‘वंदे मातरम्’ को लेकर कांग्रेस विवादों में घिर गई है। भाजपा ने इस मामले में सोनिया गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। वहीं, राष्ट्रगीत के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के वंशज ने भी इस मुद्दे पर अपनी मांग सामने रखी है।Congress has landed in controversy over the issue of ‘Vande Mataram’. The BJP has filed an FIR against Sonia Gandhi in connection with the matter. Meanwhile, a descendant of Bankim Chandra Chattopadhyay, the writer of the national song, has also put forward a demand regarding the controversy.‘वन्दे मातरम्’ विषयं प्रति कांग्रेस् दलं विवादे पतितम् अस्ति। भाजपा-दलेन अस्मिन् प्रकरणे सोनिया गान्धी विरुद्धं प्राथमिकी (FIR) पञ्जीकृता अस्ति। राष्ट्रगीतस्य रचयिता बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्यायस्य वंशजेन अपि अस्य विषयस्य सम्बन्धे स्वकीयः आग्रहः प्रस्तुतः।
नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान ‘वंदे मातरम्’ के गायन को लेकर नया विवाद सामने आ गया है। कार्यक्रम में राष्ट्रगीत के प्रस्तुतीकरण को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

नई दिल्ली। स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान कांग्रेस मुख्यालय में ‘वंदे मातरम्’ के गायन को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। भाजपा विधायक और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के वंशज सुमित्रो चटर्जी ने कथित घटना को लेकर कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी से बिना शर्त माफी की मांग की है। वहीं, कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि उसने ‘वंदे मातरम्’ के पूर्ण संस्करण के गायन को रोकने का कोई प्रयास नहीं किया।
‘वंदे मातरम्’ के गायन पर विवाद गहराया
यह विवाद 15 अगस्त को आयोजित कांग्रेस के स्वतंत्रता दिवस समारोह से जुड़ा है। कार्यक्रम का एक वीडियो सामने आने के बाद इस मुद्दे ने तूल पकड़ लिया। वीडियो में सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से बातचीत करती नजर आ रही हैं, जबकि पीछे ‘वंदे मातरम्’ का गायन चल रहा है।
वीडियो के अगले हिस्से में सोनिया गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे कथित रूप से एक ऐसा इशारा करते नजर आते हैं, जिसे भाजपा नेताओं ने ‘वंदे मातरम्’ का गायन रोकने के संकेत के तौर पर बताया है। इसी वीडियो को आधार बनाकर भाजपा ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं।
हालांकि कांग्रेस ने भाजपा के इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। पार्टी के अनुसार, सोनिया गांधी केवल मल्लिकार्जुन खरगे के बैठने के लिए कुर्सी की व्यवस्था को लेकर बातचीत कर रही थीं। कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि ‘वंदे मातरम्’ के पूर्ण संस्करण के गायन को रोकने का कोई प्रयास नहीं किया गया।
सुमित्रो चटर्जी ने सोनिया गांधी को पत्र भेजकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई
भाजपा विधायक सुमित्रो चटर्जी ने सोनिया गांधी को पत्र भेजकर इस पूरे मामले पर अपनी नाराजगी जाहिर की। नैहाटी से भाजपा विधायक ने कहा कि उन्होंने यह पत्र किसी राजनीतिक हैसियत से नहीं, बल्कि एक सामान्य नागरिक, राष्ट्रभक्त और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के प्रत्यक्ष वंशज के रूप में लिखा है।
चटर्जी ने कथित घटना पर नाराजगी और चिंता जताते हुए कहा कि स्वतंत्र भारत में ‘वंदे मातरम्’ के पूर्ण गीत के गायन को लेकर किसी भी प्रकार की झिझक बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने इस स्थिति को इतिहास की पुरानी भूल को दोबारा दोहराने के समान बताया।
स्वतंत्रता संग्राम में ‘वंदे मातरम्’ के ऐतिहासिक योगदान का उल्लेख
भाजपा विधायक ने अपने पत्र में ‘वंदे मातरम्’ के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े गौरवशाली इतिहास को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि श्री अरबिंदो ने इस गीत को एक ऐसे मंत्र के रूप में वर्णित किया था, जिसने लोगों को राष्ट्रभक्ति की भावना से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
चटर्जी ने अपने पत्र में 1896 के कलकत्ता अधिवेशन का भी जिक्र किया, जहां रवींद्रनाथ टैगोर ने ‘वंदे मातरम्’ का गायन किया था। उन्होंने 1905 के बनारस कांग्रेस अधिवेशन का उल्लेख करते हुए बताया कि उस दौरान सरला देवी चौधरानी ने भी यह गीत प्रस्तुत किया था।
चटर्जी ने 1909 में राजद्रोह के मुकदमे के दौरान बाल गंगाधर तिलक के समर्थकों द्वारा ‘वंदे मातरम्’ के जयघोष का भी उल्लेख किया। उन्होंने 1938 में हैदराबाद की उस्मानिया यूनिवर्सिटी के राष्ट्रवादी छात्रों का जिक्र करते हुए कहा कि निजाम की पाबंदियों के बावजूद छात्रों ने इसे जोश और देशभक्ति से भरे नारे के रूप में इस्तेमाल किया था।
कांग्रेस पर दोहरे रवैये का आरोप
सुमित्रो चटर्जी ने ‘वंदे मातरम्’ के मुद्दे पर कांग्रेस पर कथित दोहरे रवैये का आरोप लगाया। उन्होंने 1937 में मोहम्मद अली जिन्ना की आपत्तियों के बाद कांग्रेस द्वारा गीत के संक्षिप्त रूप को स्वीकार किए जाने के फैसले का भी उल्लेख किया।
चटर्जी ने कहा कि उस दौर में हुआ समझौता आज के विवाद में भी किसी न किसी रूप में नजर आता है। उन्होंने कांग्रेस की पश्चिम बंगाल छात्र इकाई ‘छात्र परिषद’ का उल्लेख करते हुए सवाल किया कि जब पार्टी की अपनी छात्र इकाई ‘वंदे मातरम्’ से जुड़ी रही है, तो कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को इस गीत को लेकर आपत्ति क्यों होनी चाहिए?
भाजपा विधायक ने जोर देकर कहा कि ‘वंदे मातरम्’ किसी एक राजनीतिक दल की मिल्कियत नहीं है। उन्होंने इसे भारत की साझा ऐतिहासिक चेतना और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की अमूल्य विरासत का हिस्सा बताया। उनके मुताबिक, यह स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और बलिदान से जुड़ा राष्ट्रीय प्रतीक है और इसका सम्मान करना देश के स्वतंत्रता आंदोलन के प्रति सम्मान व्यक्त करने के समान है।
English
A fresh controversy has emerged over the singing of ‘Vande Mataram’ during the Independence Day celebration held at the Congress headquarters in New Delhi. The presentation of the national song at the event has sparked a political debate.
New Delhi: A political controversy has intensified over the singing of ‘Vande Mataram’ during the Independence Day programme at the Congress headquarters. BJP MLA and descendant of Bankim Chandra Chattopadhyay, Sumitro Chatterjee, has urged Congress Parliamentary Party chairperson Sonia Gandhi to offer an unconditional apology over the alleged incident. Meanwhile, the Congress has denied any attempt to stop the complete version of ‘Vande Mataram’.
Controversy Erupts Over the Singing of ‘Vande Mataram’
The controversy relates to the Congress Independence Day programme held on August 15. The issue gained momentum after a video from the event surfaced. In the footage, Sonia Gandhi can be seen speaking with Congress president Mallikarjun Kharge while ‘Vande Mataram’ is being sung in the background.
In the subsequent part of the video, Sonia Gandhi and Mallikarjun Kharge are allegedly seen making a gesture that BJP leaders have interpreted as a signal to stop the singing of ‘Vande Mataram’. Based on the footage, the BJP has raised questions about the role of the Congress leadership.
The Congress, however, has rejected the allegations made by the BJP. According to the party, Sonia Gandhi was only discussing arrangements for a chair for Mallikarjun Kharge. The Congress clarified that there was no attempt to stop the complete version of ‘Vande Mataram’ from being sung.
Sumitro Chatterjee Writes to Sonia Gandhi, Expressing His Objection
BJP MLA Sumitro Chatterjee wrote to Sonia Gandhi, expressing his objection to the matter. The BJP legislator from Naihati said he wrote the letter not in his political capacity, but as an ordinary citizen, a patriot and a direct descendant of Bankim Chandra Chattopadhyay.
Expressing his disappointment and anger over the alleged incident, Chatterjee said that any hesitation over singing the complete version of ‘Vande Mataram’ in independent India is deeply unfortunate. He described the situation as an attempt to repeat a mistake from history.
Mention of the Historic Role of ‘Vande Mataram’ in India’s Freedom Struggle
In his letter, the BJP MLA highlighted the glorious history of ‘Vande Mataram’ and its connection with India’s freedom struggle. He said Sri Aurobindo had described the song as a mantra that played an important role in inspiring people and connecting them with a spirit of patriotism.
