महाकाल महालोक के बाद अब उज्जैन में भगवान श्रीकृष्ण के 151 फीट ऊंचे विराट विश्वरूप का भव्य स्वरूप साकार होने जा रहा है।After Mahakal Mahalok, Ujjain is now set to witness the grand creation of a 151-foot-tall majestic Vishwaroop of Lord Shri Krishna.महाकालमहालोकानन्तरम् इदानीम् उज्जयिन्यां भगवान् श्रीकृष्णस्य १५१ पादोन्नतं विराट् विश्वरूपं भव्यतया साकारं भविष्यति।
उज्जैन में ‘महाकाल महालोक’ की ऐतिहासिक सफलता के बाद अब प्रदेश सरकार शहर को भगवान श्रीकृष्ण की वैश्विक आध्यात्मिक नगरी के रूप में विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत उज्जैन विकास प्राधिकरण (यूडीए) इंदौर रोड पर स्थित यूनिटी मॉल के पीछे, शिप्रा नदी के पावन तट पर भगवान श्रीकृष्ण के विराट ‘विश्वरूप’ की 151 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा स्थापित करेगा। इस विशाल प्रतिमा पर आधुनिक थ्रीडी प्रोजेक्शन शो भी प्रस्तुत किया जाएगा, जो श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगा।

‘महाकाल महालोक’ की अपार सफलता के बाद प्रदेश सरकार अब उज्जैन को भगवान श्रीकृष्ण की वैश्विक आध्यात्मिक राजधानी के रूप में विकसित करने की तैयारी में जुट गई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत उज्जैन विकास प्राधिकरण (यूडीए) इंदौर रोड स्थित यूनिटी मॉल के पीछे, शिप्रा नदी के पावन तट पर भगवान श्रीकृष्ण के विराट ‘विश्वरूप’ की 151 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा स्थापित करेगा। प्रतिमा पर आधुनिक थ्रीडी प्रोजेक्शन शो भी प्रदर्शित किया जाएगा। परियोजना के लिए एजेंसी के चयन हेतु 220 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया गया है। सरकार का मानना है कि इस पहल से उज्जैन में धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के साथ-साथ नाइट टूरिज्म को भी नई पहचान और गति मिलेगी।
यूनिटी मॉल के पीछे करीब 30 एकड़ क्षेत्र में विकसित होने वाली इस भव्य परियोजना में भगवान श्रीकृष्ण के विराट ‘विश्वरूप’ को अत्याधुनिक डिजिटल तकनीक के माध्यम से सजीव रूप दिया जाएगा। टेंडर दस्तावेज के मुताबिक, प्रतिमा पर 40 हजार ल्यूमेन्स क्षमता वाले छह आधुनिक 3-चिप डीएलपी लेजर प्रोजेक्टर स्थापित किए जाएंगे। इन हाई-एंड प्रोजेक्टरों की मदद से भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा के मुखमंडल, भुजाओं, धड़ और कमलासन पर आकर्षक थ्रीडी प्रोजेक्शन मैपिंग की जाएगी।
अत्याधुनिक ग्राफिक्स लेजर, मूविंग हेड बीम लाइट्स और हाई-एंड ऑडियो सिस्टम के माध्यम से प्रतिदिन शाम 15 से 20 मिनट का भव्य डिजिटल शो आयोजित किया जाएगा। इस शानदार प्रस्तुति में श्रीमद्भगवद्गीता के प्रेरणादायी संदेश, भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े प्रमुख प्रसंगों और भारतीय संस्कृति की गौरवशाली झलक को आधुनिक तकनीक के जरिए जीवंत रूप में प्रदर्शित किया जाएगा।
देश की सबसे विशाल धातु निर्मित भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा को 30 फीट ऊंचे भव्य पेडस्टल पर स्थापित किया जाएगा। इस विशाल प्रतिमा का डिजाइन ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ के शिल्पकार पद्मभूषण राम वनजी सुतार के पुत्र और प्रसिद्ध वास्तुकार डॉ. अनिल राम सुतार तैयार कर रहे हैं। परियोजना का विस्तृत प्रस्ताव जल्द ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
सरकार की योजना केवल एक विशाल प्रतिमा के निर्माण तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य महाकाल लोक, सांदीपनि आश्रम, श्रीकृष्ण विश्वरूप, यूनिटी मॉल और शिप्रा रिवरफ्रंट को आपस में जोड़कर उज्जैन में एक समग्र धार्मिक एवं पर्यटन सर्किट विकसित करना है। इस सर्किट के माध्यम से श्रद्धालु और पर्यटक दिन के साथ-साथ रात्रि में भी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक अनुभव का आनंद ले सकेंगे। इससे शहर में पर्यटकों के ठहरने की अवधि बढ़ने की उम्मीद है, जिसका सीधा लाभ होटल, परिवहन, रेस्टोरेंट, हस्तशिल्प, स्थानीय बाजार और सेवा क्षेत्र को मिलेगा। साथ ही हजारों नए रोजगार और व्यापारिक अवसर भी सृजित होने की संभावना है।
