निगम कर्मचारियों के नियमितीकरण पर हाईकोर्ट सख्त, बिलासपुर कमिश्नर को 3 महीने में उचित निर्णय लेने के निर्देश। High Court Directs Decision on Regularisation of Municipal Employees Within Three Months। निगमकर्मचारिणां नियमितीकरणविषये उच्चन्यायालयस्य निर्देशः, त्रिमासाभ्यन्तरे युक्तियुक्तनिर्णयस्य आदेशः।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की एकलपीठ ने बिलासपुर नगर निगम के कर्मचारी जागेश्वर दुबे सहित अन्य कर्मचारियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है।

बिलासपुर। नगर निगम कर्मचारियों के नियमितीकरण से संबंधित याचिका पर सुनवाई करते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की एकलपीठ ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए। न्यायमूर्ति संजय के. अग्रवाल की पीठ ने सक्षम अधिकारी को कर्मचारियों के अभ्यावेदन पर नियमानुसार विचार कर तीन महीने के भीतर उचित और तर्कसंगत फैसला लेने को कहा है। यह निर्देश जागेश्वर दुबे सहित अन्य कर्मचारियों की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया।
याचिका दायर करने वालों में बिलासपुर नगर निगम में कार्यरत माली जागेश्वर दुबे, इलेक्ट्रीशियन चंद्र कुमार नागदौने, टाइमकीपर मिर्जा वाहिद बेग और माली पेट्रिक पास्टी शामिल हैं। कर्मचारियों का कहना था कि लंबे समय से सेवा देने के बावजूद उनकी सेवाओं को नियमित नहीं किया जा रहा है। उन्होंने इस कार्रवाई को मनमाना बताते हुए संविधान के अनुच्छेद 14, 16 और 21 के उल्लंघन का आरोप लगाया। साथ ही, सामान्य प्रशासन विभाग के 5 मार्च 2008 के परिपत्र का हवाला देते हुए समान पद पर कार्यरत और उनसे कनिष्ठ कर्मचारियों की तर्ज पर नियमितीकरण का लाभ देने की मांग की।।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील ने अदालत को बताया कि नियमितीकरण की मांग को लेकर बिलासपुर नगर निगम कमिश्नर के समक्ष पहले ही अभ्यावेदन दिया जा चुका है। हालांकि, काफी समय बीतने के बावजूद उस पर अब तक कोई फैसला नहीं हुआ। इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने अपनी मांग को सीमित करते हुए हाईकोर्ट से अनुरोध किया कि संबंधित सक्षम अधिकारी उनके लंबित अभ्यावेदन पर नियमों के अनुसार विचार कर उचित निर्णय लें।
नगर निगम की ओर से अदालत में मौजूद अधिवक्ता ने याचिकाकर्ताओं की इस सीमित मांग पर कोई आपत्ति नहीं जताई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति संजय के. अग्रवाल ने याचिका का निस्तारण कर दिया। हाईकोर्ट ने बिलासपुर नगर निगम के कमिश्नर, यानी सक्षम प्राधिकारी, को निर्देश दिया कि कर्मचारियों के अभ्यावेदन पर नियमों के अनुरूप विचार करते हुए आदेश की प्रति मिलने की तारीख से तीन महीने के भीतर उचित एवं तर्कसंगत निर्णय लिया जाए।
अतिरिक्त दस्तावेजों सहित अभ्यावेदन प्रस्तुत करने की अनुमति
हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को अतिरिक्त राहत देते हुए यह अनुमति दी है कि वे अपने दावे के समर्थन में जरूरी दस्तावेज संलग्न कर सक्षम प्राधिकारी के समक्ष नया या अतिरिक्त अभ्यावेदन पेश कर सकते हैं। अदालत ने यह भी साफ किया कि नियमितीकरण के दावे पर उसने कोई अंतिम राय नहीं दी है। ऐसे में संबंधित अधिकारी को लागू नियमों और शासन के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए अभ्यावेदन का स्वतंत्र रूप से परीक्षण कर उचित निर्णय लेना होगा
English
The single bench of the Chhattisgarh High Court, while hearing a petition filed by Jageshwar Dubey and other employees of Bilaspur Municipal Corporation, has issued a significant order.
Bilaspur: Hearing a petition concerning the regularisation of employees working in the Bilaspur Municipal Corporation, a single bench of the Chhattisgarh High Court issued important directions. Justice Sanjay K. Agrawal directed the competent authority to examine the representations submitted by the employees in accordance with the applicable rules and take a reasoned decision within three months. The order was passed during the hearing of a petition filed by Jageshwar Dubey and other employees.
The petitioners include Bilaspur Municipal Corporation employees Jageshwar Dubey and Patrick Pasty, who work as gardeners, electrician Chandra Kumar Nagdaune, and timekeeper Mirza Wahid Beg. They claimed that despite serving in the corporation, their services had not been regularised. Terming the denial arbitrary, they argued that it violated Articles 14, 16 and 21 of the Constitution. They also sought regularisation on the same terms as similarly placed and junior employees, citing the General Administration Department’s circular dated March 5, 2008.
During the hearing, counsel for the petitioners informed the court that a representation seeking regularisation had already been submitted before the Bilaspur Municipal Corporation Commissioner. However, no decision had been taken on it despite a considerable passage of time. The petitioners subsequently narrowed down their prayer and requested the High Court to direct the competent authority to examine their pending representation in accordance with the applicable rules and take an appropriate decision.
