सावन का पहला सोमवार आज: ग्वालियर के अचलेश्वर महादेव मंदिर में उमड़ेगा भक्तों का जनसैलाब, 25 हजार श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं। First Monday of Sawan Today: A Huge Crowd of Devotees Expected at Gwalior’s Achleshwar Mahadev Temple; Special Arrangements for 25,000 Worshippers। अद्य श्रावणमासस्य प्रथमः सोमवासरः: ग्वालियरस्थिते अचलेश्वरमहादेवमन्दिरे भक्तानां विशालः जनसागरः समुपस्थितः भविष्यति, पञ्चविंशतिसहस्रं श्रद्धालूनां कृते विशेषव्यवस्थाः कृताः।
इस बार अभिषेक के लिए किसी भी तरह की स्लॉट बुकिंग की व्यवस्था नहीं की गई है। श्रद्धालु निर्धारित नियमों और व्यवस्थाओं के तहत भगवान अचलेश्वर महादेव के दर्शन कर जलाभिषेक कर सकेंगे।

सावन के पहले सोमवार को लेकर अचलेश्वर महादेव मंदिर को भव्य और आकर्षक रूप से सजाया गया है। भगवान अचलनाथ के विशेष श्रृंगार और दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में उत्साह देखने को मिल रहा है।
भगवान शिव की उपासना के लिए अत्यंत पावन माने जाने वाले सावन माह का पहला सोमवार आज श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के माहौल में मनाया जाएगा। शहर के प्राचीन अचलेश्वर महादेव मंदिर में ब्रह्ममुहूर्त से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने और भक्तों का जनसैलाब उमड़ने की संभावना है।
मंदिर प्रबंधन का अनुमान है कि सावन के पहले सोमवार पर 25 हजार से अधिक श्रद्धालु भगवान अचलेश्वर महादेव के दर्शन के लिए पहुंच सकते हैं। संभावित भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर न्यास और जिला प्रशासन ने सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन तथा भक्तों की सुविधाओं के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं।
श्रद्धालुओं की सुगम आवाजाही और भीड़ नियंत्रण के लिए मंदिर के प्रमुख प्रवेश द्वार पर बैरिकेडिंग की गई है।
श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए मंदिर के तीन प्रमुख प्रवेश द्वार—नंदी द्वार, त्रिशूल द्वार और एमएलबी कॉलेज गेट—पर बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई है। दर्शन के दौरान भीड़ को नियंत्रित रखने और किसी भी तरह की धक्का-मुक्की से बचने के लिए प्रवेश व निकास के अलग-अलग मार्ग तय किए गए हैं।मंदिर परिसर में पुलिस बल के साथ 60 प्रशिक्षित सेवादार भी तैनात रहेंगे। ये सेवादार श्रद्धालुओं को व्यवस्थित कतार में दर्शन कराने, उन्हें आवश्यक जानकारी देने और आपात स्थिति में तुरंत सहायता उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी संभालेंगे।मंदिर प्रबंधन के अनुसार, गर्भगृह समेत पूरे मंदिर परिसर की विशेष साफ-सफाई कराई गई है। श्रद्धालुओं की सुविधा और परिसर की स्वच्छता बनाए रखने के लिए दिनभर सफाई व्यवस्था लगातार जारी रहेगी।
इस वर्ष जलाभिषेक के लिए किसी भी प्रकार की स्लॉट बुकिंग की व्यवस्था नहीं की गई है। श्रद्धालु मंदिर प्रबंधन द्वारा तय की गई व्यवस्थाओं के अनुसार भगवान अचलेश्वर महादेव के दर्शन कर जलाभिषेक कर सकेंगे। वहीं, शहर के गुप्तेश्वर महादेव, कोटेश्वर महादेव और अन्य प्रमुख शिव मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की संभावित भारी भीड़ को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल और स्वयंसेवकों की तैनाती की गई है। पार्किंग, यातायात व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष नजर रखी जाएगी।
भगवान शिव की पूजा इस विधि से करें।
प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और श्रद्धापूर्वक भगवान शिव की पूजा का संकल्प लें। सबसे पहले शिवलिंग पर गंगाजल अथवा शुद्ध जल अर्पित करें। इसके बाद दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से पंचामृत अभिषेक करें। पूजा में बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफेद चंदन, आक के फूल और मौसमी फल अर्पित करें।
भगवान शिव की पूजा के दौरान इन महत्वपूर्ण बातों का रखें विशेष ध्यान
- श्रद्धालु व्यवस्थित कतार में रहकर ही भगवान के दर्शन करें।
- श्रद्धालु प्रशासन की ओर से तय किए गए मार्गों का पालन करें और निर्देशों के अनुसार ही आगे बढ़ें।
- भीड़ के दौरान बुजुर्गों और बच्चों की सुरक्षा व सुविधा का विशेष ध्यान रखें।
- मंदिर परिसर की स्वच्छता बनाए रखें और प्लास्टिक या कचरा इधर-उधर न फैलाएं।
- दर्शन के दौरान धक्का-मुक्की न करें और किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न दें।
- सुरक्षा कर्मियों और सेवादारों के निर्देशों का पालन करें।
सावन के सोमवार का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन माह का प्रत्येक सोमवार भगवान शिव की विशेष कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करने का अत्यंत शुभ अवसर माना जाता है।
- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन के सोमवार को व्रत रखने, शिवलिंग पर जल चढ़ाने और रुद्राभिषेक करने से मन को शांति मिलती है। साथ ही रोगों से राहत, वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि, संतान प्राप्ति और आर्थिक उन्नति का आशीर्वाद मिलने की मान्यता है।
- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अविवाहित युवक-युवतियां मनचाहे और योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति की कामना से सावन के सोमवार का व्रत रखते हैं। वहीं, विवाहित महिलाएं परिवार की सुख-शांति और समृद्धि के साथ अपने पति की लंबी आयु की कामना करते हुए भगवान शिव और माता पार्वती की श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना करती हैं।
English
This time, no slot booking system has been introduced for the ritual offering. Devotees will be able to have darshan of Lord Achleshwar Mahadev and perform Jalabhishek according to the prescribed arrangements.
The first Monday of the holy month of Sawan, considered highly auspicious for the worship of Lord Shiva, will be observed today with great devotion and enthusiasm. A massive influx of devotees is expected at the city’s ancient Achleshwar Mahadev Temple from the early hours of Brahma Muhurta.
According to the temple management, more than 25,000 devotees are expected to visit Achleshwar Mahadev Temple on the first Monday of Sawan. In view of the anticipated large gathering, the temple trust and district administration have made extensive arrangements for security, crowd management, and the convenience of devotees.
Barricades have been installed at the main entrance to ensure smooth movement of devotees and effective crowd management.
In view of the expected large gathering of devotees, barricades have been placed at the temple’s three main entry points—Nandi Gate, Trishul Gate, and the MLB College Gate. Separate entry and exit routes have been arranged to manage the crowd efficiently and prevent pushing, congestion, or any disorder during darshan.Along with the police force, 60 trained volunteers will remain deployed at the temple. They will help devotees maintain orderly queues, provide necessary guidance, and offer immediate assistance in case of an emergency.According to the temple management, special cleaning has been carried out in the sanctum sanctorum and throughout the temple premises. Cleaning services will continue throughout the day to ensure cleanliness and convenience for devotees.
This year, no slot booking system has been introduced for Jalabhishek. Devotees will be able to have darshan of Lord Achleshwar Mahadev and perform the sacred water offering as per the arrangements made by the temple administration. Meanwhile, additional police personnel and volunteers have been deployed at Gupteshwar Mahadev, Koteshwar Mahadev, and other major Shiva temples across the city in view of the expected heavy turnout. Special monitoring will be maintained over parking, traffic management, and security arrangements.
Follow This Method to Worship Lord Shiva
Begin the worship by taking a morning bath, wearing clean clothes, and offering prayers to Lord Shiva with devotion. First, pour Gangajal or clean water over the Shivling. Then perform the Panchamrit Abhishek using milk, curd, honey, ghee, and sugar. Offer bel leaves, dhatura, bhang, white sandalwood, aak flowers, and seasonal fruits during the ritual.
Chant the sacred mantra “Om Namah Shivaya” while performing the worship. Reciting the Mahamrityunjaya Mantra, Shiv Chalisa, or Rudrashtakam is also considered highly auspicious and spiritually beneficial. Conclude the पूजा with the aarti of Lord Shiva and pray for the happiness, peace, and well-being of the family, society, and the nation.
Keep These Important Things in Mind While Worshipping Lord Shiva
- Devotees are requested to have darshan only while standing in an orderly queue.
- Devotees should follow the routes designated by the administration and proceed according to the issued instructions.
- Take special care of the safety and comfort of elderly people and children, especially in crowded areas.
- Help keep the temple premises clean and avoid throwing plastic or waste around.
- Avoid pushing or jostling during darshan, and do not pay attention to or spread any rumours.
- Devotees should follow the instructions issued by security personnel and volunteers and cooperate in maintaining order.
Religious and Spiritual Significance of Sawan Mondays
- According to religious beliefs, every Monday of the holy month of Sawan is considered highly auspicious for receiving the special grace and blessings of Lord Shiva.