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यह महत्वाकांक्षी परियोजना प्रदेश सरकार की श्रीकृष्ण पाथेय योजना का भी अहम हिस्सा है। योजना के तहत 81 करोड़ रुपये की लागत से महर्षि सांदीपनि आश्रम का विकास किया जा रहा है, जबकि 120 करोड़ रुपये से महिदपुर स्थित नारायणा धाम को आधुनिक और भव्य स्वरूप देने की तैयारी है। इन सभी परियोजनाओं के पूर्ण होने के बाद उज्जैन की पहचान केवल महाकाल की नगरी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा, दर्शन और सनातन संस्कृति के एक प्रमुख वैश्विक केंद्र के रूप में उभरने की दिशा में आगे बढ़ेगा। सिंहस्थ-2028 से पहले इन परियोजनाओं के पूरा होने पर उज्जैन के धार्मिक, आर्थिक और पर्यटन विकास को नई ऊंचाइयां मिलने की उम्मीद है।
English
Following the remarkable success of ‘Mahakal Mahalok,’ the state government is now moving forward with plans to develop Ujjain as a global spiritual hub dedicated to Lord Shri Krishna. Under this ambitious project, the Ujjain Development Authority (UDA) will install a grand 151-foot-tall statue depicting the majestic ‘Vishwaroop’ of Lord Krishna on the sacred banks of the Shipra River, behind Unity Mall on Indore Road. A modern 3D projection show will also be displayed on the massive statue, creating a unique attraction for devotees and tourists.
Following the immense success of ‘Mahakal Mahalok,’ the state government is now preparing to develop Ujjain as a global spiritual capital dedicated to Lord Shri Krishna. Under this ambitious project, the Ujjain Development Authority (UDA) will install a magnificent 151-foot-tall statue depicting the विराट ‘Vishwaroop’ of Lord Krishna on the sacred banks of the Shipra River, behind Unity Mall on Indore Road. A state-of-the-art 3D projection show will also be showcased on the statue. A tender worth ₹220 crore has been issued to select an agency for the project. The initiative is expected to give a major boost to religious and cultural tourism while opening new opportunities for night tourism in Ujjain.
Spread across nearly 30 acres behind Unity Mall, this grand project will bring the majestic ‘Vishwaroop’ of Lord Shri Krishna to life through cutting-edge digital technology. According to the tender documents, six high-end 3-chip DLP laser projectors with a brightness capacity of 40,000 lumens each will be installed on the statue. These advanced projectors will create stunning 3D projection mapping effects across the statue’s face, arms, torso, and lotus throne.
A spectacular 15–20-minute digital show will be presented every evening using advanced graphics lasers, moving-head beam lights, and a high-end audio system. The immersive presentation will bring to life the inspiring teachings of the Shrimad Bhagavad Gita, key episodes from the life of Lord Shri Krishna, and the rich heritage of Indian culture through modern technology.
The country’s largest metal statue of Lord Shri Krishna will be installed on a magnificent 30-foot-high pedestal. The statue is being designed by renowned architect Dr. Anil Ram Sutar, son of Padma Bhushan Ram V. Sutar, the sculptor behind the Statue of Unity. The project’s detailed proposal will soon be presented before Chief Minister Dr. Mohan Yadav.
