हसदेव नदी का बढ़ा जलस्तर, जांजगीर-चांपा और खरसिया तक पड़ेगा बांगो बांध के पानी का असर। Hasdeo River Swells as Water Released from Korba’s Bango Dam Impacts Janjgir-Champa and Kharsia। हसदेवीनद्याः जलप्रवाहः तीव्रः, कोरबास्थित-बाङ्गोबन्धात् विसृष्टस्य जलस्य प्रभावः जांजगीर-चाम्पा-खरसियापर्यन्तं दृश्यते।
कोरबा के मिनीमाता हसदेव बांगो बांध में जलस्तर 93.65% तक पहुंचने के बाद पिछले 60 घंटों से नौ गेट लगातार खुले हैं। इन गेटों के जरिए करीब 48,828 क्यूसेक पानी प्रति सेकेंड हसदेव नदी में छोड़ा जा रहा है। वहीं, दर्री बांध के चार गेट भी खोल दिए गए हैं। बढ़ते जलप्रवाह को देखते हुए जल संसाधन विभाग ने नदी किनारे और निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है।

कोरबा के मिनीमाता हसदेव बांगो बांध में 93.65 प्रतिशत जलभराव के बाद जलदबाव को नियंत्रित करने के लिए 11 में से नौ गेट लगातार 60 घंटे से खुले हैं। इन गेटों के माध्यम से हर सेकेंड करीब 48,828 क्यूसेक पानी हसदेव नदी में छोड़ा जा रहा है। लगातार हो रही जलनिकासी से नदी का बहाव तेज बना हुआ है। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने नदी किनारे बसे निचले इलाकों में निगरानी और सतर्कता बढ़ा दी है।
इस मानसून बांगो बांध में हुई अच्छी बारिश के कारण जलभराव की स्थिति अपेक्षाकृत जल्दी बन गई। लंबे समय के बाद बांध के नौ गेट एक साथ खोले गए हैं। इससे पहले वर्ष 2014 से पूर्व बांध के पूरी तरह भरने पर 10 गेट तक खोलकर अतिरिक्त पानी की निकासी की गई थी। फिलहाल गेट नंबर 2, 3, 4, 8, 9 और 10 को एक-एक मीटर, गेट नंबर 5 और 7 को डेढ़-डेढ़ मीटर तथा गेट नंबर 6 को दो मीटर तक खोला गया है। लगातार जल निकासी के चलते बांध के जलस्तर में करीब 8 सेंटीमीटर की गिरावट दर्ज की गई है।
कार्यपालन अभियंता संतोष भारती के अनुसार, जब बांध का जलस्तर घटकर 92 प्रतिशत तक आ जाएगा, तब गेटों को बंद करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। बांगो बांध से लगातार छोड़े जा रहे पानी का प्रभाव दर्री बांध पर भी दिखाई दे रहा है। दर्री बांध के 14 में से चार गेट खोलकर हसदेव नदी में पानी छोड़ा जा रहा है। इसके साथ ही दायीं और बायीं तट नहरों के जरिए 3,800 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। लगातार बारिश के चलते हसदेव के अलावा तान, अहिरन और लीलागर नदियों तथा जिले के विभिन्न नालों का जलस्तर भी बढ़ा हुआ है। नदी किनारे के खेतों और कृषि क्षेत्रों में पानी भरने से खेती-किसानी प्रभावित हुई है। जल संसाधन विभाग ने लोगों से नदी तथा तेज बहाव वाले क्षेत्रों से दूरी बनाए रखने की अपील की है
बांध के गेट खोलने का फैसला ऐसे लिया जाता है
बांध के गेट कितने मीटर तक खोले जाएं और कितनी मात्रा में पानी छोड़ा जाए, यह फैसला कई परिस्थितियों का आकलन करने के बाद लिया जाता है। इसमें बांध में पहुंच रहे पानी की मात्रा, वर्तमान जलस्तर, मौसम विभाग के बारिश के पूर्वानुमान, जलाशय की क्षमता और डाउनस्ट्रीम नदी के बहाव को प्रमुखता से देखा जाता है। गेट की संरचना तथा जलाशय में पानी की ऊंचाई के आधार पर संभावित जलप्रवाह का तकनीकी हिसाब भी लगाया जाता है। बांगो परियोजना के कार्यपालन अभियंता संतोष भारती के अनुसार, 80 हजार क्यूसेक तक पानी छोड़ने का अधिकार कार्यपालन अभियंता के पास है। इससे अधिक जल निकासी के लिए अधीक्षण अभियंता और मुख्य अभियंता की मंजूरी आवश्यक होती है।
