खुदरा बाजार में चीनी के दाम 64 रुपये किलो के करीब पहुंचे, रिकॉर्ड महंगाई; जमाखोरी पर सरकार की कड़ी नजर।Sugar prices near ₹64 per kg in retail markets, hit record high; government cracks down on hoarding। खुद्रविक्रयविपण्यां शर्करायाः मूल्यं प्रतिकिलोग्रामं ६४ रूप्यकाणां समीपे, विक्रमस्तरे मूल्यवृद्धिः; सञ्चयकारिषु सर्वकारस्य कठोरदृष्टिः।

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मंगलवार को खुदरा बाजार में चीनी के दाम में करीब एक रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी दर्ज की गई और कीमत लगभग 64 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई। कुछ स्थानों पर उपभोक्ताओं को चीनी 76 रुपये किलो तक खरीदनी पड़ी।

खुदरा बाजार में चीनी के दाम 64 रुपये प्रति किलो के करीब पहुंचे

मंगलवार को खुदरा बाजार में चीनी की कीमतों में करीब एक रुपये प्रति किलो का इजाफा हुआ। इसके साथ ही चीनी का औसत भाव लगभग 64 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गया, जबकि कुछ इलाकों में यह 76 रुपये किलो तक बिकी।

सोमवार को चीनी का औसत खुदरा भाव 63.05 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया। हालांकि बीते कुछ दिनों में मिल स्तर पर चीनी की एक्स-मिल कीमतों में कमी आई है, लेकिन इसका फायदा अभी तक खुदरा बाजार में ग्राहकों को नहीं मिला है।

उपभोक्ता मामलों के विभाग के मूल्य निगरानी प्रभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 25 अगस्त को चीनी का औसत खुदरा भाव 63.97 रुपये प्रति किलो रहा। यह एक महीने पहले के 48.81 रुपये प्रति किलो की तुलना में करीब 31 प्रतिशत ज्यादा है। वहीं, पिछले साल इसी अवधि में चीनी का औसत भाव 46.31 रुपये प्रति किलो था।

थोक बाजार में सोमवार को चीनी का भाव 59.23 रुपये प्रति किलो था

सोमवार को थोक बाजार में चीनी का औसत भाव 59.23 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया। यह कीमत एक महीने पहले के 45.35 रुपये और एक साल पहले के 43.01 रुपये प्रति किलो के मुकाबले काफी अधिक है।

खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने सोमवार को बताया कि देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। सरकार द्वारा चीनी आयात की अनुमति देने के साथ ही सट्टेबाजी और जमाखोरी पर अंकुश लगाने के फैसलों के बाद मिल स्तर पर चीनी की कीमत करीब 18 प्रतिशत घटकर 55 रुपये प्रति किलो रह गई है।

आने वाले दिनों में चीनी की मिल कीमतों में और कमी आने की उम्मीद है। इससे पहले पिछले सप्ताह मिल स्तर पर चीनी का भाव रिकॉर्ड 67 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया था।

इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (इस्मा) के अनुमान के मुताबिक, 2025-26 के चीनी विपणन वर्ष में एथेनाल उत्पादन के लिए उपयोग के बाद करीब 279 लाख टन चीनी उत्पादन होने की संभावना है। इस अवधि की शुरुआत में चीनी का स्टॉक लगभग 50 लाख टन था, जबकि देश में सालाना घरेलू खपत 280 से 285 लाख टन के बीच रहने का अनुमान है।

विपणन वर्ष के सितंबर अंत तक चीनी का भंडार घटकर करीब 35 लाख टन रहने का अनुमान है। वहीं, मौजूदा विपणन वर्ष में कुल चीनी उत्पादन लगभग 309 लाख टन रहने की संभावना जताई गई है।

नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज (एनएफसीएसएफ) के प्रबंध निदेशक प्रकाश नाइकनवारे के मुताबिक, देश के किसी भी राज्य में चीनी का एक्स-मिल भाव 55 रुपये प्रति किलोग्राम से ऊपर नहीं है। वहीं, जमाखोरी पर लगाम कसने के लिए सरकार ने देशभर में फ्लाइंग स्क्वाड की तैनाती की है।

सरकार ने चीनी आयात नियमों में किया बदलाव, आयात प्रक्रिया हुई आसान

चीनी उद्योग की ओर से आयातित खेप पहुंचने में हो रही देरी को लेकर जताई गई चिंताओं के बाद सरकार ने राहत दी है। अब आयातित कच्ची चीनी के प्रसंस्करण और घरेलू बाजार में बिक्री की समयसीमा भारत में खेप पहुंचने की तारीख से दो महीने तक बढ़ा दी गई है।

स्थानीय बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की मंजूरी दी थी। इसके साथ आयातकों को निर्देश दिया गया था कि वे कच्ची चीनी का प्रसंस्करण कर 31 अक्टूबर तक घरेलू बाजार में इसकी बिक्री सुनिश्चित करें।

हाल ही में हुई बैठक में चीनी उद्योग ने संबंधित मंत्रालयों के सामने मौजूदा समयसीमा को अव्यावहारिक बताया। उद्योग प्रतिनिधियों ने इसके पीछे ब्राजील के बंदरगाहों पर बढ़ती भीड़ और चीनी की खेप को भारत पहुंचने में लगने वाले करीब 40 दिनों का हवाला दिया।

इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने 24 अगस्त को 20 अगस्त को जारी अधिसूचना में संशोधन किया। इसके तहत आयातित कच्ची चीनी के प्रसंस्करण और घरेलू बिक्री की समयसीमा बढ़ा दी गई है। एनएफसीएसएफ के प्रबंध निदेशक प्रकाश नाईकनवरे ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया।

(English)

Sugar prices in the retail market rose by nearly ₹1 per kg on Tuesday, reaching around ₹64 per kilogram. In some places, consumers were forced to pay as much as ₹76 per kg for sugar.

Retail sugar prices rise to nearly ₹64 per kilogram

On Tuesday, retail sugar prices increased by nearly ₹1 per kg, taking the average price to around ₹64 per kilogram. In some areas, sugar was sold at prices as high as ₹76 per kg.

The average retail price of sugar stood at ₹63.05 per kg on Monday. Although ex-mill sugar prices have declined over the past few days, the reduction has yet to reflect in the retail market.

According to the Price Monitoring Division of the Department of Consumer Affairs, the average retail price of sugar stood at ₹63.97 per kg on August 25. This was about 31% higher than the ₹48.81 per kg recorded a month earlier, while the average price was ₹46.31 per kg a year ago.

The average wholesale price of sugar stood at ₹59.23 per kg on Monday. This was significantly higher than ₹45.35 per kg a month ago and ₹43.01 per kg a year earlier.

Food Secretary Sanjeev Chopra said on Monday that the country has sufficient sugar stocks. Following the government’s decision to permit sugar imports and curb speculation and hoarding, ex-mill sugar prices have declined by around 18% to ₹55 per kg.

Sugar mill prices are expected to decline further in the coming days. Last week, the ex-mill price of sugar had surged to a record ₹67 per kg.

According to the Indian Sugar and Bio-Energy Manufacturers Association (ISMA), sugar production for the 2025-26 marketing year is estimated at around 27.9 million tonnes after diversion for ethanol production. The opening stock stood at about 5 million tonnes, while annual domestic demand is projected to remain between 28 and 28.5 million tonnes.

Sugar stocks are projected to decline to around 3.5 million tonnes by the end of September. Meanwhile, total sugar production in the current marketing year is estimated at about 30.9 million tonnes.

Prakash Naiknaware, Managing Director of the National Federation of Cooperative Sugar Factories (NFCSF), said that ex-mill sugar prices are not above ₹55 per kg in any state across the country. Flying squads have also been deployed nationwide to curb hoarding.

Government relaxes sugar import norms, eases the import process

Amid concerns in the sugar industry over delays in the arrival of import consignments, the government has provided relief by extending the deadline for processing and domestic sale of imported raw sugar to two months from the date of its arrival in India.

To boost domestic sugar supplies and keep prices under control, the government had permitted the import of 1 million tonnes of raw sugar. Importers were initially directed to process the raw sugar and sell it in the domestic market by October 31.

During a recent meeting, the sugar industry told the concerned ministries that the existing deadline was impractical. Industry representatives cited congestion at Brazilian ports and the nearly 40 days required for sugar consignments to reach India.

Taking these concerns into account, the Directorate General of Foreign Trade (DGFT) issued a corrigendum on August 24 to its notification dated August 20. The revised order extends the deadline for processing and domestic sale of imported raw sugar. NFCSF Managing Director Prakash Naiknaware welcomed the government’s decision.

(संस्कृत)

मङ्गलवासरे खुद्रविपण्यां शर्करायाः मूल्यं प्रतिकिलोग्रामं प्रायः एकरूप्यकं वर्धितम्, ततश्च मूल्यं प्रतिकिलोग्रामं प्रायः ६४ रूप्यकाणि अभवत्। केषुचित् स्थानेषु शर्करा प्रतिकिलोग्रामं ७६ रूप्यकाणां मूल्येन अपि विक्रीता।

खुद्रविपण्यां शर्करायाः मूल्यं प्रतिकिलोग्रामं ६४ रूप्यकाणां समीपं प्राप्तम्

मङ्गलवासरे खुद्रविपण्यां शर्करायाः मूल्यं प्रतिकिलोग्रामं प्रायः एकरूप्यकेण वर्धितम्। ततः शर्करायाः औसतं मूल्यं प्रतिकिलोग्रामं प्रायः ६४ रूप्यकाणि अभवत्, केषुचित् प्रदेशेषु च सा ७६ रूप्यकैः प्रतिकिलोग्रामं विक्रीता।

सोमवासरे शर्करायाः औसतं खुद्रमूल्यं प्रतिकिलोग्रामं ६३.०५ रूप्यकाणि अभवत्। यद्यपि विगतेषु कतिपयेषु दिवसेषु शर्करायाः मिल्-मूल्ये अर्थात् एक्स-मिल्-दरे न्यूनता अभवत्, तथापि तस्य प्रभावः अद्यापि खुद्रविपण्यां न दृश्यते।

उपभोक्तृकार्यविभागस्य मूल्यनिरीक्षणप्रभागस्य आँकडानुसारं अगस्तमासस्य २५ दिनाङ्के शर्करायाः औसतं खुद्रमूल्यं प्रतिकिलोग्रामं ६३.९७ रूप्यकाणि आसीत्। एतत् एकमासपूर्वस्य ४८.८१ रूप्यकाणां मूल्यस्य अपेक्षया प्रायः ३१ प्रतिशतं अधिकम् अस्ति। अपरतः वर्षपूर्वं शर्करायाः औसतं मूल्यं प्रतिकिलोग्रामं ४६.३१ रूप्यकाणि आसीत्।

सोमवासरे थोकविपण्यां शर्करायाः औसतं मूल्यं प्रतिकिलोग्रामं ५९.२३ रूप्यकाणि अभवत्। एतत् मूल्यं एकमासपूर्वस्य ४५.३५ रूप्यकाणां तथा वर्षपूर्वस्य ४३.०१ रूप्यकाणां तुलनायां पर्याप्तम् अधिकम् अस्ति।

खाद्यसचिवः सञ्जीवः चोपड़ा सोमवासरे अवदत् यत् देशे शर्करायाः पर्याप्तः सञ्चयः विद्यते। सर्वकारेण शर्करायाः आयाताय अनुमतिं दत्त्वा सट्टाव्यापारस्य सञ्चयस्य च नियन्त्रणाय निर्णयः कृतः। ततः मिल्-स्तरे शर्करायाः मूल्यं प्रायः १८ प्रतिशतं न्यूनं भूत्वा प्रतिकिलोग्रामं ५५ रूप्यकाणि अभवत्।

आगामिषु दिवसेषु शर्करायाः मिल्-मूल्येषु अधिका न्यूनता सम्भाव्यते। गतसप्ताहे मिल्-स्तरे शर्करायाः मूल्यं विक्रमरूपेण प्रतिकिलोग्रामं ६७ रूप्यकाणि यावत् अभवत्।

इण्डियन शुगर एण्ड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन अर्थात् इस्मा-सङ्गठनस्य अनुमानानुसारं २०२५-२६ विपणनवर्षे एथेनाल-निर्माणाय उपयोगानन्तरं शर्करायाः उत्पादनं प्रायः २७९ लक्षटनपरिमितं भविष्यति। अस्य वर्षस्य प्रारम्भिकः शर्करासञ्चयः प्रायः ५० लक्षटनपरिमितः आसीत्। देशे वार्षिकी शर्करायाः घरेलुमागधा च प्रायः २८० तः २८५ लक्षटनपर्यन्तं भवितुम् अनुमानिता अस्ति।

सितम्बरमासस्य अन्ते शर्करायाः सञ्चयः न्यूनत्वं प्राप्य प्रायः ३५ लक्षटनपरिमितः भविष्यति इति अनुमानम् अस्ति। अपरतः वर्तमानविपणनवर्षे शर्करायाः कुलोत्पादनं प्रायः ३०९ लक्षटनपरिमितं भविष्यति इति सम्भावना व्यक्ता अस्ति।

नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज (एनएफसीएसएफ) संस्थायाः प्रबन्धनिदेशकः प्रकाशः नाइकनवारे अवदत् यत् देशस्य कस्मिन् अपि राज्ये शर्करायाः एक्स-मिल्-मूल्यं प्रतिकिलोग्रामं ५५ रूप्यकाणां अधिकं नास्ति। सञ्चयकारिणां नियन्त्रणाय च सम्पूर्णदेशे फ्लाइङ्ग्-स्क्वाड्-दलानि नियुक्तानि सन्ति।

सर्वकारेण शर्करायाः आयातनियमेषु शिथिलीकरणं कृतम्, आयातप्रक्रिया च सरलीकृता

आयातितशर्करायाः खेपानां आगमने विलम्बं प्रति शर्कराउद्योगस्य चिन्तां दृष्ट्वा सर्वकारेण राहतिः प्रदत्ता। अधुना आयातितायाः कच्चशर्करायाः प्रसंस्करणस्य तथा घरेलुविपण्यां विक्रयस्य समयसीमा भारतागमनदिनाङ्कात् द्विमासपर्यन्तं विस्तृता अस्ति।

स्थानीयविपण्यां शर्करायाः आपूर्तिं वर्धयितुं मूल्यं च नियन्त्रयितुं सर्वकारेण १० लक्षटनपरिमितायाः कच्चशर्करायाः आयाताय अनुमतिः प्रदत्ता आसीत्। आयातकेभ्यः पूर्वं निर्देशः दत्तः आसीत् यत् ते कच्चशर्करायाः प्रसंस्करणं कृत्वा अक्टोबर्-मासस्य ३१ दिनाङ्कपर्यन्तं घरेलुविपण्यां तस्याः विक्रयं कुर्वन्तु।

हालैव आयोजितायां सभायां शर्कराउद्योगेन सम्बन्धितमन्त्रालयेभ्यः उक्तं यत् वर्तमानसमयसीमा व्यावहारिकी नास्ति। उद्योगप्रतिनिधिभिः ब्राजीलदेशस्य पत्तनेषु वर्धमानायाः भीडायाः तथा शर्करायाः खेपानां भारतं प्राप्तुं प्रायः चत्वारिंशत् दिनानि लगन्ति इति कारणयोः उल्लेखः कृतः।

एताः परिस्थितीः दृष्ट्वा विदेशव्यापारमहानिदेशालयेन (डीजीएफटी) अगस्तमासस्य २४ दिनाङ्के अगस्तमासस्य २० दिनाङ्कस्य अधिसूचनायां संशोधनं प्रकाशितम्। संशोधितनिर्णयेन आयातितायाः कच्चशर्करायाः प्रसंस्करणस्य घरेलुविपण्यां विक्रयस्य च समयसीमा विस्तृता अस्ति। एनएफसीएसएफ-संस्थायाः प्रबन्धनिदेशकः प्रकाशः नाईकनवरे सर्वकारस्य अस्य निर्णयस्य स्वागतं कृतवान्।

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