13 साल पुराने झीरम कांड पर फिर गरमाई सियासत, मोस्ट वॉन्टेड माओवादी आरोपितों के नाम सूची से गायब होने पर कांग्रेस ने उठाए सवाल; नार्को टेस्ट की मांग। Politics Heats Up Over 13-Year-Old Jhiram Valley Case, Congress Questions Absence of Key Maoist Accused from Most-Wanted List and Demands Narco Test. त्रयोदशवर्षप्राचीनस्य झीरमघटनाप्रकरणस्य विषये पुनः विवादः, अतिवाञ्छितमाओवादी-अभियुक्तानां नामानि सूचीतः अनुपस्थितानि इति कांग्रेसदलस्य प्रश्नाः; नार्को-परीक्षणस्य आग्रहः.

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कांग्रेस का आरोप है कि आत्मसमर्पण के बाद भी संबंधित माओवादी आरोपितों से पूछताछ नहीं की गई। पार्टी ने NIA की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए मामले में नार्को टेस्ट कराने की मांग की है।

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले के 13 वर्ष बाद मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर फिर सवाल उठने लगे हैं। हमले की साजिश के प्रमुख आरोपित बताए गए तिमिरी तिरूपति उर्फ देवजी और कमांडर बारसे सुक्का उर्फ देवा का नाम एनआईए की वांछित सूची में शामिल था, लेकिन अदालत में इनके खिलाफ मुकदमा आगे नहीं बढ़ सका। इससे मामले की जांच और ट्रायल की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

11 माओवादियों के खिलाफ चला ट्रायल।

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले के 13 वर्ष बाद मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर फिर सवाल उठने लगे हैं। हमले की साजिश के प्रमुख आरोपित बताए गए तिमिरी तिरूपति उर्फ देवजी और कमांडर बारसे सुक्का उर्फ देवा का नाम एनआईए की वांछित सूची में शामिल था, लेकिन अदालत में इनके खिलाफ मुकदमा आगे नहीं बढ़ सका। इससे मामले की जांच और ट्रायल की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

आत्मसमर्पण के बाद भी नहीं हुई पूछताछ, जांच प्रक्रिया पर उठे सवाल।

झीरम मामले से जुड़ा एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि देवजी और देवा सहित कुछ ऐसे माओवादी, जिनके नाम जांच के दौरान सामने आते रहे थे, बाद में आत्मसमर्पण कर चुके हैं। इसके बावजूद झीरम कांड की जांच में उनसे पूछताछ नहीं की गई। विशेषज्ञों के अनुसार, इन लोगों से पूछताछ होती तो हमले की साजिश, घटनाक्रम और उससे जुड़े अन्य पहलुओं के संबंध में अहम जानकारियां सामने आ सकती थीं। इससे जांच को नई दिशा मिलने की संभावना भी थी।

झीरम कांड की NIA जांच पर कांग्रेस ने उठाए सवाल, प्रक्रिया पर मांगा जवाब।

कांग्रेस ने झीरम घाटी मामले की एनआईए जांच में इसे गंभीर कमी बताते हुए सवाल खड़े किए हैं। पार्टी ने संकेत दिया है कि मामले को लेकर वह उच्च न्यायालय का रुख कर सकती है। कांग्रेस के मुताबिक, झीरम घाटी हमले की पूरी सच्चाई सामने लाने के लिए जांच एजेंसियों को हर संभावित पहलू की गहनता से पड़ताल करनी चाहिए।

झीरम कांड में नार्को टेस्ट की मांग, कांग्रेस का सुप्रीम कोर्ट जाने का ऐलान।

झीरम कांड: कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री, गृह मंत्री और अधिकारियों समेत समर्पित माओवादियों के नार्को टेस्ट की मांग उठाईरायपुर। एनआईए की विशेष अदालत के फैसले के बाद झीरम घाटी हमले को लेकर कांग्रेस ने जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े करते हुए नार्को टेस्ट की मांग तेज कर दी है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह, गृह मंत्री ननकी राम कंवर, मुख्य सचिव, डीजीपी, एडीसी और आत्मसमर्पण कर चुके माओवादियों का नार्को टेस्ट कराने की मांग की है।दीपक बैज का कहना है कि झीरम घाटी की घटना को केवल माओवादी हमला मानकर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसके पीछे राजनीतिक साजिश और हत्या के पहलू की भी जांच होनी चाहिए। कांग्रेस का दावा है कि संबंधित तत्कालीन पदाधिकारियों और अन्य लोगों के नार्को टेस्ट से घटना से जुड़े अनसुलझे सवालों के जवाब सामने आ सकते हैं। पार्टी ने इस मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख करने की तैयारी भी शुरू कर दी है।वहीं, विशेषज्ञों के अनुसार आत्मसमर्पण कर चुके माओवादियों पर किसी तरह की कानूनी कार्रवाई संभव न होने की स्थिति में भी जांच एजेंसी कानून के दायरे में उनसे पूछताछ कर सकती थी। ऐसी पूछताछ से हमले की साजिश और उससे जुड़े लोगों की पूरी कड़ी को समझने में जांचकर्ताओं को अहम जानकारी मिल सकती थी।

(English)

“The Congress alleges that the Maoist accused involved were not interrogated even after their surrender. Questioning the NIA’s investigation process, the party has demanded a narco test in the matter.”

