जन्मदिन से एक दिन पहले भूपेश बघेल का ‘सवालों वाला केक’—BJP सरकार को महंगाई, पेपर लीक और सट्टे की ऐसी कड़वी मिठाई खिलाई कि जवाब ढूंढते-ढूंढते चाय ठंडी हो जाए। One day before his birthday, Bhupesh Baghel’s ‘Cake of Questions’—fed such a bitter sweet of inflation, paper leaks, and betting to the BJP government that the tea would get cold while searching for answers। जन्मोत्सवात् एकदिने पूर्वे भूपेश बघेलस्य ‘प्रश्नानां मोदकम्’ (केकः)—तेन भाजपा-सर्वकाराय मूल्यवृद्धेः, प्रश्नपत्र-प्रकटनस्य, द्यूतक्रीडायाः च तादृशी तिक्ता मधुरा रसगुल्लिका भोजिता, यत् उत्तरं अन्विष्यन्तः तेषां चषक-चायं शीतलं भवेत्।
🇮🇳Hindi
रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने वंदे मातरम के मुद्दे, बढ़ती महंगाई, पेट्रोल-डीजल की कीमतों और प्रदेश में कथित सट्टा व शराब कारोबार को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने खनिज संसाधनों के मामले में राज्य को हो रही कथित राजस्व हानि पर सरकार की चुप्पी को लेकर भी सवाल उठाए।

भूपेश बघेल ने कहा कि हाल ही में विधानसभा और संसद के सत्रों में कई महत्वपूर्ण विषय चर्चा का केंद्र रहे, लेकिन कुछ ऐसे मुद्दे भी रहे जिन पर पर्याप्त चर्चा किए बिना ही फैसले कर दिए गए। उन्होंने खान एवं खनिज विकास एवं विनियमन संशोधन 2026 का उल्लेख करते हुए कहा कि खनिज संसाधनों से जुड़े मामलों में राज्य सरकारों के अधिकारों में बदलाव किया गया है।
पूर्व मुख्यमंत्री के अनुसार, पहले राज्यों को मिलने वाले अधिकारों में कमी करते हुए अधिक शक्तियां केंद्र सरकार के पास केंद्रित कर दी गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे राज्यों के राजस्व पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इस मुद्दे पर केरल और झारखंड की सरकारों द्वारा भी आपत्ति दर्ज कराए जाने का उल्लेख करते हुए बघेल ने कहा कि खनिज संपदा से जुड़े राज्यों के आर्थिक हितों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।
उन्होंने सरकार से वंदे मातरम, महंगाई, ईंधन की कीमतों और प्रदेश में कथित अवैध कारोबार से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट जवाब देने की मांग की।
शराब घोटाले और ऑनलाइन सट्टे पर उठाए सवाल।
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रदेश में शराब की कथित ओवररेटिंग, नकली शराब की बिक्री और सट्टे के कारोबार को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की कार्रवाई को लेकर भी सवाल खड़े किए।
भूपेश बघेल ने कहा कि प्रदेश में कथित तौर पर शराब लगातार तय कीमत से अधिक दर पर बेची जा रही है और नकली शराब की बिक्री की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। उन्होंने सवाल किया कि इन मामलों में ईडी कब कार्रवाई करेगी।
पूर्व मुख्यमंत्री ने सट्टे के मुद्दे पर भी सरकार को घेरते हुए कहा कि प्रदेश में सट्टा खुलेआम चल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार कई मामलों को ईडी और सीबीआई के पास भेज देती है, जिसके बाद कार्रवाई के नाम पर कथित वसूली शुरू हो जाती है।
बघेल ने डबल इंजन सरकार पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि क्या सरकार बनने के बाद प्रदेश में सट्टे का कारोबार वास्तव में बंद हुआ है। उन्होंने शराब और सट्टे से जुड़े मामलों पर सरकार से जवाब और प्रभावी कार्रवाई की मांग की।
सौरभ चंद्राकर की भारत वापसी पर बड़ा सवाल।
बघेल ने कहा कि यदि सौरभ चंद्राकर को भारत लाया भी जाता है तो यह देखना होगा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) मामले की निष्पक्ष और प्रभावी जांच कैसे करेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सट्टे का पैसा प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तक पहुंचने और कथित रूप से एक वरिष्ठ अधिकारी के इसमें शामिल होने की बात सामने आती रही है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि मामला लगभग तीन साल पुराना होने जा रहा है और अब तक जांच की प्रगति पर गंभीर सवाल बने हुए हैं। उन्होंने पूछा कि इतने समय बाद क्या ईडी इस पूरे मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच कर पाएगी। बघेल ने आरोपों की जांच कर सच सामने लाने की मांग की।
भूपेश बघेल ने पूछा कि शुभम सोनी और सौरभ चंद्राकर कहां हैं और यदि वे भारत आते हैं तो मामले की निष्पक्ष जांच कौन करेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में कई बड़े लोगों के नाम सामने आ सकते हैं और कथित रूप से सैकड़ों-हजारों करोड़ रुपये के लेन-देन का खुलासा हो सकता है।।
पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि सौरभ चंद्राकर को भारत तब लाया जाएगा, जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार बनेगी और राहुल गांधी प्रधानमंत्री होंगे। बघेल ने कहा कि उस समय इस पूरे मामले के कथित सूत्रों और इससे जुड़े तथ्यों का खुलासा होगा।
गौरतलब है कि सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल सहित कई लोगों के खिलाफ महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप मामले में जांच जारी है। जुलाई 2026 में सीबीआई ने इस मामले में कई आरोपपत्र दाखिल किए और भारतीय अधिकारी सौरभ चंद्राकर को विदेश से भारत लाने की प्रक्रिया में जुटे होने की बात सामने आई थी।
पेपर लीक की जड़ तक कब पहुंचेगी जांच? असली गुनाहगारों पर सवाल।
बघेल ने कहा कि वर्ष 2024 में पेपर लीक से जुड़े कानून को और कठोर बनाया गया और उसे संसद से पारित किया गया। उस दौरान राहुल गांधी ने कहा था कि सिर्फ कानून बदलने से काम नहीं चलेगा, बल्कि सिस्टम को बदलने की जरूरत है। उन्होंने आरोप लगाया कि कानून बनने के बाद भी देश में पेपर लीक की घटनाएं नहीं रुकीं।
पूर्व मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के शीर्ष अधिकारियों पर कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विभिन्न स्तरों पर कार्रवाई की जा रही है, लेकिन NTA के डीजी और चेयरमैन जैसे जिम्मेदार पदों पर बैठे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कब होगी।
भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि कानून पारित होने के बाद छत्तीसगढ़ में भी पेपर लीक की घटना सामने आई। उनके अनुसार, कृषि विश्वविद्यालय से जुड़ा प्रश्नपत्र लीक हुआ और मामले के तार दुर्ग के एक निजी कॉलेज तक पहुंचे, जबकि कथित रूप से पेपर कवर्धा में मिला।
उन्होंने इसे व्यवस्था की खामी बताते हुए कहा कि कानून कितना भी सख्त क्यों न बना दिया जाए, जब तक सिस्टम में मौजूद कमियों को दूर नहीं किया जाएगा, तब तक ऐसी घटनाओं को रोकना मुश्किल है।
बघेल ने कहा कि पेपर लीक का मुद्दा लोकसभा से लेकर पूरे देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक चर्चा का विषय बना, लेकिन इसके बावजूद छत्तीसगढ़ में पेपर लीक की घटना सामने आई। उन्होंने डबल इंजन सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार के बावजूद कानून का पर्याप्त भय नजर नहीं आ रहा है।
वंदे मातरम् पर भी दिया बयान।
🇬🇧English
Raipur: Former Chhattisgarh Chief Minister Bhupesh Baghel has targeted the government over the Vande Mataram issue, rising inflation, petrol and diesel prices, and the alleged betting and liquor trade in the state. He also questioned the government’s silence over the alleged revenue loss linked to mineral resources.
Baghel said that several important issues came up during the recent sessions of the state Assembly and Parliament. However, he claimed that some significant matters were passed or decided without adequate discussion.
Referring to the Mines and Minerals Development and Regulation Amendment, 2026, the former chief minister alleged that changes had reduced the role and powers of state governments while concentrating greater authority with the Centre.
According to Baghel, such changes could adversely affect the revenue earned by mineral-rich states. He also referred to objections raised by the governments of Kerala and Jharkhand, saying that the financial interests of states must be protected.
The former chief minister demanded clear answers from the government on issues related to Vande Mataram, inflation, fuel prices and alleged illegal businesses in the state.
Questions Raised Over Liquor Scam and Online Betting।
Raipur: Former Chhattisgarh Chief Minister Bhupesh Baghel has questioned the government over alleged liquor overpricing, the sale of spurious liquor and the continued operation of betting activities in the state. He also raised questions about the role and action of the Enforcement Directorate (ED) and the Central Bureau of Investigation (CBI).
Baghel alleged that liquor was being sold above the prescribed price in Chhattisgarh and that complaints regarding the sale of spurious liquor were also being reported. He questioned when the ED would take action in such cases
Targeting the government over betting, the former chief minister alleged that betting activities were continuing openly in the state. He further claimed that the state government hands several cases over to the ED and CBI, after which alleged extortion begins in the name of investigation.
Taking a swipe at the double-engine government, Baghel asked whether betting had actually stopped in the state after the formation of the government. He demanded answers and effective action on issues related to liquor and betting.
When Will Saurabh Chandrakar Return to India?
Baghel said reports about bringing Chandrakar back to India have continued to appear in the media, but his return has not yet materialised. He questioned how the Enforcement Directorate (ED) would conduct a fair and effective investigation even if Chandrakar is brought back.
The former chief minister alleged that money linked to the betting network had reached the Prime Minister’s Office (PMO) and claimed that a senior officer was allegedly involved. These allegations have not been independently verified.
Baghel said the case is approaching three years and raised questions over the pace and direction of the investigation. He asked whether the ED would now be able to conduct an independent and comprehensive probe and demanded that the truth behind the allegations be brought out.
Baghel said an IG in Chhattisgarh had earlier stated that Saurabh Chandrakar, described as a promoter of the online betting app, would be behind bars within a week. He questioned the current status of both Chandrakar and Shubham Soni and asked who would conduct an impartial investigation if they were brought to India.
The former chief minister alleged that an investigation could expose the involvement of several influential people and reveal alleged transactions involving hundreds or even thousands of crores of rupees.
Baghel further claimed that Saurabh Chandrakar would be brought to India when the Congress forms the government at the Centre and Rahul Gandhi becomes Prime Minister. He said that the alleged links and facts connected to the case would then be exposed.
Why Are the Real Culprits Still Outside in the Paper Leak Case?
Baghel said the law related to paper leaks was further strengthened and passed in 2024. At that time, Rahul Gandhi had argued that changing laws alone would not be enough and that the system itself needed to be changed. Baghel alleged that paper leaks continued in the country even after the stricter law came into force.
The former chief minister also questioned action against senior officials of the National Testing Agency (NTA). He said action was being taken at different levels but asked when accountability would be fixed for the NTA Director General and the Chairman.
Baghel further alleged that a paper leak incident surfaced in Chhattisgarh after the law was passed. According to him, a question paper linked to an agriculture university was leaked, with connections to a private college in Durg and the alleged recovery of the paper in Kawardha.
Calling it a failure of the system, he said that no matter how strict a law becomes, paper leaks will be difficult to stop unless weaknesses in the system are removed.