- According to religious beliefs, observing a fast, offering water to the Shivling, and performing Rudrabhishek on a Monday during Sawan are believed to bring mental peace. These rituals are also associated with blessings of relief from ailments, happiness in married life, the blessing of children, and financial prosperity.
- According to religious beliefs, unmarried young men and women observe the Monday fast during Sawan while praying for a suitable and desired life partner. Married women, meanwhile, worship Lord Shiva and Goddess Parvati with devotion for their family’s happiness, peace, prosperity, and their husbands’ long lives.
- It is because of this deep faith and religious devotion that the first Monday of Sawan is regarded as a special and significant occasion of belief and worship for devotees.
संस्कृत:
अस्मिन् वर्षे अभिषेकाय कस्यापि समयनिर्धारणस्य अथवा स्लॉट-आरक्षणस्य व्यवस्था न कृता अस्ति। श्रद्धालवः निर्धारितव्यवस्थानुसारं भगवान् अचलेश्वरमहादेवस्य दर्शनं कृत्वा जलाभिषेकं कर्तुं शक्नुवन्ति।
भगवतः शिवस्य आराधनाय अत्यन्तं पवित्रः मन्यमानः श्रावणमासस्य प्रथमः सोमवासरः अद्य श्रद्धया भक्त्या उत्साहेन च आचरिष्यते। नगरस्य प्राचीन-अचलेश्वरमहादेवमन्दिरे ब्रह्ममुहूर्तात् एव बहुसंख्यकाः श्रद्धालवः समागमिष्यन्ति तथा भक्तानां विशालः जनसमूहः दृश्यते इति सम्भावना अस्ति।।
मन्दिरप्रबन्धनस्य अनुमानानुसारं श्रावणमासस्य प्रथमसोमवासरे पञ्चविंशतिसहस्राधिकाः श्रद्धालवः भगवानः अचलेश्वरमहादेवस्य दर्शनार्थं आगमिष्यन्ति। सम्भावितां विशालजनसमूहस्य भीडं दृष्ट्वा मन्दिरन्यासेन जिलाप्रशासनेन च सुरक्षा-जनसमूहनियन्त्रण-श्रद्धालुसुविधानां कृते व्यापकाः व्यवस्थाः कृताः सन्ति।
श्रद्धालूनां सुगमागमनाय जनसमूहनियन्त्रणाय च मन्दिरस्य प्रमुखप्रवेशद्वारे अवरोधकव्यवस्था कृता अस्ति।
श्रद्धालूनां अधिकसंख्यां दृष्ट्वा मन्दिरस्य त्रिषु प्रमुखप्रवेशद्वारेषु—नन्दीद्वारे, त्रिशूलद्वारे तथा एमएलबी-महाविद्यालयद्वारे—अवरोधकव्यवस्था कृता अस्ति। दर्शनसमये जनसमूहस्य सुचारुरूपेण नियन्त्रणाय धक्कामुक्क्याः अव्यवस्थायाश्च निवारणाय पृथक् प्रवेशमार्गाः निर्गमनमार्गाश्च निर्धारिताः सन्ति।मन्दिरपरिसरे पुलिसबलस्य सह षष्टिः प्रशिक्षिताः सेवकाः अपि नियुक्ताः भविष्यन्ति। ते श्रद्धालून् क्रमबद्धपङ्क्तौ दर्शनं कारयिष्यन्ति, आवश्यकं मार्गदर्शनं प्रदास्यन्ति तथा आपत्कालीनस्थितौ त्वरितां सहायतां प्रदास्यन्ति।मन्दिरप्रबन्धनस्य अनुसारं गर्भगृहसहितस्य सम्पूर्णमन्दिरपरिसरस्य विशेषस्वच्छता कृता अस्ति। श्रद्धालूनां सुविधायै परिसरस्य स्वच्छतायै च दिवसभरं स्वच्छताव्यवस्था निरन्तरं प्रवर्तिष्यते।
