क्या है मुरिया दरबार? राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू होंगी शामिल, इसी ऐतिहासिक परंपरा के साथ संपन्न होता है विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा.What Is the Muria Darbar? President Droupadi Murmu to Attend the Historic Tribal Tradition That Marks the Conclusion of Bastar Dussehra. क्या है मुरिया दरबार? राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू होंगी शामिल, इसी ऐतिहासिक परंपरा के साथ संपन्न होता है विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा.

रायपुर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 22 और 23 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ के दो दिवसीय दौरे पर रहेंगी। इस दौरान वे राजधानी रायपुर और जगदलपुर में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में शिरकत करेंगी। राष्ट्रपति का यह दौरा राज्य के लिए खास महत्व रखता है।मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रपति मुर्मू को विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा उत्सव में शामिल होने के लिए विशेष रूप से आमंत्रित किया था। इसी निमंत्रण के आधार पर राष्ट्रपति की छत्तीसगढ़ यात्रा निर्धारित की गई है। उनके दौरे को लेकर तैयारियां की जा रही हैं।
अधिकारियों के मुताबिक, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अपने छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान रायपुर स्थित लोक भवन और बुढ़ापारा के बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगी। इसके बाद वे जगदलपुर के लालबाग मैदान में आयोजित होने वाले पारंपरिक मुरिया दरबार में शामिल होंगी। राष्ट्रपति बस्तर दशहरा के मुख्य सार्वजनिक समारोह में भी शिरकत करेंगी। उनके इस दौरे से बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और ऐतिहासिक परंपराओं को विशेष महत्व मिलने की उम्मीद है।
क्या है मुरिया दरबार?
मुरिया दरबार विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा की प्रमुख ऐतिहासिक परंपराओं में से एक है। इसी आयोजन के साथ लगभग 75 दिनों तक चलने वाले इस अनूठे उत्सव का समापन होता है। मुरिया दरबार को आदिवासी समाज की विशिष्ट ‘जन-संसद’ और पारंपरिक जनजातीय लोकतंत्र के रूप में भी देखा जाता है।इस परंपरा की शुरुआत कब हुई, इसका सटीक ऐतिहासिक विवरण उपलब्ध नहीं है। हालांकि, प्रचलित मान्यताओं के अनुसार, राजशाही के दौर में राजा-महाराजा इस दरबार का आयोजन करते थे। समय के साथ मुरिया दरबार बस्तर की जनजातीय संस्कृति, सामाजिक सहभागिता और ऐतिहासिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक बन गया है।
मुरिया दरबार की परंपरा में राजा-महाराजाओं का सादगीपूर्ण रूप देखने को मिलता था। इस विशेष अवसर पर राजा शाही वेशभूषा त्यागकर साधारण कपड़े पहनते और आम लोगों के बीच जमीन पर बैठकर उनकी समस्याएं सुनते थे। दरबार में आदिवासी समुदाय के लोग अपनी परेशानियां और शिकायतें सीधे राजा के सामने रखते थे। इसके बाद राजपरिवार की ओर से समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक निर्देश दिए जाते थे।समय के साथ शासन व्यवस्था बदल गई, लेकिन इस परंपरा का महत्व आज भी बना हुआ है। वर्तमान में मुरिया दरबार में गांवों के पारंपरिक मुखिया और प्रतिनिधि शामिल होते हैं तथा स्थानीय लोगों की समस्याओं को सुनकर उनके समाधान पर चर्चा करते हैं। यह परंपरा बस्तर की जनजातीय संस्कृति और जनभागीदारी की ऐतिहासिक विरासत को दर्शाती है।
मुरिया दरबार में बस्तर के 80 परगनों के पारंपरिक मुखिया शामिल होते हैं। इस दौरान वे क्षेत्र की समस्याओं, जनजातीय समुदायों की मांगों और स्थानीय मुद्दों पर चर्चा करते हैं।
मुरिया दरबार में बस्तर के 80 परगनों के पारंपरिक मुखिया शामिल होते हैं। इस दौरान वे क्षेत्र की समस्याओं, जनजातीय समुदायों की मांगों और स्थानीय मुद्दों पर चर्चा करते हैं।मान्यता है कि बस्तर के पारंपरिक मुरिया दरबार में 80 परगनों के मुखिया, चालकी, मेम्बर और मेम्बरीन भाग लेते हैं। इस आयोजन के दौरान ये प्रतिनिधि अलग-अलग दरबार लगाकर अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं और लोगों की शिकायतों को सुनते हैं। इसके बाद संबंधित मुद्दों को समाधान के लिए प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है। यह परंपरा स्थानीय समुदायों को अपनी बात रखने और जनसमस्याओं को सामने लाने का महत्वपूर्ण मंच प्रदान करती है।
राष्ट्रपति के छत्तीसगढ़ दौरे को लेकर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी, चप्पे-चप्पे पर रहेगी निगरानी.
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के छत्तीसगढ़ दौरे को लेकर राज्य प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। मुख्य सचिव ने रायपुर और बस्तर संभाग के संबंधित जिला कलेक्टरों को यात्रा के दौरान आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं।रायपुर और जगदलपुर के जिला कलेक्टरों, पुलिस आयुक्तों तथा पुलिस अधीक्षकों को स्वामी विवेकानंद हवाई अड्डे, रायपुर और मां दंतेश्वरी हवाई अड्डे, जगदलपुर से लेकर सभी प्रमुख कार्यक्रम स्थलों तक सुरक्षा काफिले और सड़क मार्ग से आवागमन की सुचारू व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।इसके अलावा, राष्ट्रपति के साथ आने वाले विशिष्ट अतिथियों के ठहरने के लिए उच्चस्तरीय आवास व्यवस्था सहित अन्य आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश भी संबंधित विभागों के अधिकारियों को दिए गए हैं। प्रशासन का जोर यात्रा के दौरान सुरक्षा, समन्वय और व्यवस्थाओं को सुचारू बनाए रखने पर है।
English
Raipur: President Droupadi Murmu will visit Chhattisgarh on October 22 and 23. During her two-day visit, she will participate in various programmes scheduled in the state capital, Raipur, and Jagdalpur.Chief Minister Vishnu Deo Sai had specially invited the President to attend the world-famous Bastar Dussehra festival. Her visit to Chhattisgarh was subsequently scheduled in response to this invitation. Preparations are underway for the President’s visit
According to officials, President Droupadi Murmu will attend programmes at Lok Bhavan in Raipur and the Balbir Singh Juneja Indoor Stadium in the Budhapara area during her visit to Chhattisgarh. She will also participate in the traditional Muria Darbar at Lalbagh Ground in Jagdalpur, along with the main public event of Bastar Dussehra. Her visit is expected to highlight the region’s rich tribal heritage and distinctive cultural traditions.
What Is Muria Darbar?
Muria Darbar is one of the most significant historical traditions associated with the world-famous Bastar Dussehra festival. The 75-day-long celebration concludes with this distinctive gathering. It is often regarded as a unique tribal ‘people’s parliament’ and a traditional form of tribal democracy.The exact date of the tradition’s origin remains unknown. However, according to popular accounts, kings and rulers organised the Darbar during the era of princely rule. Over time, Muria Darbar has become an important symbol of Bastar’s tribal culture, community participation and historical heritage.
The tradition of Muria Darbar reflected the humble side of the erstwhile kings of Bastar. On this special occasion, the rulers set aside their royal attire, dressed in simple clothes and sat on the ground among the people to listen to their concerns. Members of tribal communities presented their grievances and problems directly to the king. The royal family would then issue directions to address these issues.Although the system of governance has changed over time, the tradition continues to hold significance. Today, village chiefs and traditional community representatives participate in Muria Darbar, listen to local concerns and discuss possible solutions. The practice reflects Bastar’s tribal heritage and its long-standing tradition of community participation.
Traditional chiefs representing 80 parganas of Bastar participate in the Muria Darbar. During the gathering, they discuss regional concerns, the demands of tribal communities and local issues.
According to local accounts, the traditional Muria Darbar of Bastar brings together chiefs, Chalaki, members and women representatives known as Memberin from 80 parganas. During the gathering, these representatives hold separate sessions to hear grievances and understand the problems affecting their respective areas. They then present these concerns to the administration for consideration and resolution. The tradition serves as an important platform for community participation and voicing local issues.
Security Tightened Ahead of the President’s Visit to Chhattisgarh, Extensive Surveillance Arrangements in Place.
Preparations for President Droupadi Murmu’s visit to Chhattisgarh have gathered pace, with the Chief Secretary issuing clear instructions to the concerned district collectors of the Raipur and Bastar divisions to ensure all necessary arrangements.The district collectors, police commissioners and superintendents of police concerned have been entrusted with ensuring secure convoy movement and smooth road transportation from Swami Vivekananda Airport in Raipur and Maa Danteshwari Airport in Jagdalpur to all major event venues.Officials from the relevant departments have also been directed to arrange high-quality accommodation for distinguished guests accompanying the President, along with other essential facilities. The administration is focusing on maintaining security, coordination and smooth arrangements throughout the visit.
संस्कृति
रायपुरम्। भारतस्य राष्ट्रपतिः द्रौपदी मुर्मू अक्टूबर-मासस्य २२ तथा २३ दिनाङ्कयोः छत्तीसगढराज्यस्य द्विदिवसीययात्रां करिष्यति। अस्यां यात्रायां सा राज्यस्य राजधानी रायपुरे तथा जगदलपुरे आयोजितेषु विविधेषु कार्यक्रमेषु भागं ग्रहीष्यति।मुख्यमन्त्री विष्णुदेव सायः राष्ट्रपतिं विश्वप्रसिद्धे बस्तर-दशहरामहोत्सवे भागं ग्रहीतुं विशेषतया आमन्त्रितवान् आसीत्। तस्य आमन्त्रणस्य आधारेण एव राष्ट्रपतेः छत्तीसगढयात्रा निर्धारिताऽभवत्। राष्ट्रपतेः आगमनाय आवश्यकाः सज्जताः प्रचलन्ति।
अधिकारिणां कथनानुसारं राष्ट्रपतिः द्रौपदी मुर्मू छत्तीसगढयात्रायाः समये रायपुरस्थिते लोकभवने तथा बुधापाराक्षेत्रस्थिते बलबीरसिंह-जुनेजा-आच्छादित-क्रीडाङ्गणे आयोजितेषु कार्यक्रमेषु भागं ग्रहीष्यति। तदनन्तरं सा जगदलपुरस्य लालबागमैदाने आयोजिते पारम्परिके मुरिया-दरबारे तथा बस्तर-दशहरामहोत्सवस्य मुख्ये सार्वजनिककार्यक्रमे च सम्मिलिता भविष्यति। अस्याः यात्रायाः माध्यमेन बस्तरप्रदेशस्य समृद्धायाः जनजातीयसंस्कृतेः विशिष्टानां च परम्पराणां महत्त्वं वर्धिष्यते।
किं नाम मुरिया-दरबारः?
मुरिया-दरबारः विश्वप्रसिद्धस्य बस्तर-दशहरामहोत्सवस्य प्रमुखासु ऐतिहासिकपरम्परासु अन्यतमा अस्ति। अस्य आयोजनस्य सहायतया पञ्चसप्ततिदिनानि यावत् प्रचलितस्य महोत्सवस्य समापनं भवति। मुरिया-दरबारः आदिवासीसमाजस्य विशिष्टा ‘जनसभा’ अथवा पारम्परिकजनजातीयलोकतन्त्रस्य रूपेण अपि परिगण्यते।अस्याः परम्परायाः आरम्भः कदा अभवत् इति विषये सटीका ऐतिहासिकसूचना उपलब्धा नास्ति। तथापि प्रचलितजनश्रुतीनुसारं राजशासनकाले राजानः महाराजाश्च अस्य दरबारस्य आयोजनं कुर्वन्ति स्म। कालान्तरे मुरिया-दरबारः बस्तरप्रदेशस्य जनजातीयसंस्कृतेः, सामाजिकसहभागितायाः तथा ऐतिहासिकधरोहरस्य महत्त्वपूर्णं प्रतीकं जातम्।