He said the paper leak issue had been discussed in the Lok Sabha and across the country, yet another alleged incident had surfaced in Chhattisgarh. Targeting the double-engine government, Baghel questioned why the fear of law was still not visible.
He also made a statement on the Vande Mataram issue.
🕉संस्कृत
रायपुरनगरम्। छत्तीसगढ़स्य पूर्वमुख्यमन्त्री भूपेशबघेलः वन्देमातरम्-विषयं, वर्धमानां महङ्गतां, पेट्रोल-डीजलयोः मूल्यानि तथा राज्ये कथितं सट्टा-मद्यव्यापारं च विषयीकृत्य शासनस्य तीव्रं आलोचनां कृतवान्। खनिजसम्पदां सम्बन्धे राज्यस्य कथितराजस्वहानिविषये शासनस्य मौनमपि तेन प्रश्नीकृतम्।
बघेलः अवदत् यत् विधानसभा-संसत्सत्रयोः अनेकानि महत्त्वपूर्णानि विषयाणि चर्चायाः केन्द्रं अभवन्, किन्तु केचन विषयाः पर्याप्तचर्चां विना एव निर्णीताः अथवा पारिताः।
सः खान एवं खनिज विकास एवं विनियमन संशोधन 2026 इत्यस्य उल्लेखं कुर्वन् अवदत् यत् खनिजसम्पदां सम्बन्धे राज्यसरकाराणाम् अधिकाराः परिवर्तिताः सन्ति तथा केन्द्रसरकारस्य अधिकाराः अधिकं केन्द्रीकृताः जाताः।
तस्य मते, एतादृशैः परिवर्तनैः खनिजसम्पन्नराज्यानां राजस्वे प्रतिकूलः प्रभावः भवितुं शक्नोति। केरल-झारखण्डराज्ययोः शासनाभ्यां अपि अस्मिन् विषये आपत्तिः प्रदर्शिता इति सः अवदत्।
पूर्वमुख्यमन्त्री शासनात् वन्देमातरम्-विषये, महङ्गतायां, इन्धनमूल्येषु तथा राज्ये कथितेषु अवैधव्यापारेषु स्पष्टम् उत्तरं याचितवान्।
मद्यघोटालस्य अन्तर्जालीयसट्टस्य च विषये शासनात् प्रश्नाः।
रायपुरनगरम्। छत्तीसगढ़स्य पूर्वमुख्यमन्त्री भूपेशबघेलः राज्ये कथितमद्यस्य अधिकमूल्यविक्रयं, कृत्रिममद्यविक्रयं तथा सट्टाव्यवसायस्य सञ्चालनं विषयीकृत्य शासनं प्रश्नीकृतवान्। प्रवर्तननिदेशालयस्य (ईडी) केन्द्रीयान्वेषणब्यूरोस्य (सीबीआई) च कार्यवाह्याः विषये अपि तेन प्रश्नाः उत्थापिताः।
बघेलः अवदत् यत् छत्तीसगढ़राज्ये कथितरूपेण मद्यं निर्धारितमूल्यात् अधिकमूल्येन विक्रीयते तथा कृत्रिममद्यस्य विक्रयसम्बन्धिन्यः अपि शिकायताः प्राप्यन्ते। एतादृशेषु विषयेषु ईडी कदा कार्यवाही करिष्यति इति तेन प्रश्नः कृतः।
पूर्वमुख्यमन्त्री सट्टाविषये अपि शासनं लक्ष्यीकृत्य अवदत् यत् राज्ये सट्टाव्यवसायः खुलेआम प्रचलति। सः आरोपं कृतवान् यत् राज्यशासनं अनेकान् विषयान् ईडी-सीबीआईसंस्थयोः समीपं प्रेषयति, ततः अन्वेषणस्य नाम्ना कथितवसूलिः आरभ्यते।
द्वियन्त्रशासनं लक्ष्यीकृत्य बघेलः प्रश्नं कृतवान् यत् नूतनशासनस्य गठनानन्तरं राज्ये सट्टाव्यवसायः वास्तवमेव समाप्तः अभवत् वा। मद्य-सट्टासम्बद्धेषु विषयेषु स्पष्टोत्तरं प्रभावी कार्यवाही च तेन अपेक्षिता।
सौरभचन्द्राकरः भारतं कदा आगमिष्यति?
सः अवदत् यत् सौरभचन्द्राकरस्य भारतम् आनेतव्यस्य चर्चा माध्यमेषु दीर्घकालात् प्रचलति, किन्तु अद्यापि तस्य भारतप्रत्यागमनं न अभवत्। सः प्रश्नं कृतवान् यत् यदि चन्द्राकरः भारतम् आनयिष्यते, तर्हि प्रवर्तननिदेशालयः (ईडी) कथं निष्पक्षतया प्रभाविरूपेण च अन्वेषणं करिष्यति।
बघेलः आरोपं कृतवान् यत् सट्टासम्बद्धं धनं कथितरूपेण प्रधानमन्त्रीकार्यालयम् (पीएमओ) यावत् गतं तथा एकः वरिष्ठाधिकारी अपि अस्मिन् प्रकरणे कथितरूपेण संलिप्तः अस्ति। एते आरोपाः स्वतन्त्ररूपेण पुष्टाः न सन्ति।
पूर्वमुख्यमन्त्री अवदत् यत् प्रकरणस्य प्रायः त्रिवर्षाणि पूर्णानि भविष्यन्ति तथा अन्वेषणस्य गतिः दिशायाः च विषये गम्भीराः प्रश्नाः उत्पन्नाः सन्ति। सम्पूर्णस्य प्रकरणस्य निष्पक्षं व्यापकं च अन्वेषणं भवेत् तथा सत्यं जनसम्मुखम् आगच्छेत् इति तेन अपेक्षितम्।
प्रश्नपत्र-प्रसारणप्रकरणे वास्तविकदोषिणः अद्यापि बहिः कथं सन्ति?
बघेलः अवदत् यत् वर्षे 2024 तमे प्रश्नपत्र-प्रसारणसम्बन्धी विधिः अधिकं कठोरः कृतः तथा पारितः। तस्मिन् समये राहुलगान्धिना अपि केवलं विधिपरिवर्तनं पर्याप्तं नास्ति, अपितु सम्पूर्णव्यवस्थायाः परिवर्तनम् आवश्यकम् इति उक्तम्।
सः आरोपं कृतवान् यत् कठोरविधेः प्रवर्तनानन्तरम् अपि प्रश्नपत्र-प्रसारणस्य घटनाः न निरुद्धाः। राष्ट्रीयपरीक्षासंस्थायाः (NTA) उच्चाधिकारिणां विरुद्धं कार्यवाही कदा भविष्यति इति अपि तेन प्रश्नः कृतः।
पूर्वमुख्यमन्त्री आरोपं कृतवान् यत् विधेः पारणानन्तरं छत्तीसगढ़े अपि प्रश्नपत्र-प्रसारणस्य घटना अभवत्। कृषिविश्वविद्यालयसम्बद्धं प्रश्नपत्रं प्रसारितम्, दुर्गनगरस्य एकेन निजीमहाविद्यालयेन सह सम्बन्धः तथा कवर्धानगरे प्रश्नपत्रस्य प्राप्तिः इति कथ्यते।
एतत् व्यवस्थायाः दोषं निर्दिशन् सः अवदत् यत् विधिः कियत् अपि कठोरः भवतु, किन्तु व्यवस्थायाः दोषाः न निवार्यन्ते चेत् एतादृश्याः घटनाः निरोद्धुं कठिनं भविष्यति। द्वियन्त्रशासनस्य सत्तायाम् अपि विधेः भयः पर्याप्तरूपेण न दृश्यते इति तेन आरोपः कृतः।
वन्दे मातरम्-विषये अपि तेन वक्तव्यम् प्रदत्तम्।