Raipur. Thirteen years after the much-discussed Jhiram Valley Maoist attack in Chhattisgarh, questions have resurfaced over the investigation and the subsequent court trial. Timiri Tirupati alias Devji, identified as a key accused in the conspiracy, and commander Barse Sukka alias Deva were listed as wanted by the NIA, yet no trial proceeded against them in court. The development has once again raised serious questions over the investigation and judicial proceedings in the case.

A total of 11 Maoist accused faced trial in the Jhiram case, while one of them has since died. Recently, the NIA Special Court in Jagdalpur convicted 10 accused in the case. However, prominent Maoist leaders such as Devji and Deva, whose roles have long been considered significant in the attack, were not part of the court proceedings. This has once again raised questions over the judicial process in the case.

No Interrogation Even After Surrender, Questions Raised Over Investigation.

One of the key aspects of the Jhiram case is that some wanted Maoists, including Devji and Deva, whose names had repeatedly emerged during the investigation, later surrendered. Despite this, they were not questioned in connection with the Jhiram case. Experts believe that interrogating such individuals could have provided crucial information about the conspiracy, sequence of events and other aspects of the attack, potentially giving the investigation a new direction.

Congress Raises Questions Over NIA Probe Into Jhiram Case, Seeks Answers on Investigation.

Congress has termed the issue a major shortcoming in the NIA investigation into the Jhiram Valley case. The party has also indicated that it may approach the High Court over the matter. According to Congress, a thorough examination of every possible angle is essential to uncover the complete truth behind the Jhiram Valley attack.

Congress to Approach Supreme Court Seeking Narco Test in Jhiram Case.

Raipur. Following the verdict of the NIA Special Court, the Congress has intensified its questions over the investigation into the Jhiram Valley attack and demanded narco tests of several individuals. State Congress president Deepak Baij has sought narco tests of then Chief Minister Dr Raman Singh, Home Minister Nanki Ram Kanwar, the then Chief Secretary, DGP, ADC and Maoists who later surrendered.Baij has described the Jhiram Valley incident as more than just a Maoist attack, alleging that the possibility of a political conspiracy and targeted killings should also be examined. The Congress leader said that narco tests of the concerned former office-holders and others could help bring answers to several unresolved questions surrounding the incident. The party has also begun preparations to approach the Supreme Court over its demand for narco tests.

Experts, meanwhile, point out that even if legal action against surrendered Maoists was not possible, investigators could have questioned them within the framework of law. Such questioning, they say, could have helped investigators piece together the broader chain of events and understand the conspiracy behind the attack.

(संस्कृत)

“कांग्रेसपक्षस्य आरोपः अस्ति यत् आत्मसमर्पणोत्तरमपि सम्बद्धैः माओवादि-आरोपितैः सह पृच्छा न कृता। एन.आई.ए. (NIA) संस्थायाः अन्वेषणप्रक्रियायां प्रश्नं उत्थाप्य दलेन अस्मिन् प्रकरणे नार्को-परीक्षणस्य (Narco Test) मागः कृता।”

रायपुरम्। छत्तीसगढस्य बहुचर्चितस्य झीरमघाटी-नक्सल-आक्रमणस्य त्रयोदशवर्षानन्तरं प्रकरणस्य अन्वेषणं न्यायालयीय-विचारणं च पुनः प्रश्नाधीनं जातम्। आक्रमणस्य षड्यन्त्रस्य प्रमुखः अभियुक्तः इति कथितः तिमिरी तिरूपतिः उर्फ देवजी तथा प्रमुखः सेनानायकः बारसे सुक्का उर्फ देवा च एनआईए-संस्थायाः वाञ्छित-अभियुक्तानां सूच्यां समाविष्टौ आस्ताम्। तथापि न्यायालये तयोः विरुद्धं अभियोगस्य विचारणं न प्रवृत्तम्। एतेन प्रकरणस्य अन्वेषण-प्रक्रियायां न्यायिक-विचारणायां च पुनः गम्भीराः प्रश्नाः उत्पन्नाः।

झीरमप्रकरणे समग्रतः एकादश माओवादी-अभियुक्तानां विरुद्धं न्यायालये विचारणं प्रवृत्तम्। तेषु एकस्य अभियुक्तस्य पूर्वमेव निधनं जातम्। अधुना जगदलपुरस्थितेन एनआईए-विशेष-न्यायालयेन दश अभियुक्ताः दोषिणः इति निर्णीताः। किन्तु आक्रमणे महत्त्वपूर्णां भूमिकां निर्वहितवन्तः इति मन्यमानानां प्रमुखमाओवादी-नेतॄणां देवजी-देवयोः विरुद्धं न्यायालये अभियोगस्य विचारणं न प्रवृत्तम्। अतः प्रकरणस्य न्यायिक-प्रक्रियायाः विषये पुनः प्रश्नाः उद्भूताः।

