कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघ का हमला, सिर पर लाठी मारकर बचाई जान। Tiger Attacks Man in Kanha Tiger Reserve, Victim Saves His Life by Striking It with a Stick। कान्हा व्याघ्रारण्ये व्याघ्रेण आक्रमणम्, काष्ठदण्डेन प्रहारं कृत्वा पुरुषेण स्वजीवनं रक्षितम्।
करेली गांव निवासी 30 वर्षीय संतोष मेश्राम रोजाना की तरह खेती से जुड़े काम के लिए अपने खेत की ओर जा रहे थे। इसी दौरान मोवाला बीट के जंगल से लगे रास्ते पर पहुंचते ही झाड़ियों में घात लगाए बैठे बाघ ने अचानक उन पर हमला कर दिया।

बालाघाट। कान्हा टाइगर रिजर्व के बफर जोन स्थित खापा परिक्षेत्र में बाघ के हमलों से ग्रामीणों में भय का माहौल है। इसी क्षेत्र में करेली गांव के एक युवक पर बाघ ने अचानक हमला कर दिया। ग्रामीणों को मौके की ओर आते देख बाघ ने युवक को छोड़ दिया। इसके बाद युवक ने साहस दिखाते हुए पास पड़ी लाठी उठाई और बाघ के सिर पर प्रहार कर किसी तरह अपनी जान बचा ली।
बाघ ने युवक के दोनों हाथों को अपने जबड़ों में मजबूती से दबोच लिया।
करेली गांव निवासी 30 वर्षीय संतोष मेश्राम रोजाना की तरह खेती के काम से अपने खेत की ओर जा रहे थे। मोवाला बीट के जंगल से लगे रास्ते पर पहुंचते ही झाड़ियों में घात लगाए बैठे बाघ ने अचानक उन पर हमला कर दिया। बाघ ने संतोष के दोनों हाथों को अपने जबड़ों में कसकर दबोच लिया।
बाघ ने युवक को छोड़ दिया और तेजी से जंगल की ओर चला गया।
जान का खतरा महसूस होते ही संतोष ने खुद को बचाने के लिए पूरी ताकत लगा दी। हाथ में मौजूद लाठी से उन्होंने बाघ के सिर पर लगातार प्रहार किए। उनकी चीख-पुकार सुनकर आसपास के खेतों में काम कर रहे लोग भी मदद के लिए दौड़ पड़े। लोगों को अपनी ओर आता देख बाघ ने संतोष को छोड़ दिया और जंगल की ओर भाग गया।
हमले में संतोष के दोनों हाथों और सिर पर चोटें आईं।
बाघ के हमले में संतोष के दोनों हाथों पर दांतों के गहरे घाव हो गए और काफी रक्तस्राव हुआ। खुद को बचाने की कोशिश के दौरान वह सिर के बल जमीन पर गिर पड़े, जिससे सिर में भी चोट लग गई। किसी तरह घर पहुंचने के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने तत्काल 108 एंबुलेंस की मदद से उन्हें बैहर के सिविल अस्पताल पहुंचाया।
डॉ. कौशल कुमार के अनुसार, संतोष की स्थिति फिलहाल स्थिर है। उनके हाथों और सिर की चोटों पर उपचार कर उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया है। अधिक रक्तस्राव को देखते हुए डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज जारी है। घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम गांव पहुंची और इलाके में गश्त बढ़ा दी। ग्रामीणों को मुनादी के जरिए सतर्क करते हुए खेतों की ओर अकेले न जाने की सलाह दी गई है।
यह इलाका मालखेड़ी गांव से सटा हुआ है।
जानकारी के मुताबिक मालखेड़ी, पर्रापुर समेत खापा परिक्षेत्र के सात गांवों में पिछले 15 दिनों से बाघ की मौजूदगी को लेकर ग्रामीणों में डर बना हुआ है। करेली गांव इन प्रभावित गांवों से करीब 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। वन विभाग के अधिकारी के अनुसार खापा परिक्षेत्र में जंगल से सटे कुल 21 गांव आते हैं। इस क्षेत्र में करीब 28 बाघों की मौजूदगी दर्ज है।
करेली गांव में जंगल से सटे इलाके में एक युवक पर बाघ ने हमला कर दिया। घायल युवक का अस्पताल में उपचार जारी है। घटना के बाद वन विभाग ने क्षेत्र में निगरानी और गश्त बढ़ाते हुए कर्मचारियों को सतर्क कर दिया है। आसपास के गांवों में मुनादी कराकर ग्रामीणों से सुबह और शाम जंगल की दिशा में अकेले न जाने की अपील की गई है। बच्चों और बुजुर्गों को लेकर विशेष सतर्कता बरतने की हिदायत दी गई है।
सुनील कुमार पंद्रे, एसडीओ, कान्हा टाइगर रिजर्व के मलाजखंड अनुभाग।
English
Thirty-year-old Santosh Meshram, a resident of Kareli village, was heading to his field as usual for farm work. When he reached a path adjoining the forest area of the Mowala Beat, a tiger hiding in the bushes suddenly pounced on him.
