करोड़ों के रेलवे ओवरब्रिज की खुली पोल: उद्घाटन के कुछ ही समय बाद सड़क की सतह हुई जर्जर, निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल। Cracks in Multi-Crore Railway Overbridge Exposed: Road Surface Deteriorates Soon After Inauguration, Raising Questions Over Construction Quality। बहुकोटिरूप्यकव्ययेन निर्मितस्य रेलमार्गोपरिसेतोः गुणवत्ता सन्देहास्पदा, उद्घाटनानन्तरमेव मार्गस्य पृष्ठभागः जीर्णः।
छत्तीसगढ़ के बिश्रामपुर में रेलवे क्रॉसिंग की परेशानी खत्म करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर बनाया गया रेलवे ओवरब्रिज उद्घाटन के कुछ ही समय बाद सवालों के घेरे में आ गया है। ब्रिज की सड़क पर जगह-जगह दरारें पड़ने, गड्ढे बनने और सतह उखड़ने की शिकायतें सामने आई हैं। निर्माण की इस स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी है और वे कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठा रहे हैं।

बिश्रामपुर: रेलवे क्रॉसिंग पर लगने वाले जाम और आवागमन की समस्या से राहत दिलाने के उद्देश्य से करोड़ों रुपये की लागत से बनाया गया ओवरब्रिज अब अपनी गुणवत्ता को लेकर सवालों के घेरे में है। एसईसीएल के क्षेत्रीय मुख्यालय के पास रेलवे लाइन के ऊपर निर्मित इस ओवरब्रिज के कुछ हिस्सों में दरारें दिखाई देने लगी हैं। वहीं, ब्रिज से जुड़े मार्ग पर सड़क की सतह जगह-जगह उखड़ने, दरकने और गड्ढे बनने से स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ गई है। लोगों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
लंबे समय से बनी थी जाम की समस्या: बताया जाता है कि बिश्रामपुर क्षेत्र में रेलवे क्रॉसिंग के कारण वर्षों से आवागमन प्रभावित होता रहा। ट्रेन के गुजरने के दौरान फाटक बंद होते ही सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग जाती थीं, जिससे लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ती थी। इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने और यातायात को सुगम बनाने के लिए रेल प्रशासन ने करोड़ों रुपये की लागत से रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण कराया था।
उम्मीदों के उलट सामने आई खामियां: कुछ ही दिनों पहले बनकर तैयार हुए ओवरब्रिज से लोगों को उम्मीद थी कि रेलवे क्रॉसिंग पर लगने वाले जाम और लंबे इंतजार से राहत मिलेगी। लेकिन निर्माण के कुछ समय बाद ही ओवरब्रिज के रेलवे लाइन वाले हिस्से में दरारें दिखाई देने लगीं और सड़क की स्थिति भी बिगड़ने लगी। मार्ग पर कई जगह गड्ढे बन गए हैं, जबकि सड़क की सतह भी उखड़ने लगी है। बारिश के दौरान इन गड्ढों में पानी भरने से समस्या और बढ़ सकती है तथा हादसों की आशंका भी बनी हुई है।
निर्माण के दौरान भी गुणवत्ता पर उठे थे सवाल।
ओवरब्रिज के निर्माण की शुरुआत से ही इसकी कार्यप्रणाली और गुणवत्ता को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठते रहे थे। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार इस महत्वपूर्ण अधोसंरचना परियोजना से क्षेत्रवासियों को सुरक्षित, सुगम और बेहतर आवागमन की उम्मीद थी। हालांकि, निर्माण के कुछ ही समय बाद दरारें उभरने और सड़क के क्षतिग्रस्त होने की स्थिति ने निर्माण एजेंसी के साथ ही संबंधित विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य में किसी प्रकार की लापरवाही या गुणवत्ता में कमी पाई जाती है तो जिम्मेदार एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए और क्षतिग्रस्त हिस्से की स्थायी मरम्मत कराई जानी चाहिए।
निर्माण की गुणवत्ता की जांच की मांग तेज।
स्थानीय लोगों ने रेल प्रशासन से ओवरब्रिज के निर्माण कार्य की विस्तृत तकनीकी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि सिर्फ गड्ढों को भरकर या सड़क की ऊपरी मरम्मत कर देने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। ब्रिज और उससे जुड़े मार्ग की गुणवत्ता की समग्र जांच कराई जानी चाहिए, ताकि निर्माण में किसी संभावित खामी का समय रहते पता लगाया जा सके और भविष्य में किसी बड़े हादसे की आशंका को रोका जा सके। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार ओवरब्रिज की मौजूदा स्थिति ने एक बार फिर निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
English
A multi-crore railway overbridge built in Bishrampur, Chhattisgarh, to ease traffic congestion and eliminate the problems caused by the railway crossing has come under serious scrutiny. Within a short time of its inauguration, cracks have reportedly appeared on parts of the bridge, while potholes and damaged road surfaces are also being seen at several locations. The deteriorating condition has sparked anger among local residents, who are questioning the quality of the construction work.
