अचानक शराब छोड़ने पर शरीर में क्या बदलाव आते हैं? रोज़ाना कितनी शराब पीना अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता है?What happens when you suddenly stop drinking alcohol? How much alcohol is considered relatively safe to consume per day?मद्यपानस्य सहसा परित्यागे शरीरे किं भवति? प्रतिदिनं कियत् मद्यपानं तुलनात्मकतया सुरक्षितं मन्यते?

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बेहतर स्वास्थ्य के लिए हर प्रकार के नशे से दूरी बनाए रखना ज़रूरी है। सभी नशीले पदार्थ शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं, लेकिन शराब का असर शरीर और स्वास्थ्य पर सबसे गंभीर और चिंताजनक माना जाता है।

शराब को लेकर नए शोध सामने आए हैं, जिनकी अनदेखी करना स्वास्थ्य के लिए भारी पड़ सकता है।

डॉक्टरों का कहना है कि शराब का सेवन, चाहे कभी-कभार हो या नियमित रूप से, शरीर के कई अहम अंगों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

इस लेख में शराब के शारीरिक और मानसिक प्रभावों के साथ-साथ अचानक शराब छोड़ने पर शरीर में होने वाले बदलावों और संभावित परिणामों की जानकारी दी गई है।

हमारे द्वारा पी गई शराब शरीर में जाकर किस प्रकार काम करती है और अंततः कहाँ पहुंचती है?

अधिकांश लोगों को लगता है कि शराब केवल पेट में जाकर बाद में मूत्र के जरिए शरीर से बाहर निकल जाती है। लेकिन वास्तव में इसका असर शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों पर पड़ता है, जिसकी जानकारी बहुत से लोगों को नहीं होती।

इस विषय को बेहतर ढंग से समझने के लिए हमने एमजीएम हेल्थकेयर के किडनी प्रत्यारोपण विशेषज्ञ डॉ. त्यागराजन से बातचीत की।

उन्होंने बताया, “शराब की मात्रा, सेवन की आवृत्ति या कितने वर्षों से इसका सेवन किया जा रहा है, इससे अलग एक बात स्पष्ट है कि शराब शरीर के लिए नुकसानदेह होती है। साथ ही, महिलाओं पर इसका प्रभाव पुरुषों की तुलना में अधिक गंभीर होता है, क्योंकि उनका शरीर शराब के प्रति अधिक संवेदनशील माना जाता है।”

डॉ. त्यागराजन के अनुसार, “शरीर में प्रवेश करने के बाद शराब पेट से होकर छोटी आंत तक पहुंचती है। वहीं यह टूटकर एल्डिहाइड नामक रासायनिक पदार्थ में बदलने लगती है।”

क्या महिलाओं पर शराब का खतरा सबसे अधिक होता है?

शराब पुरुषों और महिलाओं दोनों के स्वास्थ्य को प्रभावित करती है। हालांकि, डॉ. त्यागराजन के अनुसार आनुवंशिक बनावट के कारण महिलाओं का शरीर शराब के प्रति अधिक संवेदनशील होता है, इसलिए उन पर इसके दुष्प्रभाव अपेक्षाकृत अधिक पड़ सकते हैं।

उन्होंने बताया, “लगातार शराब का सेवन करने से लिवर में हानिकारक तत्व जमा होने लगते हैं, जिससे उसकी कोशिकाओं को नुकसान पहुंचता है। समय के साथ लिवर पर स्थायी निशान बनने लगते हैं, जिसे फाइब्रोसिस कहा जाता है। इस स्थिति में लिवर की कोशिकाएँ कठोर और मोटी हो जाती हैं तथा उनकी लचीलापन कम होने लगता है।”

उन्होंने आगे बताया कि समय के साथ अन्य जोखिम कारक भी मिलकर लिवर सिरोसिस का कारण बन सकते हैं। इस स्थिति में लिवर की स्वस्थ कोशिकाएँ धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त होकर उनकी जगह मोटे और दाग़दार ऊतक (स्कार टिश्यू) ले लेते हैं।

हालांकि, यह बीमारी कितनी तेज़ी से बढ़ेगी या धीरे-धीरे विकसित होगी, यह व्यक्ति की आनुवंशिक बनावट और उसके शराब सेवन की मात्रा पर काफी हद तक निर्भर करता है।

दूसरी ओर, डॉक्टरों का मानना है कि शराब का सेवन करने वाली महिलाओं में लिवर संबंधी बीमारियों का जोखिम पुरुषों की तुलना में अधिक हो सकता है।

शराब के सेवन से होने वाले लिवर संबंधी रोग

शराब का नियमित सेवन लिवर से जुड़ी कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पिछले दस वर्षों में भारत में लिवर रोगों के मामलों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में लगभग हर पाँच में से एक व्यक्ति किसी न किसी प्रकार की लिवर बीमारी से प्रभावित है। साथ ही, लिवर रोगों के कारण होने वाली मौतों की संख्या में भी लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

डॉ. त्यागराजन का कहना है कि शराब के कारण लिवर पर पड़ने वाला सबसे गंभीर दुष्प्रभाव लिवर सिरोसिस है।

लंबे समय तक लिवर को होने वाली क्षति शरीर में सूजन और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकती है। समय के साथ यह लिवर की कार्यक्षमता को धीरे-धीरे कम कर देती है, जिससे उसके सामान्य कार्य प्रभावित होने लगते हैं।

इसके प्रमुख लक्षणों में लगातार थकान और ऊर्जा की कमी, मांसपेशियों की कमजोरी, शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन), गंभीर पीलिया तथा खून की उल्टी जैसी गंभीर समस्याएं शामिल हो सकती हैं।

English

Staying away from all forms of addiction is essential for good health. While every intoxicating substance can harm the body, alcohol is known to have some of the most serious and alarming effects on physical health.

New research on alcohol has emerged, and ignoring these findings could come at a significant cost to your health.

According to doctors, drinking alcohol—whether occasionally or on a daily basis—can adversely affect several vital organs of the body.

This article explores the physical and mental effects of alcohol, along with the possible consequences of suddenly quitting drinking.

What happens to the alcohol we drink, and where does it go inside the body?

Many people believe that alcohol simply goes to the stomach and is later eliminated through urine. In reality, alcohol affects several vital organs of the body, and many people are unaware of these effects.

To gain a better understanding of the topic, we spoke with Dr. Thyagarajan, a kidney transplant specialist at MGM Healthcare.

He said, “Regardless of how much, how often, or for how long a person drinks alcohol, it is harmful to the body. Moreover, women are generally more sensitive to alcohol than men, making them more vulnerable to its adverse effects.”

Are women at the highest risk from alcohol consumption?

Alcohol can affect the health of both men and women. However, according to Dr. Thyagarajan, women are generally more sensitive to alcohol due to their genetic makeup, which may make them more vulnerable to its harmful effects.

He said, “Regular alcohol consumption causes harmful substances to build up in the liver, damaging its cells. Over time, permanent scarring can develop in the liver, a condition known as fibrosis. In this stage, liver tissue becomes thicker, stiffer, and less flexible.”

He further explained that other contributing factors can eventually lead to liver cirrhosis. In this condition, healthy liver cells are gradually replaced by thick, scarred tissue, reducing the liver’s normal function.

However, whether the disease progresses rapidly or develops gradually largely depends on a person’s genetic makeup and the amount of alcohol they consume.

On the other hand, doctors say that women who consume alcohol may face a higher risk of developing liver disease than men.

Alcohol-Related Liver Diseases

Regular alcohol consumption can lead to several serious liver diseases. According to available data, the number of liver disease cases in India has increased significantly over the past decade.

According to the report, nearly one in every five Indians is affected by some form of liver disease. The number of deaths caused by liver-related illnesses has also been on the rise.

According to Dr. Thyagarajan, liver cirrhosis is the most serious effect of alcohol on the liver.

Damage to the liver over many years can lead to inflammation and other health complications. Over time, it gradually reduces the liver’s ability to function properly, affecting its normal performance.

Common symptoms include persistent fatigue and low energy, muscle weakness, dehydration, severe jaundice, and vomiting blood in advanced cases.

संस्कृत

उत्तमस्वास्थ्यस्य कृते सर्वप्रकारेभ्यः व्यसनेभ्यः दूरस्थितिः आवश्यकाऽस्ति। सर्वे मादकपदार्थाः शरीराय हानिकारकाः भवन्ति, किन्तु मद्यस्य दुष्प्रभावाः शरीरे विशेषतः गम्भीराः चिन्ताजनकाः च भवन्ति।

मद्यविषये नवीनाः अनुसन्धानपरिणामाः प्रकाशिताः सन्ति। तेषाम् अवहेलनं स्वास्थ्यस्य कृते महद् अहितकरं भवितुम् अर्हति।

वैद्याः वदन्ति यत् मद्यपानं कदाचित् वा प्रतिदिनं वा क्रियमाणम्, शरीरस्य अनेकान् महत्त्वपूर्णान् अवयवान् प्रतिकूलतया प्रभावितुं शक्नोति।

अस्मिन् लेखे मद्यस्य शारीरिक-मानसिकदुष्प्रभावाः तथा सहसा मद्यत्यागेन शरीरे सम्भवन्तः परिवर्तनाः तेषां परिणामाश्च विवेचिताः सन्ति।

यत् मद्यं वयं पिबामः, तत् शरीरे कुत्र गच्छति तथा कथं कार्यं करोति?

