बचपन में पिता ने छोड़ा साथ, परिवार के लिए फिल्मों में आईं रेखा; आज हैं दिग्गज अभिनेत्री। Father Left Her in Childhood, Rekha Entered Films for Her Family; Today, She’s a Legendary Actress। बाल्ये पित्रा त्यक्ता रेखा कुटुम्बाय चलचित्रजगत् आगता; अद्य सा दिग्गज-अभिनेत्री अस्ति।

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“भारतीय सिनेमा की सदाबहार अभिनेत्री रेखा का शुरुआती जीवन संघर्षों से भरा रहा”। “पिता जेमिनी गणेशन से दूरी और परिवार की आर्थिक परेशानियों के बीच उन्होंने परिस्थितियों से मजबूर होकर अभिनय की दुनिया में कदम रखा”। “आगे चलकर अपनी प्रतिभा और मेहनत के दम पर रेखा ने बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्रियों में अपनी खास पहचान बनाई।”

रेखा का फिल्मों में आने का नहीं था इरादा, हालात ने पहुंचाया अभिनय की दुनिया में।

एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। रेखा आज हिंदी सिनेमा की सबसे प्रतिष्ठित और लोकप्रिय अभिनेत्रियों में गिनी जाती हैं। अपने लंबे फिल्मी करियर में वह 180 से अधिक फिल्मों में अभिनय कर चुकी हैं और दर्शकों के बीच उनकी खास पहचान है। हालांकि, रेखा का फिल्मी सफर शुरुआत से आसान नहीं रहा। कम ही लोग जानते हैं कि उन्होंने अभिनय की दुनिया में कदम अपनी इच्छा से नहीं, बल्कि परिवार की आर्थिक परेशानियों के चलते रखा था। संघर्षों से भरी उनकी इस यात्रा ने आगे चलकर उन्हें बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री बना दिया।

पिता के साए के बिना गुजरा रेखा का बचपन।

रेखा का जन्म अभिनेता जेमिनी गणेशन और अभिनेत्री पुष्पवल्ली के परिवार में हुआ था। जन्म के समय उनका नाम भानुरेखा रखा गया था। बचपन में वह स्वभाव से बेहद संकोची थीं। परिवार की आर्थिक परेशानियों के बीच भाई-बहनों की पढ़ाई में सहयोग करने के लिए उन्हें अपनी स्कूली शिक्षा भी बीच में छोड़नी पड़ी। हालांकि, जब रेखा से उनके बचपन के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने उस दौर को ‘खूबसूरत’ यादों से भरा बताया।

रेखा ने अपने माता-पिता के रिश्ते को याद करते हुए बताया था कि उनके बीच प्रेम तो था, लेकिन यह रिश्ता कई जटिलताओं से भी भरा हुआ था। उनके अनुसार, पिता जेमिनी गणेशन उन्हें बहुत छोटी उम्र में छोड़कर चले गए थे, इसलिए उन्हें उनसे जुड़ी ज्यादा बातें याद नहीं हैं। हालांकि, उनकी मां अक्सर जेमिनी गणेशन के आकर्षक व्यक्तित्व और उनसे जुड़ी प्रेम कहानियों का जिक्र किया करती थीं। यही वजह रही कि पिता की गैरमौजूदगी के बावजूद रेखा के मन में उनकी एक अलग और खास तस्वीर बनी रही।

स्कूल के बाहर पहली बार पिता की झलक मिली रेखा को।

रेखा के मुताबिक, पिता जेमिनी गणेशन से जुड़ी उनकी शुरुआती यादें घर की नहीं, बल्कि स्कूल से जुड़ी हैं। उन्होंने बताया था कि एक बार उन्होंने अपने पिता को स्कूल के बाहर उनके दूसरे बच्चों को छोड़ते हुए देखा था। रेखा भी उसी स्कूल में पढ़ती थीं, जहां जेमिनी गणेशन की अन्य शादियों से हुए बच्चे भी शिक्षा लेते थे। हालांकि, आमना-सामना होने के बावजूद दोनों के बीच कभी बातचीत नहीं हुई। रेखा का मानना था कि शायद उनके पिता को यह जानकारी भी नहीं थी कि वह उसी स्कूल में मौजूद थीं।

‘शायद मैंने पिता की कमी के एहसास को खुद से दूर कर दिया था’

जब रेखा से पूछा गया कि क्या उन्हें इस बात का कभी मलाल रहा कि उनके पिता ने उन्हें पहचानने या अपनाने की कोशिश नहीं की, तो उन्होंने कहा था कि शायद उन्होंने उस दर्द को अपने भीतर ही दबा दिया था। उनके बचपन की दुनिया पढ़ाई, होमवर्क और भाई-बहनों से खुद की तुलना जैसी छोटी-छोटी बातों तक सीमित थी। रेखा को पिता की कमी का एहसास जरूर होता था, लेकिन पिता के स्नेह का करीब से अनुभव उन्हें कभी नहीं मिला।

बचपन के मुश्किल दौर में भगवान बने रेखा का सहारा।

रेखा ने अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए बताया था कि उनका काफी समय दादी और मौसी के साथ बीता। उनकी मां फिल्मों की शूटिंग में व्यस्त रहती थीं, जिसके कारण उन्हें अक्सर अकेलेपन का सामना करना पड़ता था। उनके जीवन में उस समय कोई मजबूत पुरुष आदर्श भी नहीं था। रेखा के मुताबिक, उस दौर में भगवान ही उनके लिए सबसे बड़े सहारे थे। बाद में फिल्ममेकर मोहन सहगल उनकी जिंदगी में पिता जैसी भूमिका लेकर आए और उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में रेखा का काफी साथ दिया।

मजबूरी में रखा फिल्मों का रुख, आगे चलकर रेखा बनीं सिनेमा की पहचान।

रेखा ने बताया था कि फिल्मों में उनका प्रवेश किसी शौक का नतीजा नहीं, बल्कि पारिवारिक परिस्थितियों की देन था। आर्थिक तंगी और भाई-बहनों की पढ़ाई की जिम्मेदारी के बीच उन्होंने अपनी मां के कहने पर अभिनय शुरू किया। शुरुआत में उनका इरादा केवल एक फिल्म करने का था, लेकिन ‘अंजाना सफर’ से शुरू हुई यह यात्रा आगे चलकर भारतीय सिनेमा के सबसे लंबे, शानदार और यादगार करियर में बदल गई।

(English)

Evergreen Indian cinema icon Rekha had a challenging childhood. With her father Gemini Ganesan being away and her family facing financial difficulties, she entered the world of acting due to circumstances. With her talent and hard work, Rekha eventually established herself as one of Bollywood’s most iconic actresses.

Entertainment Desk, New Delhi: Rekha is today regarded as one of the most iconic and popular actresses in Hindi cinema. She has acted in more than 180 films during her illustrious career and has earned a special place in the hearts of audiences. However, her journey in the film industry was far from easy. Few people know that she did not enter films out of passion initially, but because of her family’s financial difficulties. Her challenging journey eventually transformed her into one of Bollywood’s most celebrated actresses.

Rekha’s Childhood Was Spent Without Her Father.

Rekha was born to actor Gemini Ganesan and actress Pushpavalli, and was initially named Bhanurekha. She was quite shy and reserved as a child. Due to the family’s financial difficulties, she had to leave school to help support the education of her siblings. Despite the hardships, Rekha has described her childhood as “beautiful” when speaking about those early years.

Rekha once spoke about her parents’ relationship, saying that although there was love between them, their bond was also quite complicated. She recalled that her father, Gemini Ganesan, left when she was very young, leaving her with only a few memories of him. Her mother, however, often spoke about Ganesan, describing his charming personality and sharing stories of their love. As a result, despite his absence, Rekha developed a distinct and special image of her father in her mind.

Rekha Saw Her Father for the First Time Outside Her School.

According to Rekha, her earliest memories of her father, Gemini Ganesan, are not from home but from outside her school. She recalled seeing him one day as he arrived to drop off children he had from his other marriages. Rekha studied at the same school, where some of Ganesan’s other children were also enrolled. Despite crossing paths, father and daughter never spoke to each other. Rekha felt that her father may not have even known that she was there.

