रायपुर की ‘तीसरी आंख’ पर छाया धुंधलापन, 100 से ज्यादा CCTV कैमरे बंद; आरोपियों तक पहुंचना पुलिस के लिए बना चुनौती।Raipur’s ‘Third Eye’ Goes Blurry: Over 100 CCTV Cameras Shut Down, Police Struggle to Trace Suspects.रायपुरस्य ‘तृतीयनेत्रे’ व्यवधानम्, शताधिकाः सीसीटीवी-कैमरा निष्क्रियाः; अभियुक्तानाम् अन्वेषणे पुलिसस्य कठिनता।
राजधानी में अपराधियों की पहचान और वारदात के बाद उनके भागने का रास्ता तलाशने लगाए गए आईटीएमएस के कैमरे पुलिस के लिए ही परेशानी बन गए हैं।

रायपुर।राजधानी में अपराधियों की पहचान और घटनाओं के बाद उनके भागने के मार्ग का पता लगाने के लिए लगाए गए ITMS कैमरे अब पुलिस के लिए चुनौती बनते जा रहे हैं। शहर के प्रमुख चौक-चौराहों से लेकर आउटर इलाकों तक 100 से अधिक कैमरे लंबे समय से बंद बताए जा रहे हैं। वहीं, कई चालू कैमरों की तस्वीरें भी स्पष्ट नहीं मिल रही हैं।
कैमरों की खराब स्थिति का सीधा असर आपराधिक मामलों की जांच पर पड़ रहा है। लूट, डकैती, चोरी, छिनैती और हिट एंड रन जैसी घटनाओं में संदिग्धों की पहचान तथा उनके आने-जाने के रास्ते का पता लगाने में पुलिस को मुश्किलें हो रही हैं। इससे अपराधियों तक पहुंचने में जांच एजेंसियों का समय और मेहनत दोनों बढ़ रहे हैं।
किसी घटना के बाद जब पुलिस इंटीग्रेटेड सिटी कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) से CCTV फुटेज की जांच शुरू करती है, तो कई कैमरों की स्क्रीन ब्लैक नजर आती है। वहीं, कुछ कैमरों के लेंस पर जमी धूल और तकनीकी खामियों के कारण फुटेज साफ नहीं मिल पाती। इसके चलते बदमाशों के चेहरे और वाहनों के नंबर की पहचान करना पुलिस के लिए मुश्किल हो जाता है।
कंपनी का 8 करोड़ रुपये भुगतान अटका, CCTV कैमरों का मेंटेनेंस हुआ ठप।
राजधानी में इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) का संचालन और रखरखाव कर रही एलएंडटी कंपनी का करीब 8 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित है। भुगतान अटकने के बाद कंपनी ने सिस्टम के संचालन और मेंटेनेंस का काम बंद कर दिया है।
मेंटेनेंस रुकने का असर शहर की निगरानी व्यवस्था पर भी पड़ रहा है। इसके चलते 372 CCTV कैमरों और 36 ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) कैमरों की नियमित सर्विसिंग प्रभावित हो गई है। कैमरों की देखरेख नहीं होने से तकनीकी खराबियों के समाधान में भी परेशानी बढ़ रही है।
इसके चलते शहर के कई संवेदनशील और महत्वपूर्ण स्थानों पर लगे कैमरे पूरी तरह बंद पड़े हैं। वहीं, जो कैमरे अभी काम कर रहे हैं, उनके लेंस की सफाई नहीं होने से तस्वीरें धुंधली आ रही हैं। ऐसी स्थिति में संदिग्धों के चेहरे और उनकी गतिविधियों की स्पष्ट पहचान करना पुलिस के लिए चुनौती बन गया है।
अपराध जांच में बढ़ी मुश्किलें, पुलिस के सामने ये प्रमुख चुनौतियां
- अपराध में इस्तेमाल होने वाले वाहनों की पहचान करने में पुलिस के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। नंबर प्लेट पढ़कर वाहन की जानकारी जुटाने वाले 36 ANPR कैमरे बंद पड़े हैं। इसके कारण फर्जी नंबर प्लेट, बिना नंबर प्लेट या संदिग्ध वाहनों से वारदात को अंजाम देकर फरार होने वाले आरोपियों का पता लगाना मुश्किल हो रहा है।
- लूट, डकैती जैसी गंभीर वारदातों के बाद आरोपियों ने किस रास्ते से शहर छोड़ा और कौन-से चौराहों से होते हुए आउटर की ओर भागे, इसकी जानकारी जुटाना पुलिस के लिए चुनौती बन गया है। कैमरों की खराबी के चलते कई अहम स्थानों का डिजिटल फुटेज उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। ऐसे में आरोपियों की गतिविधियों और उनके भागने के रूट का पता लगाने में जांच टीम को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
(English)
Raipur: ITMS cameras installed across the capital to identify criminals and track their escape routes after incidents have become a challenge for the police. More than 100 cameras installed at major intersections as well as outer areas of the city are reportedly non-functional. Even among the operational cameras, several are producing unclear and blurry footage.
