“₹22,360 करोड़ की ‘उत्कृष्ट’ शिक्षा का महाप्रदर्शन! सेलुद में शौचालय गायब, पेंड्रावन में शिक्षक लापता—बच्चों ने सड़क को बना दिया सरकार का नया ‘शिकायत कार्यालय’!” “₹22,360 Crore ‘Excellent Education’ on Paper, Students on Roads in Reality! Toilets Missing in Selud, Teachers Missing in Pendravan—Welcome to Chhattisgarh’s New ‘Roadside Grievance System’!”“₹२२,३६०-कोटिरूप्यकाणां ‘उत्कृष्ट-शिक्षा’! सेलुदे शौचालयं नास्ति, पेन्द्रावणे शिक्षकः नास्ति—बालकाः मार्गमेव नव-‘शिकायत-कार्यालयं’ कृतवन्तः!”

सेलूद. पाटन विधानसभा के अंतर्गत आने वाले ग्रामपंचायत सेलूद में ग्राम में ही स्थित स्वामी आत्मानंदउत्कृष्ट विद्यालय के छात्र एवं छात्राओं के द्वारा आजसुबह 9 बजे आर एस पास अचानक बजरंग चौक केपास मुख्य दुर्ग – पाटन मार्ग में छत्तीसगढ़ शासन एवंप्रशासन के समक्ष अपनी शाला से संबंधित मांगो कोलेकर ” बागी प्रदर्शन ” का सहारा लेना आम जनताके सामने प्रस्तुत हुआ , शाला के बच्चों ने मजबूरिवशसिस्टम के विरुद्ध बागी प्रदर्शन करते हुए तकरीबनआधे से एक घंटे तक मुख्य दुर्ग – पाटन मार्ग बजरंगचौक सेलूद में ” चक्का जाम ” जैसे मैदानी जंग कासहारा लिया !
नेता अधिकारी शायद
व्यस्त है हड़प में
शायद कुछ इसी वजह से पहले ” पेंड्रावन ” और अब “
सेलूद ” के स्कूली बच्चे आ गए सड़क में

सबसे बड़ा सोचनीय विषय यह लगता है कि आखिरऐसी क्या मजबूरी आन पड़ी कि जिले के ही ग्रामपेंड्रावन के बाद अब सेलूद के छात्र – छात्राओंको सड़कों पर आना पड़ा जबकि दुर्ग जिला स्वयंछत्तीसगढ़ के शिक्षा मंत्री गंजेंद्र यादव का गृह जिला हैऔर उनके ही जिले में अब ग्राम सेलूद के स्कूली बच्चोंको ऐसा बागी तरीका अपनाना पड़ा !?मामला सामने आता है –
” शाला में उचित शौचालय की कमी ” का .कितना गौरान्वित पुरस्कार है ये सरकार की शिक्षाप्रणाली के उत्कृष्ट कार्य के लिए पहले ” पेंड्रावन ” औरअब सेलूद स्थित ” स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय” के बच्चों की ओर से , सवाल यह उठता है कि क्याशासन एवं प्रशासन इस पुरस्कार को किस तरीके सेस्वीकार करती है !