The government’s vision extends beyond the construction of a massive statue. The plan is to connect Mahakal Lok, Sandipani Ashram, Shri Krishna Vishwaroop, Unity Mall, and the Shipra Riverfront to create an integrated religious and tourism circuit in Ujjain. This initiative will enable devotees and visitors to enjoy spiritual and cultural experiences not only during the day but also after sunset. The project is expected to increase tourists’ length of stay in the city, benefiting hotels, transport services, restaurants, handicrafts, local markets, and the service sector. It is also likely to create thousands of new employment and business opportunities.
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This ambitious project is also an important part of the state government’s Shri Krishna Pathey Yojana. Under the scheme, Maharishi Sandipani Ashram is being developed at a cost of ₹81 crore, while Narayana Dham in Mahidpur is set to receive a grand and modern transformation with an investment of ₹120 crore. Once all these projects are completed, Ujjain’s identity will extend beyond being only the city of Mahakal and will move toward becoming a major global centre for the teachings, philosophy, and Sanatan culture associated with Lord Shri Krishna. With these projects expected to be completed before Simhastha 2028, Ujjain is likely to reach new heights in religious, economic, and tourism development.
संस्कृत:
‘महाकालमहालोकस्य’ ऐतिहासिकसफलतायाः अनन्तरं राज्यसरकारः अधुना उज्जयिनीं भगवान् श्रीकृष्णस्य वैश्विकाध्यात्मिकराजधानीरूपेण विकसितुं प्रयत्नशीलास्ति। अस्य महत्त्वाकाङ्क्षिणः परियोजनायाः अन्तर्गतं उज्जयिनीविकासप्राधिकरणम् (यूडीए) इन्दौरमार्गस्थितस्य यूनिटी-मॉलस्य पृष्ठभागे पवित्रायाः क्षिप्रानद्याः तटे भगवान् श्रीकृष्णस्य विराट् ‘विश्वरूपस्य’ १५१ पादोन्नतां भव्यप्रतिमां स्थापयिष्यति। अस्यां विशालप्रतिमायां आधुनिकः त्रिविमीय-प्रक्षेपणप्रदर्शनम् अपि प्रदर्शयिष्यते, यत् श्रद्धालूनां पर्यटकानां च विशेषाकर्षणं भविष्यति।
‘महाकालमहालोकस्य’ अपारसफलतायाः अनन्तरं राज्यसरकारः अधुना उज्जयिनीं भगवान् श्रीकृष्णस्य वैश्विकाध्यात्मिकराजधानीरूपेण विकसितुं सज्जा भवति। अस्य महत्त्वाकाङ्क्षिणः परियोजनायाः अन्तर्गतं उज्जयिनीविकासप्राधिकरणम् (यूडीए) इन्दौरमार्गस्थितस्य यूनिटी-मॉलस्य पृष्ठभागे पवित्रायाः क्षिप्रानद्याः तटे भगवान् श्रीकृष्णस्य विराट् ‘विश्वरूपस्य’ १५१ पादोन्नतां भव्यप्रतिमां स्थापयिष्यति। तस्यां प्रतिमायाम् आधुनिकं त्रिविमीय-प्रक्षेपणप्रदर्शनम् अपि आयोजयिष्यते। परियोजनायाः कृते संस्थाचयनार्थं २२० कोटिरूप्यकाणां निविदा निर्गता अस्ति। अस्याः योजनायाः माध्यमेन धार्मिकपर्यटनस्य, सांस्कृतिकपर्यटनस्य तथा रात्रिकालीनपर्यटनस्य च नवीनो विस्तारः भविष्यतीति अपेक्ष्यते।