The poor condition of the surveillance network is affecting investigations into robbery, burglary, theft, snatching and hit-and-run cases. Police are facing difficulties in identifying suspects and tracing the routes used by them, making the investigation process more time-consuming.
After a crime, when police examine CCTV footage through the Integrated City Command and Control Centre (ICCC), several camera screens are reportedly found completely black. In some cases, dust accumulated on camera lenses and technical faults make the footage unclear, making it difficult to identify criminals’ faces and vehicle registration numbers.
Along with the CCTV network, maintenance issues have also been reported with traffic signals installed at major intersections. The lack of regular maintenance is affecting both surveillance and traffic management in the city.
Company’s ₹8 Crore Payment Stuck, CCTV Camera Maintenance Comes to a Halt.
The operation and maintenance of the Intelligent Traffic Management System (ITMS) in the capital has been disrupted after around ₹8 crore in payments to L&T remained pending. Following the delay in payment, the company has stopped the system’s maintenance and operational work.
The suspension has affected the city’s surveillance infrastructure. Regular servicing of 372 CCTV cameras and 36 Automatic Number Plate Recognition (ANPR) cameras has also come to a halt, making it difficult to address technical faults and maintain the surveillance network.
Major Challenges Hampering Crime Investigations, Police Face Key Hurdles.
Police are facing difficulties in identifying vehicles used in criminal activities. Thirty-six ANPR cameras, designed to read vehicle registration plates and help track vehicles, are currently non-functional. This is making it harder to trace suspects who flee after committing crimes using vehicles with fake or missing number plates.
After major crimes such as robbery and dacoity, police are struggling to determine which intersections the suspects used before fleeing towards the outskirts. Due to gaps in the surveillance system, digital footage from several key locations is unavailable. This is making it harder for investigators to track the movements and escape routes of the accused.
(संस्कृत)
रायपुरम्। राजधानीनगरे अपराधिनां परिचयं कर्तुं घटनानन्तरं तेषां पलायनमार्गस्य अन्वेषणाय च स्थापिताः आईटीएमएस-कैमरा अधुना पुलिसकर्मचारिणां कृते समस्यायाः कारणं भवन्ति। नगरस्य प्रमुखेषु चतुष्पथेषु बाह्यप्रदेशेषु च स्थापिताः शताधिकाः कैमरा निष्क्रियाः सन्ति। ये कैमरा कार्यरताः सन्ति, तेषाम् अपि दृश्यानि बहुधा अस्पष्टानि धूमिलानि च दृश्यन्ते।