“एक सवाल जो इन दोनों घटनाओं से छत्तीसगढ़ की “शिक्षा प्रणाली” के साथ “वित्त प्रणाली” पर भी सवाल उठाती है जिसका कार्यभार स्वयं पूर्व आईएएस अधिकारी “ओपी चौधरी “के हाथ में है जो इतने ज्यादा पढ़े-लिखे, पूर्व आईएएस एवं प्रशासन प्रणाली के तजुर्बेदार व्यक्ति है किंतु राजनीति में आने के बाद उनके इन गुणों की मृत्यु होने की आशंका तो अवश्य लगाई जा सकती है”
“क्योंकि वित्त में शिक्षा का स्वरूप हजारों करोड़ों से सुसज्जित सुन्दर एवं अनोखे से हैऔर यह सवाल अब सिस्टम से बागी प्रदर्शनों वाले बच्चों द्वारा सड़कों से है -“
“जब श्रेष्ठ शिक्षा एवं नारी सुरक्षा है सत्तापक्ष के संस्कारतो फिर कैसे छा रहा है घोर अंधकार”
“सेलुद शाला की बालिकाएं लंबे अरसे से शौचालय जैसी समस्याओं से जूझती रही और सवाल यह भी उठता है कि शौचालय बनवाने में उतना ज्यादा शासकीय फंड भी नहीं लगता है जिसे अब तक इन बालिकाओं की भलाई से बढ़कर मानकर अब तक सिर्फ फाइलों में रखा गया क्योंकि प्राप्त जानकारी के अनुसार छात्रा-छात्राओं एवं कुछ संगठनों ने कई बार दुर्ग के सांसद एवं शिक्षा मंत्रालय के समक्ष तो इस समस्या को रखा किन्तु शायद वह वही रखा का रखा रह गया , आगे नहीं बढ़ पाया , आज भी जब सेलुद में बच्चों का “बागी प्रदर्शन” सिस्टम को आईना दिखाने लगा तब आखिर में तहसीलदार साहब को आकर प्रशासन की ओर से समस्या को पूर्ण रूप से खत्म करने के का आश्वासन दिया गया लेकिन इसमें भी संदेह की बू आने लगी है क्योंकि 21 अगस्त को जिस ” पेंड्रावन विद्यालय के बच्चों ने शिक्षक की कमी के चलते प्रदर्शन किया था और आश्वासन के साथ की शिक्षक की कमी पूरी हो जाएगी प्रदर्शन बंद किया था किंतु आश्वासन सिर्फ शब्दों तक रह पाई शायद जिससे आज फिर पेंड्रावन विद्यालय के वही बच्चे फिर से मुख्य खैरागढ़ मार्ग पर फिर से जमीनी स्तर पर विरोध प्रदर्शन करने पहुंचे , अब देखना यह होगा कि क्या छत्तीसगढ़ के शिक्षानीति में लगे इस पुरस्कार रूपी दाग का निराकरण हो पाएगा और साथ में यह भी अंदेशा लगाया जा सकता है कि इन दोनों घटनाओं से शायद और भी क्षेत्रों के छात्र – छात्राएं जो अभी भी शिक्षा एवं शिक्षा के लिए उपयोगी मूलभूत सुविधाओं से दूर है उनकी भी समस्याएं अब शायद शासन एवं प्रशासन के समक्ष आ सकती है।”
(English)
Selud. The village coming under Patan Assembly Constituency
Panchayat Selud, at the Swami Atmanand
Excellence School located within the village itself, students
and female students today at
9 AM near R.S. Pass, suddenly at Bajrang Chowk
near the main Durg–Patan road, before the Chhattisgarh Government and
administration, regarding their demands related to their school
resorted to a “rebel protest”, which came before the general public
, the school children, out of compulsion,
while protesting rebelliously against the system, for approximately
half to one hour on the main Durg–Patan road at Bajrang
Chowk, Selud, took recourse to a “road blockade” like a field battle
!
The leader-official perhaps
is busy in grabbing
Perhaps for some such reason, first ” Pendravan ” and now “
Selud ” school children have come onto the road
The biggest matter of concern seems to be that after all what compulsion arose that in the very district after the village Pendravan, now the students of Selud had to come onto the roads, while Durg district itself is the home district of Chhattisgarh’s Education Minister Gajendra Yadav and now in his own district, the school children of village Selud had to adopt such a rebellious method !?The matter comes to light -.
” Lack of proper toilets in the school ” is .What a proud award this is for the government’s educationsystem’s excellent work, first ” Pendravan ” andnow the ” Swami Atmanand Excellence School ” located in Selud, from the children, the question arises whetherthe government and administration accept this award in what way!
“A question that, from both these incidents, raises questions on Chhattisgarh’s “education system” as well as the “financial system,” the responsibility of which is in the hands of former IAS officer OP Choudhary himself, who is such a highly educated, former IAS, and experienced person in the administrative system, but after entering politics, the fear of the death of these qualities of his can certainly be suspected.”