Balaghat: Fear has gripped villages in the Khapa range of the buffer zone of Kanha Tiger Reserve following repeated tiger attacks. A young man from Kareli village was recently attacked by a tiger. When villagers approached the spot, the tiger loosened its grip and moved away. Showing remarkable courage, the युवक picked up a stick lying nearby and struck the tiger on the head, managing to save his life.
The tiger clamped both of the young man’s hands tightly in its jaws.
Thirty-year-old Santosh Meshram from Kareli village was on his way to his field for routine farming work. As soon as he reached the path adjoining the forest near Mowala Beat, a tiger hiding in the bushes suddenly pounced on him. The tiger clamped both of Santosh’s hands tightly in its jaws.
The tiger released the युवक and quickly fled toward the forest.
Realizing that his life was in danger, Santosh fought back with all his strength. Using the stick he had in his hand, he repeatedly struck the tiger on the head. Hearing his cries for help, people working in nearby fields rushed toward the spot. As they approached, the tiger released Santosh and fled into the forest.
Santosh sustained injuries to both his hands and head in the attack.
Santosh suffered deep bite wounds on both hands during the tiger attack, resulting in significant blood loss. While trying to defend himself, he fell headfirst onto the ground and also sustained an injury to his head. He somehow managed to reach home, after which his family members and villagers immediately took him to the Baihar Civil Hospital with the help of an ambulance service.
Dr. Kaushal Kumar said that Santosh’s condition is currently stable. After treating and dressing the injuries on his hands and head, doctors admitted him to the hospital for further observation. He is being closely monitored due to significant blood loss. Following the incident, a Forest Department team reached the village and increased patrolling in the area. Through public announcements, villagers have been advised not to go alone toward their fields.
The area is located adjacent to Malkhedi village.
According to available information, fear of tiger movement has persisted for the past 15 days in seven villages, including Malkhedi and Parrapur, in the Khapa range. Kareli village is located around 8 kilometres from these villages. A Forest Department official said that the Khapa range includes 21 villages situated close to the forest, where around 28 tigers are present.
A tiger attacked a young man in Kareli village near the forest boundary. The injured युवक is undergoing treatment at a hospital. Following the incident, the Forest Department has increased patrolling and kept its field staff on alert. Public announcements have been made in nearby villages, urging residents not to venture alone toward the forest, particularly during the morning and evening hours. People have also been advised to take extra precautions for children and elderly residents.
