अश्लील सीडी मामला: भूपेश बघेल को हाई कोर्ट से राहत, सीबीआई विशेष अदालत की कार्यवाही पर अंतरिम रोक । Obscene CD Case: High Court Grants Interim Relief to Bhupesh Baghel, Stays CBI Court Proceedings। कथित-अश्लील-सीडी-प्रकरणम् : भूपेशबघेलाय उच्चन्यायालयात् महत्त्वपूर्णा राहतिः, सीबीआई-विशेषन्यायालयस्य कार्यवाही स्थगिता।

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छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को कथित अश्लील सीडी मामले में हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाई कोर्ट के जस्टिस राधाकिशन अग्रवाल की एकल पीठ ने रायपुर स्थित सीबीआई की विशेष अदालत में उनके खिलाफ चल रही आगे की न्यायिक कार्यवाही पर अगले आदेश तक अंतरिम रोक लगा दी है।

यह मामला अक्टूबर 2017 में सामने आए एक कथित अश्लील वीडियो/सीडी से जुड़ा है। आरोप था कि इस वीडियो के माध्यम से तत्कालीन भाजपा सरकार के मंत्री राजेश मूणत की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई थी।

मामले की जांच पहले राज्य पुलिस और बाद में सीबीआई ने की।

जांच के दौरान सीबीआई ने वीडियो को कथित रूप से मार्फ्ड बताया और भूपेश बघेल सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, फर्जीवाड़े तथा आईटी एक्ट की धारा 67A के तहत आरोपपत्र दाखिल किया।

रिवीजन कोर्ट ने फिर शुरू की थी सुनवाई

मार्च 2025 में विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट ने भूपेश बघेल को इस मामले में आरोपमुक्त कर दिया था। हालांकि, बाद में रिवीजन कोर्ट ने इस आदेश को निरस्त करते हुए मामले की दोबारा सुनवाई के निर्देश दिए। इसके बाद भूपेश बघेल ने 24 जनवरी 2026 को सीबीआई विशेष अदालत के आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।

इस तर्क के आधार पर लगाई रोक

सुनवाई के दौरान भूपेश बघेल की ओर से दलील दी गई कि यदि ट्रायल कोर्ट को आरोप तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की अनुमति दी जाती है, तो हाई कोर्ट में दायर याचिका का उद्देश्य प्रभावित हो सकता है। इस तर्क को ध्यान में रखते हुए हाई कोर्ट ने विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीबीआई), रायपुर के समक्ष लंबित मामले में भूपेश बघेल के खिलाफ आगे की सभी कार्यवाहियों पर आगामी आदेश तक रोक लगा दी।

English

Former Chhattisgarh Chief Minister Bhupesh Baghel has received significant relief from the High Court in the alleged obscene CD case. A single bench of Justice Radhakishan Agrawal has placed an interim stay on further proceedings against Baghel before the CBI Special Court in Raipur until further orders.

The case is related to an alleged obscene video/CD that surfaced in October 2017. It was alleged that the video was circulated with the intention of damaging the public image of Rajesh Munat, who was a minister in the then BJP government.

The case was initially investigated by the state police and was later handed over to the CBI.

The CBI claimed that the video had been morphed and filed a chargesheet against Bhupesh Baghel and others under charges including criminal conspiracy, forgery, and Section 67A of the Information Technology Act.

The revision court had later resumed the hearing in the case.

In March 2025, the Special Judicial Magistrate had discharged Bhupesh Baghel from the case. However, the revision court later set aside the discharge order and directed that the matter be heard again. Baghel subsequently challenged the CBI Special Court’s order before the High Court on January 24, 2026.

Stay imposed on the basis of this argument

During the hearing, Baghel’s counsel argued that allowing the trial court to proceed with the framing of charges could render the petition pending before the High Court ineffective. Taking this argument into consideration, the High Court ordered that all further proceedings against Bhupesh Baghel in the pending case before the Special Judicial Magistrate (CBI), Raipur, would remain stayed until further orders.

संस्कृत

छत्तीसगढस्य पूर्वमुख्यमन्त्री भूपेशबघेलः कथित-अश्लील-सीडी-प्रकरणे उच्चन्यायालयात् महत्त्वपूर्णां राहतिं प्राप्तवान्। न्यायमूर्तेः राधाकृष्ण-अग्रवालस्य एकलपीठेन रायपुरनगरे स्थितस्य सीबीआई-विशेषन्यायालये तस्य विरुद्धं प्रचलन्ती अग्रिमा न्यायिककार्यवाही आगामी-आदेशपर्यन्तम् अन्तरिमरूपेण स्थगिता।

इदं प्रकरणं अक्टूबर-मासस्य 2017 तमे वर्षे प्रकाशितेन कथित-अश्लील-चलच्चित्रेण अथवा सीडी-सामग्र्या सम्बद्धम् अस्ति। आरोपः आसीत् यत् तस्य माध्यमेन तत्कालीन-भाजपा-शासनस्य मन्त्री राजेशमूणतस्य सार्वजनिक-प्रतिष्ठां क्षतिग्रस्तां कर्तुं प्रयासः कृतः।

प्रारम्भे अस्य प्रकरणस्य अन्वेषणं राज्यपुलिसद्वारा कृतम्, अनन्तरं च सीबीआई-संस्थायै समर्पितम्।

सीबीआई-संस्थया उक्तं यत् दृश्यसामग्री मार्फ्ड अथवा कृत्रिमरूपेण परिवर्तिता आसीत्। ततः भूपेशबघेलसहितानां अन्येषां विरुद्धं आपराधिक-षड्यन्त्रस्य, कूटलेखस्य तथा सूचना-प्रौद्योगिकी-अधिनियमस्य धारा 67A अन्तर्गतं आरोपपत्रं समर्पितम्।

पुनरीक्षणन्यायालयेन पुनः प्रकरणस्य श्रवणम् आरब्धम्।

मार्च-मासे 2025 तमे वर्षे विशेष-न्यायिक-मजिस्ट्रेटेन भूपेशबघेलः अस्मात् प्रकरणात् आरोपमुक्तः कृतः। परन्तु पश्चात् पुनरीक्षणन्यायालयेन सः आदेशः निरस्तः कृत्वा प्रकरणस्य पुनः श्रवणस्य निर्देशः दत्तः। तदनन्तरं भूपेशबघेलेन 24 जनवरी 2026 तमे दिने सीबीआई-विशेषन्यायालयस्य आदेशः उच्चन्यायालये चुनौतीकृतः।

अस्य तर्कस्य आधारेण स्थगनादेशः प्रदत्तः।

श्रवणकाले भूपेशबघेलस्य पक्षतः इदं तर्कितम् यत् यदि विचारणन्यायालयाय आरोपनिर्धारणस्य प्रक्रिया अग्रे नेतुं अनुमतिः दीयते, तर्हि उच्चन्यायालये प्रवर्तमाना याचिका निष्प्रभावा भवितुं शक्नोति। एतस्य तर्कस्य विचारं कृत्वा उच्चन्यायालयेन विशेष-न्यायिक-मजिस्ट्रेट (सीबीआई), रायपुरस्य समक्षं लम्बमानप्रकरणे भूपेशबघेलस्य विरुद्धं सर्वासाम् अग्रिमकार्यवाहीनाम् आगामी-आदेशपर्यन्तं स्थगनादेशः प्रदत्तः।

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