“Because the nature of education in finance is beautiful and unique, adorned with thousands of Crores and this question is now from the streets by children with rebellious demonstrations against the system -“
“When excellent education and women’s safety are the values of the ruling Party then how is deep darkness spreading”
“The girls of Selud school have been struggling with problems like toilets for a long time, and the question also arises that building a toilet does not even require that much government funding, which till now has been kept only in files considering it more important than the well-being of these girls because according to the information received, the students and some organizations presented this problem many times before the MP of Durg and the Ministry of Education, but perhaps it remained kept right there, could not move forward, even today when the “rebellious demonstration” of children in Selud started showing a mirror to the system, then finally the Tehsildar Sahab had to come and give an assurance on behalf of the administration to completely finish the problem, but a smell of doubt has started coming in this too because on August 21, the children of whichever “Pendravan school” had protested due to the shortage of teachers and stopped the protest with the assurance that the shortage of teachers would be fulfilled, but the assurance could perhaps remain only in words, due to which today again those same children of Pendravan school reached again to hold a protest demonstration on the ground level on the main Khairagarh road, now it remains to be seen whether this award-like stain on Chhattisgarh’s education policy can be resolved, and along with this, it can also be suspected that from these both incidents, perhaps students from more areas who are still away from education and basic facilities useful for education, their problems also might now come before the government and administration.”
(संस्कृत)
सेलूद्। पाटन-विधानसभाक्षेत्रस्य अन्तर्गतं वर्तमानं ग्रामपञ्चायतं सेलूद्, ग्रामे एव स्थिते स्वामी आत्मानन्दउत्कृष्टविद्यालयस्य छात्रैः छात्राभिश्च अद्यप्रातः नववादने आर.एस. पास् इत्यत्र सहसा बजरङ्गचतुष्पथेसमीपे मुख्य-दुर्ग-पाटनमार्गे छत्तीसगढशासनस्य चप्रशासनस्य समक्षं स्वशालासम्बद्धानां मागाणांविषये “विद्रोहप्रदर्शनस्य” आश्रयः सामान्यजनानांसमक्षं प्रस्तुतः अभवत्। शालायाः बालकैः विवशतयाव्यवस्थायाः विरुद्धं विद्रोहप्रदर्शनं कुर्वद्भिः प्रायःअर्धतः एकघण्टापर्यन्तं मुख्य-दुर्ग-पाटनमार्गस्य बजरङ्गचतुष्पथे सेलूदि “चक्काजामम्” इव मैदानीसङ्ग्रामस्यआश्रयः स्वीकृतः!
नेता-अधिकारी सम्भवतः
अपहरणे व्यस्तः अस्ति
सम्भवतः कस्यचित् एतादृशस्य कारणस्य एव पूर्वं “पेण्ड्रावन्” तथा अधुना “
सेलूद्” विद्यालयस्य छात्राः मार्गे आगतवन्तः।
सर्वाधिक चिन्तनीयः विषयः इदं दृश्यते यत् अन्ततःका एतादृशी विवशता उत्पन्ना यत् स्वस्य एव जनपदस्यपेण्ड्रावनग्रामस्य अनन्तरम् अधुना सेलूदस्य छात्राः छात्राश्चमार्गेषु आगन्तुं बाधिताः अभवन्, यद्यपि दुर्गजनपदः एवछत्तीसगढस्य शिक्षामन्त्रिणः गजेन्द्रयादवस्य स्वगृहनगरं जनपदं च अस्तितस्य एव जनपदे अधुना सेलूदग्रामस्य विद्यालयीयबालकाःएतादृशं विद्रोहीमार्गम् अनुसर्तुं बाधिताः अभवन् !?विषयः सम्मुखम् आगच्छति –
” विद्यालये उचितशौचालयस्य अभावः ” इति।कियत् गौरवपूर्णं पुरस्कारम् एतत् शासनस्य शिक्षायाःप्रणाल्याः उत्कृष्टकार्यस्य कृते पूर्वं “पेण्ड्रावनम्” तथाअधुना सेलूद्-स्थितस्य “स्वामी आत्मानन्द उत्कृष्टविद्यालयस्य” बालकानां पक्षतः, प्रश्नः उदेति यत् किंशासनं प्रशासनं च एतं पुरस्कारं केन प्रकारेणस्वीकरोति !
