उज्जैन में शिप्रा नदी के ग्रीन बेल्ट पर अवैध निर्माण, होटल और कॉटेज खड़े किए। Hotel and Cottages Built Illegally in Ujjain’s Green Belt Along the Shipra River। उज्जयिन्यां शिप्रानद्याः हरितपट्टिकायां अवैधरूपेण निर्मितं भोजनालयं कुटीराणि च।

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उज्जैन में शिप्रा नदी तट के ग्रीन बेल्ट क्षेत्र में पक्के निर्माण का मामला सामने आया है। ग्राम गोठड़ा स्थित सर्वे नंबर 31 और 32 में होटल राजवासा का निर्माण किए जाने की जानकारी सामने आई है।

पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों ने शिकायत में आरोप लगाया है कि अधिकारियों ने मौके का भौतिक निरीक्षण किए बिना ही निर्माण की अनुमति दे दी। उनका कहना है कि निर्माण कार्य शुरू होने से लेकर पूरा होने तक किसी स्तर पर प्रभावी जांच नहीं की गई। वहीं, इन संरचनाओं को बचाने के लिए प्रस्तावित एमआर-22 सड़क का मार्ग बदलने की कवायद किए जाने की बात भी सामने आई है।

ग्राम गोठड़ा के सर्वे नंबर 31 और 32 में होटल राजवासा के निर्माण की जानकारी सामने आई है। बहुमंजिला होटल परिसर में गार्डन, स्विमिंग पूल और कॉटेज जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं। बताया जा रहा है कि होटल से नदी के घाट तक पहुंचने की व्यवस्था भी मौजूद है। जिस भू-भाग पर यह निर्माण हुआ है, वह ग्रीन बेल्ट क्षेत्र में आता है। ऐसे में अब यह सवाल उठ रहा है कि इस संवेदनशील क्षेत्र में निर्माण की अनुमति किन नियमों के तहत दी गई और क्या निर्माण के दौरान लागू प्रतिबंधों का पूरी तरह पालन किया गया।

होटल के पिछले हिस्से के ग्रीन बेल्ट में आने और स्विमिंग पूल के निर्धारित ग्रीन बेल्ट क्षेत्र में होने को लेकर वास्तविक स्थिति अब जांच का विषय बन गई है। ग्राम एवं नगर निवेश, उज्जैन के अन्वेषक अंशुल गुप्ता के अनुसार, विभाग ने केवल कृषि भूमि पर निर्माण की अनुमति दी है और ग्रीन बेल्ट क्षेत्र के लिए किसी तरह की अनुमति जारी नहीं की गई। वहीं, होटल संचालक प्रदीप अग्रवाल का कहना है कि होटल ग्रीन बेल्ट से बाहर स्थित है और पूरा निर्माण ग्राम एवं नगर निवेश विभाग से स्वीकृत नक्शे के मुताबिक किया गया है।

पक्के निर्माणों को बचाने के लिए एमआर-22 का मार्ग बदलने की कवायद

मास्टर प्लान-2035 में शिप्रा नदी के घाट से 200 मीटर की दूरी पर 30 मीटर चौड़ी एमआर-22 सड़क का प्रावधान किया गया है। जमीन का सीमांकन होने पर पता चला कि प्रस्तावित मार्ग के आसपास पहले से कई पक्के निर्माण मौजूद हैं। मूल रूट से सड़क बनाने पर इन निर्माणों के प्रभावित होने की आशंका है। इसी वजह से अब एमआर-22 को नदी से करीब 100 मीटर दूर ले जाने का नया प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।

शिप्रा नदी के संरक्षण के लिए तय ग्रीन बेल्ट क्षेत्र में निर्माण के बाद यदि सड़क परियोजना का मार्ग भी उन्हीं संरचनाओं को ध्यान में रखकर बदला जाता है, तो भविष्य में नदी तट पर निर्माण को लेकर गलत नजीर स्थापित होने की आशंका है। इसलिए एमआर-22 का रूट बदलने से पहले ग्रीन बेल्ट में मौजूद निर्माणों की वैधता, संबंधित स्वीकृतियों और नियमों के पालन की विस्तृत जांच को आवश्यक माना जा रहा है।

हाईकोर्ट ने ग्रीन बेल्ट क्षेत्र में हुए निर्माणों का पूरा ब्योरा तलब किया

शिप्रा नदी के ग्रीन बेल्ट में हुए निर्माणों का मुद्दा अब न्यायालय तक पहुंच गया है। हाईकोर्ट ने इस क्षेत्र में किए गए निर्माणों की सूची उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। इसके बाद नदी से 200 मीटर के दायरे में मौजूद सभी निर्माणों की वैधता और अनुमति को लेकर प्रशासनिक जांच भी अहम हो गई है।

English

A case of permanent construction within the green belt along the Shipra River has come to light in Ujjain. Hotel Rajwasa has reportedly been constructed on Survey Nos. 31 and 32 in Gothda village.

