृत

रायपुर। छत्तीसगढराज्यस्य चिकित्सामहाविद्यालयेषु स्नातकोत्तरचिकित्सकानां अन्यराज्येषु प्रदीयमानस्य वृत्तिभृतेः अपेक्षया न्यूनं वृत्तिभृतिः प्राप्यमाणत्वात् असन्तोषः निरन्तरं वर्धते। द्विवर्षाधिककालात् वृत्तिभृतेः वृद्धिः न जातत्वात् चिकित्सकैः आन्दोलनस्य रूपरेखा निर्मिता अस्ति।आन्दोलनस्य प्रथमचरणे शुक्रवासरे राज्यस्य सर्वेषु चिकित्सामहाविद्यालयेषु अधिष्ठातृभ्यः सप्तदशसूत्रीयमागणापत्रं समर्पयिष्यते। अनन्तरं चिकित्सकाः स्वमागणाः मुख्यमंत्री विष्णुदेवसायी, राज्यस्य मन्त्रिभ्यः, स्थानीयविधायकान् तथा जिलाधिकारिणः च समक्षं प्रस्तोतुं सज्जतां कुर्वन्ति।

अन्यराज्येभ्यः चिकित्सकानां वृत्तिभृतिः न्यूना

पीजी-चिकित्सकैः स्पष्टं उक्तं यत् यदि पञ्चदशदिनानाम् अन्तः तेषां मागणासु सकारात्मकनिर्णयः न क्रियते, तर्हि ते आन्दोलनं करिष्यन्ति। वर्तमानसमये छत्तीसगढराज्ये पीजी-चिकित्सकानां मासिकवृत्तिभृतिः 67,500 रुप्यकात् 74,600 रुप्यकपर्यन्तं प्राप्यते।अन्यराज्येषु तु एतस्मात् अधिका वृत्तिभृतिः प्रदीयते। दिल्लीनगरे 1,32,336 रुप्यकाः, बिहारराज्ये 1,29,962 रुप्यकाः, उत्तरप्रदेशे 1,06,380 रुप्यकाः, गुजरातराज्ये 1,00,800 रुप्यकाः, हरियाणाराज्ये 1,00,980 रुप्यकाः तथा महाराष्ट्रराज्ये 92,470 रुप्यकाः प्रतिमासं वृत्तिभृतिरूपेण दीयन्ते।पीजी-चिकित्सकानां कथनमस्ति यत् समानदायित्वानि तथा तुल्यकार्यभारः सन्ति, तथापि अन्यराज्येषु कार्यरतचिकित्सकानां अपेक्षया तेषां वृत्तिभृतिः अत्यन्तं न्यूना अस्ति। एताम् आर्थिकासमानतां दूरीकर्तुं ते दीर्घकालात् वृत्तिभृतेः वृद्धिं मागन्ते।

चिकित्सालयेषु दीर्घकालं सेवां कुर्वन्तः चिकित्सकाः निरन्तरं वर्धमानं कार्यभारं तथा रोगिणां परिचर्यायाः महतीं जिम्मेदारीं निर्वहन्ति। तथापि तेभ्यः पर्याप्तं आर्थिकप्रोत्साहनं न प्राप्यते इति तेषां कथनम्। वृत्तिभृतेः तथा अन्यासां मागणानां समर्थनार्थं चिकित्सकैः पूर्वं हस्ताक्षर-अभियानमपि सञ्चालितम्। गतषड्मासेभ्यः ते क्रमशः वृत्तिभृतेः वृद्धेः मागं कुर्वन्तः सन्ति, परन्तु अद्यावधि तेषां अपेक्षानुसारः ठोसनिर्णयः न जातः।

पीजी-चिकित्सकैः स्पष्टं उक्तं यत् यदि पञ्चदशदिनानाम् अन्तः तेषां मागणासु सकारात्मकनिर्णयः न क्रियते, तर्हि ते आन्दोलनं करिष्यन्ति। वर्तमानसमये छत्तीसगढराज्ये पीजी-चिकित्सकानां मासिकवृत्तिभृतिः 67,500 रुप्यकात् 74,600 रुप्यकपर्यन्तं प्राप्यते।अन्यराज्येषु तु एतस्मात् अधिका वृत्तिभृतिः प्रदीयते। दिल्लीनगरे 1,32,336 रुप्यकाः, बिहारराज्ये 1,29,962 रुप्यकाः, उत्तरप्रदेशे 1,06,380 रुप्यकाः, गुजरातराज्ये 1,00,800 रुप्यकाः, हरियाणाराज्ये 1,00,980 रुप्यकाः तथा महाराष्ट्रराज्ये 92,470 रुप्यकाः प्रतिमासं वृत्तिभृतिरूपेण दीयन्ते।पीजी-चिकित्सकानां कथनमस्ति यत् समानदायित्वानि तथा तुल्यकार्यभारः सन्ति, तथापि अन्यराज्येषु कार्यरतचिकित्सकानां अपेक्षया तेषां वृत्तिभृतिः अत्यन्तं न्यूना अस्ति। एताम् आर्थिकासमानतां दूरीकर्तुं ते दीर्घकालात् वृत्तिभृतेः वृद्धिं मागन्ते।

चिकित्सालयेषु दीर्घकालं सेवां कुर्वन्तः चिकित्सकाः निरन्तरं वर्धमानं कार्यभारं तथा रोगिणां परिचर्यायाः महतीं जिम्मेदारीं निर्वहन्ति। तथापि तेभ्यः पर्याप्तं आर्थिकप्रोत्साहनं न प्राप्यते इति तेषां कथनम्। वृत्तिभृतेः तथा अन्यासां मागणानां समर्थनार्थं चिकित्सकैः पूर्वं हस्ताक्षर-अभियानमपि सञ्चालितम्। गतषड्मासेभ्यः ते क्रमशः वृत्तिभृतेः वृद्धेः मागं कुर्वन्तः सन्ति, परन्तु अद्यावधि तेषां अपेक्षानुसारः ठोसनिर्णयः न जातः।

जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशनस्य प्रदेशाध्यक्षः डॉ. रेशम रत्नाकरः उक्तवान् यत् आवासीयचिकित्सकाः चिकित्सालयव्यवस्थायाः मेरुदण्डरूपाः सन्ति। ते नियमितचिकित्सासेवाभिः सह आपत्कालीनस्थितिष्वपि अग्रिमपङ्क्तौ स्थित्वा महत्त्वपूर्णानि दायित्वानि निर्वहन्ति। तथापि तेषां पारिश्रमिकं राष्ट्रीयसरासरीमानस्य तुलनायां अत्यन्तं न्यूनम् अस्ति।शुक्रवासरात् चिकित्सामहाविद्यालयेषु सप्तदशसूत्रीयमागणापत्रस्य समर्पणप्रक्रिया आरभ्यते। यदि पञ्चदशदिनाभ्यन्तरे मागणासु सकारात्मकनिर्णयः न क्रियते, तर्हि चिकित्सकाः आन्दोलनं कर्तुं विवशाः भविष्यन्ति।

Advertisement

Raja Saw Mill Advertisement

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed