छत्तीसगढ़ की कटघोरा–डोंगरगढ़ रेल परियोजना को हरी झंडी, 16 वर्षों के लंबे संघर्ष के बाद विकास की नई रफ्तार को मिला रास्ता। Katghora–Dongargarh Rail Project Gets Approval in Chhattisgarh; 16 Years of Persistent Struggle Paves the Way for New Growth। छत्तीसगढे कटघोरा–डोंगरगढ़-रेलपरियोजनायै अनुमोदनम्, षोडशवर्षाणां दीर्घसंघर्षानन्तरं विकासस्य नूतनगतये मार्गः प्रशस्तः।

0

छत्तीसगढ़ की कटघोरा–डोंगरगढ़ रेल लाइन को मिली मंजूरी ने 16 वर्षों से जारी जनसंघर्ष को नई दिशा और पहचान प्रदान की है। छात्र-युवा नागरिक रेलवे जोन संघर्ष समिति ने इस ऐतिहासिक निर्णय का स्वागत करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू के प्रति आभार व्यक्त किया है।

16 साल बाद कटघोरा-डोंगरगढ़ रेल लाइन को मिली मंजूरी (AI तस्वीर)

कटघोरा–डोंगरगढ़ रेल परियोजना को मिली मंजूरी ने 16 वर्षों से चल रहे जनसंघर्ष को नई पहचान और मजबूती प्रदान की है। छात्र-युवा नागरिक रेलवे जोन संघर्ष समिति ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू के प्रति आभार व्यक्त किया। समिति ने यह भी स्पष्ट किया कि परियोजना की वास्तविक सफलता तभी सुनिश्चित होगी, जब संशोधित एलाइनमेंट और लूप लाइनों के जरिए अधिकतम आबादी तक रेल सुविधा का लाभ पहुंचाया जा सके।

दीर्घ संघर्ष से सफलता तक का सफर

कटघोरा–डोंगरगढ़ रेल लाइन को मिली मंजूरी के बाद 16 वर्षों से जारी जनसंघर्ष की कहानी एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है। छात्र-युवा नागरिक रेलवे जोन संघर्ष समिति ने इस फैसले का स्वागत करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू के प्रति आभार व्यक्त किया है।समिति ने मांग की है कि प्रस्तावित परियोजना में उसलापुर–गनियारी और खैरागढ़–राजनांदगांव के बीच लूप लाइन को भी शामिल किया जाए। समिति का मानना है कि इससे माल परिवहन के साथ-साथ यात्री रेल सेवाओं का विस्तार होगा और क्षेत्र के लोगों को बेहतर रेल संपर्क मिल सकेगा।समिति के अनुसार बिलासपुर, मुंगेली, कवर्धा, खैरागढ़, राजनांदगांव, दुर्ग, भिलाई और रायपुर के बीच बड़ी संख्या में यात्रियों की नियमित आवाजाही होती है। ऐसे में रेल परियोजना का स्वरूप व्यापक जनहित को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जाना चाहिए, ताकि अधिकतम आबादी को इसका लाभ मिल सके।संघर्ष के इतिहास को याद करते हुए समिति ने बताया कि वर्ष 2009 में बिलासपुर से मुंगेली और कवर्धा होते हुए डोंगरगढ़ तक रेल लाइन की मांग को लेकर नौ दिवसीय साइकिल यात्रा निकाली गई थी। इस जनआंदोलन के बाद तत्कालीन रेल मंत्री ममता बनर्जी ने परियोजना के पहले सर्वे को मंजूरी दी थी। बाद में संसद भवन में दिलीप सिंह जूदेव, रमेश बैस, पुन्नूलाल मोहले और मधुसूदन यादव सहित छात्र-युवा रेलवे जोन संघर्ष समिति के प्रतिनिधिमंडल ने रेल लाइन की मांग को प्रमुखता से रखा था।