Sunil Kumar Pandre, SDO, Malajkhand Section, Kanha Tiger Reserve.
संस्कृत
करेली-ग्रामस्य त्रिंशत्-वर्षीयः सन्तोष-मेश्रामः प्रतिदिनवत् कृषिकार्यार्थं स्वक्षेत्रं प्रति गच्छति स्म। सः मोवाला-वीट् वनप्रदेशस्य समीपस्थं मार्गं प्राप्तवान् तदा झाडिषु निगूढः स्थितः व्याघ्रः सहसा तस्योपरि आक्रमणं कृतवान्
बालाघाटः। कान्हा-व्याघ्र-अभयारण्यस्य संरक्षित-मध्यवर्ती-क्षेत्रे स्थिते खापा-परिक्षेत्रे व्याघ्र-आक्रमणैः जनानां मध्ये भयस्य वातावरणं वर्तते। अस्मिन् क्षेत्रे करेली-ग्रामस्य एकः युवकः व्याघ्रेण सहसा आक्रान्तः। ग्रामवासिनः तत्र आगच्छन्तः दृष्ट्वा व्याघ्रः युवकं मुमोच। ततः युवकः साहसं न त्यक्त्वा समीपे स्थितां काष्ठयष्टिं गृहीत्वा व्याघ्रस्य मस्तके प्रहारं कृत्वा स्वप्राणान् रक्षितवान्।
व्याघ्रेण युवकस्य उभौ हस्तौ स्वदंष्ट्रयोः दृढतया गृहीतौ।
।करेली-ग्रामनिवासी त्रिंशत्-वर्षीयः सन्तोष-मेश्रामः प्रतिदिनवत् कृषिकार्यार्थं स्वक्षेत्रं प्रति गच्छति स्म। मोवाला-वीट् वनस्य समीपस्थं मार्गं प्राप्तमात्रे झाडिषु निगूढः स्थितः व्याघ्रः सहसा तस्योपरि आक्रमणं कृतवान्। व्याघ्रेण सन्तोषस्य उभौ हस्तौ स्वदन्तपङ्क्त्योः दृढतया गृहीतौ।
व्याघ्रः युवकं मुमोच तथा शीघ्रं वनस्य दिशि पलायितवान्।
प्राणसंकटं अनुभूय सन्तोषः आत्मरक्षार्थं सम्पूर्णशक्त्या प्रतिरोधं कृतवान्। हस्ते स्थितया काष्ठयष्ट्या सः व्याघ्रस्य मस्तके पुनः पुनः प्रहारं कृतवान्। तस्य आक्रन्दनं श्रुत्वा समीपस्थेषु क्षेत्रेषु कार्यं कुर्वन्तः जनाः तस्य साहाय्यार्थं शीघ्रं धावितवन्तः। तान् स्वदिशि आगच्छतः दृष्ट्वा व्याघ्रः सन्तोषं मुमोच तथा वनस्य दिशि पलायितवान्।
व्याघ्रस्य आक्रमणे सन्तोषस्य उभयोः हस्तयोः मस्तके च क्षतयः अभवन्।
व्याघ्रस्य आक्रमणे सन्तोषस्य उभयोः हस्तयोः दन्तैः गभीराणि क्षतानि अभवन् तथा च बहु रक्तस्रावः जातः। आत्मरक्षायाः प्रयासे सः मस्तकेन भूमौ पतितः, येन तस्य मस्तकेऽपि क्षतिः अभवत्। कथञ्चित् सः गृहं प्राप्तवान्। ततः स्वजनैः ग्रामवासिभिश्च शीघ्रं १०८-सेवायाः साहाय्येन सः बैहर-नागरिक-चिकित्सालयं नीतः।
डाॅ. कौशल-कुमारस्य कथनानुसारं सन्तोषस्य स्वास्थ्यावस्था अधुना स्थिरा अस्ति। तस्य हस्तयोः मस्तकस्य च क्षतानां उपचारं कृत्वा चिकित्सकैः तं चिकित्सालये प्रवेशितम्। अधिकरक्तस्रावस्य कारणात् सः चिकित्सकानां निरीक्षणे स्थापितः अस्ति। घटनायाः सूचना प्राप्तमात्रे वनविभागस्य दलं ग्रामं प्राप्तम् तथा क्षेत्रे गश्तं वर्धितवान्। घोषणां कृत्वा ग्रामवासिभ्यः क्षेत्रेषु एकाकिभिः न गन्तुं सावधानता प्रदर्शिता अस्ति।
इदं क्षेत्रं मालखेड़ी-ग्रामस्य समीपवर्ति अस्ति।
प्राप्तसूचनानुसारं मालखेड़ी, पर्रापुर इत्यादिषु सप्तसु ग्रामेषु विगतपञ्चदशदिनेषु व्याघ्रस्य संचरणेन ग्रामवासिनां मध्ये भयस्य वातावरणं वर्तते। करेली-ग्रामः एतेभ्यः ग्रामेभ्यः प्रायः अष्ट-किलोमीटर-दूरे स्थितः अस्ति। वनविभागस्य अधिकारी उक्तवान् यत् खापा-परिक्षेत्रे वनस्य समीपवर्तिनः एकविंशतिः ग्रामाः सन्ति। अस्मिन् क्षेत्रे प्रायः अष्टाविंशतिः व्याघ्राः सन्ति।
करेली-ग्रामे वनस्य समीपे एकः युवकः व्याघ्रेण आक्रान्तः। घायलस्य युवकस्य चिकित्सालये उपचारः प्रचलति। घटनायाः अनन्तरं वनविभागेन क्षेत्रे गश्तं वर्धितं तथा वनकर्मचारिणः सतर्काः स्थापिताः। समीपस्थेषु ग्रामेषु घोषणां कृत्वा ग्रामवासिनः प्रातः-सायं च वनदिशि एकाकिनः न गच्छेयुः इति आह्वानं कृतम्। बालकानां वृद्धानां च विषये विशेषसावधानता पालनीया इति निर्देशः दत्तः।
सुनील-कुमार-पन्द्रे, कान्हा-व्याघ्र-अभयारण्यस्य मलाजखण्ड-विभागस्य उपखण्डाधिकारी।