Bishrampur: A multi-crore railway overbridge built to provide relief from traffic congestion and commuting problems at the railway crossing has now come under scrutiny over its construction quality. Cracks have reportedly started appearing in parts of the bridge constructed over the railway line near the SECL regional headquarters. Meanwhile, the connecting road has developed cracks, damaged patches and potholes at several places, leading to growing resentment among local residents. The condition has raised serious questions about the quality of the construction work.
Overbridge Built to End Long-Standing Traffic Woes: Railway crossing-related traffic problems had affected movement in the Bishrampur area for a long time. Whenever a train passed through, the crossing remained closed and long queues of vehicles would form on both sides, causing major inconvenience to commuters. To provide a permanent solution and ensure smoother traffic movement, the railway administration constructed the overbridge at a cost of several crores of rupees.
Defects Raise Concerns Soon After Completion: Residents had hoped that the newly completed overbridge would provide relief from long waiting times and traffic congestion at the railway crossing. However, concerns have emerged soon after construction, as cracks have reportedly appeared in the section above the railway line and the road surface has begun deteriorating. Potholes have developed at several places, while portions of the road surface are peeling away. During the rainy season, water accumulation in these potholes could worsen the situation and increase the risk of accidents.
Questions Were Raised Even During Construction।
Questions regarding the construction process and quality of the overbridge had been raised at the local level since the project began. Built at a cost of several crores of rupees, the major infrastructure project was expected to provide residents with safer, smoother and better connectivity. However, cracks appearing and the road surface getting damaged within a short time have raised serious questions about both the construction agency and the monitoring system of the concerned department. Local residents have demanded that if any negligence or deficiency in construction quality is found, action should be taken against the responsible agency and the damaged portions should be repaired on a permanent basis.
Demand for Construction Quality Probe Grows।
Local residents have demanded a detailed technical inspection of the overbridge from the railway administration. They argue that merely filling potholes or carrying out surface-level repairs will not provide a permanent solution. A comprehensive assessment of the bridge and its connecting road should be conducted to identify any possible construction defects in time and prevent the risk of a major accident in the future. The current condition of the multi-crore overbridge has once again raised questions about construction quality and the monitoring mechanism of the concerned departments.
संस्कृत
छत्तीसगढ़राज्यस्य बिश्रामपुरनगरे रेलमार्गसम्पारस्य समस्यातः जनान् मुक्तान् कर्तुं बहुकोटिरूप्यकव्ययेन निर्मितः रेलमार्गोपरिसेतुः उद्घाटनानन्तरमेव प्रश्नचिह्नितः अभवत्। अल्पकाले एव सेतोः केषुचित् भागेषु विदारणानि उत्पन्नानि, मार्गे च स्थाने स्थाने गर्ताः दृश्यन्ते तथा पृष्ठभागोऽपि जीर्णः भवति। एतादृशी स्थितिः दृष्ट्वा स्थानीयजनाः क्रुद्धाः सन्ति तथा निर्माणकार्यस्य गुणवत्तायाः विषये गम्भीरान् प्रश्नान् कुर्वन्ति।
बिश्रामपुरः: रेलमार्गसम्पारस्थले उत्पन्नात् यातायातजामात् आवागमनसमस्याभ्यश्च जनान् मुक्तान् कर्तुं बहुकोटिरूप्यकव्ययेन निर्मितः रेलमार्गोपरिसेतुः अधुना निर्माणगुणवत्ताविषये प्रश्नानां विषयः अभवत्। एसईसीएल-क्षेत्रीयमुख्यालयस्य समीपे रेलमार्गस्य उपरि निर्मितस्य सेतोः केषुचित् भागेषु विदारणानि दृश्यन्ते। सेतुना सम्बद्धमार्गे च स्थाने स्थाने मार्गपृष्ठस्य विदारणम्, क्षतिः तथा गर्तानां निर्माणं जातम्। एतस्मात् कारणात् स्थानीयजनानां असन्तोषः वर्धते तथा ते निर्माणकार्यस्य गुणवत्ताविषये गम्भीरान् प्रश्नान् उत्थापयन्ति।
दीर्घकालीनयातायातसमस्यायाः समाधानार्थं निर्मितः उपरिसेतुः: बिश्रामपुरक्षेत्रे रेलमार्गसम्पारस्य कारणेन दीर्घकालात् आवागमनं प्रभावितम् अभवत्। यदा रेलयानं गच्छति स्म, तदा सम्पारः पिधीयते स्म तथा मार्गस्य उभयोः पार्श्वयोः वाहनानां दीर्घाः पङ्क्तयः निर्मीयन्ते स्म। एतया समस्यया यात्रिणः जनाः अत्यधिकं कष्टम् अनुभवन्ति स्म। अस्याः समस्यायाः स्थायिसमाधानार्थं यातायातस्य सुगमतायै च रेलप्रशासनेन बहुकोटिरूप्यकव्ययेन उपरिसेतुः निर्मापितः।
निर्माणानन्तरमेव दोषाः प्रकाशम् आगताः: कतिपयदिनपूर्वं पूर्णं जातात् उपरिसेतोः जनाः आशां कृतवन्तः यत् अधुना रेलमार्गसम्पारस्थले दीर्घप्रतीक्षायाः यातायातजामस्य च समस्यायाः निवारणं भविष्यति। किन्तु निर्माणानन्तरं शीघ्रमेव रेलमार्गोपरिस्थिते सेतुभागे विदारणानि दृश्यन्ते स्म तथा मार्गस्य स्थितिरपि क्षीणा अभवत्। मार्गे अनेकेषु स्थानेषु गर्ताः निर्मिताः, पथस्य पृष्ठभागश्च स्थाने स्थाने उखडितः भवति। वर्षाकाले एतेषु गर्तेषु जलसञ्चयेन समस्या अधिका भवितुं शक्नोति तथा दुर्घटनानाम् आशङ्कापि वर्धते।
निर्माणकालेऽपि गुणवत्ताविषये प्रश्नाः उत्थापिताः।
उपरिसेतोः निर्माणारम्भात् एव तस्य निर्माणप्रक्रियायाः गुणवत्तायाश्च विषये स्थानीयस्तरे प्रश्नाः उत्थापिताः आसन्। बहुकोटिरूप्यकव्ययेन निर्मितात् अस्मात् महत्त्वपूर्णाधोसंरचनात्मकपरियोजनात् क्षेत्रवासिनः सुरक्षितं, सुगमं श्रेष्ठतरं च आवागमनम् अपेक्षितवन्तः। किन्तु अल्पकाले एव विदारणानां प्रादुर्भावः मार्गस्य क्षतिश्च निर्माणसंस्थायाः सम्बन्धितविभागस्य निरीक्षणव्यवस्थायाश्च विषये गम्भीरान् प्रश्नान् जनयति। स्थानीयजनाः वदन्ति यत् यदि निर्माणकार्ये कापि प्रमादः अथवा गुणवत्तायाः न्यूनता प्राप्यते, तर्हि उत्तरदायिसंस्थायाः विरुद्धं कार्यवाही कर्तव्या तथा क्षतिग्रस्तभागानां स्थायिरूपेण मर्मकरणं करणीयम्।
निर्माणगुणवत्तायाः परीक्षणस्य मागणी तीव्रा।
स्थानीयजनाः रेलप्रशासनस्य समीपे उपरिसेतोः निर्माणकार्यस्य विस्तृतं तकनीकीपरीक्षणं करणीयमिति मागणीं कृतवन्तः। तेषां मतम् अस्ति यत् केवलं गर्तानां पूरणेन अथवा मार्गस्य उपरितनमर्मकरणेन समस्यायाः स्थायिसमाधानं न भविष्यति। सेतोः तेन सम्बद्धस्य मार्गस्य च गुणवत्तायाः समग्रं परीक्षणं करणीयम्, येन निर्माणकार्ये सम्भाविताः दोषाः समये ज्ञातुं शक्यन्ते तथा भविष्ये महती दुर्घटना न भवेत्। बहुकोटिरूप्यकव्ययेन निर्मितस्य उपरिसेतोः वर्तमानस्थितिः पुनः निर्माणकार्याणां गुणवत्तां सम्बन्धितविभागानां निरीक्षणव्यवस्थां च प्रश्नचिह्नितां करोति।