The counsel appearing for the Municipal Corporation did not oppose the petitioners’ limited request. After hearing both sides, Justice Sanjay K. Agrawal disposed of the petition. The High Court directed the Commissioner of Bilaspur Municipal Corporation, being the competent authority, to examine the representation in accordance with the applicable rules and arrive at a reasoned conclusion within three months from the date of receiving a copy of the court’s order.
Liberty to Submit Representation Along with Additional Documents
The High Court has also permitted the petitioners to submit a fresh or additional representation before the competent authority, along with relevant documents supporting their claim. The court clarified that it has not expressed any opinion on the merits of their regularisation claim. Therefore, the competent authority will have to independently examine the representation and take a decision based on the applicable rules and government instructions.
संस्कृत
छत्तीसगढ-उच्चन्यायालयस्य एकलपीठेन बिलासपुर-नगरनिगमे कार्यरतस्य जागेश्वर-दुबे इत्यस्य अन्येषां च कर्मचारिणां याचिकायाः श्रवणं कृत्वा महत्त्वपूर्णः आदेशः प्रदत्तः।
बिलासपुरम्: नगरनिगमे कार्यरतकर्मचारिणां नियमितीकरणसम्बद्धायां याचिकायां श्रवणं कुर्वती छत्तीसगढ-उच्चन्यायालयस्य एकलपीठेन महत्त्वपूर्णाः निर्देशाः प्रदत्ताः। न्यायमूर्तिना संजय-के-अग्रवालेन सक्षमप्राधिकरणं कर्मचारिभिः प्रस्तुतानाम् अभ्यावेदनानां नियमानुसारं विचारं कृत्वा त्रिमासाभ्यन्तरे युक्तियुक्तं निर्णयं कर्तुं निर्दिष्टम्। अयं आदेशः जागेश्वर-दुबे-प्रमुखैः अन्यैः कर्मचारिभिः प्रस्तुतायाः याचिकायाः श्रवणसमये प्रदत्तः।
याचिकाकर्तृषु बिलासपुर-नगरनिगमे कार्यरतौ मालिनौ जागेश्वर-दुबे तथा पेट्रिक-पास्टी, विद्युत्कर्मी चन्द्रकुमार-नागदौने, समयपालकः मिर्जा-वाहिद-बेग च सम्मिलिताः सन्ति। याचिकाकर्तारः अवदन् यत् सेवायां कार्यरतत्वेऽपि तेषां सेवाः अद्यापि नियमिताः न कृताः। ते एतत् कार्यम् मनमानीपूर्णं निरूप्य संविधानस्य अनुच्छेदानां १४, १६, २१ च उल्लङ्घनमिति उक्तवन्तः। सामान्यप्रशासनविभागस्य ५ मार्च २००८ दिनाङ्कितं परिपत्रं आधारं कृत्वा समानपदानां तथा कनिष्ठकर्मचारिणां सदृशं नियमितीकरणस्य लाभं दातुं च तैः आग्रहः कृतः।
श्रवणसमये याचिकाकर्तॄणां पक्षतः अधिवक्त्रा न्यायालयं सूचितं यत् सेवायाः नियमितीकरणस्य आग्रहं कृत्वा बिलासपुर-नगरनिगमस्य आयुक्तस्य समक्षं पूर्वमेव अभ्यावेदनं प्रस्तुतम् अस्ति। किन्तु दीर्घकालं व्यतीतम् अपि तस्मिन् अभ्यावेदने अद्यापि कश्चित् निर्णयः न कृतः। ततः याचिकाकर्तारः स्वकीयां मूलमागणीं सीमितीकृत्य उच्चन्यायालयात् केवलम् एतत् निर्देशं याचितवन्तः यत् सक्षमप्राधिकारी तेषां लम्बितम् अभ्यावेदनं नियमानुसारं विचार्य उचितं निर्णयं कुर्यात्।
नगरनिगमस्य पक्षतः उपस्थितेन अधिवक्त्रा याचिकाकर्तॄणां सीमितप्रार्थनायाः विरोधः न कृतः। उभयोः पक्षयोः तर्कान् श्रुत्वा न्यायमूर्तिना संजय-के-अग्रवालेन याचिका निस्तारिता। उच्चन्यायालयेन बिलासपुर-नगरनिगमस्य आयुक्ताय, अर्थात् सक्षमप्राधिकरणाय, निर्देशः दत्तः यत् प्रस्तुतम् अभ्यावेदनं नियमानुसारं विचार्य न्यायालयस्य आदेशप्रतिलिपेः प्राप्तिदिनात् त्रिमासाभ्यन्तरे युक्तियुक्तः निर्णयः करणीयः
अतिरिक्त-दस्तावेजैः सह अभ्यावेदनं प्रस्तुतुं अनुमतिः
उच्चन्यायालयेन याचिकाकर्तृभ्यः एषा अपि अनुमतिः प्रदत्ता यत् ते स्वकीयदावस्य समर्थनार्थं आवश्यकैः प्रासंगिकदस्तावेजैः सह सक्षमप्राधिकरणस्य समक्षं नवीनम् अथवा अतिरिक्तम् अभ्यावेदनं प्रस्तुतुं शक्नुवन्ति। न्यायालयेन स्पष्टं कृतं यत् नियमितीकरणसम्बद्धे दावे तेन गुणदोषविषये कापि अन्तिममतिः न प्रकटिता। अतः सक्षमप्राधिकरणेन प्रचलितनियमानां शासननिर्देशानां च आधारेण अभ्यावेदनस्य स्वतन्त्रतया परीक्षणं कृत्वा उचितः निर्णयः करणीयः।


