इतनी खतरनाक तीखी मिर्च कि भारतीय सेना ने उससे बनाया ग्रेनेड! जानिए दुनिया की टॉप 5 सबसे तीखी मिर्चों के बारे में।So Spicy That the Indian Army Turned It into a Grenade! Discover the World’s Top 5 Hottest Chillies। एतादृशी तीक्ष्णा मरीचिका यया भारतीयसेनया ग्रेनेडः निर्मितः! ज्ञायन्तां विश्वस्य पञ्च अत्यन्ततीक्ष्णाः मरीचिकाः

0

भारत की 5 सबसे तीखी मिर्चों से रूबरू हों, इनमें से एक की आग जैसी तीक्ष्णता ने भारतीय सेना को भी चिली ग्रेनेड बनाने के लिए प्रेरित किया।

भारत की पहचान दुनियाभर में अपने खुशबूदार और स्वादिष्ट मसालों से है, जिनमें मिर्च का विशेष स्थान है। देश के अलग-अलग राज्यों में मिर्च की अनेक अनोखी किस्में उगाई जाती हैं। इनका रंग, स्वाद और तीखापन एक-दूसरे से काफी अलग होता है। कुछ मिर्चें व्यंजनों का स्वाद और खुशबू बढ़ाती हैं, जबकि कुछ इतनी जबरदस्त तीखी होती हैं कि उनका नाम सुनते ही लोगों के पसीने छूट जाते हैं।

क्या आप जानते हैं कि भारत में उगाई जाने वाली एक मिर्च का तीखापन इतना जबरदस्त है कि भारतीय सेना ने उसका उपयोग भीड़ नियंत्रण के लिए चिली ग्रेनेड विकसित करने में किया था? आइए जानते हैं भारत की 5 सबसे तीखी मिर्चों के बारे में, जो अपने अनोखे स्वाद, तेज़ तीखेपन और खास खूबियों के कारण दुनियाभर में पहचान रखती हैं।

भूत जोलोकिया

भूत जोलोकिया भारत की सबसे प्रसिद्ध और आग जैसी तीखी मिर्चों में गिनी जाती है। इसकी खेती मुख्य रूप से असम, नागालैंड, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश के क्षेत्रों में की जाती है। वर्ष 2007 में इस मिर्च ने दुनिया की सबसे तीखी मिर्च का खिताब हासिल कर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया था। इसका तीखापन इतना प्रचंड है कि इसका एक छोटा-सा टुकड़ा भी किसी व्यंजन के स्वाद और तीखेपन को पूरी तरह बदल सकता है। भूत जोलोकिया का उपयोग अचार, बेहद मसालेदार व्यंजनों और पेपर स्प्रे जैसे उत्पादों में किया जाता है। इतना ही नहीं, इसकी तीव्रता को देखते हुए भारतीय सेना ने इससे बने चिली ग्रेनेड का इस्तेमाल भीड़ नियंत्रण के लिए भी किया था।

कांथारी मिर्च

केरल और गोवा में पाई जाने वाली कांथारी मिर्च आकार में भले ही छोटी होती है, लेकिन इसका तीखापन काफी तेज़ होता है। अपनी खास स्वाद और तीखी खुशबू के कारण इसका उपयोग घरेलू रसोई में सब्जियों, चटनी और अचार को स्वादिष्ट बनाने के लिए बड़े पैमाने पर किया जाता है।

. सिरारखोंग हाथेई मिर्च

मणिपुर में उगाई जाने वाली यह खास मिर्च अपने अनोखे स्वाद और तेज़ तीखेपन के कारण अन्य किस्मों से अलग पहचान रखती है। इसकी विशिष्ट गुणवत्ता और क्षेत्रीय पहचान को देखते हुए इसे भौगोलिक संकेतक यानी जीआई

गुंटुर सन्नम मिर्च

आंध्र प्रदेश की प्रसिद्ध गुंटूर सन्नम मिर्च अपने गहरे लाल रंग और तेज़, चटपटे स्वाद के लिए खास पहचान रखती है। इसका उपयोग मसाले तैयार करने, अचार बनाने और कई तरह के स्वादिष्ट व्यंजनों में किया जाता है। अपनी बेहतरीन गुणवत्ता और खास स्वाद के कारण इसकी मांग भारत के साथ-साथ विदेशों में भी काफी अधिक है।

. ब्यादगी मिर्च

कर्नाटक की प्रसिद्ध ब्यादगी मिर्च तीखेपन के मामले में भले ही बहुत तेज़ नहीं होती, लेकिन इसका चमकदार लाल रंग और मनमोहक खुशबू इसे दूसरी मिर्चों से अलग बनाती है। इसी खासियत के कारण इसका उपयोग मसाले तैयार करने और लाल मिर्च पाउडर बनाने में बड़े पैमाने पर किया जाता है।

मिर्च का तीखापन कैसे पता चलता है?

