देवपहरी जलप्रपात में अचानक बढ़ा जलस्तर, 15 घंटे टापू पर फंसे रहे तीन युवक; डीडीआरएफ ने किया सुरक्षित रेस्क्यू।Three youths stranded on island for 15 hours at Devpahari waterfall, safely rescued by DDRF। देवपहरी जलप्रपाते अकस्मात् जलस्तरवृद्ध्या त्रयः युवकाः १५ घण्टाः द्वीपे बद्धाः, डीडीआरएफ-दलेन सुरक्षिताः उद्धृताः।
कोरबा के देवपहरी जलप्रपात में सोमवार को पिकनिक मनाने गए तीन युवक अचानक जलस्तर बढ़ने से टापू पर बने एक हट में फंस गए। पूरी रात वहां फंसे रहने के बाद मंगलवार सुबह डीडीआरएफ की टीम ने ग्रामीणों के सहयोग से रेस्क्यू अभियान चलाया और तीनों युवकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

कोरबा। देवपहरी जलप्रपात में अचानक जलस्तर बढ़ने से सोमवार को पिकनिक मनाने पहुंचे तीन युवक टापू पर बने हट में फंस गए। करीब 15 घंटे तक पानी के बीच घिरे रहने के बाद मंगलवार सुबह जिला आपदा प्रतिक्रिया बल (डीडीआरएफ) की टीम ने ग्रामीणों के सहयोग से रेस्क्यू अभियान चलाया और तीनों युवकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
घटना के बाद बारिश के मौसम में जलप्रपात क्षेत्र में पर्यटकों की आवाजाही पर प्रतिबंध के बावजूद तीन युवकों के वहां पहुंचने को लेकर प्रशासन की व्यवस्था और निगरानी पर सवाल उठने लगे हैं।
तीनों युवक पिकनिक मनाने के लिए जलप्रपात क्षेत्र में पहुंचे थे।
जिला मुख्यालय से लगभग 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित देवपहरी जलप्रपात में सोमवार को श्याम थाना क्षेत्र के ग्राम गुरमा निवासी धनेश्वर सारथी, सूरज सारथी और घनश्याम महंत पिकनिक मनाने पहुंचे। जानकारी के अनुसार, तीनों दोस्त दोपहर करीब 3:30 बजे जलप्रपात के पास पहुंचे थे। उस वक्त जलप्रपात में पानी का बहाव सामान्य बताया गया।
शाम करीब 5:30 बजे अचानक जलस्तर में तेज बढ़ोतरी होने लगी।
जलप्रपात के किनारे बनी एक झोपड़ी में तीनों युवक चले गए। करीब दो घंटे बाद शाम 5:30 बजे अचानक जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा। कुछ ही देर में पानी का बहाव इतना तेज हो गया कि युवकों के लिए वहां से वापस लौटना संभव नहीं रहा और वे झोपड़ी में ही फंस गए। हालात बिगड़ते देख धनेश्वर सारथी ने मोबाइल फोन से अपनी बहन को सूचना देकर पूरी घटना की जानकारी दी।
घटना की जानकारी मिलते ही परिजनों और ग्रामीणों ने पुलिस को सूचित किया।
घटना की जानकारी मिलने के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी। सूचना पर रात में लेमरू थाना पुलिस मौके पर पहुंची और हालात का जायजा लिया। स्थिति को देखते हुए डीडीआरएफ की टीम को भी बुलाया गया, लेकिन अंधेरा अधिक होने और पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था नहीं होने के कारण रात में तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू नहीं किया जा सका।
घने अंधेरे और तेज जलधारा के चलते रात में रेस्क्यू अभियान चलाना बेहद जोखिमपूर्ण था।
वर्षा ऋतु को देखते हुए देवपहरी समेत जिले के कई जलप्रपात और पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों के प्रवेश तथा पिकनिक पर रोक लगाई गई है। इसके बावजूद तीनों युवकों के देवपहरी पहुंचने से सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। अब यह जांच का विषय है कि प्रतिबंध के बावजूद वे वहां तक कैसे पहुंचे। साथ ही प्रशासन और पुलिस के सामने संवेदनशील पर्यटन स्थलों पर निगरानी तथा पर्यटकों की आवाजाही रोकने की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
जलस्तर बढ़ने से टापू पर फंसे युवकों ने दहशत में बिताई पूरी रात
चारों ओर तेज धार में बहता पानी और बीच में टापू जैसी छोटी जगह पर बना एक हट—ऐसे हालात में तीनों युवकों की मुश्किलें बढ़ती गईं। अंधेरा गहराने के साथ उनका डर भी बढ़ता रहा। बाहर निकलने का कोई सुरक्षित रास्ता नहीं था और पानी का बहाव लगातार तेज बना रहा। स्वजन को मोबाइल से सूचना देने के बाद तीनों युवक पूरी रात मदद का इंतजार करते हुए उसी हट में बैठे रहे।
English
Three youths who visited Devpahari Waterfall in Korba for a picnic on Monday were stranded inside a hut located on an island after the water level suddenly rose. On Tuesday morning, the DDRF team, with the help of local villagers, carried out a rescue operation and safely evacuated all three.
Korba. Three youths who had gone for a picnic at Devpahari Waterfall on Monday were stranded in a hut located on an island after the water level suddenly rose. After remaining surrounded by water for nearly 15 hours, they were safely rescued on Tuesday morning by the District Disaster Response Force (DDRF) with the assistance of local villagers.
Following the incident, questions are being raised over how the three youths managed to reach the waterfall despite restrictions on tourist movement in the area during the rainy season. The incident has also raised concerns over monitoring and enforcement of the restrictions.
All three youths had visited the waterfall area for a picnic.
Devpahari Waterfall, located around 60 kilometres from the district headquarters, was visited by three friends from Gurma village under Shyam police station area on Monday. Dhaneshwar Sarthi, Suraj Sarthi and Ghanshyam Mahant had arrived at the waterfall at around 3:30 pm for a picnic. At the time, the water flow at the site was reportedly normal.
At around 5:30 pm, the water level suddenly began to rise rapidly.
The three youths moved into a hut located near the waterfall. About two hours later, at around 5:30 pm, the water level suddenly began rising rapidly. Within a short time, the current became so strong that the youths could no longer return and were forced to remain stranded inside the hut. As the situation grew serious, Dhaneshwar Sarthi contacted his sister by phone and informed her about the incident.
After learning about the incident, the youths’ family members and local villagers informed the police.
After being informed about the incident, the youths’ family members and local villagers alerted the police. Personnel from Lemru police station reached the spot during the night and assessed the situation. The DDRF team was also called in, but the rescue operation could not be launched immediately due to darkness and inadequate lighting conditions.
Rescuing the stranded youths at night was highly risky due to darkness and the strong water current.
In view of the monsoon season, tourist entry and picnicking have been prohibited at Devpahari and several other waterfall destinations in the district. Despite the restrictions, the arrival of the three youths has raised questions about the effectiveness of the safety arrangements. Authorities will now investigate how they managed to reach the site despite the ban. The incident has also raised concerns over monitoring and measures to prevent access to sensitive tourist locations during the restricted period.
Stranded on a water-surrounded island, youths spend the entire night in fear
With strong currents flowing in every direction and only a small island-like patch with a hut in the middle, the situation became increasingly difficult for the three youths. As darkness deepened, so did their fear. With no safe way to get out and water continuing to flow rapidly, they remained stranded. After informing their family members by phone, the three spent the entire night inside the hut waiting for help
Due to the strong water current and darkness, the rescue team could not reach the youths during the night. The three spent the entire night waiting for daylight and hoping that help would reach them safely.
संस्कृत
कोरबा-जनपदे देवपहरी जलप्रपाते सोमवासरे भ्रमणाय आगताः त्रयः युवकाः अकस्मात् जलस्तरवृद्ध्या द्वीपस्थे एकस्मिन् कुटीरे अवरुद्धाः अभवन्। मङ्गलवासरे प्रातः डीडीआरएफ-दलं ग्रामवासिनां साहाय्येन उद्धारकार्यं कृत्वा तान् त्रयः सुरक्षिततया बहिः आनयत्।
कोरबा। देवपहरी जलप्रपाते सोमवासरे पिकनिक-भ्रमणाय आगताः त्रयः युवकाः अकस्मात् जलस्तरवृद्ध्या द्वीपस्थे कुटीरे अवरुद्धाः अभवन्। प्रायः पञ्चदश घण्टाः यावत् ते जलेन परिवृताः स्थिताः। मङ्गलवासरे प्रातः जिला-आपदा-प्रतिक्रियादलस्य (डीडीआरएफ) सदस्याः ग्रामवासिनां साहाय्येन उद्धारकार्यं कृत्वा तान् त्रयः युवकान् सुरक्षिततया बहिः आनयन्।
घटनायाः अनन्तरं वर्षाकाले जलप्रपातक्षेत्रे पर्यटकानां आवागमनस्य प्रतिबन्धः विद्यमानेऽपि त्रयः युवकाः कथं तत्र प्राप्तवन्तः इति विषये प्रशासनस्य व्यवस्थायाः निरीक्षणस्य च विषये प्रश्नाः उत्पन्नाः सन्ति।
त्रयः अपि युवकाः पिकनिक-भ्रमणाय जलप्रपातक्षेत्रं प्राप्तवन्तः।
जिलामुख्यालयात् प्रायः षष्टि-किलोमीटर-दूरे स्थिते देवपहरी जलप्रपाते सोमवासरे श्याम-थानाक्षेत्रस्य गुरमा-ग्रामनिवासिनः धनेश्वर-सारथी, सूरज-सारथी तथा घनश्याम-महन्तः पिकनिक-भ्रमणाय आगतवन्तः। प्राप्तविवरणानुसारं त्रयः मित्राः अपराह्णे प्रायः सार्ध-त्रिवादने जलप्रपातस्य समीपं प्राप्तवन्तः। तस्मिन् समये जलस्य प्रवाहः सामान्यः आसीत्।
सायं प्रायः सार्ध-पञ्चवादने अकस्मात् जलस्तरः तीव्रतया वर्धितुम् आरब्धवान्।
जलप्रपातस्य तीरे निर्मितायां कुट्याम् त्रयः युवकाः प्रविष्टवन्तः। प्रायः द्विघण्टानन्तरं सायं सार्ध-पञ्चवादने अकस्मात् जलस्तरः तीव्रतया वर्धितुम् आरब्धवान्। अल्पसमये एव जलस्य प्रवाहः एतावत् प्रबलः अभवत् यत् युवकानां प्रत्यागमनं कठिनम् अभवत्, अतः ते तस्यां कुट्यामेव अवरुद्धाः अभवन्। परिस्थितेः गम्भीरतां दृष्ट्वा धनेश्वर-सारथी मोबाइल-दूरभाषेण स्वभगिनीं सम्पर्क्य घटनायाः सूचनां दत्तवान्।
घटनायाः सूचना प्राप्य स्वजनाः ग्रामवासिनश्च पुलिस-प्रशासनं सूचितवन्तः
घटनायाः सूचना प्राप्य स्वजनाः ग्रामवासिनश्च पुलिस-प्रशासनं सूचितवन्तः। सूचनां प्राप्य रात्रौ लेमरू-स्थानकस्य पुलिसकर्मिणः घटनास्थलं प्राप्य परिस्थितेः निरीक्षणं कृतवन्तः। परिस्थितिं दृष्ट्वा डीडीआरएफ-दलमपि आहूतम्, किन्तु रात्रेः अन्धकारस्य पर्याप्त-प्रकाशस्य च अभावात् तत्कालं उद्धारकार्यं प्रारब्धुं न शकितम्।
गहनान्धकारे तीव्रजलप्रवाहस्य कारणेन रात्रौ उद्धारकार्यं अत्यन्तं जोखिमपूर्णम् आसीत्।
वर्षाकालं दृष्ट्वा देवपहरी-सहितेषु जनपदस्य अनेकेषु जलप्रपातेषु पर्यटनस्थलेषु च पर्यटकानाम् प्रवेशः पिकनिक-आयोजनं च निषिद्धम् अस्ति। तथापि त्रयाणां युवकानां देवपहरी-प्राप्त्या सुरक्षाव्यवस्थायाः प्रभावशीलतायाः विषये प्रश्नाः उत्पन्नाः सन्ति। प्रतिबन्धे विद्यमानेऽपि ते कथं तत्र प्राप्तवन्तः इति विषयः अधुना अन्वेषणस्य विषयः अस्ति। संवेदनशीलपर्यटनस्थलेषु निरीक्षणव्यवस्था तथा पर्यटकानाम् आवागमननिरोधस्य उपायाः कियत् प्रभाविणः सन्ति, इत्यस्मिन् विषये अपि प्रशासनस्य पुलिसस्य च समक्षं प्रश्नाः उपस्थिताः सन्ति।
जलेन परिवृते द्वीपे बद्धाः युवकाः भयाकुलतया सम्पूर्णां रात्रिम् अतीतवन्तः।
चतुर्दिक्षु तीव्रेण प्रवाहेण जलं प्रवहति स्म तथा मध्ये द्वीपसदृशे लघुस्थले निर्मितं कुटीरम् आसीत्। अन्धकारस्य वर्धनेन त्रयाणां युवकानां चिन्तापि वर्धिता। बहिः निर्गमनाय सुरक्षितः कोऽपि मार्गः नासीत् तथा जलस्य प्रवाहः निरन्तरं प्रबलः आसीत्। मोबाइल-दूरभाषेण स्वजनान् सूचयित्वा त्रयः युवकाः साहाय्यस्य प्रतीक्षां कुर्वन्तः सम्पूर्णां रात्रिं तस्मिन् कुटीरे एव स्थितवन्तः।
तीव्रजलप्रवाहस्य गहनान्धकारस्य च कारणेन उद्धारदलं रात्रौ युवकानां समीपं प्राप्तुं न अशक्नोत्। अतः त्रयः युवकाः सम्पूर्णां रात्रिं प्रातःकालस्य प्रतीक्षां कुर्वन्तः सुरक्षितसाहाय्यस्य आशां धारयन्तः तत्रैव स्थितवन्तः।