Project Approved in 2018

वर्ष 2018 में रेल परियोजना को मंजूरी तो मिल गई, लेकिन एलाइनमेंट में बदलाव के कारण लोरमी, पंडरिया और बिलासपुर क्षेत्र के हित प्रभावित हुए। इसके विरोध में पंडरिया में लगातार दो वर्षों तक आंदोलन चला। बाद में भूपेश बघेल सरकार ने परियोजना के एलाइनमेंट में संशोधन की मांग उठाई, लेकिन तत्कालीन केंद्र सरकार ने इसे स्वीकार नहीं किया। वर्ष 2024 के बाद केंद्रीय मंत्री बनने पर तोखन साहू ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के साथ समन्वय कर परियोजना को दोबारा गति दिलाने की दिशा में प्रयास शुरू किए।

2009 की साइकिल यात्रा से शुरू हुआ जनसंघर्ष

रेल लाइन की मांग सिर्फ ज्ञापनों और औपचारिक मांगों तक सीमित नहीं रही। वर्ष 2009 में छात्र-युवा रेलवे जोन संघर्ष समिति ने बिलासपुर से मुंगेली और कवर्धा के रास्ते डोंगरगढ़ तक नौ दिवसीय साइकिल यात्रा निकाली। इस अभियान के दौरान कार्यकर्ता गांव-गांव पहुंचे और लोगों को प्रस्तावित रेल परियोजना के महत्व से अवगत कराया। जनजागरूकता का यही अभियान आगे चलकर रेल लाइन के प्रथम सर्वे और व्यापक जनसमर्थन की मजबूत नींव बना।

नए एलाइनमेंट से लाखों लोगों तक पहुंचेगी रेल सुविधा

समिति ने सुझाव दिया है कि तखतपुर से कवर्धा के बीच रेल मार्ग का एलाइनमेंट इस तरह निर्धारित किया जाए, जिससे मुंगेली, लोरमी, पंडरिया, कुंडा, पांडातराई और पोंडी जैसे प्रमुख कस्बों को रेल नेटवर्क से जोड़ा जा सके। समिति का कहना है कि यदि इन क्षेत्रों से करीब 15 किलोमीटर के दायरे में रेलवे स्टेशन विकसित किए जाते हैं, तो उत्तर-पश्चिम छत्तीसगढ़ की बड़ी आबादी को सीधे रेल सुविधा का लाभ मिलेगा। इससे आवागमन सुगम होने के साथ-साथ क्षेत्र के सामाजिक, आर्थिक और औद्योगिक विकास को भी नई रफ्तार मिल सकती है।

पुराने सर्वे नहीं, बदले भौगोलिक परिदृश्य के आधार पर हो निर्णय

समिति के अनुसार वर्ष 2012 में हुए सर्वे और 2018 में तय किए गए एलाइनमेंट के बाद क्षेत्र की भौगोलिक एवं विकासात्मक स्थिति में बड़े बदलाव आए हैं। इस दौरान नई बस्तियां विकसित हुई हैं, सड़कों का विस्तार हुआ है और कई निर्माण कार्य पूरे किए गए हैं। ऐसे में परियोजना का अंतिम लोकेशन सर्वे मौजूदा परिस्थितियों और वर्तमान भौगोलिक स्वरूप को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। इससे निर्माण के दौरान आने वाली संभावित बाधाओं को कम किया जा सकेगा और ऐसा व्यावहारिक रेल मार्ग तय होगा, जिसका लाभ अधिकतम नागरिकों तक पहुंच सके।

The approval of the Katghora–Dongargarh railway line in Chhattisgarh has given a new identity and direction to a people’s movement that has continued for the past 16 years. The Chhatra Yuva Nagrik Railway Zone Sangharsh Samiti welcomed the landmark decision and expressed its gratitude to Union Minister of State Tokhan Sahu.

The approval of the Katghora–Dongargarh railway project has given fresh recognition and strength to a people’s movement that has continued for 16 years. Welcoming the decision, the Chhatra Yuva Nagrik Railway Zone Sangharsh Samiti expressed its gratitude to Union Minister of State Tokhan Sahu. The committee also emphasized that the project would achieve its true purpose only if a revised alignment and loop lines ensure railway connectivity for the maximum possible population.

A Journey from Long Struggle to Success

With the approval of the Katghora–Dongargarh railway line, the story of a people’s movement that has continued for the past 16 years has once again come into focus. The Chhatra Yuva Nagrik Railway Zone Sangharsh Samiti welcomed the decision and expressed its gratitude to Union Minister of State Tokhan Sahu.The committee has demanded that loop lines between Uslapur and Ganiyari, as well as Khairagarh and Rajnandgaon, be included in the proposed project. According to the committee, these additional routes would not only strengthen freight transportation but also expand passenger rail services and improve connectivity across the region.The committee pointed out that a large number of passengers regularly travel between Bilaspur, Mungeli, Kawardha, Khairagarh, Rajnandgaon, Durg, Bhilai and Raipur. Therefore, it said, the project should be designed with a strong public-interest focus so that the maximum number of people can benefit from it.Recalling the history of the movement, the committee said that in 2009, a nine-day bicycle rally was organized from Bilaspur to Dongargarh via Mungeli and Kawardha to demand the railway line. Following the public movement, then Railway Minister Mamata Banerjee approved the project’s first survey. Later, a delegation of the Chhatra Yuva Railway Zone Sangharsh Samiti, along with leaders including Dilip Singh Judeo, Ramesh Bais, Punnulal Mohle and Madhusudan Yadav, raised the demand prominently at Parliament House.

Project Approved in 2018

The railway project received approval in 2018, but changes to its alignment affected the interests of the Lormi, Pandariya and Bilaspur regions. This led to a prolonged protest movement in Pandariya that continued for two years. The Bhupesh Baghel government later demanded a revision of the project’s alignment, but the then Central Government did not accept the proposal. After becoming a Union Minister in 2024, Tokhan Sahu worked in coordination with Chief Minister Vishnu Deo Sai to revive the project and bring it back on track.

The 2009 Bicycle Rally Sparked the People’s Movement

The demand for the railway line was not confined to memorandums and formal appeals. In 2009, the Chhatra Yuva Railway Zone Sangharsh Samiti organized a nine-day bicycle rally from Bilaspur to Dongargarh via Mungeli and Kawardha. During the campaign, members travelled from village to village, raising awareness about the importance of the proposed railway project. This public outreach later became a strong foundation for the project’s first survey and the growth of widespread public support.

Revised Alignment to Bring Rail Connectivity to Millions

The committee has proposed that the railway alignment between Takhatpur and Kawardha should be planned in a way that connects major towns such as Mungeli, Lormi, Pandariya, Kunda, Pandatari and Pondi to the rail network. According to the committee, if railway stations are developed within a radius of about 15 kilometres of these areas, a large population across north-western Chhattisgarh would gain direct access to rail services. This would not only make travel easier but could also accelerate the region’s social, economic and industrial development.

Decision Should Reflect the New Geography, Not the Old Survey

According to the committee, the region has undergone significant geographical and developmental changes since the 2012 survey and the alignment finalized in 2018. New settlements have emerged, road networks have expanded, and several construction projects have been completed. Therefore, the final location survey should be conducted in accordance with the present conditions and the region’s current geographical landscape. This would help reduce potential construction-related obstacles and enable the selection of a practical railway route that benefits the maximum number of people.

संस्कृत:

छत्तीसगढे कटघोरा–डोंगरगढ़-रेलमार्गस्य स्वीकृत्या षोडशवर्षेभ्यः प्रवर्तमानस्य जनान्दोलनस्य नूतना दिशा तथा च नूतना पहचान प्राप्ता। छात्र-युवा-नागरिक-रेलवे-जोन-संघर्षसमितिः अस्य ऐतिहासिकनिर्णयस्य स्वागतं कृत्वा केन्द्रीयराज्यमन्त्री तोखनसाहुमहोदयस्य प्रति कृतज्ञतां प्रकटितवती।

कटघोरा–डोंगरगढ़-रेलपरियोजनायाः स्वीकृत्या षोडशवर्षेभ्यः प्रवर्तमानस्य जनसंघर्षस्य नूतना प्रतिष्ठा तथा च दृढता प्राप्ता। छात्र-युवा-नागरिक-रेलवे-जोन-संघर्षसमितिः अस्य निर्णयस्य स्वागतं कृत्वा केन्द्रीयराज्यमन्त्री तोखनसाहुमहोदयस्य प्रति कृतज्ञतां प्रकटितवती। समित्या एतदपि स्पष्टतया उक्तं यत् संशोधितमार्गनिर्धारणेन तथा लूप-रेलमार्गैः यदा अधिकतमजनसंख्यायै रेलसुविधायाः लाभः प्राप्स्यते, तदैव एषा परियोजना वस्तुतः सार्थका भविष्यति।

दीर्घसंघर्षात् सफलतायाः यात्रा

कटघोरा–डोंगरगढ़-रेलमार्गस्य अनुमोदनानन्तरं षोडशवर्षेभ्यः प्रवर्तमानस्य जनसंघर्षस्य गाथा पुनः चर्चायां समागता। छात्र-युवा-नागरिक-रेलवे-जोन-संघर्षसमितिः अस्य निर्णयस्य स्वागतं कृत्वा केन्द्रीयराज्यमन्त्री तोखनसाहुमहोदयस्य प्रति कृतज्ञतां प्रकटितवती।समित्या आग्रहः कृतः यत् प्रस्तावितायां परियोजनायाम् उसलापुर–गनियारी तथा खैरागढ़–राजनांदगांवयोः मध्ये लूप-रेलमार्गावपि समावेश्येताम्। समितेः मतेन एतेन मालपरिवहनस्य सुदृढीकरणं भविष्यति तथा च यात्री-रेलसेवानामपि विस्तारः भविष्यति।समित्या उक्तं यत् बिलासपुर, मुंगेली, कवर्धा, खैरागढ़, राजनांदगांव, दुर्ग, भिलाई तथा रायपुर-नगराणां मध्ये बहुसंख्याकानां यात्रिकाणां नियमितागमनं भवति। अतः परियोजनायाः स्वरूपं व्यापकजनहितं दृष्ट्वा निर्मातव्यम्, येन अधिकतमजनसंख्यायै रेलसुविधायाः लाभः प्राप्तुं शक्येत।संघर्षस्य इतिहासं स्मारयन्ती समितिः अवदत् यत् वर्षे 2009 तमे बिलासपुरतः मुंगेली-कवर्धामार्गेण डोंगरगढ़पर्यन्तं रेलमार्गस्य मागं कर्तुं नवदिनात्मकः साइकिल-यात्रा-अभियानः आयोजितः आसीत्। अस्य जनान्दोलनस्य अनन्तरं तत्कालीनया रेलमन्त्रिण्या ममता बनर्जीमहोदयया परियोजनायाः प्रथमसर्वेक्षणस्य अनुमोदनं कृतम्। अनन्तरं संसद्भवने दिलीपसिंहजूदेव, रमेशबैस, पुन्नूलालमोहले, मधुसूदनयादव इत्यादिभिः सह छात्र-युवा-रेलवे-जोन-संघर्षसमितेः प्रतिनिधिमण्डलेन रेलमार्गस्य मागः प्रमुखतया प्रस्तुतः।

वर्षे 2018 तमे परियोजनायाः स्वीकृतिः अभवत्

वर्षे 2018 तमे रेलपरियोजनायाः स्वीकृतिः प्राप्ता, किन्तु मार्गनिर्धारणस्य परिवर्तनात् लोरमी, पंडरिया तथा बिलासपुरप्रदेशानां हितानि प्रभावितानि अभवन्। तस्य विरोधे पंडरियायां निरन्तरं द्विवर्षपर्यन्तम् आन्दोलनम् अभवत्। अनन्तरं भूपेशबघेल-शासनेन परियोजनायाः मार्गनिर्धारणे संशोधनस्य मागः प्रस्तुतः, किन्तु तत्कालीनकेन्द्रसर्वकारेण सः प्रस्तावः न स्वीकृतः। वर्षे 2024 तमे केन्द्रीयराज्यमन्त्रीपदं प्राप्य तोखनसाहुमहोदयः मुख्यमन्त्रिणा विष्णुदेवसायमहोदयेन सह समन्वयं कृत्वा परियोजनायाः पुनः प्रवर्तनाय तथा तस्यै नूतनगतिं दातुं प्रयत्नान् आरब्धवान्।