मिर्च की तीक्ष्णता को स्कोविल हीट यूनिट (Scoville Heat Unit—SHU) के पैमाने पर मापा जाता है। इस पैमाने पर अंक जितना अधिक होता है, मिर्च उतनी ही ज्यादा तीखी मानी जाती है। आम भारतीय मिर्चों का तीखापन सामान्यतः करीब 5,000 से 50,000 SHU के बीच होता है, जबकि भूत जोलोकिया की तीक्ष्णता 10 लाख SHU से भी अधिक बताई जाती है। यही असाधारण तीखापन इसे दुनिया की सबसे तेज़ और तीखी मिर्चों की सूची में खास स्थान दिलाता है।

दिलचस्प!

भारत की ये खास मिर्चें केवल अपने जबरदस्त तीखेपन के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी अलग पहचान और अनोखी खूबियों के कारण भी दुनियाभर में प्रसिद्ध हैं। इनमें भूत जोलोकिया का नाम विशेष रूप से जाना जाता है, जिसने अपनी प्रचंड तीक्ष्णता से वैश्विक पहचान बनाई है। अगर आपको मसालेदार और तीखा भोजन पसंद है, तो भारत की इन अनोखी मिर्चों के बारे में जानना आपके लिए बेहद रोचक अनुभव हो सकता है।

English

India is renowned across the world for its rich variety of aromatic and flavorful spices, with chilli holding a special place among them. Many unique varieties of chillies are cultivated in different states of the country, each differing in colour, taste, and level of heat. While some chillies simply enhance the flavour and aroma of food, others are so intensely hot that their very names can make people break into a sweat.

Did you know that one chilli grown in India is so intensely hot that the Indian Army used it to develop chilli grenades for crowd-control purposes? Let’s explore India’s five hottest chillies, which are renowned worldwide for their distinctive flavours, extreme heat, and unique qualities.

Bhut Jolokia

Bhut Jolokia is considered one of India’s most famous and fiery chillies. It is mainly cultivated in Assam, Nagaland, Manipur, and Arunachal Pradesh. In 2007, it earned a place in the Guinness World Records after being recognized as the world’s hottest chilli. Its heat is so intense that even a tiny piece can dramatically change the flavour and spiciness of an entire dish. Bhut Jolokia is used in pickles, extremely spicy foods, and products such as pepper spray. Its powerful heat also led the Indian Army to use it in chilli grenades designed for crowd-control purposes.

Kanthari Chilli

Kanthari chilli, commonly found in Kerala and Goa, may be small in size, but it carries a powerful punch of heat. Known for its distinctive flavour and sharp spiciness, it is widely used in home kitchens to enhance the taste of vegetables, chutneys, and pickles.।

Sirarakhong Hathei Chilli

This distinctive chilli, cultivated in Manipur, stands apart from other varieties because of its unique flavour and intense heat. Owing to its special qualities and strong regional identity, it has also been awarded a Geographical Indication (GI) tag.

Guntur Sannam Chilli

Andhra Pradesh’s famous Guntur Sannam chilli is widely known for its deep red colour and bold, spicy flavour. It is commonly used in spice preparations, pickles, and a variety of delicious dishes. Due to its excellent quality and distinctive taste, it enjoys strong demand not only in India but also in international markets.

Byadgi Chilli

Karnataka’s famous Byadgi chilli may not be extremely hot, but its vibrant red colour and rich aroma make it stand out from other varieties. These unique qualities are why it is widely used in spice blends and the production of red chilli powder.

How Is the Spiciness of a Chilli Measured?

The spiciness of a chilli is measured using the Scoville Heat Unit (SHU) scale. The higher the SHU value, the hotter the chilli is considered to be. Most common Indian chillies generally range between 5,000 and 50,000 SHU, while Bhut Jolokia is reported to exceed one million SHU. Its extraordinary heat is the reason it is counted among the hottest chillies in the world.

Interesting!

These unique Indian chillies are famous not only for their intense heat but also for their distinctive identity and remarkable qualities. Among them, Bhut Jolokia is especially well known across the world and has earned global recognition for its extreme spiciness. If you enjoy hot and spicy food, discovering these remarkable Indian chillies can be a truly fascinating experience.

संस्कृत:

भारतदेशः स्वसुगन्धिभिः स्वादिष्टैः च मसालद्रव्यैः सम्पूर्णे विश्वे प्रसिद्धः अस्ति। तेषु मरीचिकायाः विशेषं स्थानम् अस्ति। देशस्य विभिन्नेषु राज्येषु मरीचिकायाः अनेकाः विशिष्टाः प्रजातयः उत्पाद्यन्ते। तासां वर्णः, स्वादः तथा तीक्ष्णता परस्परं भिन्नाः भवन्ति। काश्चन मरीचिकाः भोजनस्य स्वादं सुगन्धिं च वर्धयन्ति, परन्तु काश्चन एतावत्यः तीक्ष्णाः भवन्ति यत् तासां नाम श्रुत्वा अपि जनाः स्वेदं मुञ्चन्ति।