यूनिटी-मॉलस्य पृष्ठभागे प्रायः ३० एकरपरिमिते विस्तीर्णे क्षेत्रे निर्मीयमाणायाम् अस्यां भव्यपरियोजनायां भगवान् श्रीकृष्णस्य विराट् ‘विश्वरूपं’ अत्याधुनिकडिजिटलप्रौद्योगिक्या सजीववत् प्रदर्शयिष्यते। निविदादस्तावेजानुसारं प्रतिमायां ४० सहस्र-ल्यूमेन्स-प्रकाशक्षमतायुक्ताः षट् अत्याधुनिकाः ३-चिप-डीएलपी-लेजर-प्रक्षेपकाः स्थापयिष्यन्ते। एतेषां उन्नतप्रक्षेपकाणां साहाय्येन प्रतिमायाः मुखमण्डले, भुजयोः, वक्षःस्थले तथा कमलासने आकर्षकं त्रिविमीय-प्रक्षेपण-मानचित्रणं क्रियते।
अत्याधुनिकग्राफिक्स-लेजरप्रकाशैः, चलत्किरणदीपैः तथा उच्चस्तरीयध्वनिव्यवस्थया प्रतिदिनं सायंकाले १५–२० निमेषपरिमितः भव्यः डिजिटलप्रदर्शनकार्यक्रमः आयोजयिष्यते। अस्मिन् आकर्षके प्रदर्शने श्रीमद्भगवद्गीतायाः प्रेरणादायकसन्देशाः, भगवान् श्रीकृष्णस्य जीवनसम्बद्धाः प्रमुखप्रसङ्गाः तथा भारतीयसंस्कृतेः गौरवमयी झलकः आधुनिकप्रौद्योगिक्याः माध्यमेन सजीववत् प्रदर्शयिष्यन्ते।
देशस्य विशालतमायाः धातुनिर्मितायाः भगवान् श्रीकृष्णस्य प्रतिमायाः स्थापना ३० पादोन्नते भव्याधारे करिष्यते। अस्याः विशालप्रतिमायाः अभिकल्पनां ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ इति विश्वविख्यातप्रतिमायाः शिल्पकारस्य पद्मभूषण-राम-वनजी-सुतारस्य पुत्रः प्रसिद्धः वास्तुशिल्पविशारदः डॉ. अनिल-राम-सुतारः कुर्वन् अस्ति। अस्य परियोजनायाः विस्तृतप्रस्तावः शीघ्रमेव मुख्यमन्त्रिणः डॉ. मोहन-यादवस्य समक्षं प्रस्तूयते।
सरकारस्य लक्ष्यं केवलं विशालप्रतिमायाः निर्माणं नास्ति। अपि तु महाकाललोकं, सांदीपन्याश्रमं, श्रीकृष्णस्य विश्वरूपं, यूनिटी-मॉलं तथा क्षिप्रानदीतटं परस्परं संयोज्य उज्जयिन्यां समग्रं धार्मिक-पर्यटनपरिपथं विकसितुं योजना अस्ति। एतेन परिपथेन श्रद्धालवः पर्यटकाः च दिवा एव न, अपितु रात्रावपि आध्यात्मिकं सांस्कृतिकं च अनुभवं प्राप्स्यन्ति। अस्य परिणामस्वरूपं नगरे पर्यटकानां निवासकालः वर्धिष्यते, येन अतिथिगृहाणां, परिवहनसेवानां, भोजनालयानां, हस्तशिल्पव्यवसायस्य, स्थानीयविपणीनां तथा सेवाक्षेत्रस्य च लाभः भविष्यति। सहस्रशः नवीनरोजगारस्य व्यापारावकाशानां च सृजनस्य सम्भावना अपि वर्तते।
एतदपि जानीयात्
एषा महत्त्वाकाङ्क्षिणी परियोजना राज्यसरकारस्य श्रीकृष्णपाथेययोजनायाः अपि महत्त्वपूर्णः अंशः अस्ति। अस्याः योजनायाः अन्तर्गतं ८१ कोटिरूप्यकाणां व्ययेन महर्षिसांदीपन्याश्रमस्य विकासकार्यं प्रचलति, तथा १२० कोटिरूप्यकाणां व्ययेन महिदपुरस्थितस्य नारायणधाम्नः भव्यं आधुनिकं च स्वरूपं निर्मीयते। एतासां सर्वासां परियोजनानां पूर्णतायाः अनन्तरं उज्जयिन्याः परिचयः केवलं महाकालस्य नगरी इति न भविष्यति, अपि तु भगवान् श्रीकृष्णस्य शिक्षायाः, दर्शनस्य तथा सनातनसंस्कृतेः प्रमुखवैश्विककेन्द्ररूपेण सा विकसितुं प्रवर्तिष्यते। सिंहस्थ-२०२८ पूर्वम् एतासां परियोजनानां पूर्णतया उज्जयिन्याः धार्मिक, आर्थिक तथा पर्यटनविकासः नवीनानि शिखराणि प्राप्स्यतीति अपेक्ष्यते।