अनेकाः जनाः मन्यन्ते यत् मद्यं केवलं आमाशये गत्वा पश्चात् मूत्रमार्गेण शरीराबहिर्गच्छति। वस्तुतः तु तस्य प्रभावः शरीरस्य अनेकान् महत्त्वपूर्णान् अवयवान् व्याप्नोति, यस्य विषये बहवः अनभिज्ञाः सन्ति।

अस्य विषयस्य सम्यक् अवगमनार्थं वयं एमजीएम हेल्थकेयरस्य वृक्कप्रत्यारोपणविशेषज्ञेन डॉ. त्यागराजनेन सह संवादम् अकरोत्।

सः अवदत्, “कियत् प्रमाणेन, कियत् वारं वा, कियत्कालं यावत् मद्यं पीयते इति न मुख्यं; सत्यं तु एतदेव यत् मद्यं शरीरस्य कृते हानिकारकम् अस्ति। अपि च, स्त्रियः पुरुषेभ्यः मद्यस्य प्रभावे अधिकसंवेदनशीलाः भवन्ति, अतः तासां शरीरे तस्य दुष्प्रभावाः अधिकतया दृश्यन्ते।”

अस्य विषयस्य सम्यक् अवगमनार्थं वयं एमजीएम हेल्थकेयरस्य वृक्कप्रत्यारोपणविशेषज्ञेन डॉ. त्यागराजनेन सह संवादम् अकरोत्।

सः अवदत्, “कियत् प्रमाणेन, कियत् वारं वा, कियत्कालं यावत् मद्यं पीयते इति न मुख्यं; सत्यं तु एतदेव यत् मद्यं शरीरस्य कृते हानिकारकम् अस्ति। अपि च, स्त्रियः पुरुषेभ्यः मद्यस्य प्रभावे अधिकसंवेदनशीलाः भवन्ति, अतः तासां शरीरे तस्य दुष्प्रभावाः अधिकतया दृश्यन्ते।”

डॉ. त्यागराजनः वदति, “मद्यं शरीरे प्रविश्य आमाशयात् लघ्वन्त्रं गच्छति। तत्र तत् विघट्य ‘एल्डिहाइड्’ इति रासायनिकद्रव्ये परिणमति।”

किं मद्यपानात् स्त्रीणामेव सर्वाधिकः जोखिमः भवति?

मद्यपानस्य प्रभावः स्त्रीषु पुरुषेषु च भवति। तथापि डॉ. त्यागराजनस्य मतानुसारम् आनुवंशिकसंरचनायाः कारणेन स्त्रियः मद्यस्य प्रति अधिकसंवेदनशीलाः भवन्ति, अतः तासु तस्य दुष्प्रभावाः अधिकतया दृश्यन्ते।

सः अवदत्, “निरन्तरं मद्यपानेन यकृते हानिकारकपदार्थानां सञ्चयः भवति, येन तस्य कोशिकाः क्षीयन्ते। कालान्तरे यकृते स्थायिचिह्नानि जायन्ते, एषा अवस्था ‘फाइब्रोसिस्’ इति कथ्यते। अस्मिन् अवस्थायां यकृत्कोशिकाः स्थूलाः कठोराश्च भवन्ति तथा तासां लचकता अपि क्षीयते।”

तेन उक्तं यत् अन्येऽपि कारणसमूहाः कालान्तरे यकृत्सिरोसिस्-रोगस्य कारणं भवन्ति। अस्मिन् अवस्थायां यकृतः स्वस्थाः कोशिकाः शनैः शनैः क्षीयन्ते, तासां स्थाने स्थूलानि दागयुक्तानि ऊतकानि (स्कार-ऊतकानि) स्थापितानि भवन्ति।

तथापि अयं रोगः शीघ्रं वा शनैः शनैः वर्धते इति तस्य व्यक्तेः आनुवंशिकसंरचनायाः तथा मद्यपानस्य मात्रायाः उपरि मुख्यतया निर्भरति।

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