किं भवन्तः जानन्ति यत् भारतदेशे उत्पाद्यमाना एका मरीचिका एतावती तीक्ष्णा अस्ति यत् भारतीयसेनया जनसमूहनियन्त्रणार्थं मरीचिकाग्रनेडस्य निर्माणे तस्याः उपयोगः कृतः? आगच्छन्तु, भारतस्य पञ्च अत्यन्ततीक्ष्णानां मरीचिकानां विषये जानीमः, याः स्वविशिष्टस्वादेन, प्रचण्डतीक्ष्णतया तथा अद्वितीयगुणैः विश्वभरि प्रसिद्धाः सन्ति।

भूतजोलोकिया (भूत-जोलोकिया-मरीचिका)

भूतजोलोकिया भारतस्य अत्यन्तप्रसिद्धासु प्रचण्डतीक्ष्णासु च मरीचिकासु एका अस्ति। असम-नागालैण्ड-मणिपुर-अरुणाचलप्रदेशेषु मुख्यतया तस्याः कृषिः क्रियते। वर्षे २००७ तमे सा विश्वस्य अत्यन्ततीक्ष्णा मरीचिका इति गिनीजविश्वकीर्तिपुस्तके स्थानं प्राप्तवती। तस्याः तीक्ष्णता एतावती प्रबलाऽस्ति यत् तस्याः अल्पमात्रमपि कस्यचित् व्यञ्जनस्य स्वादं तीक्ष्णतां च पूर्णतया परिवर्तयितुं शक्नोति। अस्याः उपयोगः आचारनिर्माणे, अत्यन्ततीक्ष्णेषु भोज्यपदार्थेषु तथा मरिचप्रक्षेपकेषु अपि भवति। तस्याः प्रचण्डतीक्ष्णतां दृष्ट्वा भारतीयसेनया जनसमूहनियन्त्रणार्थं निर्मितेषु मरीचिकाग्रनेडेषु अपि तस्याः उपयोगः कृतः।

कान्थारी-मरीचिका

केरल-गोवाप्रदेशयोः प्राप्यमाणा कान्थारी-मरीचिका आकारेण लघ्वी भवति, किन्तु तस्याः तीक्ष्णता अत्यन्तं प्रबला अस्ति। विशिष्टस्वादेन तीक्ष्णसुगन्धेन च युक्ता इयं गृहरसोय्यां शाकानां, चटनी-आचारयोः च स्वादवर्धनाय बहुधा उपयुज्यते

सिरारखोंग-हाथेई-मरीचिका

मणिपुरप्रदेशे उत्पाद्यमाना इयं विशिष्टा मरीचिका स्वकीयेन अद्वितीयस्वादेन प्रखरतीक्ष्णतया च अन्याभ्यः मरीचिकाभ्यः भिन्ना परिचिता अस्ति। अस्याः विशेषगुणानां प्रादेशिकपरिचयस्य च कारणात् अस्यै भौगोलिकसूचकत्वस्य अर्थात् जीआई-चिह्नस्य सम्मानमपि प्रदत्तम् अस्ति।

गुन्टूर-सन्नम-मरीचिका

आन्ध्रप्रदेशस्य प्रसिद्धा गुन्टूर-सन्नम-मरीचिका स्वस्य गाढरक्तवर्णेन तीक्ष्णेन रुचिकरेण च स्वादेन विशेषरूपेण प्रसिद्धा अस्ति। अस्याः उपयोगः मसालद्रव्यनिर्माणे, आचारनिर्माणे तथा विविधेषु स्वादिष्टेषु व्यञ्जनेषु क्रियते। उत्तमगुणवत्तायाः विशिष्टस्वादस्य च कारणात् भारतदेशे एव न, विदेशेषु अपि अस्याः महती मागणी अस्ति

ब्यादगी-मरीचिका

कर्नाटकप्रदेशस्य प्रसिद्धा ब्यादगी-मरीचिका तीक्ष्णतायां अत्यधिकप्रखरा न भवति, किन्तु तस्याः दीप्तिमान् रक्तवर्णः मनोहरः सुगन्धश्च तां अन्याभ्यः मरीचिकाभ्यः विशिष्टां करोति। एतासां विशेषतां कारणात् मसालद्रव्यनिर्माणे रक्तमरीचिचूर्णस्य निर्माणे च तस्याः व्यापकः उपयोगः क्रियते।

मरीचिकायाः तीक्ष्णता कथं मीयते?

मरीचिकायाः तीक्ष्णता स्कोविल-ऊष्मामानक-एकक (Scoville Heat Unit—SHU) इति मापदण्डेन मीयते। अस्मिन् मापदण्डे यावदधिकः अङ्कः भवति, तावती मरीचिका अधिकतीक्ष्णा मन्यते। सामान्यभारतीय-मरीचिकानां तीक्ष्णता प्रायः ५,००० तः ५०,००० SHU पर्यन्तं भवति, परन्तु भूतजोलोकियायाः तीक्ष्णता दशलक्षात् अपि अधिका इति कथ्यते। एषा असाधारणा तीक्ष्णता एव तां विश्वस्य अत्यन्ततीक्ष्णासु मरीचिकासु विशेषस्थानं ददाति।

रोचकं!

Advertisement

Raja Saw Mill Advertisement

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed