रामअवतार जग्गी हत्याकांड में शूटर चिमन सिंह को सुप्रीम कोर्ट से जमानत, जेल से बाहर आने का रास्ता खुला। Supreme Court Grants Bail to Shooter Chiman Singh in Ramavatar Jaggi Murder Case, Clearing the Way for His Release। रामावतार-जग्गी-हत्याकाण्डे शूटर् चिमनसिंहाय सर्वोच्चन्यायालयेन जामिनं प्रदत्तम्, कारागारात् मुक्तेः मार्गः प्रशस्तः।
बहुचर्चित राम अवतार जग्गी हत्याकांड में दोषी करार दिए गए शूटर चिमन सिंह को सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई। वर्ष 2003 में हुई इस हत्या के मामले में जिला न्यायालय ने चिमन सिंह को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने उसे अंतरिम राहत प्रदान की है।

रायपुर। प्रदेश के चर्चित राम अवतार जग्गी हत्याकांड में दोषी करार दिए गए शूटर चिमन सिंह को सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई। शीर्ष अदालत से अंतरिम राहत मिलने के बाद उसके जेल से रिहा होने का रास्ता साफ हो गया है। चिमन सिंह को यह राहत जिला न्यायालय द्वारा सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई के दौरान मिली।
राम अवतार जग्गी हत्याकांड में वर्ष 2007 में रायपुर जिला न्यायालय ने चिमन सिंह, याह्या ढेबर, एएस गिल समेत अन्य पुलिस अधिकारियों और कुल 28 सह-आरोपितों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। वहीं, निचली अदालत ने अमित जोगी को इस मामले में बरी कर दिया था। हालांकि, बाद में हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए उन्हें भी दोषी करार दिया। हाईकोर्ट के इस आदेश पर फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा रखी है।
सुप्रीम कोर्ट में दायर की थी अपील
जिला अदालत के इस फैसले को चुनौती देते हुए चिमन सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी। मामले की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने उसकी जमानत याचिका मंजूर करते हुए उसे अंतरिम राहत प्रदान की।
राम अवतार जग्गी की हत्या 4 जून 2003 को हुई थी।
गौरतलब है कि 4 जून 2003 को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के तत्कालीन प्रदेश कोषाध्यक्ष राम अवतार जग्गी की मौदहापारा थाना क्षेत्र के पास दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उस दौर में यह प्रकरण प्रदेश के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में गिना जाता था। अब सुप्रीम कोर्ट से चिमन सिंह को जमानत मिलने के बाद यह बहुचर्चित मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है।
English
The Supreme Court on Monday granted bail to shooter Chiman Singh, who was convicted in the high-profile Ram Avtar Jaggi murder case. In connection with the murder that took place in 2003, the district court had sentenced him to life imprisonment. While hearing his appeal against the conviction and sentence, the apex court granted him interim relief.
Raipur: The Supreme Court on Monday granted bail to shooter Chiman Singh, who was convicted in the high-profile Ram Avtar Jaggi murder case. Following the interim relief granted by the apex court, the way has been cleared for his release from jail. The relief came during the hearing of his appeal challenging the life imprisonment sentence awarded by the district court.
In 2007, the Raipur District Court convicted Chiman Singh, Yahya Dhebhar, A.S. Gill, several police officials, and a total of 28 co-accused in the Ram Avtar Jaggi murder case, sentencing them to life imprisonment. Amit Jogi, however, was acquitted by the trial court. Later, the High Court overturned that decision and also held him guilty. The Supreme Court has currently stayed the High Court’s order.
Appeal Filed in the Supreme Court
Chiman Singh had filed an appeal in the Supreme Court challenging the district court’s verdict. During the hearing, the apex court accepted his bail plea and granted him interim relief.
Ram Avtar Jaggi was murdered on June 4, 2003.