वर्षे 2009 तमे सायकलयात्रया जनान्दोलनस्य आरम्भः अभवत्

रेलमार्गस्य मागः केवलं ज्ञापनपत्रेषु औपचारिकमागेषु च सीमितः नाभवत्। वर्षे 2009 तमे छात्र-युवा-रेलवे-जोन-संघर्षसमित्या बिलासपुरतः मुंगेली-कवर्धामार्गेण डोंगरगढ़पर्यन्तं नवदिनात्मकः सायकलयात्रा-अभियानः आयोजितः। अस्मिन् अभियाने कार्यकर्तारः ग्रामं ग्रामं गत्वा जनान् प्रस्तावितायाः रेलपरियोजनायाः महत्त्वं बोधितवन्तः। एषः जनजागरण-अभियानः अनन्तरं रेलमार्गस्य प्रथमसर्वेक्षणस्य व्यापकजनसमर्थनस्य च दृढाधारः अभवत्।

संशोधितमार्गनिर्धारणेन लक्षशः जनाः रेलसुविधायाः लाभं प्राप्स्यन्ति

समित्या प्रस्तावः प्रस्तुतः यत् तखतपुरतः कवर्धापर्यन्तं रेलमार्गस्य मार्गनिर्धारणम् एवं क्रियेत, येन मुंगेली, लोरमी, पंडरिया, कुंडा, पांडातराई तथा पोंडी इत्यादयः प्रमुखनगरप्रदेशाः रेलजालेन सम्बद्धाः भवेयुः। समितेः मतानुसारम्, यदि एतेषां प्रदेशानां समीपे प्रायः पञ्चदशकिलोमीटरपरिधौ रेलस्थानकानि निर्मीयेरन्, तर्हि उत्तर-पश्चिम-छत्तीसगढ़स्य विशालजनसंख्यायाः प्रत्यक्षं रेलसुविधालाभः भविष्यति। एतेन यात्रासौकर्यस्य वृद्धेः सह क्षेत्रस्य सामाजिक-आर्थिक-औद्योगिकविकासोऽपि नूतनां गतिं प्राप्स्यति।चाहें तो इसे �⁠और संक्षिप्त न्यूज़ कॉपी

पुरातनसर्वेक्षणस्य स्थाने परिवर्तितभौगोलिकस्थित्याधारेण निर्णयः क्रियताम्

समितेः कथनानुसारं वर्षे 2012 तमे सम्पन्नस्य सर्वेक्षणस्य तथा वर्षे 2018 तमे निर्धारितस्य मार्गनिर्धारणस्य अनन्तरं क्षेत्रस्य भौगोलिक-विकासात्मकस्थितौ व्यापकाः परिवर्तनाः अभवन्। अस्मिन् काले नवीनाः बस्तयः विकसिताः, मार्गाणां विस्तारः अभवत् तथा च बहूनि निर्माणकार्याणि सम्पन्नानि। अतः परियोजनायाः अन्तिमस्थानसर्वेक्षणं वर्तमानपरिस्थितीनां तथा अद्यतनभौगोलिकस्वरूपस्य आधारेण करणीयम्। एतेन निर्माणकाले सम्भाव्यबाधाः न्यूनीकर्तुं शक्यन्ते तथा च अधिकतमजनानां हिताय उपयुक्तः व्यावहारिकश्च रेलमार्गः निर्धारयितुं शक्यते।

Advertisement

Raja Saw Mill Advertisement

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed