शराब पीकर दोबारा ड्राइविंग पड़ी भारी, 15 हजार का जुर्माना; एक माह SP कार्यालय में करनी होगी सफाई। Repeat Drunk Driving to Cost ₹15,000 Fine; Offender Ordered to Clean SP Office for a Month. पुनः मद्यपानं कृत्वा वाहनचालनं दण्डनीयम्, १५ सहस्ररूप्यकाणां दण्डः; मासमेकं पुलिस-अधीक्षक-कार्यालये स्वच्छताकार्यं करणीयम्।

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सड़क सुरक्षा और जनहित को प्राथमिकता देते हुए जांजगीर-चांपा की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) अदालत ने शराब पीकर वाहन चलाने के मामले में कड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने आरोपी युवक पर 15 हजार रुपये का आर्थिक दंड लगाया है। इसके साथ ही उसे एक महीने तक समाज सेवा करने का आदेश भी दिया गया है। अदालत के इस निर्णय को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने और नशे में वाहन चलाने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

अदालत के आदेश के अनुसार आरोपी को एक माह तक अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कार्यालय में सफाई कार्य करना होगा। इस आदेश का उद्देश्य आम लोगों को यातायात नियमों के पालन के प्रति जागरूक करना और शराब के नशे में वाहन चलाने जैसी लापरवाही के खिलाफ सख्त संदेश देना है।

जांजगीर-चांपा में मामला सामने आया, जहां यातायात विभाग की टीम नियमित जांच अभियान चला रही थी। इसी दौरान टीम ने विजय सूर्यवंशी नामक युवक को कथित तौर पर शराब के नशे में वाहन चलाते हुए पकड़ा। कार्रवाई के बाद पुलिस ने आरोपी को आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी कर न्यायालय के समक्ष पेश किया।

आरोपी की स्वीकारोक्ति और अपराध की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए अदालत ने मोटर यान अधिनियम की धारा 185 के तहत उस पर आर्थिक दंड लगाया। इसके साथ ही न्यायालय ने पारंपरिक सजा से अलग सामुदायिक सेवा का आदेश भी दिया, ताकि आरोपी को अपनी जिम्मेदारी का एहसास हो और समाज में सड़क सुरक्षा का संदेश पहुंचे।

अदालत के फैसले के बाद आरोपी ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए पछतावा जाहिर किया। उसने भविष्य में शराब के नशे में वाहन नहीं चलाने और यातायात नियमों का पूरी जिम्मेदारी एवं निष्ठा के साथ पालन करने का आश्वासन दिया।

अदालत के इस फैसले का उद्देश्य लोगों को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करना और यह संदेश देना है कि मानव जीवन सबसे अनमोल है। शराब के नशे में वाहन चलाना केवल चालक के लिए ही खतरनाक नहीं होता, बल्कि सड़क पर सफर कर रहे अन्य लोगों की जान को भी गंभीर जोखिम में डाल सकता है। ऐसे में सुरक्षित यातायात के लिए नियमों का पालन और जिम्मेदारी से वाहन चलाना बेहद जरूरी है।

(English)

Keeping road safety and public interest as priorities, the Chief Judicial Magistrate (CJM) Court in Janjgir-Champa has delivered a strict verdict in a drunk-driving case. The court imposed a fine of ₹15,000 on the accused and also ordered him to perform community service for one month. The decision is being viewed as a significant step toward raising awareness about road safety and curbing the practice of driving under the influence of alcohol.

Under the court’s order, the accused will be required to carry out cleaning duties at the Additional Superintendent of Police’s office for one month. The decision aims to create a strong message among the public about following traffic rules and discouraging irresponsible driving under the influence of alcohol.

The case was reported in Janjgir-Champa, where a traffic department team was conducting a checking drive. During the inspection, the team caught a युवक named Vijay Suryavanshi allegedly driving under the influence of alcohol. Following the action, the police completed the necessary legal formalities and produced the accused before the court.

Considering the accused’s admission and the seriousness of the offence, the court imposed a fine under Section 185 of the Motor Vehicles Act. In addition, the court awarded a distinctive community service sentence, aiming to reinforce the importance of responsible driving and road safety.