“एकः प्रश्नः यः एताभ्यां द्वाभ्यां घटनाभ्यां छत्तीसगढ़स्य “शिक्षाप्रणाल्या” सह “वित्तप्रणाल्याः” उपरि अपि प्रश्नं उत्थापयति, यस्य कार्यभारः स्वयं पूर्व-आईएएस-अधिकारी ओपी चौधरी महोदयस्य हस्ते अस्ति, यः एतावान् सुशिक्षितः, पूर्व-आईएएस तथा प्रशासनिकप्रणाल्याः अनुभवी व्यक्तिः अस्ति, किन्तु राजनीतिं प्रविश्य तस्य एतेषां गुणानां विनाशस्य आशंका तु अवश्यमेव कर्तुं शक्यते।”
“यतः वित्ते शिक्षायाः स्वरूपं सहस्रकोटिभिः सुसज्जितं सुन्दरं च विशिष्टं च अस्तिअयं च प्रश्नः अधुना व्यवस्थायाः विरुद्धं विद्रोही-प्रदर्शनं कुर्वद्भिः बालकैः मार्गेभ्यः अस्ति -“
यदा श्रेष्ठा शिक्षा नारीसुरक्षा च सत्तापक्षस्य संस्काराः सन्ति
तर्हि कथं घोरः अन्धकारः प्रसरति”
“सेलुद-विद्यालयस्य बालिकाः दीर्घकालात् शौचालयसदृशीभिः समस्याभिः सह युध्यमानाः सन्ति, अयमपि प्रश्नः उत्तिष्ठति यत् शौचालयनिर्माणे तावान् अधिकः शासकीयनिधिः अपि न अपेक्ष्यते, यः इदानीं यावत् एतासां बालिकानां कल्याणात् अधिकं मत्वा केवलं सञ्चिकामु (फाइल्स) एव स्थापितः, यतः प्राप्तानुसारं छात्र-छात्राभिः कैश्चित् सङ्घटनैः च बहुवारं दुर्ग-सांसदस्य शिक्षामन्त्रालयस्य च समक्षं एषा समस्या स्थापिता, किन्तु प्रायः सा तत्रैव स्थिता अभवत्, अग्रे वर्धितुं न शक्नोत्, अद्यापि यदा सेलुद-नगरे बालकानां “विद्रोही-प्रदर्शनम्” व्यवस्थायाः दर्पणं दर्शयितुं आरब्धवान्, तदा अन्ते तहसीलदार-महोदयेन आगत्य प्रशासनस्य पक्षतः समस्यां पूर्णरूपेण समाप्तुं आश्वासनं दत्तम्, किन्तु एतस्मिन् अपि सन्देहस्य दुर्गन्धः आगन्तुं आरब्धः यतः २१ आगस्ट दिनाङ्के यस्य “पेंड्रावन-विद्यालयस्य” बालकैः शिक्षकाणां अभावकारणात् प्रदर्शनं कृतं आसीत्, शिक्षकस्य अभावः पूरितः भविष्यति इति आश्वासनेन सह प्रदर्शनं स्थगितं कृतम्, किन्तु आश्वासनं केवलं शब्देषु एव अवशिष्टं जातं येन अद्य पुनः तस्यैव पेंड्रावन-विद्यालयस्य छात्राः मुख्य-खैरागढ़-मार्गे पुनः धरातले विरोध-प्रदर्शनं कर्तुं प्राप्ताः, इदानीं द्रष्टव्यं भविष्यति यत् किं छत्तीसगढ़स्य शिक्षानीतौ लग्नस्य एतस्य पुरस्काररूपिणः कलङ्कस्य निवारणम् भवितुं शक्नोति, एतेन सह एषा अपि आशङ्का कर्तुं शक्यते यत् एताभ्यां द्वाभ्यां घटनाभ्यां प्रायः अन्यक्षेत्राणां छात्र-छात्राः ये अद्यापि शिक्षया शिक्षायाः उपयोगि-मूलभूतसुविधाभिः च दूरे सन्ति, तेषामपि समस्याः इदानीं सर्वकारस्य प्रशासनस्य च समक्षं आगन्तुं शक्नुवन्ति।”
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