मुरिया-दरबारस्य परम्परायां प्राचीनबस्तरस्य राज्ञां सरलस्वभावस्य दर्शनं भवति स्म। अस्मिन् विशेषावसरे राजानः राजकीयवस्त्राणि त्यक्त्वा साधारणवस्त्राणि धारयन्ति स्म तथा सामान्यजनैः सह भूमौ उपविश्य तेषां समस्याः शृण्वन्ति स्म। जनजातीयसमुदायस्य जनाः स्वकीयाः समस्याः तथा शिकायताः राज्ञः समक्षं प्रत्यक्षं निवेदयन्ति स्म। ततः राजपरिवारस्य पक्षतः तासां समस्याणां समाधानाय आवश्यकाः निर्देशाः दीयन्ते स्म।कालान्तरे शासनव्यवस्थायां परिवर्तनं जातम्, तथापि अस्याः परम्परायाः महत्त्वम् अद्यापि विद्यमानम् अस्ति। अधुना मुरिया-दरबारे ग्रामाणां पारम्परिकाः प्रमुखाः तथा समुदायप्रतिनिधयः भागं गृह्णन्ति। ते स्थानीयजनानां समस्याः शृण्वन्ति तथा तासां समाधानस्य उपायान् चर्चयन्ति। एषा परम्परा बस्तरप्रदेशस्य जनजातीयसंस्कृतेः तथा जनसहभागितायाः ऐतिहासिकधरोहरस्य प्रतीका अस्ति।
मुरिया-दरबारे बस्तरप्रदेशस्य अष्टाशीतिपरगणानां पारम्परिकाः प्रमुखाः भागं गृह्णन्ति। अस्मिन् सम्मेलने ते प्रदेशस्य समस्याः, जनजातीयसमुदायानां मागाः तथा स्थानीयविषयान् चर्चयन्ति।
स्थानीयजनश्रुत्यनुसारं बस्तरप्रदेशस्य पारम्परिके मुरिया-दरबारे अष्टाशीतिपरगणानां प्रमुखाः, चालकी, सदस्याः तथा मेम्बरीन इति नाम्ना प्रसिद्धाः महिला-प्रतिनिधयः भागं गृह्णन्ति। अस्मिन् आयोजने ते पृथक्-पृथक् सभाः आयोज्य स्व-स्व क्षेत्राणां समस्याः जनानां शिकायताश्च शृण्वन्ति। ततः समाधानार्थं ताः समस्याः प्रशासनस्य समक्षं प्रस्तुवन्ति। एषा परम्परा स्थानीयसमुदायानां सहभागितायै जनसमस्यानां प्रस्तुतीकरणाय च महत्त्वपूर्णं मञ्चं प्रददाति।
राष्ट्रपतेः छत्तीसगढयात्रायाः पूर्वं सुरक्षा-व्यवस्था सुदृढा, सर्वत्र कठोरं निरीक्षणं भविष्यति।
राष्ट्रपतेः द्रौपदी मुर्मू इत्यस्याः छत्तीसगढयात्राम् उद्दिश्य राज्यप्रशासनेन सज्जताः तीव्राः कृताः। मुख्यसचिवः रायपुर-बस्तरसम्भागयोः सम्बन्धितेभ्यः जिलाधिकारिभ्यः यात्रायाः समये आवश्यकव्यवस्थाः सुनिश्चितुं स्पष्टान् निर्देशान् दत्तवान्।रायपुर-जगदलपुरयोः सम्बन्धितेभ्यः जिलाधिकारिभ्यः, पुलिस-आयुक्तेभ्यः तथा पुलिस-अधीक्षकेभ्यः स्वामी-विवेकानन्द-विमानपत्तनात् रायपुरे तथा माँ-दन्तेश्वरी-विमानपत्तनात् जगदलपुरे च सर्वेषु प्रमुखकार्यक्रमस्थलेषु सुरक्षितवाहनसमूहस्य सुचारुसञ्चालनस्य तथा मार्गयात्रायाः व्यवस्थायाः दायित्वं समर्पितम् अस्ति।राष्ट्रपतिना सह आगच्छद्भ्यः विशिष्टातिथिभ्यः उच्चस्तरीय-आवासव्यवस्थां सहिताः सर्वाः आवश्यकसुविधाः सुनिश्चितुं सम्बन्धितविभागानाम् अधिकारिभ्यः अपि निर्देशाः प्रदत्ताः। यात्रायाः समये सुरक्षायाः, समन्वयस्य तथा सर्वासां व्यवस्थाणां सुचारुसञ्चालनस्य च विषये प्रशासनस्य विशेषं ध्यानम् अस्ति।