Following the court’s action, the accused expressed regret over his mistake and acknowledged his responsibility. He assured the court that he would never drive under the influence of alcohol in the future and would strictly follow all traffic rules.

Following the court’s action, the accused expressed regret over his mistake and acknowledged his responsibility. He assured the court that he would never drive under the influence of alcohol in the future and would strictly follow all traffic rules.

(संस्कृत)

मार्गसुरक्षां जनहितं च सर्वोपरि मन्यमाना जांजगीर-चाम्पा-मुख्यन्यायिकदण्डाधिकारी-अदालत् मद्यपानं कृत्वा वाहनचालनस्य प्रकरणे कठोरं निर्णयं दत्तवती। न्यायालयेन अभियुक्तयुवकाय पञ्चदशसहस्ररूप्यकाणां आर्थिकदण्डः निर्धारितः। तेन सह तस्मै एकमासपर्यन्तं समाजसेवां कर्तुम् आदेशः अपि प्रदत्तः। न्यायालयस्य अयं निर्णयः मार्गसुरक्षाजागरूकतायाः वर्धनाय तथा मद्यपानं कृत्वा वाहनचालनस्य प्रवृत्तेः निरोधाय महत्त्वपूर्णः पदक्षेपः मन्यते।

न्यायालयस्य आदेशानुसारम् अभियुक्तेन एकमासपर्यन्तम् अतिरिक्त-पुलिस-अधीक्षकस्य कार्यालये स्वच्छताकार्यं कर्तव्यं भविष्यति। अस्य आदेशस्य उद्देश्यं जनसामान्यं यातायात-नियमपालनाय जागरूकं कर्तुं तथा मद्यपानं कृत्वा वाहनचालनस्य लापरवाहप्रवृत्तेः विरुद्धं कठोरं सन्देशं प्रसारयितुम् अस्ति।

प्रकरणं जांजगीर-चाम्पा-जनपदस्य अस्ति, यत्र यातायात-विभागस्य दलं नियमितपरीक्षण-अभियानं सञ्चालयति स्म। तस्मिन् समये दलस्य सदस्यैः विजय-सूर्यवंशी-नामकः युवकः कथितरूपेण मद्यपानं कृत्वा वाहनं चालयन् गृहीतः। ततः पुलिस्-प्रशासनेन आवश्यकां विधिकप्रक्रियां सम्पाद्य अभियुक्तः न्यायालयस्य समक्षं प्रस्तुतः।

अभियुक्तस्य स्वीकृतिं अपराधस्य गाम्भीर्यं च दृष्ट्वा न्यायालयेन मोटरयान-अधिनियमस्य १८५-धारायाः अन्तर्गतं तस्मै आर्थिकदण्डः आरोपितः। तेन सह न्यायालयेन पारम्परिकदण्डात् भिन्नरूपेण सामुदायिकसेवायाः आदेशः अपि प्रदत्तः। अस्य निर्णयस्य उद्देश्यं उत्तरदायित्वस्य बोधं जनयितुं तथा मार्गसुरक्षायाः महत्त्वपूर्णं सन्देशं प्रसारयितुम् अस्ति।

न्यायालयस्य निर्णयानन्तरम् अभियुक्तः स्वस्य अपराधं स्वीकृत्य पश्चात्तापं प्रकटितवान्। सः भविष्ये कदापि मद्यपानावस्थायां वाहनं न चालयिष्यति तथा यातायात-नियमांश्च पूर्णनिष्ठया उत्तरदायित्वेन च पालिष्यतीति आश्वासनं दत्तवान्।

न्यायालयस्य अस्य निर्णयस्य मुख्योद्देश्यं जनसामान्यं मार्गसुरक्षायाः विषये जागरूकं कर्तुं तथा मानवजीवनस्य अमूल्यत्वं स्मारयितुम् अस्ति। मद्यपानावस्थायां वाहनचालनं न केवलं चालकस्य जीवनाय घातकं भवितुम् अर्हति, अपितु मार्गे गच्छतां निर्दोषजनानाम् अपि जीवनं संकटे स्थापयितुं शक्नोति। अतः सुरक्षितयातायाताय नियमपालनं उत्तरदायित्वपूर्वकं वाहनचालनं च अत्यावश्यकम् अस्ति।

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