A case of hotel, cottage and other permanent constructions has come to light within the green belt along the Shipra River in Ujjain. Multi-storey hotel buildings, cottages and other structures have reportedly been developed within the prescribed 200-metre zone of the river. The constructions on Survey Nos. 31 and 32 in Gothda village have raised concerns over the protection and preservation of the Shipra’s green belt.

Environmental activists have alleged in their complaint that the authorities granted permission without conducting a physical inspection of the site. They also claimed that no proper inspection was carried out either during or after the construction. Interestingly, efforts are reportedly underway to alter the proposed route of MR-22 to prevent these structures from being affected.

Hotel Rajwasa has reportedly been constructed on Survey Nos. 31 and 32 in Gothda village. The multi-storey hotel complex is said to include a garden, swimming pool and cottages, along with access from the premises to the river ghat. The land on which the hotel has been developed falls within the designated green belt. This has raised questions about the grounds on which permission was granted and whether all prescribed restrictions were followed during construction.

The status of the rear portion of the hotel allegedly falling within the green belt, as well as the swimming pool’s location in the designated green belt area, is now subject to verification. Anshul Gupta, an investigator with the Town and Country Planning Department in Ujjain, said permission was granted only for construction on agricultural land and no approval was issued for any construction within the green belt. Hotel operator Pradeep Agrawal, however, claimed that the hotel is located outside the green belt and that the construction was carried out as per the plan approved by the Town and Country Planning Department.

Preparations Underway to Reroute MR-22 to Protect Permanent Structures

Under Master Plan-2035, a 30-metre-wide MR-22 road has been proposed at a distance of 200 metres from the Shipra River ghat. After the land was identified, several permanent structures were found to already exist along the proposed route. Construction of the road as per the original alignment could affect these structures. Consequently, a proposal is now being prepared to shift the MR-22 route to around 100 metres away from the river.

If the road project is modified to accommodate structures built within the designated green belt meant to protect the Shipra River, it could set a problematic precedent for future construction along the riverbank. Therefore, before altering the MR-22 alignment, the legality of the existing constructions, the approvals granted for them and compliance with the prescribed regulations are considered necessary to be thoroughly examined.

High Court Seeks Detailed List of Constructions in the Green Belt Area

The issue of constructions within the Shipra River’s green belt has now reached the court. The High Court had sought a list of constructions carried out in the designated green belt area. Following this, administrative scrutiny of the legality and approvals of structures located within 200 metres of the river has also assumed significance.

संस्कृत:

उज्जयिन्यां शिप्रानद्याः तटे हरितपट्टिकाक्षेत्रे पक्कनिर्माणस्य विषयः प्रकाशे आगतः। गोठडाग्रामस्य ३१ तथा ३२ क्रमाङ्कितयोः सर्वेक्षणक्षेत्रयोः ‘राजवासा’ नामकं भोजनालयं निर्मितमिति ज्ञातम्।

उज्जयिन्यां शिप्रानद्याः तटस्थे हरितपट्टिकाक्षेत्रे भोजनालयस्य, कुटीराणां तथा अन्येषां स्थायिनिर्माणानां प्रकरणं प्रकाशमागतम्। नद्याः निर्धारिते द्विशतमीटरपरिमिते क्षेत्रे बहुमञ्जिलाभवनं, कुटीराणि तथा अन्याः संरचनाः निर्मिताः इति कथ्यते। गोठडाग्रामस्य ३१ तथा ३२ क्रमाङ्कितेषु सर्वेक्षणक्षेत्रेषु कृतैः एतैः निर्माणैः शिप्रानद्याः हरितपट्टिकायाः संरक्षणव्यवस्थायाः विषये प्रश्नाः उद्भूताः।

पर्यावरणसंरक्षणसम्बद्धैः जनैः कृतायां शिकायतायाम् आरोपितं यत् अधिकारिभिः स्थलस्य भौतिकनिरीक्षणं विना एव निर्माणस्य अनुमतिः प्रदत्ता। निर्माणकार्यस्य समये तथा ततः परं च सम्यक् परीक्षणं न कृतमिति अपि तैः उक्तम्। विशेषतया एतेषां निर्माणानां रक्षणार्थं प्रस्तावितस्य एम.आर.-२२ मार्गस्य पथपरिवर्तनस्य प्रयासः क्रियमाणः इति अपि ज्ञायते।