आत्मसमर्पणानन्तरमपि न अभवत् पृच्छा, अन्वेषण-प्रक्रियायां प्रश्नाः उद्भूताः।

झीरम-प्रकरणस्य एकः महत्त्वपूर्णः पक्षः अस्ति यत् देवजी-देवयोः सहिताः केचन वाञ्छित-माओवादी, येषां नामानि अन्वेषणकाले पुनः पुनः प्रकाशं गतानि, पश्चात् आत्मसमर्पणं कृतवन्तः। तथापि झीरम-प्रकरणस्य अन्वेषणसमये तेषां पृच्छा न कृता। विशेषज्ञाणां मतानुसारं तेषां पृच्छया आक्रमणस्य षड्यन्त्रस्य, घटनाक्रमस्य तथा अन्येषां सम्बद्ध-पक्षाणां विषये महत्त्वपूर्णाः सूचनाः प्राप्तुं शक्यन्ते स्म। अनेन अन्वेषणाय नूतना दिशा अपि प्राप्तुं शक्नोति स्म।

झीरम-प्रकरणस्य एनआईए-अन्वेषणे कांग्रेस-पक्षेण प्रश्नाः उत्थापिताः, अन्वेषण-प्रक्रियायाः विषये उत्तरं याचितम्।

कांग्रेस-पक्षेण झीरम-घाटी-प्रकरणस्य एनआईए-अन्वेषणे एषा गम्भीरा न्यूनता इति कथयित्वा प्रश्नाः उत्थापिताः। अस्मिन् विषये पक्षः उच्चन्यायालयस्य शरणं गन्तुं शक्नोतीति संकेतितवान्। कांग्रेस-पक्षस्य मतानुसारं झीरम-घाटी-आक्रमणस्य पूर्णं सत्यं प्रकाशयितुं अन्वेषणस्य सर्वेषां सम्भावितानां पक्षाणां गहनतया परीक्षणम् आवश्यकम् अस्ति।

झीरम-प्रकरणे नार्को-परीक्षणस्य आग्रहः, कांग्रेस-पक्षः सर्वोच्चन्यायालयं प्रति गमिष्यति।

रायपुरम्। एनआईए-विशेष-न्यायालयस्य निर्णयस्य अनन्तरं कांग्रेस-पक्षेण झीरम-घाटी-आक्रमणस्य अन्वेषण-प्रक्रियायां प्रश्नाः उत्थापिताः तथा च कतिपयेषां व्यक्तीनां नार्को-परीक्षणस्य मागः कृतः। प्रदेश-कांग्रेस-अध्यक्षः दीपक-बैजः तत्कालीनस्य मुख्यमन्त्रिणः डॉ. रमण-सिंहस्य, गृहमन्त्रिणः ननकी-राम-कंवरस्य, मुख्यसचिवस्य, डीजीपी-अधिकरिणः, एडीसी-अधिकरिणः तथा आत्मसमर्पित-माओवादीजनानां नार्को-परीक्षणं कर्तुं मागं कृतवान्।दीपक-बैजस्य कथनानुसारं झीरम-घाट्यां घटितं प्रकरणं केवलं माओवादी-आक्रमणरूपेण न द्रष्टव्यम्, अपितु तत्र राजनैतिक-षड्यन्त्रस्य हत्यायाः च पक्षस्य अपि सम्यक् अन्वेषणम् आवश्यकम् अस्ति। तस्य मतानुसारं सम्बन्धितानां तत्कालीन-पदाधिकारिणां अन्येषां च नार्को-परीक्षणेन घटनायाः सम्बद्धाः अनेकाः अनुत्तरिताः प्रश्नाः प्रकाशं प्राप्तुं शक्नुवन्ति। कांग्रेस-पक्षः अस्य आग्रहस्य विषये सर्वोच्च-न्यायालयस्य शरणं गन्तुं अपि सज्जतां आरब्धवान्।विशेषज्ञाणां मतानुसारं आत्मसमर्पणं कृतवद्भिः माओवादीजनैः विरुद्धं यदि कानूनी-कार्रवाई सम्भवा नासीत्, तथापि अन्वेषण-संस्था विधेः सीमायां तैः सह पृच्छां कर्तुं शक्नोति स्म। तादृशया पृच्छया आक्रमणस्य पृष्ठे स्थितस्य षड्यन्त्रस्य घटनाक्रमस्य च विस्तृतां कडीं ज्ञातुं अन्वेषणाय महत्त्वपूर्णा सूचना प्राप्तुं शक्या आसीत्।

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