जांजगीर-चांपा और खरसिया में मंगलवार को दिखेगा बांगो से छोड़े पानी का असर
बांगो बांध से छोड़े जा रहे पानी का प्रभाव कोरबा तक ही सीमित नहीं है। हसदेव नदी आगे जांजगीर-चांपा से गुजरते हुए रायगढ़ के खरसिया क्षेत्र की ओर बढ़ती है। ऐसे में मंगलवार को इन इलाकों में भी जलस्तर और नदी के बहाव में बढ़ोतरी का असर नजर आ सकता है। इसे देखते हुए प्रशासन इन क्षेत्रों में भी नदी के जलस्तर और प्रवाह की लगातार निगरानी कर रहा है
खास तौर पर नदी किनारे बसे गांवों और निचले इलाकों में जलस्तर बढ़ने की आशंका को देखते हुए प्रशासन अलर्ट मोड पर है। बांगो बांध से लगातार पानी छोड़े जाने के चलते हसदेव नदी का बहाव तेज बना हुआ है, जिसका प्रभाव आगे नदी के निचले क्षेत्रों में भी देखने को मिलेगा।
English
After the water level at Korba’s Minimata Hasdeo Bango Dam rose to 93.65%, nine gates have remained open for the past 60 hours. Around 48,828 cusecs of water is being released every second through these gates. Four gates of the Darri Dam have also been opened. In view of the increased water flow, the Water Resources Department has advised residents of low-lying areas along the river to remain alert.
Nine of the 11 gates of Korba’s Minimata Hasdeo Bango Dam have remained open for the past 60 hours after the reservoir reached 93.65% capacity. The gates are being operated to regulate water pressure, with around 48,828 cusecs of water released into the Hasdeo River every second. The continuous discharge has kept the river flow strong, prompting the administration to increase monitoring and vigilance in low-lying areas along the river.
Heavy monsoon rainfall has led to the water storage level at Bango Dam rising earlier than usual this season. After a long gap, nine gates of the dam have been opened simultaneously. Before 2014, when the reservoir reached near-full capacity, as many as 10 gates had to be opened to discharge excess water on a large scale. At present, gates 2, 3, 4, 8, 9 and 10 are open by one metre each, gates 5 and 7 by 1.5 metres each, while gate 6 is open by two metres. Continuous water discharge has brought down the dam’s water level by around eight centimetres.
Executive Engineer Santosh Bharti said the dam gates will be closed once the water level falls to around 92%. The continuous discharge from Bango Dam has also affected the Darri Dam. Four of its 14 gates have been opened to release water into the Hasdeo River, while another 3,800 cusecs is being discharged through the right and left bank canals. Persistent rainfall has also raised water levels in the Tan, Ahiran and Lilagar rivers, along with several streams across the district. Waterlogging in agricultural fields near riverbanks has disrupted farming activities. The Water Resources Department has advised people to stay away from rivers and areas experiencing strong water currents.
How the Decision to Open Dam Gates Is Made
The decision on how high the dam gates should be opened and how much water should be released is taken after assessing several factors. These include the inflow into the reservoir, the existing water level, rainfall forecasts, storage capacity and the downstream river flow. Engineers also technically assess the expected discharge based on the gate design and the water depth in the reservoir. According to Santosh Bharti, Executive Engineer of the Bango Project, the Executive Engineer is authorized to release up to 80,000 cusecs of water. Any discharge beyond this limit requires approval from the Superintending Engineer and the Chief Engineer.
Impact of Water Released from Bango Dam Expected in Janjgir-Champa and Kharsia on Tuesday
The impact of water released from Bango Dam is not confined to Korba district. The Hasdeo River flows further through Janjgir-Champa and towards the Kharsia region of Raigarh district. As a result, the effect of the increased discharge is expected to be visible in these areas on Tuesday. Authorities are therefore closely monitoring the river’s water level and flow in these regions as well.
The administration is particularly alert in villages located along the river and other low-lying areas where rising water levels could pose a risk. With continuous water discharge from Bango Dam, the flow of the Hasdeo River remains strong, and its impact is expected to be felt further downstream.
संस्कृत
कोरबास्थिते मिनीमाता-हसदेव-बाङ्गो-बन्धे जलस्तरः ९३.६५ प्रतिशतं प्राप्ते सति नव द्वाराणि गतानि ६० घण्टाभ्यः निरन्तरं उद्घाटितानि सन्ति। एतेभ्यः द्वारेभ्यः प्रतिसेकण्डं ४८,८२८ क्यूसेक् परिमितं जलं विसृज्यते। दर्री-बन्धस्यापि चत्वारि द्वाराणि उद्घाटितानि। वर्धमानजलप्रवाहं दृष्ट्वा जलसंसाधनविभागेन नद्याः अधोभागेषु निवसद्भ्यः जनभ्यः सावधानतां पालनीयामिति सूचना प्रदत्ता।
कोरबास्थितस्य मिनीमाता-हसदेव-बाङ्गो-बन्धस्य जलपूर्णता ९३.६५ प्रतिशतं प्राप्तवती। जलदाबस्य नियन्त्रणार्थं एकादशसु द्वारेषु नव द्वाराणि गतषष्टि-घण्टाभ्यः निरन्तरम् उद्घाटितानि सन्ति। एतेभ्यः द्वारेभ्यः प्रतिसेकण्डं ४८,८२८ क्यूसेक् जलं हसदेवीनद्यां विसृज्यते। निरन्तरजलविसर्जनेन नद्याः प्रवाहः तीव्रः वर्तते। परिस्थितिं दृष्ट्वा प्रशासनं नदीतीरस्थेषु निम्नप्रदेशेषु निरीक्षणं सावधानतां च वर्धितवान्।
अस्मिन् वर्षे बाङ्गो-बन्धक्षेत्रे मानसून-वृष्टेः प्रचुरतया जलसञ्चयस्य स्थितिः शीघ्रमेव निर्मिता। दीर्घकालानन्तरं बन्धस्य नव द्वाराणि एकस्मिन् काले उद्घाटितानि सन्ति। २०१४ वर्षात् पूर्वं बन्धः पूर्णतया पूरिते सति अतिरिक्तजलस्य निष्कासनार्थं दश द्वाराणि उद्घाटितानि आसन्। सम्प्रति द्वितीयं, तृतीयं, चतुर्थं, अष्टमं, नवमं दशमं च द्वारं प्रत्येकं एकमीटर-परिमाणेन उद्घाटितम् अस्ति। पञ्चमं सप्तमं च द्वारं सार्धैकमीटर-परिमाणेन, षष्ठं द्वारं तु द्विमीटर-परिमाणेन उद्घाटितम् अस्ति। निरन्तरजलविसर्जनेन बन्धस्य जलस्तरे प्रायः अष्टसेन्टीमीटर-परिमिता न्यूनता अभवत्।
कार्यपालन-अभियन्ता सन्तोष-भारती इत्युक्तवान् यत् यदा बन्धस्य जलस्तरः ९२ प्रतिशतं यावत् न्यूनः भविष्यति, तदा द्वाराणि पिधास्यन्ते। बाङ्गो-बन्धात् निरन्तरं विसृज्यमानस्य जलस्य प्रभावः दर्री-बन्धेऽपि दृश्यते। दर्री-बन्धस्य चतुर्दशसु द्वारेषु चत्वारि द्वाराणि उद्घाट्य हसदेवीनद्यां जलं विसृज्यते। अपि च दक्षिणोत्तर-तटयोः नहराभ्यां ३,८०० क्यूसेक् जलं विसृज्यते। निरन्तरवृष्ट्या हसदेवीनद्याः सह तान्, अहिरन्, लीलागर्-नदीनां तथा जनपदस्थनालानां जलस्तरोऽपि वर्धितः अस्ति। नदीतीरसमीपस्थेषु क्षेत्रेषु जलपूरणेन कृषिकार्यं प्रभावितम् अस्ति। जलसंसाधनविभागेन जनाः नद्याः तीव्रप्रवाहयुक्तेभ्यः प्रदेशेभ्यश्च दूरं स्थातुं सावधानिताः।
बन्धस्य द्वाराणि उद्घाटयितुं निर्णयः कथं क्रियते
बन्धस्य द्वाराणि कियत्पर्यन्तं उद्घाटनीयानि तथा कियत् जलं विसर्जनीयम् इति निर्णयः विविधपरिस्थितीनां मूल्याङ्कनानन्तरं क्रियते। जलाशये प्रविश्यमानस्य जलस्य मात्रा, वर्तमानजलस्तरः, वर्षायाः पूर्वानुमानम्, जलाशयस्य धारणक्षमता तथा अधोभागे नद्याः जलप्रवाहः प्रमुखतया विचार्यन्ते। द्वाराणां संरचनां जलाशयस्थजलस्य ऊर्ध्वतां च आधृत्य सम्भावितजलप्रवाहस्य तकनीकी-मूल्याङ्कनमपि क्रियते। बाङ्गो-परियोजनायाः कार्यपालन-अभियन्ता सन्तोष-भारती इत्यस्य अनुसारम्, ८०,००० क्यूसेक्-पर्यन्तं जलविसर्जनस्य अधिकारः कार्यपालन-अभियन्तायाः भवति। ततः अधिकं जलं विसर्जयितुं अधीक्षण-अभियन्तुः मुख्य-अभियन्तुः च अनुमतिः आवश्यकं भवति।
मङ्गलवासरे जांजगीर-चाम्पा-खरसियायोः बाङ्गो-बन्धात् विसृष्टजलस्य प्रभावः दृश्यते
बाङ्गो-बन्धात् विसृष्टस्य जलस्य प्रभावः केवलं कोरबा-मण्डले एव सीमितः नास्ति। हसदेवी नदी अग्रे जांजगीर-चाम्पा-मण्डलं प्रवहन्ती रायगढ-मण्डलस्य खरसिया-प्रदेशस्य दिशि गच्छति। अतः मङ्गलवासरे एतेषु प्रदेशेष्वपि जलस्तरस्य नदीप्रवाहस्य च वृद्धेः प्रभावः दृश्यते। एतां स्थितिं दृष्ट्वा प्रशासनं एतेषु क्षेत्रेष्वपि नद्याः जलस्तरं प्रवाहं च निरन्तरं निरीक्षते।
विशेषतः नदीतीरस्थेषु ग्रामेषु निम्नप्रदेशेषु च जलस्तरवृद्धेः सम्भावनां दृष्ट्वा प्रशासनं सतर्कम् अस्ति। बाङ्गो-बन्धात् निरन्तरं जलविसर्जनेन हसदेवी-नद्याः प्रवाहः तीव्रः वर्तते, तस्य प्रभावः नद्याः अधोभागेष्वपि दृश्यते।