गोठडाग्रामस्य ३१ तथा ३२ क्रमाङ्कितयोः सर्वेक्षणक्षेत्रयोः ‘राजवासा’ नामकस्य भोजनालयस्य निर्माणं कृतमिति ज्ञायते। बहुमञ्जिले अस्मिन् भवनसमूहे उद्यानं, जलक्रीडास्थलं तथा कुटीराणि निर्मितानि सन्ति। होटलपरिसरात् नद्याः घाटपर्यन्तं गमनस्य व्यवस्था अपि अस्ति इति कथ्यते। यत्र एतत् निर्माणं कृतम्, सा भूमिः हरितपट्टिकाक्षेत्रे अन्तर्भवति। अतः प्रश्नः उदेति यत् अस्मिन् क्षेत्रे निर्माणस्य अनुमतिः केषां नियमानाम् आधारेण प्रदत्ता तथा निर्माणकाले निर्धारितनिषेधानां पूर्णतया पालनं कृतं वा न वा।

भोजनालयस्य पृष्ठभागः हरितपट्टिकाक्षेत्रे अन्तर्भवति वा न वा, तथा जलक्रीडास्थलं हरितपट्टिकायाः निर्धारिते क्षेत्रे अस्ति वा न वा इति विषयः अधुना परीक्षणीयः अभवत्। उज्जयिन्याः ग्राम-नगरनियोजनविभागस्य अन्वेषकः अंशुलगुप्तः अवदत् यत् विभागेन केवलं कृषिभूमौ निर्माणस्य अनुमतिः प्रदत्ता, हरितपट्टिकाक्षेत्रे निर्माणार्थं कापि अनुमतिः न प्रदत्ता। अपरतः भोजनालयसञ्चालकः प्रदीप अग्रवालः दावं कृतवान् यत् भोजनालयः हरितपट्टिकाक्षेत्रात् बहिः स्थितः अस्ति तथा च निर्माणकार्यं विभागेन अनुमोदितस्य मानचित्रस्य अनुसारमेव कृतम्।

पक्कनिर्माणानां रक्षणार्थं एम.आर.-२२ मार्गस्य परिवर्तनस्य सज्जता

मास्टर प्लान-२०३५ अन्तर्गते शिप्रानद्याः घाटात् २०० मीटरपरिमिते अन्तरे ३० मीटरविस्तृतस्य एम.आर.-२२ मार्गस्य प्रस्तावः कृतः अस्ति। भूमेः सीमाङ्कनानन्तरं ज्ञातं यत् प्रस्तावितमार्गस्य समीपे पूर्वमेव अनेकानि पक्कनिर्माणानि सन्ति। मूलमार्गेण मार्गनिर्माणे एतेषां निर्माणानां प्रभाविता सम्भाव्यते। अतः अधुना एम.आर.-२२ मार्गं नद्याः समीपात् प्रायः १०० मीटरदूरे परिवर्तयितुं नूतनः प्रस्तावः सज्जीक्रियते।

शिप्रानद्याः संरक्षणार्थं निर्धारिते हरितपट्टिकाक्षेत्रे निर्माणानि कृतानि सन्ति। यदि एतेषां निर्माणानां अनुरूपं मार्गपरियोजनायाः परिवर्तनं क्रियते, तर्हि भविष्ये नदीतटे निर्माणकार्यस्य विषये अनुचितः दृष्टान्तः स्थापितः भवितुम् अर्हति। अतः एम.आर.-२२ मार्गस्य परिवर्तनात् पूर्वं हरितपट्टिकायां विद्यमाननिर्माणानां वैधता, प्राप्तानुमतयः तथा निर्धारितनियमपालनस्य विस्तृतं परीक्षणं आवश्यकं मन्यते।

उच्चन्यायालयेन हरितपट्टिकाक्षेत्रे कृतनिर्माणानां सम्पूर्णविवरणं तलब्धम्।

शिप्रानद्याः हरितपट्टिकाक्षेत्रे कृतनिर्माणानां विषयः अधुना न्यायालयपर्यन्तं प्राप्तः अस्ति। उच्चन्यायालयेन अस्मिन् क्षेत्रे कृतानां निर्माणानां सूची प्रस्तुतुं निर्देशः प्रदत्तः आसीत्। ततः परं नद्याः २०० मीटरपरिमिते क्षेत्रे विद्यमानानां सर्वेषां निर्माणानां वैधतायाः अनुमतीनां च प्रशासनिकपरीक्षणं महत्त्वपूर्णं जातम्।

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