“Perhaps I Had Shut Out the Feeling of My Father’s Absence”.

When Rekha was asked whether she ever felt hurt that her father had not tried to acknowledge or accept her, she said that perhaps she had suppressed that pain within herself. As a child, her world revolved around studies, homework and comparing herself with her siblings. She did feel the absence of a father, but she had never truly experienced a father’s love up close.

God Became Rekha’s Strength During Her Difficult Childhood.

Recalling her childhood, Rekha said that she spent much of her early years with her grandmother and aunt, while her mother was often busy shooting for films. She did not have a strong male role model in her life during that period. According to Rekha, God was the person she looked up to the most at that time. Later, filmmaker Mohan Sehgal became a father-like figure in her life and supported her greatly in the film industry.

She Entered Films Out of Circumstances, Later Became an Icon of Indian Cinema.

Rekha had revealed that her entry into films was driven by circumstances rather than passion. Amid financial difficulties and the responsibility of supporting her siblings’ education, she began acting at her mother’s request. Initially, she planned to work in just one film, but her journey, which began with Anjana Safar, eventually turned into one of the longest and most memorable careers in Indian cinema.

(संस्कृत)

भारतीयचलच्चित्रजगतः सदाबहार-अभिनेत्री रेखायाः प्रारम्भिकजीवनं संघर्षपूर्णम् आसीत्। पिता जेमिनी गणेशनस्य दूरत्वेन तथा पारिवारिक-आर्थिककष्टैः बाधिता सा परिस्थितिवशं अभिनयक्षेत्रे प्रविष्टवती। अनन्तरं स्वप्रतिभया परिश्रमेण च रेखा हिन्दीचलच्चित्रजगतः प्रमुखासु अभिनेत्रीसु स्वकीयां विशिष्टां परिचितिं स्थापितवती।

मनोरञ्जन-विभागः, नवदिल्ली। अद्य रेखा हिन्दीचलच्चित्रजगतः प्रमुखासु लोकप्रियासु च अभिनेत्रीसु गणिता भवति। स्वस्य दीर्घे चलचित्रजीवने सा १८० तः अधिकेषु चलचित्रेषु अभिनयम् अकरोत् तथा च दर्शकानां हृदयेषु विशिष्टं स्थानं प्राप्तवती। किन्तु तस्याः चलचित्रयात्रा प्रारम्भादेव सरल न आसीत्। अल्पाः एव जनाः जानन्ति यत् सा अभिनयक्षेत्रे स्वेच्छया न, अपि तु पारिवारिक-आर्थिककठिनतायाः कारणेन प्रविष्टवती। तस्याः संघर्षपूर्णा यात्रा अनन्तरं तां बॉलीवुड्-जगतः प्रमुखासु अभिनेत्रीसु प्रतिष्ठितवती।

पितुः सान्निध्यविहीनं रेखायाः बाल्यजीवनम्।

रेखायाः जन्म अभिनेता जेमिनी गणेशनस्य अभिनेत्री पुष्पवल्ल्याः च गृहे अभवत्। जन्मसमये तस्याः नाम भानुरेखा इति स्थापितम् आसीत्। बाल्यकाले सा अत्यन्तं लज्जाशीला संकोचपूर्णा च आसीत्। पारिवारिक-आर्थिककठिनतायाः कारणेन भ्रातृभगिनीनां शिक्षायै साहाय्यं कर्तुं तस्यै विद्यालयीयशिक्षाम् अपि त्यक्तुं अभवत्। तथापि, बाल्यकालस्य विषये पृष्टा सा तं कालखण्डं ‘सुन्दरम्’ इति वर्णितवती।

रेखा एकदा स्वमातापित्रोः सम्बन्धस्य विषये कथितवती यत् तयोः मध्ये प्रेम आसीत्, किन्तु तयोः सम्बन्धः जटिलतापूर्णः अपि आसीत्। तस्याः कथनानुसारं पिता जेमिनी गणेशनः तस्याः बाल्यावस्थायामेव तां त्यक्त्वा गतवान्, अतः तस्य सम्बन्धे तस्याः विशेषाः स्मृतयः न सन्ति। किन्तु तस्याः माता प्रायः जेमिनी गणेशनस्य आकर्षकव्यक्तित्वस्य तथा तयोः प्रेमकथानां वर्णनं करोति स्म। अतः पितुः अनुपस्थितेः सत्त्वेऽपि रेखायाः मनसि तस्य एकः विशिष्टः विशेषश्च भावः निर्मितः।