अस्मिन् वर्षे जलाभिषेकाय कस्यापि समयनिर्धारणस्य अथवा स्लॉट-आरक्षणस्य व्यवस्था न कृता अस्ति। श्रद्धालवः मन्दिरप्रबन्धनेन निर्धारितव्यवस्थानुसारं भगवानः अचलेश्वरमहादेवस्य दर्शनं कृत्वा जलाभिषेकं कर्तुं शक्नुवन्ति। अपरत्र नगरस्य गुप्तेश्वरमहादेव-कोटेश्वरमहादेवसहितेषु अन्येषु प्रमुखशिवालयेषु अपि श्रद्धालूनां सम्भावितां विशालभीडं दृष्ट्वा अतिरिक्तपुलिसबलस्य स्वयंसेवकानां च नियुक्तिः कृता अस्ति। वाहनस्थान-यातायात-सुरक्षाव्यवस्थासु विशेषनिगरानी स्थापयिष्यते।
एवं विधिना भगवान् शिवस्य पूजां कुरुत
प्रातःकाले स्नानं कृत्वा स्वच्छवस्त्राणि धारयेत् तथा श्रद्धया भगवानः शिवस्य पूजनसंकल्पं कुर्यात्। सर्वप्रथमं शिवलिङ्गे गङ्गाजलं अथवा शुद्धजलं समर्पयेत्। ततः दुग्ध-दधि-मधु-घृत-शर्कराभिः पञ्चामृताभिषेकं कुर्यात्। पूजायां बिल्वपत्राणि, धत्तूरपुष्पाणि, भाङ्गं, श्वेतचन्दनं, अर्कपुष्पाणि तथा ऋतुफलानि समर्पयेत्।
पूजासमये ‘ॐ नमः शिवाय’ इति मन्त्रस्य जपं कुर्यात्। महामृत्युञ्जयमन्त्रस्य जपः, शिवचालीसायाः अथवा रुद्राष्टकस्य पाठश्च अत्यन्तं शुभः फलदायकश्च मन्यते। अन्ते भगवानः शिवस्य आरार्तिकां कृत्वा परिवारस्य, समाजस्य राष्ट्रस्य च सुख-शान्ति-कल्याणार्थं प्रार्थनां कुर्यात्।
भगवतः शिवस्य पूजाकाले एतेषु महत्त्वपूर्णेषु विषयेषु विशेषं ध्यानं कुरुत
- श्रद्धालवः सुव्यवस्थितपङ्क्तौ स्थित्वा एव भगवतः दर्शनं कुर्वन्तु।
- श्रद्धालवः प्रशासनद्वारा निर्धारितान् मार्गान् अनुसरन्तु तथा प्रदत्तनिर्देशानुसारम् एव अग्रे गच्छन्तु।
- जनसमूहे विशेषतः वृद्धानां बालकानां च सुरक्षा-सुविधयोः विशेषं ध्यानं कुर्वन्तु।
- मन्दिरपरिसरस्य स्वच्छतां पालयन्तु तथा प्लास्टिकद्रव्यं अपशिष्टं वा इतस्ततः मा क्षिपन्तु।
- दर्शनसमये धक्कामुक्कीं मा कुर्वन्तु तथा कस्यापि अफवायाः विश्वासं मा कुर्वन्तु।
- श्रद्धालवः सुरक्षाकर्मिभिः सेवकैश्च प्रदत्तान् निर्देशान् पालयन्तु तथा व्यवस्थायाः संरक्षणे सहयोगं कुर्वन्तु।
श्रावणमासस्य सोमवासरस्य धार्मिकम् आध्यात्मिकं च महत्त्वम्
- श्रावणमासस्य सोमवासरस्य धार्मिकम् आध्यात्मिकं च महत्त्वम्
- धार्मिकमान्यतानुसारं श्रावणमासस्य प्रत्येकः सोमवासरः भगवतः शिवस्य विशेषकृपाम् आशीर्वादं च प्राप्तुं अत्यन्तं शुभः अवसरः मन्यते।
- धार्मिकमान्यतानुसारं श्रावणमासस्य सोमवासरे व्रतपालनं, शिवलिङ्गे जलार्पणं तथा रुद्राभिषेकं च कृत्वा मनसः शान्तिः प्राप्यते। एतेन रोगेभ्यः राहतिः, वैवाहिकजीवने सुखसमृद्धिः, सन्तानप्राप्तेः आशीर्वादः तथा आर्थिकसमृद्धिः च लभ्यते इति श्रद्धा अस्ति।
- धार्मिकमान्यतानुसारं अविवाहिताः युवकाः युवत्यश्च मनोऽनुकूलस्य योग्यस्य च जीवनसहचरस्य प्राप्तिकामनया श्रावणमासस्य सोमवासरव्रतं पालयन्ति। विवाहिताः महिलाः तु परिवारस्य सुख-शान्ति-समृद्ध्यर्थं पत्युः दीर्घायुषः कामनया च भगवान्तं शिवं माता पार्वतीं च श्रद्धया पूजयन्ति।
- एतस्याः गाढायाः श्रद्धायाः धार्मिकविश्वासस्य च कारणात् श्रावणमासस्य प्रथमः सोमवासरः भक्तानां कृते आस्थायाः भक्तेः च विशेषः महत्त्वपूर्णः उत्सवः मन्यते।