कैमराणां दुर्व्यवस्थायाः प्रभावः लुण्ठन, चोरी, अपहरणसदृशेषु अपराधेषु तथा वाहन-दुर्घटनानन्तरं पलायनस्य प्रकरणेषु अन्वेषणकार्ये दृश्यते। संदिग्धानां परिचये तेषां गमनमार्गस्य च ज्ञाने पुलिसकर्मचारिणः कठिनतां अनुभवन्ति।
अपराधस्य घटनानन्तरं यदा पुलिसकर्मचारिणः एकीकृत-नगर-आदेश-नियन्त्रणकेन्द्रात् (आईसीसीसी) सीसीटीवी-दृश्यचित्राणि परीक्षन्ते, तदा अनेकानां कैमराणां पटलाः कृष्णवर्णाः दृश्यन्ते। केषाञ्चित् कैमराणां लेंसस्थे धूलिकणैः तकनीकी-दोषैश्च दृश्यचित्राणि अस्पष्टानि भवन्ति। अतः अपराधिनां मुखानां वाहनानां पञ्जीकरण-सङ्ख्यानां च स्पष्टतया परिचयः कर्तुं कठिनं भवति।
एतदतिरिक्तं नगरस्य प्रमुखेषु चतुष्पथेषु स्थापितानां यातायात-संकेतकानाम् अपि नियमितरूपेण अनुरक्षणं न भवति। अनेन नगरस्य निगराणी-व्यवस्था तथा यातायात-प्रबन्धनम् अपि प्रभावितं भवति।
कम्पन्याः अष्टकोटिरूप्यकाणां भुगतानं लम्बितम्, सीसीटीवी-कैमरा-अनुरक्षणकार्यं स्थगितम्।
राजधानीनगरे बुद्धिमत्-यातायात-प्रबन्धन-व्यवस्थायाः (ITMS) सञ्चालनं अनुरक्षणं च कुर्वत्या एलएण्डटी-कम्पन्या सह सम्बद्धं प्रायः अष्टकोटिरूप्यकाणां भुगतानं लम्बितम् अस्ति। भुगतानस्य विलम्बात् कम्पनी द्वारा व्यवस्थायाः सञ्चालन-अनुरक्षणकार्यं स्थगितम्।
अस्य प्रभावः नगरस्य निगराणी-व्यवस्थायाम् अपि दृश्यते। ३७२ सीसीटीवी-कैमरा तथा ३६ स्वचालित-सङ्ख्यापट्टिका-परिचय-कैमरा (ANPR) इत्येतेषां नियमित-अनुरक्षणं सेवाकार्यं च अवरुद्धम् अस्ति। तकनीकी-दोषानां निवारणे अपि अधुना कठिनता उत्पन्ना अस्ति।
अस्य परिणामस्वरूप नगरस्य अनेकासु महत्त्वपूर्णस्थलेषु स्थापिताः बहवः कैमरा पूर्णतः निष्क्रियाः सन्ति। ये कैमरा कार्यरताः सन्ति, तेषाम् अपि लेंसस्य समुचित-सफाई न भवति, अतः दृश्यचित्राणि धूमिलानि अस्पष्टानि च दृश्यन्ते। एतादृशे परिस्थितौ पुलिसकर्मचारिणां कृते संदिग्धानां मुखपरिचये तेषां गतिविधीनां निरीक्षणे च कठिनता जायते।
अपराधान्वेषणे वर्धिताः समस्याः, पुलिसस्य समक्षं प्रमुखाः आव्हानाः।
अपराधेषु प्रयुक्तानां वाहनानां परिचये पुलिसकर्मचारिणां समक्षं महती समस्या उत्पन्ना अस्ति। वाहनानां पञ्जीकरण-सङ्ख्यां पठित्वा तेषां परिचयं ज्ञातुं सहायकरूपाः ३६ एएनपीआर-कैमरा निष्क्रियाः सन्ति। अतः मिथ्या-पञ्जीकरण-सङ्ख्यायुक्तैः अथवा सङ्ख्यापट्टिका-विहीनैः वाहनैः अपराधं कृत्वा पलायमानानां अपराधिनां अन्वेषणं कठिनं जातम्।
लुण्ठन-डकैती-सदृशानां गम्भीरापराधानां घटनानन्तरं अपराधिनः कस्मात् चतुष्पथात् नगरस्य बाह्यप्रदेशं प्रति पलायितवन्तः इति ज्ञातुं पुलिसकर्मचारिणां कृते कठिनता जायते। निगराणी-व्यवस्थायाः दोषात् अनेकमहत्त्वपूर्णस्थलानां डिजिटल-दृश्यचित्राणि उपलब्धानि न भवन्ति। अतः अपराधिनां गतिविधीनां तेषां पलायनमार्गस्य च अन्वेषणे कठिनता उत्पद्यते।