In his letter, Chatterjee also referred to the 1896 Calcutta session of the Indian National Congress, where Rabindranath Tagore sang ‘Vande Mataram’. He also mentioned the 1905 Banaras Congress session, where Sarala Devi Chaudhurani is said to have performed the song.
संस्कृतम्:
नवदिल्ल्यां स्थिते कांग्रेस् मुख्यालये स्वातन्त्र्यदिवसस्य समारोहकाले ‘वन्दे मातरम्’ गीतस्य गायनं प्रति नूतनः विवादः उत्पन्नः अभवत्। अस्य कार्यक्रमस्य प्रस्तुतीकरणं प्रति राजनैतिकः विमर्शः तीव्रः जातः।
नवदिल्लीतः। स्वातन्त्र्यदिवसस्य कार्यक्रमे कांग्रेस् मुख्यालये ‘वन्दे मातरम्’ गीतस्य गायनं प्रति राजनैतिकः विवादः तीव्रः अभवत्। भाजपा-विधायकः तथा बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्यायस्य वंशजः सुमित्रो चटर्जी इत्यनेन कथितघटनायाः विषये कांग्रेस् संसदीयदलस्य अध्यक्षा सोनिया गान्धी प्रति निःशर्तक्षमायाः आग्रहः कृतः। अपरपक्षे कांग्रेस्-दलेन ‘वन्दे मातरम्’ गीतस्य सम्पूर्णरूपस्य गायनं निवारयितुं कश्चन प्रयासः कृतः इति आरोपः निरस्तः।
‘वन्दे मातरम्’ गीतस्य गायनं प्रति विवादः तीव्रः अभवत्।
अयं विवादः अगस्तमासस्य १५ दिनाङ्के आयोजितस्य कांग्रेस्-दलस्य स्वातन्त्र्यदिवस-समारोहस्य सम्बन्धितः अस्ति। कार्यक्रमस्य एकं दृश्यचित्रं प्रकाशितं जातं, ततः विवादः तीव्रः अभवत्। दृश्यचित्रे सोनिया गान्धी कांग्रेस्-अध्यक्षेन मल्लिकार्जुन-खरगेण सह वार्तालापं कुर्वती दृश्यते, यदा पृष्ठभूमौ ‘वन्दे मातरम्’ गीतस्य गायनं प्रवर्तते।
दृश्यचित्रस्य अग्रिमे भागे सोनिया गान्धी तथा मल्लिकार्जुन-खरगे कथितरूपेण एकं संकेतं कुर्वन्तौ दृश्येते। भाजपा-नेतारः तं संकेतं ‘वन्दे मातरम्’ गीतस्य गायनं स्थगयितुं दत्तः निर्देशः इति व्याख्यातवन्तः। अस्य दृश्यचित्रस्य आधारेण भाजपा-दलेन कांग्रेस् नेतृत्वस्य भूमिकां प्रति प्रश्नाः उत्थापिताः।
परन्तु कांग्रेस्-दलेन भाजपा-दलस्य एते आरोपाः पूर्णतया निरस्ताः। दलस्य कथनानुसारं सोनिया गान्धी केवलं मल्लिकार्जुन-खरगेस्य उपवेशनार्थं आसन्दस्य व्यवस्थां प्रति वार्तां कुर्वती आसीत्। कांग्रेस्-दलेन स्पष्टं कृतं यत् ‘वन्दे मातरम्’ गीतस्य सम्पूर्णसंस्करणस्य गायनं स्थगयितुं कश्चित् प्रयासः न कृतः।
सुमित्रो चटर्जिना सोनिया गान्धीं प्रति पत्रं प्रेष्य स्वीयः आपत्तिः प्रकटिता।
भाजपा-विधायकः सुमित्रो चटर्जी सोनिया गान्धीं प्रति पत्रं लिखित्वा अस्मिन् विषये स्वीयं विरोधं प्रकटितवान्। नैहाटी-क्षेत्रस्य भाजपा-विधायकः अवदत् यत् सः एतत् पत्रं राजनैतिक-विधायकत्वेन न, अपितु सामान्यनागरिकः, देशभक्तः तथा बंकिमचन्द्र-चट्टोपाध्यायस्य प्रत्यक्षवंशजः इति रूपेण लिखितवान्।
कथितघटनां प्रति दुःखं क्रोधं च प्रकटयन् चटर्जी अवदत् यत् स्वतन्त्रभारते ‘वन्दे मातरम्’ गीतस्य सम्पूर्णस्य गायनं प्रति काचित् संकोचभावना अत्यन्तं दुर्भाग्यपूर्णा अस्ति। तेन एषा स्थितिः इतिहासस्य पूर्वकृतदोषस्य पुनरावृत्तिरिव वर्णिता।
भारतस्य स्वातन्त्र्यसङ्ग्रामे ‘वन्दे मातरम्’ इत्यस्य ऐतिहासिकभूमिकायाः उल्लेखः।
भाजपा-विधायकेन स्वकीयपत्रे ‘वन्दे मातरम्’ गीतस्य स्वातन्त्र्यसङ्ग्रामेन सह सम्बद्धस्य गौरवपूर्णस्य इतिहासस्य उल्लेखः कृतः। तेन उक्तं यत् श्रीअरविन्देन एतत् गीतं तादृशः मन्त्रः इति वर्णितम्, यः जनान् राष्ट्रभक्तेः भावनया सह सम्बद्धुं महत्त्वपूर्णां भूमिकां निर्वहति स्म।
चटर्जी स्वकीयपत्रे १८९६ तमे वर्षे कलकत्तायां आयोजितस्य भारतीय-राष्ट्रीय-कांग्रेसः अधिवेशनस्य अपि उल्लेखं कृतवान्, यत्र रवीन्द्रनाथ-ठाकुरेण ‘वन्दे मातरम्’ गीतं गतम्। सः १९०५ तमे वर्षे वाराणस्यां आयोजितस्य कांग्रेस्-अधिवेशनस्य उल्लेखं कुर्वन् अवदत् यत् तस्मिन् समये सरला देवी चौधराण्या अपि एतत् गीतं प्रस्तुतम्।
चटर्जी १९०९ तमे वर्षे राजद्रोह-प्रकरणस्य न्यायिककार्यवाहीकाले बालगङ्गाधर-तिलकस्य समर्थकैः ‘वन्दे मातरम्’ इति घोषस्य कृतस्य उल्लेखम् अपि अकरोत्। सः १९३८ तमे वर्षे हैदराबाद-नगरस्य उस्मानिया-विश्वविद्यालयस्य राष्ट्रवादी-छात्राणाम् अपि उल्लेखं कृतवान्। तेन उक्तं यत् निजामस्य प्रतिबन्धेषु अपि ते छात्राः ‘वन्दे मातरम्’ इति उत्साहपूर्णं राष्ट्रभक्तिप्रेरकं घोषरूपेण प्रयुक्तवन्तः।
कांग्रेस्-दलस्य द्वैधनीतिः इति आरोपः।
सुमित्रो चटर्जी इत्यनेन ‘वन्दे मातरम्’ विषयं प्रति कांग्रेस्-दलस्य कथित-द्वैधनीतेः आरोपः कृतः। तेन १९३७ तमे वर्षे मुहम्मद-अली-जिन्ना इत्यस्य आपत्तीनाम् अनन्तरं कांग्रेस्-दलेन गीतस्य संक्षिप्तरूपं स्वीकृतमिति निर्णयस्य अपि उल्लेखः कृतः।
चटर्जी अवदत् यत् तस्मिन् काले कृतस्य समझौतेस्य प्रभावः अद्यतन-विवादेऽपि दृश्यते। सः पश्चिमबङ्गस्य कांग्रेस्-दलस्य छात्रशाखायाः ‘छात्रपरिषदः’ उल्लेखं कुर्वन् प्रश्नं कृतवान् यत् कांग्रेस्-दलस्य शीर्षनेतृत्वस्य ‘वन्दे मातरम्’ गीतं प्रति आपत्तिः किमर्थं भवेत्?
भाजपा-विधायकः बलपूर्वकं उक्तवान् यत् ‘वन्दे मातरम्’ कस्यापि एकस्य राजनैतिक-दलस्य सम्पत्तिः नास्ति। तेन एतत् भारतस्य सामूहिक-ऐतिहासिक-स्मृतेः तथा बंकिमचन्द्र-चट्टोपाध्यायस्य अमूल्य-परम्परायाः अङ्गम् इति वर्णितम्। तस्य मते एतत् गीतं स्वातन्त्र्यसेनानीनां त्यागेन बलिदानेन च सम्बद्धं राष्ट्रियं प्रतीकम् अस्ति; अतः अस्य सम्मानः स्वातन्त्र्यसङ्ग्रामस्य सम्मानस्य तुल्यः अस्ति।