It is worth noting that on June 4, 2003, Ram Avtar Jaggi, the then state treasurer of the Nationalist Congress Party (NCP), was shot dead in broad daylight near the Maudhapara police station area. At the time, the case was considered one of the most high-profile criminal cases in the state. With Chiman Singh now being granted bail by the Supreme Court, the high-profile case has once again returned to the spotlight.
संस्कृत:
बहुचर्चिते राम-अवतार-जग्गी-हत्याकाण्डे दोषी घोषिताय शूटर् चिमनसिंहाय सोमवासरे सर्वोच्चन्यायालयेन जामिनं प्रदत्तम्। वर्षे 2003 तमे संवत्सरे जाते अस्मिन् हत्याप्रकरणे जिलान्यायालयेन तस्मै आजीवनकारावासस्य दण्डः विहितः आसीत्। तस्य निर्णयस्य विरुद्धं दायरितायाः अपीलायाः श्रवणकाले सर्वोच्चन्यायालयेन तस्मै अन्तरिमराहतिः प्रदत्ता।
रायपुरम्। राज्यस्य बहुचर्चिते राम-अवतार-जग्गी-हत्याकाण्डे दोषी घोषिताय शूटर् चिमनसिंहाय सोमवासरे सर्वोच्चन्यायालयेन जामिनं प्रदत्तम्। सर्वोच्चन्यायालयात् अन्तरिमराहतिः प्राप्ता इति कारणात् तस्य कारागारात् मुक्तेः मार्गः प्रशस्तः अभवत्। जिलान्यायालयेन विहितस्य आजीवनकारावासदण्डस्य विरुद्धं दायरितायाः अपीलायाः श्रवणकाले तस्मै एषा राहतिः प्रदत्ता।
राम-अवतार-जग्गी-हत्याकाण्डे वर्षे 2007 तमे रायपुर-जिलान्यायालयेन चिमनसिंहः, याह्या-ढेबरः, ए.एस.-गिलः, अन्ये पुलिस-अधिकारीणः तथा समग्रतया अष्टाविंशतिः सह-अभियुक्ताः दोषिणः घोषिताः तथा तेभ्यः आजीवनकारावासदण्डः विहितः। तु अमित-जोगी महोदयः अधोन्यायालयेन अस्मिन् प्रकरणे निर्दोषः घोषितः आसीत्। पश्चात् उच्चन्यायालयेन अधोन्यायालयस्य निर्णयः परिवर्त्य सः अपि दोषी घोषितः। सम्प्रति उच्चन्यायालयस्य अस्मिन् आदेशे सर्वोच्चन्यायालयेन स्थगनादेशः प्रदत्तः अस्ति।
सर्वोच्चन्यायालये अपीलिका दायरीकृता आसीत्
जिलान्यायालयस्य अस्य निर्णयस्य विरुद्धं चिमनसिंहेन सर्वोच्चन्यायालये अपीलिका दायरीकृता आसीत्। प्रकरणस्य श्रवणकाले सर्वोच्चन्यायालयेन तस्य जामिनयाचिका स्वीकृता तथा तस्मै अन्तरिमराहतिः प्रदत्ता।
राम-अवतार-जग्गी-महोदयस्य हत्या 2003 तमे वर्षे जून-मासस्य चतुर्थे दिने अभवत्।
उल्लेखनीयं यत् 2003 तमे वर्षे जून-मासस्य चतुर्थे दिने राष्ट्रवादी-कांग्रेस-पक्षस्य (एनसीपी) तत्कालीनः प्रदेशकोषाध्यक्षः राम-अवतार-जग्गी मौदहापारा-पुलिस-थानस्य समीपे दिवा एव गोलीप्रहारेण हतः आसीत्। तस्मिन् काले एषः प्रकरणः प्रदेशस्य अत्यन्तं चर्चितेषु आपराधिकप्रकरणेषु गणितः आसीत्। अधुना सर्वोच्चन्यायालयेन चिमनसिंहाय जामिनं प्रदत्तम्, तेन एषः बहुचर्चितः प्रकरणः पुनः एकवारं समाचारमुख्यतां प्राप्तवान्।