विद्यालयस्य बहिः रेखया प्रथमवारं पितुः दर्शनं कृतम्

रेखायाः कथनानुसारं पिता जेमिनी गणेशनस्य विषये तस्याः प्रारम्भिकाः स्मृतयः गृहात् न, अपितु विद्यालयस्य बहिः सम्बद्धाः आसन्। सा स्मरति यत् एकदा तया स्वपितरं अन्याभिः पत्निभिः जातान् स्वसन्ततीन् विद्यालये स्थापयितुं आगच्छन्तं दृष्टम्। रेखा अपि तस्मिन्नेव विद्यालये पठति स्म, यत्र गणेशनस्य अन्ये सन्तानाः अपि पठन्ति स्म। तथापि तयोः सम्मुखीभवनेऽपि कदापि वार्तालापः न अभवत्। रेखायाः मतम् आसीत् यत् सम्भवतः तस्य पिता तस्याः तत्र उपस्थितिमपि न जानाति स्म

‘सम्भवतः पितुः अभावस्य भावनां मया स्वयमेव मनसः दूरं कृतम्।

यदा रेखायाः पृष्टं यत् किं तस्याः कदापि दुःखम् अभवत् यत् तस्याः पिता तां ज्ञातुं वा स्वीकर्तुं वा प्रयत्नं न कृतवान्, तदा सा उक्तवती यत् सम्भवतः तया तत् दुःखं स्वमनसि एव दमनं कृतम्। बाल्यकाले तस्याः संसारः अध्ययनम्, गृहकार्यं, भ्रातृभगिनीभिः सह स्वस्य तुलनां च परितः एव सीमितः आसीत्। पितुः अभावस्य अनुभूतिः तस्याः आसीत्, किन्तु पितुः स्नेहस्य निकटानुभवः तया कदापि न प्राप्तः।

बाल्यकालस्य कठिनसमये भगवानेव रेखायाः आश्रयः अभवत्।

रेखा स्वस्य बाल्यकालं स्मरन्ती उक्तवती यत् तस्याः बाल्यजीवनस्य बहवः दिवसाः पितामह्या मातुल्या च सह व्यतीताः। तस्याः माता प्रायः चलचित्रस्य चित्राङ्कने व्यस्ता भवति स्म। तस्मिन् समये तस्याः जीवने कोऽपि दृढः पुरुष-आदर्शः अपि नासीत्। रेखायाः कथनानुसारं तस्मिन् काले भगवानेव तस्याः प्रमुखः आश्रयः आसीत्। अनन्तरं चलचित्रनिर्माता मोहन सहगलः तस्याः जीवने पितृसदृशः व्यक्तित्वः अभवत् तथा चलचित्रजगति तस्यै बहु साहाय्यं कृतवान्।

परिस्थितिवशं चलचित्रजगति प्रविष्टा रेखा अनन्तरं सिनेमाजगतः परिचयः अभवत्।

रेखया कथितं यत् चलचित्रजगति तस्याः प्रवेशः स्वेच्छया न, अपितु पारिवारिकपरिस्थितीनां कारणेन अभवत्। आर्थिककठिनतायाः तथा भ्रातृभगिनीनां शिक्षायाः दायित्वस्य मध्ये मातुः आग्रहात् सा अभिनयम् आरब्धवती। प्रारम्भे तस्याः केवलं एकस्मिन् चलचित्रे कार्यं कर्तुम् अभिप्रायः आसीत्, किन्तु ‘अञ्जानसफर’ इत्यनेन आरब्धा तस्याः यात्रा अनन्तरं भारतीयचलच्चित्रजगतः दीर्घतमेषु स्मरणीयतमेषु च अभिनयजीवनेषु परिणता।

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