छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति संजय अग्रवाल को भावपूर्ण विदाई। Chhattisgarh High Court bids farewell to Justice Sanjay Agrawal।छत्तीसगढ-उच्चन्यायालये न्यायमूर्तेः संजय-अग्रवालस्य भावपूर्णा विदाई।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति संजय अग्रवाल के सेवानिवृत्ति अवसर पर मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा के न्यायालय कक्ष में गरिमामयी विदाई समारोह आयोजित किया गया। लगभग एक दशक के न्यायिक कार्यकाल में न्यायमूर्ति अग्रवाल ने एकलपीठ और युगलपीठ में सुनवाई करते हुए 6,300 से अधिक मामलों का सफलतापूर्वक निराकरण किया। विधि के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान, न्यायिक कार्यों के प्रति समर्पण और शालीन व्यक्तित्व की इस अवसर पर सभी ने सराहना की।

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में बुधवार को न्यायमूर्ति संजय अग्रवाल के सेवानिवृत्ति अवसर पर मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा के न्यायालय कक्ष में विदाई समारोह आयोजित किया गया। मुख्य न्यायाधीश ने न्यायमूर्ति अग्रवाल के लंबे न्यायिक अनुभव, गहन विधिक ज्ञान, निष्पक्ष कार्यशैली और प्रशासनिक क्षमता की सराहना की। उन्होंने कहा कि न्यायमूर्ति अग्रवाल ने प्रत्येक प्रकरण की सुनवाई धैर्य, संवेदनशीलता और पूर्ण निष्पक्षता के साथ की। उनके शांत और सौम्य स्वभाव, संतुलित दृष्टिकोण तथा गरिमापूर्ण व्यवहार ने उन्हें न्यायिक परिवार के साथ अधिवक्ताओं के बीच भी सम्मान और स्नेह का पात्र बनाए रखा।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि न्यायमूर्ति अग्रवाल ने अपने न्यायिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए सदैव न्यायपालिका की प्रतिष्ठा और गरिमा को सर्वोच्च स्थान दिया। कानून के शासन के प्रति उनकी दृढ़ निष्ठा और न्याय के मानवीय पहलुओं के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण युवा न्यायिक अधिकारियों के लिए अनुकरणीय और प्रेरणादायक है।
करीब दस वर्षों की न्यायिक सेवा में 6,300 से अधिक मामलों का किया निराकरण
न्यायमूर्ति संजय अग्रवाल को 29 सितंबर 2016 को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। इसके बाद 8 जनवरी 2018 को उन्होंने स्थायी न्यायाधीश के रूप में पदभार ग्रहण किया। अपने न्यायिक कार्यकाल में उन्होंने एकलपीठ और युगलपीठ दोनों में अनेक महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई की और 6,300 से अधिक प्रकरणों का सफलतापूर्वक निराकरण किया। उनके महत्वपूर्ण न्यायिक योगदान में एकलपीठ के 102 और युगलपीठ के 163 प्रकाशित निर्णय भी शामिल हैं।
खनिज और सेवा कानून से जुड़े अहम मामलों में दिए महत्वपूर्ण निर्णय
न्यायमूर्ति संजय अग्रवाल के महत्वपूर्ण फैसलों में मेसर्स बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड बनाम छत्तीसगढ़ राज्य एवं अन्य (डब्ल्यूपीसी 1943/2020) का निर्णय विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। इस मामले की सुनवाई के दौरान उन्होंने खनिज रियायत नियमों के तहत केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति से संबंधित प्रावधानों की विस्तृत और महत्वपूर्ण व्याख्या की। इस निर्णय ने खनिज कानून से जुड़े मामलों में कानूनी प्रावधानों को स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
परिवार की विधिक परंपरा से मिली न्याय के क्षेत्र में मजबूत विरासत
अपने विदाई संबोधन में न्यायमूर्ति संजय अग्रवाल ने अपने न्यायिक सफर में सहयोग देने वाले सभी लोगों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने ईश्वर, मुख्य न्यायाधीश, साथी न्यायाधीशों, परिवार के सदस्यों, न्यायिक अधिकारियों, सहयोगियों, अधिवक्ताओं और पूरे हाई कोर्ट परिवार का आभार माना। उनके न्यायिक जीवन की पृष्ठभूमि में परिवार की सुदृढ़ विधिक परंपरा भी रही है। उनके दादा इस क्षेत्र के प्रतिष्ठित सिविल अधिवक्ता थे, जबकि उनके चाचा रवीश चंद्र अग्रवाल वरिष्ठ अधिवक्ता होने के साथ ही अविभाजित मध्यप्रदेश के महाधिवक्ता का दायित्व भी संभाल चुके हैं।
विदाई समारोह में न्यायिक जगत की कई हस्तियां रहीं मौजूद
न्यायमूर्ति संजय अग्रवाल के सम्मान में आयोजित विदाई समारोह में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के सभी न्यायाधीश, उनके परिवारजन और विधि जगत से जुड़े अनेक प्रमुख लोग उपस्थित रहे। समारोह में महाधिवक्ता, राज्य विधिक परिषद के अध्यक्ष, हाई कोर्ट अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष, वरिष्ठ अधिवक्ता और भारत सरकार के वरिष्ठ पैनल अधिवक्ता भी शामिल हुए। इसके अलावा विधि एवं विधायी कार्य विभाग के प्रमुख सचिव, रजिस्ट्रार जनरल, रजिस्ट्री और न्यायिक अकादमी के अधिकारी, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के न्यायिक अधिकारी, प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी तथा हाई कोर्ट के अधिकारी-कर्मचारियों ने भी समारोह में सहभागिता की।
English
A dignified farewell ceremony was held in the courtroom of Chief Justice Ramesh Sinha at the Chhattisgarh High Court on the retirement of Justice Sanjay Agrawal. During his nearly decade-long judicial tenure, he successfully disposed of more than 6,300 cases while hearing matters as a single judge and as part of division benches. His significant contribution to the field of law, dedication to judicial duties and graceful conduct were widely appreciated on the occasion.
Bilaspur: A farewell ceremony was held on Wednesday in the courtroom of Chief Justice Ramesh Sinha at the Chhattisgarh High Court on the retirement of Justice Sanjay Agrawal. The Chief Justice praised his judicial experience, profound legal knowledge, impartial approach and administrative efficiency. He said Justice Agrawal heard every case with patience, sensitivity and complete fairness. His calm nature, balanced outlook and dignified conduct earned him widespread respect and affection among members of the judicial fraternity and the legal community.
The Chief Justice said that Justice Agrawal always upheld the dignity and prestige of the judiciary while discharging his judicial responsibilities. His unwavering commitment to the rule of law and his sensitive approach towards the human aspects of justice continue to serve as an inspiration and example for young judicial officers.
Nearly a Decade-Long Judicial Journey, Over 6,300 Cases Disposed Of
Justice Sanjay Agrawal was elevated as a judge of the Chhattisgarh High Court on September 29, 2016, and later took oath as a permanent judge on January 8, 2018. During his judicial tenure, he heard numerous significant cases in both single and division benches and successfully disposed of more than 6,300 matters. His judicial record also includes 102 reported judgments delivered as part of single benches and 163 reported judgments in division benches.
Significant Judgments in Mineral and Service Law Cases
Among the significant judgments delivered by Justice Sanjay Agrawal, the decision in M/s Bajrang Power and Ispat Ltd. vs. State of Chhattisgarh and Others (WPC 1943/2020) remains particularly noteworthy. While hearing the case, he gave an important interpretation of the provisions concerning the prior approval of the Central Government under the Mineral Concession Rules. The ruling played a significant role in bringing greater clarity to legal issues related to mineral law.
A Strong Legal Legacy Rooted in the Family
In his farewell address, Justice Sanjay Agrawal expressed gratitude to everyone who supported him throughout his judicial journey. He thanked God, the Chief Justice, fellow judges, his family, judicial officers, colleagues, advocates and the entire High Court fraternity. His judicial career was also rooted in a strong family legacy in the legal profession. His grandfather was a renowned civil lawyer in the region, while his uncle, Ravish Chandra Agrawal, was a senior advocate and had also served as the Advocate General of undivided Madhya Pradesh.
Prominent Members of the Legal Fraternity Attend Farewell Ceremony
The farewell ceremony held in honour of Justice Sanjay Agrawal witnessed the presence of all judges of the Chhattisgarh High Court, his family members and several prominent representatives of the legal fraternity. The Advocate General, the Chairman of the State Bar Council, the President of the High Court Bar Association, senior advocates and senior panel counsel for the Government of India were also present. Senior officials, including the Principal Secretary of the Law and Legislative Affairs Department, the Registrar General, officers of the Registry and Judicial Academy, judicial officers of the State Legal Services Authority, administrative and police officers, as well as officers and employees of the High Court, also attended the ceremony.
संस्कृत
छत्तीसगढ-उच्चन्यायालये न्यायमूर्तेः संजय-अग्रवालस्य सेवानिवृत्त्यवसरे मुख्यन्यायाधीशस्य रमेश-सिन्हस्य न्यायालय-कक्षे गरिमामयः विदाई-समारोहः आयोजितः। प्रायः दशवर्षपर्यन्तं स्वीयस्य न्यायिक-कार्यकालस्य अवधौ तेन एकलपीठे युगलपीठे च श्रवणं कुर्वता 6,300-तः अधिकानां प्रकरणानां सफलतया निराकरणं कृतम्। विधिक्षेत्रे तस्य महत्त्वपूर्णं योगदानं, न्यायिककर्तव्येषु समर्पणं तथा शालीनाचारः सर्वैः प्रशंसितः।
बिलासपुरम्। छत्तीसगढ-उच्चन्यायालये बुधवासरे न्यायमूर्तेः संजय-अग्रवालस्य सेवानिवृत्त्यवसरे मुख्यन्यायाधीशस्य रमेश-सिन्हस्य न्यायालय-कक्षे विदाई-समारोहः आयोजितः। मुख्यन्यायाधीशेन तस्य न्यायिकजीवनस्य, गभीरस्य विधिज्ञानस्य, निष्पक्षकार्यशैल्याः तथा प्रशासनिकदक्षतायाः प्रशंसा कृता। तेन उक्तं यत् न्यायमूर्ति अग्रवालः प्रत्येकस्य प्रकरणस्य श्रवणं अत्यन्तधैर्येण, संवेदनशीलतया पूर्णनिष्पक्षतया च अकरोत्। तस्य शान्तः सौम्यः स्वभावः, सन्तुलिता दृष्टिः तथा शालीनः आचारः न्यायिकपरिवारे विधिसमुदाये च तं सर्वेषां प्रियं सम्माननीयञ्च अकरोत्।
मुख्यन्यायाधीशेन उक्तं यत् न्यायमूर्ति अग्रवालः स्वीयानां न्यायिककर्तव्यानां निर्वहणकाले सदैव न्यायपालिकायाः गरिमां प्रतिष्ठां च उन्नतां रक्षितवान्। विधिशासनस्य प्रति तस्य दृढा निष्ठा तथा न्यायस्य मानवीयपक्षस्य प्रति संवेदनशीला दृष्टिः युवा-न्यायिकाधिकारिणां कृते प्रेरणादायिनी अनुकरणीया च अस्ति।
प्रायः दशकव्यापी न्यायिकयात्रा, 6,300-तः अधिकप्रकरणानां सफलं निराकरणम्
न्यायमूर्ति संजय-अग्रवालः 29 सितम्बर 2016 दिनाङ्के छत्तीसगढ-उच्चन्यायालयस्य न्यायाधीशपदे नियुक्तः अभवत्। ततः 8 जनवरी 2018 दिनाङ्के सः स्थायिन्यायाधीशरूपेण शपथं गृहीतवान्। स्वीयस्य न्यायिककार्यकालस्य अवधौ तेन एकलपीठे युगलपीठे च अनेकमहत्त्वपूर्णप्रकरणानां श्रवणं कृतम् तथा 6,300-तः अधिकानां प्रकरणानां सफलतया निराकरणं कृतम्। तस्य उल्लेखनीयेषु न्यायिकयोगदानेषु एकलपीठस्य 102 प्रकाशितनिर्णयाः तथा युगलपीठस्य 163 प्रकाशितनिर्णयाः अपि सम्मिलिताः सन्ति।
खनिज-सेवा-विधिसम्बद्धेषु महत्त्वपूर्णप्रकरणेषु उल्लेखनीयनिर्णयाः
न्यायमूर्तेः संजय-अग्रवालस्य महत्त्वपूर्णनिर्णयेषु मेसर्स बजरंग पावर एण्ड इस्पात लिमिटेड बनाम छत्तीसगढराज्यम् एवं अन्ये (डब्ल्यूपीसी 1943/2020) इति प्रकरणस्य निर्णयः विशेषरूपेण उल्लेखनीयः अभवत्। अस्मिन् प्रकरणे तेन खनिज-अनुज्ञा-नियमेषु केन्द्रसरकारस्य पूर्वस्वीकृतिसम्बद्धानां प्रावधानानां विस्तृता महत्त्वपूर्णा च व्याख्या कृता। अस्य निर्णयस्य माध्यमेन खनिजविधिसम्बद्धानां कानूनीप्रावधानानां स्पष्टीकरणे महत्त्वपूर्णं योगदानं जातम्।
परिवारे दृढा विधिकपरम्परा विरासतारूपेण स्थिता
स्वीयविदाईसम्बोधने न्यायमूर्ति संजय-अग्रवालः स्वस्य न्यायिकजीवनयात्रायां सहयोगं प्रदत्तवत्सु सर्वेषु प्रति कृतज्ञतां प्रकटितवान्। तेन ईश्वरस्य, मुख्यन्यायाधीशस्य, सहन्यायाधीशानां, परिवारजनानां, न्यायिकाधिकारिणां, सहकर्मिणां, अधिवक्तृणां तथा सम्पूर्णस्य उच्चन्यायालय-परिवारस्य च आभारः व्यक्तः। तस्य न्यायिकजीवनस्य पृष्ठभूमौ परिवारस्य सुदृढा विधिकपरम्परा अपि आसीत्। तस्य पितामहः अस्मिन् अञ्चले प्रसिद्धः सिविल-अधिवक्ता आसीत्, यदा तु तस्य पितृव्यः रवीशचन्द्र-अग्रवालः वरिष्ठाधिवक्ता तथा अविभाजित-मध्यप्रदेशस्य महाधिवक्ता अपि अभवत्।
विदाईसमारोहे न्यायिकजगतः अनेकाः प्रमुखव्यक्तयः उपस्थिताः
न्यायमूर्तेः संजय-अग्रवालस्य सम्मानार्थम् आयोजिते विदाईसमारोहे छत्तीसगढ-उच्चन्यायालयस्य सर्वे न्यायाधीशाः, तस्य परिवारजनाः तथा विधिक्षेत्रस्य अनेकाः प्रमुखप्रतिनिधयः उपस्थिताः आसन्। समारोहे महाधिवक्ता, राज्यविधिकपरिषदः अध्यक्षः, उच्चन्यायालय-अधिवक्तृसंघस्य अध्यक्षः, वरिष्ठाधिवक्तारः तथा भारतसरकारस्य वरिष्ठपैनल-अधिवक्तारः अपि उपस्थिताः आसन्। तदतिरिक्तं विधि-विधायीकार्यविभागस्य प्रमुखसचिवः, रजिस्ट्रार-जनरलः, रजिस्ट्री-न्यायिक-अकादम्याः अधिकारिणः, राज्यविधिकसेवा-प्राधिकरणस्य न्यायिकाधिकारिणः, प्रशासनिक-पुलिस-अधिकारिणः तथा उच्चन्यायालयस्य अधिकारी-कर्मचारिणः अपि समारोहे सहभागं कृतवन्तः।


